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  • राजा मानधाता की कठोर तपस्या से जुड़ा ओंकारेश्वर धाम, जानें 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल इस पवित्र मंदिर की खास मान्यताएं

    राजा मानधाता की कठोर तपस्या से जुड़ा ओंकारेश्वर धाम, जानें 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल इस पवित्र मंदिर की खास मान्यताएं


    मध्य प्रदेश: में नर्मदा नदी के किनारे स्थित ओंकारेश्वर धाम भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल इस तीर्थस्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु महादेव के दर्शन करने पहुंचते हैं। यहां नर्मदा नदी के घाट, प्राचीन मंदिर और पूजा-अर्चना का वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का संगम होने के कारण ओंकारेश्वर देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में विशेष स्थान रखता है।

    ओंकारेश्वर की पहचान यहां स्थित मानधाता द्वीप से भी जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस द्वीप को ऊपर से देखने पर इसका आकार ओम जैसा दिखाई देता है। हिंदू धर्म में ओम को पवित्र ध्वनि और आध्यात्मिक प्रतीक माना जाता है। इसी मान्यता के कारण इस स्थान का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा के साथ द्वीप की धार्मिक पहचान से भी परिचित होते हैं।

    ओंकारेश्वर धाम की सबसे प्रमुख पौराणिक मान्यताओं में राजा मानधाता की तपस्या का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि राजा मानधाता ने इसी पर्वत पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए लंबे समय तक कठोर तप किया था। उनकी साधना से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें दर्शन दिए। इसी कथा को ओंकारेश्वर धाम की धार्मिक पहचान से जोड़ा जाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह प्रसंग भक्ति, साधना और भगवान शिव के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

    इस तीर्थस्थल का संबंध आदि शंकराचार्य से भी बताया जाता है। मान्यता है कि अपनी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने यहां समय बिताया था। अद्वैत वेदांत की परंपरा में भी ओंकारेश्वर का विशेष महत्व माना जाता है। इस कारण यहां केवल भगवान शिव के भक्त ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान, दर्शन और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले लोग भी पहुंचते हैं। मंदिर परिसर और नर्मदा नदी के आसपास का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को ध्यान और साधना के लिए आकर्षित करता है।

    ओंकारेश्वर की यात्रा में ममलेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यह मंदिर नर्मदा नदी के दूसरे तट पर स्थित है और इसे अमलेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, ओंकारेश्वर आने वाले अनेक श्रद्धालु ममलेश्वर महादेव की पूजा भी करते हैं। मान्यता है कि दोनों मंदिरों के दर्शन करने से तीर्थयात्रा पूर्ण होती है। इसी वजह से भक्त नर्मदा के दोनों किनारों पर स्थित इन प्राचीन शिव मंदिरों तक पहुंचते हैं।

    ओंकारेश्वर और ममलेश्वर धाम की विशेषता केवल उनकी धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है। नर्मदा नदी के घाट, मंदिरों में होने वाली पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की मौजूदगी यहां के वातावरण को विशिष्ट बनाते हैं। नदी के किनारे स्थित मंदिरों का प्राकृतिक परिवेश इस तीर्थस्थल की पहचान को और आकर्षक बनाता है।

    भगवान शिव के दर्शन, धार्मिक आस्था और मानसिक शांति की तलाश में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचते हैं। राजा मानधाता की तपस्या से जुड़ी पौराणिक कथा, मानधाता द्वीप का ओम जैसा आकार, आदि शंकराचार्य से संबंधित मान्यता और ममलेश्वर मंदिर के दर्शन इस धाम को विशेष धार्मिक पहचान देते हैं। यही कारण है कि ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश के प्रमुख शिव तीर्थों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

  • भेड़ाघाट नर्मदा महोत्सव में अरुणिता और ऋचा शर्मा की गायकी ने बांधा समां, ढोल-ताशा की गूंज से झूमे दर्शक

    भेड़ाघाट नर्मदा महोत्सव में अरुणिता और ऋचा शर्मा की गायकी ने बांधा समां, ढोल-ताशा की गूंज से झूमे दर्शक


    मध्य प्रदेश: के जबलपुर स्थित भेड़ाघाट में आयोजित दो दिवसीय नर्मदा महोत्सव का समापन रविवार को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। महोत्सव की अंतिम शाम में गायिका अरुणिता कांजीलाल और पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा ने अपने गीतों से दर्शकों का मनोरंजन किया। वहीं, महाराष्ट्र से आए कलाकारों की पारंपरिक ढोल-ताशा प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उत्साह भर दिया। शरद पूर्णिमा की चांदनी और भेड़ाघाट की संगमरमरी चट्टानों के बीच आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में भक्ति संगीत, शास्त्रीय नृत्य और फिल्मी गीतों का संगम देखने को मिला।

    कार्यक्रम की शुरुआत मां नर्मदा के पूजन से हुई। इसके बाद जबलपुर की त्रिभंग कला अकादमी की कलाकार कौतुकी उपाध्याय ने कथक शैली में शिव स्तुति प्रस्तुत की। शास्त्रीय नृत्य की इस प्रस्तुति के बाद महाराष्ट्र की शिवमुद्रा संस्था के कलाकारों ने पारंपरिक ढोल-ताशा वादन किया। कलाकारों की ऊर्जावान प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान खींचा और सांस्कृतिक संध्या का माहौल उत्साहपूर्ण बना दिया।

    महोत्सव की प्रमुख प्रस्तुतियों में अरुणिता कांजीलाल का गायन शामिल रहा। इंडियन आइडल सीजन-12 की प्रथम उपविजेता अरुणिता ने ‘अई गिरि नंदिनी’ स्तोत्र से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘राम सियाराम’, ‘एक राधा एक मीरा’, ‘हीरे मोती मैं न चाहूं’ और ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ जैसे गीत सुनाए। उनके गायन में भक्ति और लोकप्रिय संगीत का मेल देखने को मिला।

    अरुणिता ने मां नर्मदा को समर्पित भजन ‘मां रेवा थारो पानी निर्मल’ भी प्रस्तुत किया। इस भजन ने कार्यक्रम में भक्तिमय वातावरण बनाया। नर्मदा महोत्सव के धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप के बीच यह प्रस्तुति शाम के खास हिस्सों में शामिल रही।

    इसके बाद पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा ने मंच संभाला। उन्होंने ‘सोनिया वे रांझणा वे’, ‘जिंदगी में कभी कोई आए न रब्बा’ और ‘माही वे’ जैसे लोकप्रिय फिल्मी गीत प्रस्तुत किए। उनकी गायकी के दौरान दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साह जताया। ऋचा शर्मा की प्रस्तुति के साथ महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या का समापन हुआ।

    शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले इस महोत्सव में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक भेड़ाघाट पहुंचते हैं। यहां की संगमरमरी चट्टानें, नर्मदा तट का प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन को विशेष पहचान देते हैं। इस बार भी कथक, भजन, फिल्मी गीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विविध रंग दिए।

    समापन समारोह में राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं, जबकि विधायक नीरज सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह भी वर्चुअल माध्यम से समारोह से जुड़े। उन्होंने नर्मदा महोत्सव को मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक बताया। साथ ही आयोजन को और भव्य बनाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रखने की बात कही। महोत्सव के समापन के साथ भेड़ाघाट की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन महत्व एक बार फिर सामने आया।

  • जबलपुर में भारी बारिश से बरगी बांध लबालब, 17 गेट खोले गए, नर्मदा के घाट डूबे और 10 गांवों का संपर्क टूटा

    जबलपुर में भारी बारिश से बरगी बांध लबालब, 17 गेट खोले गए, नर्मदा के घाट डूबे और 10 गांवों का संपर्क टूटा


    मध्य प्रदेश:   में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच जबलपुर का बरगी बांध पानी से लबालब भर गया है। बांध के कैचमेंट क्षेत्र मंडला और डिंडोरी में लगातार बारिश होने से जलस्तर तेजी से बढ़ा। स्थिति को देखते हुए बांध के 17 गेट खोलकर नर्मदा नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के निचले इलाकों में भी असर दिखाई देने लगा है।

    बरगी बांध के 17 गेट करीब 2.38 मीटर की ऊंचाई तक खोले गए हैं। इन गेटों के जरिए लगभग 6,121 क्यूमेक पानी नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है। बांध में पानी का भराव इतना अधिक है कि कई गेटों से पानी तेज बहाव के साथ बाहर निकल रहा है। जलस्तर में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर नर्मदा नदी के आसपास के क्षेत्रों पर पड़ा है।

    नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण जबलपुर और आसपास के प्रमुख घाटों में पानी भर गया है। नदी के बढ़ते बहाव के चलते घाटों के निचले हिस्से जलमग्न हो चुके हैं। लगातार बारिश और बांध से छोड़े जा रहे पानी के कारण स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

    नर्मदा के बढ़ते जलस्तर का असर नदी किनारे बसे गांवों के आवागमन पर भी पड़ा है। जानकारी के अनुसार बरगी नगर, बिजौरा, बांदरकोला, खापा, बसा, दुर्गा नगर और प्रेम नगर समेत आसपास के करीब 10 गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क टूट गया है। पानी बढ़ने के कारण इन क्षेत्रों में आने-जाने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन को अलर्ट किया गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। लोगों से डूब क्षेत्र और जलभराव वाले स्थानों से दूर रहने तथा नदी और घाटों के आसपास नहीं जाने की अपील की गई है।

    नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं। प्रशासन की ओर से जलस्तर और नदी के बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

    भारी बारिश का असर केवल बरगी बांध तक सीमित नहीं है। बांध के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार पानी आने से जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से बांध से पानी की निकासी बढ़ानी पड़ी। 17 गेट खोलकर पानी छोड़े जाने के बाद नर्मदा के बहाव में भी तेजी आई है।

    प्रशासन की ओर से निचले इलाकों के लोगों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से जलमग्न घाटों और नदी के तेज बहाव वाले हिस्सों में जाने से बचने को कहा गया है। लगातार बारिश के बीच बांध और नदी के जलस्तर पर निगरानी जारी है।

    फिलहाल बरगी बांध से पानी की निकासी जारी है और नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। करीब 10 गांवों का संपर्क प्रभावित होने तथा घाटों के जलमग्न होने के कारण स्थानीय स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

  • नर्मदा उफान पर, घाट-मंदिर जलमग्न; छोटे पुल-रपटे डूबे, जोहिला बांध के पांच गेट खुले

    नर्मदा उफान पर, घाट-मंदिर जलमग्न; छोटे पुल-रपटे डूबे, जोहिला बांध के पांच गेट खुले


    उमरिया।
    मंडला जिले में पिछले 24 घंटे से हो रही तेज बारिश के चलते नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जलस्तर बढ़ने से नर्मदा किनारे स्थित मंदिर और घाट जलमग्न हो गए हैं। मंडला शहर का छोटा रपटा पुल भी पूरी तरह डूब गया है और पानी पुल के ऊपर से बह रहा है।

    नर्मदा में बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। माहिष्मती घाट, सहस्रधारा सहित प्रमुख घाटों पर पुलिस बल तैनात किया गया है। लोगों को नदी के पास जाने, नहाने और जलमग्न पुल-पुलियों को पार करने से रोका जा रहा है।

    पांच-छह छोटे पुल और रपटे जलमग्न

    लगातार बारिश के कारण जिले के करीब पांच-छह छोटे पुल और रपटे भी जलमग्न होने की सूचना है। प्रशासन ने ऐसे स्थानों पर बैरिकेडिंग कर आवागमन बंद कराया है। चौकीदारों की तैनाती के साथ पुलिस और होमगार्ड की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।

    जोहिला बांध के पांच गेट खुले

    उमरिया जिले में पिछले कई दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण जोहिला बांध का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। पानी की बढ़ती आवक को देखते हुए बांध प्रबंधन ने रविवार को इस मानसून में पहली बार एक साथ पांच गेट खोलकर पानी की निकासी शुरू की। गेट खुलने के बाद तेज बहाव के साथ पानी बाहर निकल रहा है।

    बांध प्रबंधन के अनुसार गेट क्रमांक दो को दो मीटर, तीन को तीन मीटर, चार को तीन मीटर, पांच को दो मीटर और छह को दो मीटर तक खोला गया है। पांचों गेट से कुल 12 मीटर पानी की निकासी की जा रही है। इससे करीब 50 हजार क्यूसेक पानी प्रति सेकंड की दर से बाहर निकल रहा है।

    बांध देखने पहुंच रहे लोग

    जोहिला बांध के पांच गेट एक साथ खोले जाने की सूचना के बाद आसपास के लोग बांध का नजारा देखने पहुंचने लगे हैं। पाली निवासी शिवम गुप्ता ने बताया कि इससे पहले एक और दो गेट खुले थे, लेकिन पांच गेटों से एक साथ पानी निकलते देखना अलग अनुभव है।

    माला गुप्ता ने बताया कि तेज बहाव के साथ बांध से निकलते पानी का दृश्य आकर्षक है। एक साथ पांच गेट खुलना आम तौर पर देखने को नहीं मिलता। हालांकि, बांध पर सुरक्षा कर्मी तैनात हैं और लोगों को पानी के तेज बहाव वाले क्षेत्र से दूर रहने की हिदायत दी जा रही है।

    सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क

    बांध के गेट खुलने के बाद लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। लोगों को पानी के नजदीक जाने से रोका जा रहा है। प्रशासन और बांध प्रबंधन ने लोगों से तेज बहाव वाले क्षेत्रों में नहीं जाने और सावधानी बरतने की अपील की है।

    प्रशासन ने नर्मदा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए भी लोगों से नदी और जलमग्न पुल-पुलियों से दूरी बनाए रखने को कहा है। संबंधित विभागों को स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

  • अमरकंटक में शीतलहर का प्रकोप बर्फ से ढकी वादियां शिमला-मनाली जैसा नजारा

    अमरकंटक में शीतलहर का प्रकोप बर्फ से ढकी वादियां शिमला-मनाली जैसा नजारा


    अनूपपुर । मध्य प्रदेश के अमरकंटक में सोमवार सुबह तापमान में आई गिरावट ने क्षेत्र को बर्फीला बना दिया। सतपुड़ा और विंध्य की पहाड़ियों पर समुद्र तल से 1048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरकंटक में नर्मदा नदी तट मैदानों और खुले स्थानों पर पाला जम गया और घास पर ओस बर्फ की तरह दिखने लगी। तापमान शून्य डिग्री के करीब पहुंचते ही पूरा क्षेत्र शीतलहर और घना कोल्ड स्नैप से ढक गया जिससे यह स्थान शिमला और मनाली जैसे पहाड़ी क्षेत्रों का रूप धारण कर चुका था।

    शून्य डिग्री के पास पहुंचा तापमान

    मौसम विभाग के मुताबिक अमरकंटक का न्यूनतम तापमान एक बार फिर शून्य डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। नववर्ष के बाद तीन दिनों तक काले बादल छाए रहे जिससे ठंड में थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन जैसे ही बादल छंटे ठंड का असर जबरदस्त रूप से बढ़ गया। इसका असर यह रहा कि घास-फूस पत्तियों और वाहनों की छतों पर बर्फ की मोटी परत जम गई।

    सफेद चादर में ढकी अमरकंटक

    रामघाट माई की बगिया जमुना दादर कपिलधारा और अन्य क्षेत्रों में सुबह बर्फ का नजारा कुछ इस प्रकार था कि अमरकंटक की वादियां शिमला कुल्लू और मनाली जैसी लग रही थीं। पूरी नगरी बर्फ की सफेद चादर में ढकी हुई नजर आ रही थी जिससे प्रकृति का अनोखा सौंदर्य सामने आ रहा था।

    श्रद्धालुओं की अटूट आस्था

    कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद अमरकंटक में श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई। बड़ी संख्या में तीर्थयात्री और पर्यटक मां नर्मदा के पावन जल में डुबकी लगाने के लिए आए। ठंडी हवाओं के बावजूद उनके उत्साह में कोई कमी नहीं आई और वे स्नान व दर्शन करने में व्यस्त रहे।

    पर्यटकों का विशेष आकर्षण

    अमरकंटक का बर्फ से ढका नजारा ठंडी हवाएं और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां आने वाले पर्यटक इस बर्फीले मौसम और प्राकृतिक नजारों से अभिभूत नजर आ रहे हैं। अमरकंटक की ठंड और बर्फीली हवाएं इन दिनों एक विशेष अनुभव बन चुकी हैं और यह स्थान पर्यटकों के लिए एक अद्वितीय गंतव्य बन गया है।