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  • नरसिंहगढ़ के लीलावती अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत से आक्रोश, परिजनों ने लापरवाही की जांच और कार्रवाई की मांग उठाई

    नरसिंहगढ़ के लीलावती अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत से आक्रोश, परिजनों ने लापरवाही की जांच और कार्रवाई की मांग उठाई

    मध्य प्रदेश: के राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ स्थित लीलावती अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया। महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। घटना के बाद अस्पताल में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी रही।

    परिजनों का आरोप है कि महिला के उपचार के दौरान अस्पताल के कर्मचारियों की ओर से लापरवाही बरती गई। उनका दावा है कि महिला को गलत दवाएं दी गईं, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    मामले में परिजनों ने ड्यूटी पर मौजूद मेडिकल स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि अस्पताल में मौजूद कुछ कर्मचारी कथित तौर पर नशे की हालत में थे और ऐसी स्थिति में मरीज का उपचार किया जा रहा था। परिजनों ने संबंधित कर्मचारियों की चिकित्सकीय जांच कराने और अल्कोहल टेस्ट कराए जाने की मांग प्रशासन के सामने रखी है।

    महिला की मौत के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और अन्य लोगों की भीड़ जुट गई। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि यदि उपचार में लापरवाही या किसी कर्मचारी की गंभीर चूक सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

    हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और परिजनों को समझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद मृतका के शव को आवश्यक पंचनामा कार्रवाई के लिए ले जाया गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल नरसिंहगढ़ भेज दिया, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का चिकित्सकीय परीक्षण किया जा सके।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच प्रक्रिया से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई। इलाज से संबंधित रिकॉर्ड, दवाओं की जानकारी और अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दौरान महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। फिलहाल परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

    घटना के बाद स्थानीय स्तर पर अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों के उपचार और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

    बताया जा रहा है कि इसी अस्पताल को लेकर कुछ दिन पहले भी एक अन्य महिला के उपचार से संबंधित विवाद सामने आया था। इस कारण ताजा घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और उपचार प्रक्रिया को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ गई है। हालांकि, दोनों मामलों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

    पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई या उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही की भूमिका रही। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध चिकित्सकीय तथ्यों को मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिजनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है।

  • भोपाल-राजगढ़ को जोड़ने वाला डायवर्सन जलमग्न, प्रशासन ने आवाजाही पर लगाया प्रतिबंध

    भोपाल-राजगढ़ को जोड़ने वाला डायवर्सन जलमग्न, प्रशासन ने आवाजाही पर लगाया प्रतिबंध


    भोपाल  लगातार हो रही बारिश के चलते भोपाल और राजगढ़ जिले को जोड़ने वाले पार्वती नदी के अस्थायी वैकल्पिक मार्ग पर आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। बैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर नदी के बीच बनाए गए इस डायवर्सन पर पानी भर जाने और तेज बहाव के कारण प्रशासन ने सोमवार देर रात यह फैसला लिया। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।

    बैरसिया एसडीएम आशुतोष शर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि पार्वती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे नदी के बीच बना अस्थायी मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया है और वहां से गुजरना बेहद जोखिमभरा हो गया है। किसी भी संभावित हादसे को रोकने के लिए इस मार्ग पर सभी प्रकार के वाहनों और लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

    बैरिकेडिंग और निगरानी के निर्देश

    प्रशासन ने संबंधित विभागों को मार्ग के दोनों ओर बैरिकेडिंग लगाने, चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा संकेतक स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति जोखिम उठाकर इस रास्ते का उपयोग न कर सके।

    आदेश के पालन की जिम्मेदारी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, जनपद पंचायत, लोक निर्माण विभाग (PWD) और पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है। अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने तथा लोगों को सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों से भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

    उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    पहले भी हो चुके हैं हादसे

    यह वैकल्पिक मार्ग जनवरी 2025 में पार्वती नदी पर बने 49 वर्ष पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद तैयार किया गया था। बारिश शुरू होने से पहले तक इसी रास्ते से बसें, ट्रक, कारें और दोपहिया वाहन गुजर रहे थे, लेकिन जलस्तर बढ़ने के साथ यहां हादसों का खतरा भी बढ़ गया। पिछले वर्ष अक्टूबर में इसी मार्ग पर एक बस फंस गई थी, जबकि हाल ही में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पानी में गिर गई थी। हालांकि उस हादसे में चारों लोग सुरक्षित बच गए थे।

    कई जिलों की लाइफलाइन है यह मार्ग

    बैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर स्थित यह पुल भोपाल और राजगढ़ के अलावा गुना, विदिशा, शिवपुरी, अशोकनगर, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन और इंदौर जैसे जिलों की आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यही मार्ग आगरा-बंबई राष्ट्रीय राजमार्ग से भी जुड़ता है।

    करीब 49 वर्ष पुराने इस पुल की अब तक केवल दो बार मरम्मत हुई है। रखरखाव के अभाव में इसकी स्थिति लगातार खराब होती गई और जनवरी 2025 में पुल धंसने के बाद इसे पूरी तरह बंद करना पड़ा था। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे बंद मार्ग से गुजरने का प्रयास न करें और केवल सुरक्षित वैकल्पिक रास्तों का ही उपयोग करें।