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  • सतना में लोक अदालत का बड़ा फैसला: हजारों मामलों का निपटारा, करोड़ों का समझौता

    सतना में लोक अदालत का बड़ा फैसला: हजारों मामलों का निपटारा, करोड़ों का समझौता


    नई दिल्ली । सतना में आयोजित नेशनल लोक अदालत में 2888 मामलों का आपसी सुलह से निपटारा हुआ। इस दौरान 9.42 करोड़ रुपये से अधिक के अवार्ड पारित किए गए, जबकि 22 दंपतियों ने पुराने विवाद खत्म कर दोबारा साथ रहने का फैसला किया।

    सतना में चालू वर्ष की दूसरी नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ जिला जज गीता सोलंकी ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर कई न्यायिक अधिकारी और अधिवक्ता मौजूद रहे। लोक अदालत में आपसी सहमति के आधार पर कुल 2888 मामलों का समाधान किया गया। इन मामलों में कुल 9 करोड़ 42 लाख 81 हजार 737 रुपये के अवार्ड पारित किए गए, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिली।

    परिवारिक विवादों में आई सुलह, 22 जोड़े फिर साथ

    कुटुंब न्यायालय की पीठ में पेश 30 मामलों में से 22 विवादित दंपतियों के बीच समझौता कराया गया। वर्षों से अलगाव की स्थिति में चल रहे कई जोड़ों ने अदालत में एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर नए सिरे से जीवन शुरू करने का फैसला लिया। तलाक की प्रक्रिया में पहुंचे कई दंपति भी समझाइश के बाद फिर से साथ रहने को तैयार हुए, जिससे पारिवारिक विवादों में सकारात्मक समाधान देखने को मिला।

    मोटर दुर्घटना और बीमा मामलों में बड़ा मुआवजा

    लोक अदालत में मोटर दुर्घटना से जुड़े मामलों में भी महत्वपूर्ण फैसले हुए। एक मामले में हर्षिता बत्रा को 47 लाख रुपये का चेक प्रदान किया गया। कुल 12 मामलों में 52 लाख रुपये से अधिक का अवार्ड पारित किया गया। इन मामलों में बीमा कंपनियों और पक्षकारों के बीच समझौते के बाद तेजी से निपटारा किया गया।

    विद्युत और श्रम मामलों में भी राहत

    विद्युत विभाग से जुड़े 256 मामलों का निपटारा करते हुए 86 लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं श्रम न्यायालय में 7 मामलों में 20 लाख रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति श्रमिकों को दिलाई गई।

    जमीन, चेक बाउंस और ट्रैफिक मामलों का भी समाधान

    लोक अदालत में जमीन विवाद, चेक बाउंस, आपराधिक और ट्रैफिक से जुड़े मामलों का भी समाधान किया गया। इससे अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करने में मदद मिली। सतना की यह लोक अदालत न केवल मामलों के त्वरित निपटारे का उदाहरण बनी, बल्कि आपसी सुलह और सामाजिक संतुलन की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम साबित हुई।

  • भोपाल में कुटुंब न्यायालय की नेशनल लोक अदालत में 100 से अधिक रिश्तों को बचाया, पति ने बेटी को गोद में उठाते ही मांगी माफी

    भोपाल में कुटुंब न्यायालय की नेशनल लोक अदालत में 100 से अधिक रिश्तों को बचाया, पति ने बेटी को गोद में उठाते ही मांगी माफी


    भोपाल । भोपाल के कुटुंब न्यायालय में आयोजित नेशनल लोक अदालत में 100 से अधिक रिश्तों को टूटने से बचाया गया। इस दौरान पति-पत्नी ने अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए गिले-शिकवे भूलकर फिर से एक-दूसरे के साथ रहने का निर्णय लिया। यह अदालत उन दंपत्तियों के लिए वरदान साबित हुई जिनके रिश्ते झगड़ों और विवादों की वजह से खटाई में थे।

    एक विशेष मामले में जहां एक व्यवसायी पति और उसकी पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था दोनों के बीच काउंसलिंग सत्र में एक भावुक पल आया। पत्नी ने डेढ़ साल की अपनी बेटी को पति से दूर रखकर मायके भेज दिया था और वह अपने पति से मिलने भी नहीं देती थी। पत्नी ने पति के खिलाफ भरण-पोषण का केस भी दायर कर रखा था और पति का कहना था कि यदि पत्नी मायके में रहेगी तो वह भरण-पोषण नहीं देगा।

    इस बीच कुटुंब न्यायालय में काउंसलिंग के दौरान जज ने पति से कहा कि वह अपनी बेटी को गोद में लेकर पत्नी से मिलें। जब पति ने बेटी को गोद में उठाया तो उसकी आँखों में पछतावा और अफसोस था। कई महीनों से अपनी बेटी से अलग रह रहे पति को अपनी गलती का एहसास हुआ। इसके बाद उसने पत्नी से माफी मांगी और समझौते की इच्छा जताई।
    पत्नी ने भी बच्चों के भविष्य को देखते हुए पति की माफी स्वीकार की और दोनों ने एक-दूसरे को समझते हुए एक नया अध्याय शुरू करने का निर्णय लिया। इसके बाद वे दोनों घर लौट गए और अपने रिश्ते को फिर से संजीवनी दी।

    कुटुंब न्यायालय की नेशनल लोक अदालत में इस तरह के कई अन्य मामले भी आए जिनमें रिश्तों में दरार आ चुकी थी लेकिन अदालत की मध्यस्थता से और समझाइश से वे सब वापस एकजुट हो गए। इस प्रक्रिया ने यह साबित किया कि सही मार्गदर्शन और समझ के साथ पारिवारिक रिश्तों को पुनर्निर्मित किया जा सकता है। भोपाल के कुटुंब न्यायालय में आयोजित नेशनल लोक अदालत में कई रिश्तों को टूटने से बचाया गया। एक दिल छूने वाले मामले में पति ने अपनी बेटी को गोद में उठाते हुए पत्नी से माफी मांगी और दोनों ने मिलकर अपने रिश्ते को फिर से संजीवित किया। यह अदालत परिवारों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरी है।