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  • नीति आयोग को मिला बड़ा महत्व, पीएम मोदी ने बताया देश की नीति-निर्माण व्यवस्था का मजबूत स्तंभ

    नीति आयोग को मिला बड़ा महत्व, पीएम मोदी ने बताया देश की नीति-निर्माण व्यवस्था का मजबूत स्तंभ


    नई दिल्ली। देश की विकास और नीति-निर्माण प्रणाली में नीति आयोग की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। केंद्र सरकार के अनुसार यह संस्था न केवल नीतियों को आकार देने का काम कर रही है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में विकास को गति देने में भी अहम योगदान निभा रही है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग को भारत की नीति-निर्माण व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बताया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संस्था सहकारी संघवाद को मजबूत करने, प्रशासनिक सुधारों को आगे बढ़ाने और नागरिकों के जीवन को आसान बनाने यानी ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नीति आयोग आज एक ऐसे मंच के रूप में उभर चुका है जहां नवाचार, दीर्घकालिक सोच और प्रभावी रणनीति पर काम किया जाता है।

    हाल ही में सरकार द्वारा नीति आयोग का पुनर्गठन किया गया, जिसके बाद इसके नए नेतृत्व को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। प्रधानमंत्री ने नए उपाध्यक्ष और अन्य पूर्णकालिक सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि वे अपने कार्यकाल में प्रभावशाली और परिणाम देने वाला कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि यह टीम देश की नीति निर्माण प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने में योगदान देगी।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि नीति आयोग का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने में भी सहायता करना है। यह संस्था केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत बनाकर विकास को संतुलित दिशा देने का कार्य कर रही है।

    इस अवसर पर उन्होंने विशेष रूप से नए उपाध्यक्ष के अनुभव की सराहना की। अर्थशास्त्र और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि उनके मार्गदर्शन में नीति आयोग की भूमिका और अधिक प्रभावी होगी। सरकार का मानना है कि ऐसे अनुभवी विशेषज्ञों की भागीदारी से नीतियों की गुणवत्ता और कार्यान्वयन क्षमता दोनों में सुधार होगा।

    नीति आयोग देश के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए काम करता है। यह केवल आर्थिक नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक, तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों को भी अपनी कार्ययोजना में शामिल करता है। इसका उद्देश्य भारत को एक समग्र विकास मॉडल की ओर ले जाना है, जहां हर क्षेत्र को समान अवसर मिल सके।

    वर्तमान समय में जब भारत तेजी से आर्थिक और सामाजिक बदलावों से गुजर रहा है, नीति आयोग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। यह संस्था सरकार को नीतिगत सुझाव देने के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के विकास मॉडल का विश्लेषण कर बेहतर समाधान प्रस्तुत करने का काम करती है।

    प्रधानमंत्री के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि सरकार नीति आयोग को भविष्य की विकास रणनीति के केंद्र में देख रही है। आने वाले समय में यह संस्था देश के विकास एजेंडे को दिशा देने में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है, जिससे भारत के ‘विकसित राष्ट्र’ बनने के लक्ष्य को गति मिलेगी।

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    स्वच्छ ऊर्जा बनेगी भारतीय कंपनियों की नई ताकत, दुनिया के बाजारों में मिलेगा मौका: पीएम मोदी


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर की गई हालिया सैन्य कार्रवाई का जोरदार बचाव किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर यह कदम अभी नहीं उठाया जाता, तो भविष्य में ईरान को रोक पाना लगभग असंभव हो जाता। उनके मुताबिक यह हमला महज जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से एक रणनीतिक और समयबद्ध निर्णय था।

    ‘नागरिकों को निशाना बनाता है तेहरान’
    फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना बना रहा है, जबकि इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई आतंकवादियों और सैन्य ढांचों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, “यही तेहरान और हमारे बीच मूल अंतर है। वे नागरिकों को निशाना बनाते हैं, हम आतंकियों को।”

    प्रधानमंत्री ने हालिया बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी मिसाइलें “टीएनटी से भरी बस की तरह होती हैं, जो मैक 8 की रफ्तार से आकर गिरती हैं।” उनके अनुसार, एक हमले में नौ लोगों की मौत हुई। उन्होंने इसे ‘सामूहिक हत्या’ करार दिया और कहा कि दुनिया को ऐसे खतरों से बचाना जरूरी है।

    परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम बना कारण
    नेतन्याहू का कहना है कि इजरायल ने पहले भी ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर प्रहार किया था, लेकिन इसके बावजूद तेहरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को और आगे बढ़ाया। “हमें लगा था कि वे सबक सीखेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वे सुधार से परे हैं और अमेरिका को नष्ट करने के लक्ष्य को लेकर कट्टर हैं,” उन्होंने कहा।

    उन्होंने दावा किया कि ईरान नए भूमिगत ठिकाने बना रहा था, जिससे उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम भविष्य की किसी भी सैन्य कार्रवाई से सुरक्षित हो सकता था। यदि ये ठिकाने पूरी तरह तैयार हो जाते, तो इजरायल या अमेरिका के लिए उन्हें निष्क्रिय करना बेहद कठिन हो जाता।

    ‘देरी का मतलब होता रणनीतिक हार’
    नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि “अगर अभी कार्रवाई नहीं करते, तो भविष्य में कोई कदम उठाना संभव नहीं होता।” उनके अनुसार, ईरान न केवल इजरायल बल्कि अमेरिका और अन्य देशों को भी निशाना बना सकता था, उन्हें ब्लैकमेल कर सकता था और क्षेत्रीय संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ सकता था।

    उन्होंने कहा कि यह सिर्फ इजरायल की सुरक्षा का सवाल नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक स्थिरता का मुद्दा है। “हमें अपनी दुनिया को इन लोगों से बचाना होगा,” उन्होंने दोहराया।

    ट्रंप की सराहना, गठबंधन पर भरोसा
    इजरायली प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी निर्णायक कार्रवाई के लिए “पक्के इरादे वाले राष्ट्रपति” की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, “हम उनके बहुत मजबूत और काबिल साझेदार हैं। हमारा गठबंधन आज बेहद मजबूत है।”

    नेतन्याहू के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक तालमेल ने इस कार्रवाई को संभव बनाया। उन्होंने संकेत दिया कि यह कदम लंबे समय से मिल रही खुफिया जानकारियों और सुरक्षा आकलन के आधार पर उठाया गया।

    बढ़ता तनाव, दुनिया की नजरें
    ईरान पर हमले और उसके बाद की जवाबी कार्रवाइयों से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि यह टकराव सीमित दायरे में रहेगा या व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।

    नेतन्याहू ने हालांकि साफ कर दिया है कि उनके मुताबिक यह कार्रवाई टाली नहीं जा सकती थी। “हमें अभी करना था और हमने किया। वरना ईरान की सरकार भविष्य की किसी भी कार्रवाई से सुरक्षित हो जाती,” उन्होंने कहा।