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  • नरसिंहपुर में राजस्व न्यायालयों पर सवाल, वकीलों ने उठाई आवाज

    नरसिंहपुर में राजस्व न्यायालयों पर सवाल, वकीलों ने उठाई आवाज


    मध्य प्रदेश । नरसिंहपुर जिले में मंगलवार को अधिवक्ताओं ने राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के नाम प्रभारी अपर कलेक्टर गजेंद्र नागेश को दिया गया।

    अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि राजस्व न्यायालयों में न केवल मामलों के निपटारे में देरी हो रही है, बल्कि कई बार उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार भी नहीं किया जाता, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।

    लंबित मामलों और ऑनलाइन प्रक्रिया पर उठे सवाल
    ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने कहा कि राजस्व न्यायालयों में मामलों का समय पर पंजीयन और निपटारा नहीं हो रहा है। उनका आरोप है कि कई मामलों को केवल पोर्टल पर लंबित न दिखाने के उद्देश्य से ऑनलाइन डिस्पोज कर दिया जाता है, जबकि वास्तविक सुनवाई ऑफलाइन जारी रहती है। इसके साथ ही, बिना उचित प्रक्रिया के मामलों को खारिज करने और अपंजीकृत प्रकरणों के संचालन को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।

    नियमित अधिकारी और समयबद्ध न्यायालय कार्य की मांग
    अधिवक्ताओं ने मांग की कि नरसिंहपुर जिले में नियमित अपर कलेक्टर की तत्काल नियुक्ति की जाए। वर्तमान में जिला पंचायत सीईओ को अपर कलेक्टर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जिससे न्यायालयीन कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि अपर कलेक्टर न्यायालय में सुनवाई के लिए निश्चित दिन और समय तय किया जाए ताकि वकीलों और पक्षकारों को अनावश्यक परेशानी न हो।

    कर्मचारियों पर कार्रवाई और पारदर्शिता की मांग
    ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि न्यायालय में लंबे समय से पदस्थ कर्मचारियों को हटाया जाए, ऑनलाइन और ऑफलाइन मामलों की जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए। अधिवक्ताओं ने जोर देकर कहा कि लंबित प्रकरणों का शीघ्र पंजीयन और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि आम नागरिकों को न्याय में देरी न हो।

    प्रशासन से समाधान की उम्मीद
    अधिवक्ताओं ने प्रशासन से इस पूरे मामले में गंभीरता से संज्ञान लेने और जल्द सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। अब सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • गड्ढों पर लिखे तंज से गरमाई सियासत: नरसिंहपुर में सड़क पर अनोखा विरोध

    गड्ढों पर लिखे तंज से गरमाई सियासत: नरसिंहपुर में सड़क पर अनोखा विरोध


    नरसिंहपुर। नरसिंहपुर जिले में सड़क की जर्जर हालत को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। गोटेगांव-नरसिंहपुर मार्ग की बदहाली के खिलाफ कार्यकर्ताओं ने सड़क के गड्ढों को ही अपना मंच बना लिया और उन्हीं पर तंज भरे नारे लिखकर प्रशासन और सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की।

    जिला पंचायत सदस्य और कांग्रेस नेता अरविंद सिंह पटेल के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने चूने और फेवीकोल के घोल से गड्ढों के बीच सरकार विरोधी संदेश लिखे। इनमें “रोड पर गड्ढे हैं या गड्ढे में रोड?”, “भाजपा का विकास” और “अमेरिका से बेहतर रोड” जैसे व्यंग्यात्मक नारे शामिल थे, जो राहगीरों के बीच चर्चा का विषय बने रहे।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मार्ग जिले का प्रमुख और व्यस्त सड़क मार्ग है, लेकिन लंबे समय से इसकी मरम्मत नहीं की गई है। जगह-जगह गहरे गड्ढों के कारण यहां आए दिन हादसे होते रहते हैं और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस सड़क के फोरलेन निर्माण को लेकर पहले सर्वे भी किया गया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हो सका। नेताओं ने आरोप लगाया कि यह मार्ग प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी रास्ते से कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि गुजरते हैं, इसके बावजूद सड़क की हालत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।

    प्रदर्शनकारियों ने इसे सरकार की विकास कार्यों में लापरवाही बताते हुए कहा कि उनका यह अनोखा विरोध प्रशासन को जगाने और जल्द से जल्द सड़क सुधार कार्य शुरू कराने के उद्देश्य से किया गया है। फिलहाल स्थानीय स्तर पर यह प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग सोशल मीडिया पर भी इन नारों को साझा कर रहे हैं।

  • नरसिंहपुर मर्डर केस: हाथ-पैर बांधकर युवक की हत्या, शव को गहरी खाई में फेंका

    नरसिंहपुर मर्डर केस: हाथ-पैर बांधकर युवक की हत्या, शव को गहरी खाई में फेंका


    नई दिल्ली। राजस्थान के भीलवाड़ा निवासी वीरू उर्फ पप्पू जाट हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, नरसिंहपुर के साईंखेड़ा में रहने वाली रीना किरार ने अपने बचपन के प्रेमी अरुण पटेल और उसके साथी हरनाम किरार के साथ मिलकर वीरू की हत्या की साजिश रची। वीरू को सोशल मीडिया के जरिए करीब 900 किलोमीटर दूर मध्यप्रदेश बुलाया गया था।
    जांच में सामने आया कि 29 अप्रैल को वीरू जैसे ही रीना के घर पहुंचा, वहां पहले से मौजूद आरोपियों ने बेसबॉल बैट से हमला कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद घर में फैला खून साफ किया गया, शव के हाथ-पैर बांधकर मुंह पर टेप लगाया गया और बोरी में पैक कर XUV 700 से रायसेन जिले के नागिन मोड़ सिरवारा ब्रिज के पास ले जाकर करीब 40 फीट गहरी खाई में फेंक दिया गया।
    7 मई को रायसेन के बाड़ी थाना क्षेत्र में सड़ी-गली लाश मिलने के बाद पुलिस जांच शुरू हुई। मौके से मिले बैग और बच्चे की कॉपी ने केस सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। कॉपी में लिखावट के आधार पर पुलिस साईंखेड़ा पहुंची और फिर उज्जैन से रीना किरार, अरुण पटेल और हरनाम किरार को गिरफ्तार किया गया।
    पुलिस का कहना है कि हत्या की वजह प्रेम संबंधों में जलन और विवाद था। जांच में यह भी सामने आया कि अरुण पटेल रीना के परिवार पर काफी पैसा खर्च करता था और उसने उसे SUV व जेवर भी दिलाए थे। वीरू का रीना से लगातार बढ़ता संपर्क अरुण को पसंद नहीं था, जिसके बाद साजिश रचकर हत्या कर दी गई।
  • पिकनिक बना हादसा नरसिंहपुर के दो युवक नर्मदा नदी में डूबे धुरेड़ी पर्व की खुशियां मातम में बदलीं

    पिकनिक बना हादसा नरसिंहपुर के दो युवक नर्मदा नदी में डूबे धुरेड़ी पर्व की खुशियां मातम में बदलीं


    नरसिंहपुर जिले में धुरेड़ी पर्व के दिन एक दर्दनाक हादसे ने त्योहार की खुशियों को गहरे मातम में बदल दिया। मां नर्मदा के बरमान स्थित रेत घाट पर पिकनिक मनाने पहुंचे दो युवकों की नदी में डूबने से मौत हो गई। इस हादसे के बाद नरसिंहपुर शहर के सिंधी कॉलोनी और स्टेशनगंज इलाके में शोक की लहर फैल गई और पूरे क्षेत्र में मातम का माहौल बन गया।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार नरसिंहपुर शहर की सिंधी कॉलोनी कृष्णा वार्ड निवासी संभव हरियानी उम्र 20 वर्ष पिता कैलाश हरियानी और सौरभ चावला उम्र 25 वर्ष पिता अनिल चावला अपने दो अन्य दोस्तों के साथ धुरेड़ी पर्व के मौके पर बरमान घाट घूमने और पिकनिक मनाने पहुंचे थे। सभी दोस्त नदी किनारे समय बिता रहे थे और इसी दौरान दोनों युवक नर्मदा नदी में स्नान करने उतर गए।

    बताया जा रहा है कि बुधवार दोपहर स्नान के दौरान अचानक दोनों युवकों का संतुलन बिगड़ गया और वे गहरे पानी की ओर चले गए। देखते ही देखते दोनों युवक पानी में डूबने लगे। उनके साथ मौजूद दोस्तों ने जब उन्हें डूबता देखा तो तुरंत शोर मचाया और आसपास मौजूद लोगों से मदद मांगी।

    घटना की सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद नाविकों और गोताखोरों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। स्थानीय लोग और पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और सभी ने मिलकर युवकों को ढूंढने की कोशिश की। काफी प्रयासों के बाद दोनों युवकों को नदी से बाहर निकाला गया और तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया।

    अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों युवकों को मृत घोषित कर दिया। इस खबर के मिलते ही उनके परिजनों और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। जैसे ही यह सूचना शहर पहुंची तो सिंधी कॉलोनी और स्टेशनगंज इलाके में लोगों की भीड़ पीड़ित परिवारों के घर पहुंचने लगी। पूरे इलाके में शोक का माहौल बन गया और परिवारों का रो रोकर बुरा हाल हो गया।

    बताया जा रहा है कि दोनों युवक अपने दोस्तों के साथ त्योहार का आनंद लेने और घूमने के उद्देश्य से बरमान घाट पहुंचे थे लेकिन अचानक हुए इस हादसे ने उनकी जिंदगी ही छीन ली। इस घटना ने एक बार फिर नदी में स्नान के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को भी उजागर कर दिया है।

    पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है और शवों का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है ताकि हादसे की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।
    इस दुखद घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और लोग मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।

  • सिस्टम से हारा सरपंच: नरसिंहपुर में पंचायत भवन के अंदर खुद को किया कैद, आत्मदाह की दी चेतावनी।

    सिस्टम से हारा सरपंच: नरसिंहपुर में पंचायत भवन के अंदर खुद को किया कैद, आत्मदाह की दी चेतावनी।


    नरसिंहपुर/ मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने लोकतंत्र के जमीनी स्तर पंचायती राज और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के चीचली जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली सीरेगांव ग्राम पंचायत के सरपंच महेंद्र कुशवाहा ने व्यवस्था से हारकर एक आत्मघाती कदम उठाने का ऐलान किया है। मंगलवार की रात से ही सरपंच ने खुद को पंचायत भवन के एक कमरे में कैद कर लिया है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नहीं सुना गया, तो वे वहीं आत्मदाह कर लेंगे।

    क्या है पूरा मामला?
    सीरेगांव के सरपंच महेंद्र कुशवाहा का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से वे अपनी पंचायत में विकास कार्य कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, ग्राम पंचायत में निर्माण कार्यों और अन्य विकास परियोजनाओं में लगातार बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। सरपंच का कहना है कि उन्होंने ग्राम स्तर की समस्याओं के निराकरण के लिए कई बार जनपद पंचायत से लेकर जिला कलेक्टर तक का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने दर्जनों बार लिखित आवेदन दिए, जनसुनवाई में अपनी बात रखी, लेकिन हर बार उन्हें केवल ‘आश्वासन’ का झुनझुना थमा दिया गया।

    सरपंच का दर्द यह है कि एक चुना हुआ जनप्रतिनिधि होने के बावजूद वे अपने क्षेत्र की जनता की सेवा नहीं कर पा रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।

    वीडियो संदेश और ‘अंतिम फैसला’
    पंचायत भवन में खुद को कैद करने के बाद सरपंच महेंद्र कुशवाहा ने एक वीडियो जारी किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सरपंच काफी भावुक और व्यथित नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं पिछले दो साल से प्रशासन से निवेदन कर रहा हूं कि मुझे काम करने दिया जाए और विकास कार्यों में सहयोग किया जाए, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। पिछले मंगलवार की जनसुनवाई में भी मैंने गुहार लगाई थी, पर मुझे सिर्फ प्रताड़ना मिली।”

    सरपंच ने वीडियो में स्पष्ट रूप से कहा कि यह उनका ‘अंतिम फैसला’ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं हुआ, तो वे पंचायत भवन के भीतर ही खुद को आग लगा लेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि उन्हें कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और स्थानीय प्रशासन की होगी।

    प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप
    जैसे ही सरपंच के कैद होने और आत्मदाह की चेतावनी की खबर फैली, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह का चरम कदम उठाना जिले की कानून-व्यवस्था और छवि के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और तहसील स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचे और सरपंच को समझाने-बुझाने का दौर शुरू हुआ।यह घटना केवल एक सरपंच की नाराजगी भर नहीं है, बल्कि यह उस नौकरशाही की तस्वीर पेश करती है जहाँ एक जनप्रतिनिधि को अपनी आवाज सुनाने के लिए मौत को गले लगाने जैसी धमकी देनी पड़ती है। सीरेगांव की जनता अब इस उम्मीद में है कि शासन उनकी पंचायत की समस्याओं पर ध्यान देगा और सरपंच को न्याय मिलेगा, ताकि गांव में विकास के पहिये फिर से घूम सकें। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन सरपंच को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिशों में जुटा है।

  • नरसिंहपुर में तेज रफ्तार का कहर: अनियंत्रित होकर पलटी कार, चार दोस्त गंभीर रूप से घायल

    नरसिंहपुर में तेज रफ्तार का कहर: अनियंत्रित होकर पलटी कार, चार दोस्त गंभीर रूप से घायल


    नरसिंहपुर । शहर के बायपास रोड स्थित महर्षि स्कूल के पास सोमवार की रात एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ एक तेज रफ्तार कार अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर कई बार पलट गई। हादसे के वक्त कार में चार किशोर सवार थे, जो इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुँचकर स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को कार से बाहर निकाला और तत्काल जिला अस्पताल पहुँचाया।

    घायलों का उपचार और स्थिति हादसे में घायल किशोरों की पहचान कृष्णा तिवारी, अंश दुबे, सहज राजपूत और अर्णव जाट के रूप में हुई है। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के दौरान दो किशोरों की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। डॉक्टरों ने तत्काल उनका सीटी स्कैन कराने के बाद बेहतर इलाज और न्यूरो केयर की आवश्यकता को देखते हुए उन्हें लक्ष्मी नारायण अस्पताल रेफर कर दिया है। शेष दो घायलों का उपचार जिला अस्पताल में ही जारी है। राहत की बात यह है कि ताजा अपडेट के अनुसार फिलहाल चारों की स्थिति स्थिर बनी हुई है।

    जांच में जुटी पुलिस घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस ने मामले को संज्ञान में ले लिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार की रफ्तार अधिक थी, जिसके कारण चालक मोड़ पर संतुलन खो बैठा। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या दुर्घटना तकनीकी खराबी की वजह से हुई या फिर मानवीय लापरवाही इसका मुख्य कारण थी। पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहन को जब्त कर लिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। बायपास रोड पर बढ़ते हादसों को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से यहाँ सुरक्षा संकेतक लगाने की मांग भी की है।