Tag: National News

  • दिल्ली के झुग्गी पुनर्वास पर बड़ा फैसला, 4 लाख परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ; यमुना जल परियोजना पर राज्यों में बनी सहमति

    दिल्ली के झुग्गी पुनर्वास पर बड़ा फैसला, 4 लाख परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ; यमुना जल परियोजना पर राज्यों में बनी सहमति


    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास और शहरी विकास को लेकर केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राजधानी के करीब 4 लाख परिवारों को लाभ पहुंचाने वाली व्यापक पुनर्वास योजना को मंजूरी देने की दिशा में सहमति बनी है। इस बैठक में दिल्ली के शहरी ढांचे को मजबूत करने और झुग्गी क्षेत्रों को व्यवस्थित आवासीय कॉलोनियों में बदलने पर विशेष जोर दिया गया।

    बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि नई पुनर्वास कॉलोनियों का विकास केवल आवास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें आंगनवाड़ी केंद्र, विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्र, खेल मैदान और अन्य आवश्यक सामुदायिक सुविधाएं भी शामिल होंगी। इसका उद्देश्य पुनर्वासित परिवारों को बेहतर और संतुलित शहरी जीवन उपलब्ध कराना है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि झुग्गी पुनर्वास नीति-2026 को जल्द अधिसूचित किया जाए ताकि प्रक्रिया को कानूनी और प्रशासनिक आधार मिल सके।

    इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री Manohar Lal Khattar, दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta तथा उपराज्यपाल T. S. Singh Sandhu भी मौजूद रहे। सभी पक्षों ने मिलकर पुनर्वास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने और PPP मॉडल के तहत विकास कार्यों को लागू करने पर सहमति जताई।

    योजना के तहत DDA और DUSIB को निर्देश दिया गया है कि पांच झुग्गी क्लस्टरों के लिए 45 दिनों के भीतर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाए और 50 अतिरिक्त क्लस्टरों के लिए परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाए। सरकार का लक्ष्य है कि पुनर्वास कार्यों में पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित की जाए, ताकि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके।

    बैठक में यमुना नदी के जल प्रबंधन और किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर भी अहम निर्णय लिया गया। छह राज्यों ने मिलकर इस परियोजना के क्रियान्वयन पर सहमति जताई है, जिससे दिल्ली सहित पूरे यमुना बेसिन क्षेत्र में जल आपूर्ति को मजबूत करने की उम्मीद है। विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से में से कुछ भाग दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराने पर सहमति बनी है, जिससे राजधानी में जल संकट को कम करने में मदद मिलेगी।

    सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यह समग्र योजना दिल्ली के शहरी विकास और जल संसाधन प्रबंधन में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। आने वाले समय में इससे न केवल झुग्गी क्षेत्रों का पुनर्गठन होगा, बल्कि राजधानी के बुनियादी ढांचे में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बापू के अहिंसा संदेश को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम किया साझा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बापू के अहिंसा संदेश को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम किया साझा


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके अहिंसा के संदेश को स्मरण करते हुए संस्कृत में रचित एक प्रेरणादायी सुभाषितम साझा किया। इस सुभाषितम के माध्यम से प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी द्वारा मानवता की रक्षा के लिए अहिंसा को सर्वोच्च मूल्य मानने की भावना को देश और दुनिया के सामने पुनः रेखांकित किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि पूज्य बापू का संपूर्ण जीवन अहिंसा, सत्य और मानव कल्याण के सिद्धांतों पर आधारित रहा। उन्होंने बिना हथियार के, केवल नैतिक बल और सत्य की शक्ति से न केवल भारत को स्वतंत्रता दिलाई, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाया। अहिंसा का यह संदेश आज के अशांत वैश्विक वातावरण में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा की गई अपनी पोस्ट में लिखा कि महात्मा गांधी ने मानवता की रक्षा के लिए सदैव अहिंसा पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अहिंसा में वह शक्ति निहित है, जो बिना हिंसा और हथियार के भी दुनिया को बदल सकती है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया संस्कृत सुभाषितम अहिंसा के दर्शन को गहराई से अभिव्यक्त करता है

    अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परन्तपः।
    अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते॥

    इस सुभाषितम का तात्पर्य है कि अहिंसा सर्वोच्च कर्तव्य है और अहिंसा ही सर्वोच्च तपस्या है। अहिंसा को परम सत्य बताया गया है, जिससे सभी धर्मों और नैतिक मूल्यों की उत्पत्ति होती है। यह संदेश महात्मा गांधी के जीवन दर्शन का सार प्रस्तुत करता है, जिसमें उन्होंने मानवता, करुणा और नैतिकता को सर्वोपरि रखा।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी संकेत दिया कि अहिंसा केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के निर्माण का आधार भी है। बापू का अहिंसा का विचार सामाजिक समरसता, शांति और न्यायपूर्ण व्यवस्था की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि महात्मा गांधी के सिद्धांत आज भी भारत की नीतियों और मूल्यों में प्रतिबिंबित होते हैं।

    देशभर में शहीद दिवस के अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह सुभाषितम न केवल बापू के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि देशवासियों के लिए यह संदेश भी है कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही स्थायी शांति और मानव कल्याण संभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश बापू के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर किया नमन, स्वदेशी को बताया आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर किया नमन, स्वदेशी को बताया आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके विचारों एवं आदर्शों को स्मरण किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पूज्य बापू का जीवन, उनका व्यक्तित्व और उनका कृतित्व देशवासियों को सत्य, अहिंसा और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की निरंतर प्रेरणा देता रहेगा। महात्मा गांधी का स्वदेशी पर दिया गया बल आज के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का मजबूत आधारस्तंभ है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा अपने संदेश में राष्ट्रपिता को नमन करते हुए कहा कि बापू का स्वदेशी विचार केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं था, बल्कि यह आत्मसम्मान, आत्मबल और सामाजिक चेतना से भी जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का दर्शन आज के भारत के विकास मॉडल में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है, जहां स्थानीय संसाधनों, स्वदेशी उत्पादों और भारतीय मूल्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी का संपूर्ण जीवन मानवता, करुणा और नैतिकता का प्रतीक है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सत्य और अहिंसा जैसे मूल्यों के बल पर न केवल भारत को आज़ादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग भी दिखाया। बापू का यह संदेश आज के वैश्विक परिदृश्य में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि महात्मा गांधी का व्यक्तित्व देशवासियों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की सीख देता है। उन्होंने समाज के हर वर्ग को समानता, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और अनुशासन का महत्व समझाया। गांधीजी के विचारों में निहित सादगी और सेवा भाव आज भी राष्ट्र निर्माण की प्रेरक शक्ति बने हुए हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के जो संकल्प लिए गए हैं, उनकी जड़ें महात्मा गांधी के स्वदेशी और ग्राम स्वराज के विचारों में निहित हैं। स्थानीय से वैश्विक की सोच, कुटीर उद्योगों को बढ़ावा और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण, बापू के सपनों को साकार करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।

    देशभर में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। यह दिन शहीद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है और राष्ट्रपिता के बलिदान को याद करने का अवसर प्रदान करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त किए गए विचार एक बार फिर यह स्मरण कराते हैं कि महात्मा गांधी केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित व्यक्तित्व नहीं हैं, बल्कि वे आज भी भारत की आत्मा और दिशा के मार्गदर्शक हैं।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने 'ओडिशा की मदर टेरेसा' पार्वती गिरि को दी श्रद्धांजलि; स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा में उनके योगदान को सराहा

    प्रधानमंत्री मोदी ने 'ओडिशा की मदर टेरेसा' पार्वती गिरि को दी श्रद्धांजलि; स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा में उनके योगदान को सराहा


    नई दिल्ली/भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक पार्वती गिरि जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी अदम्य साहसपूर्ण भूमिका और आजादी के बाद समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए उनके कार्यों को याद किया। स्वतंत्रता संग्राम की प्रखर नायिका प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पूर्व में ट्विटर पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि पार्वती गिरि जी ने विदेशी शासन के खिलाफ आंदोलन में बेहद सराहनीय भूमिका निभाई थी। मात्र 16 वर्ष की आयु में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में सक्रिय भागीदारी करने वाली पार्वती गिरि अपनी अटूट देशभक्ति के लिए जानी जाती हैं। उन्हें उनके सेवा भाव के कारण ‘ओडिशा की मदर टेरेसा’ के नाम से भी जाना जाता है।

    महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सेवा में उल्लेखनीय कार्य प्रधानमंत्री ने पार्वती गिरि के सामुदायिक सेवा के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण और संस्कृति के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उनके कार्य आज भी प्रेरणा देते हैं। उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा को ही अपना धर्म माना। प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि उन्होंने पिछले महीने अपने प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रम मन की बात में भी पार्वती गिरि जी के जीवन संघर्ष और उनकी महानता का विशेष उल्लेख किया था।   एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व पार्वती गिरि जी का जन्म 19 जनवरी 1926 को हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन अनाथों की सेवा और जेल सुधार जैसे रचनात्मक कार्यों में समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि उनकी जन्म शताब्दी पर देशवासी उनके आदर्शों को अपनाकर एक समावेशी समाज के निर्माण का संकल्प लेंगे।

  • रक्षा मंत्रालय में रिश्वतखोरी का खुलासा: CBI ने लेफ्टिनेंट कर्नल को किया गिरफ्तार, 2.36 करोड़ नकद जब्त

    रक्षा मंत्रालय में रिश्वतखोरी का खुलासा: CBI ने लेफ्टिनेंट कर्नल को किया गिरफ्तार, 2.36 करोड़ नकद जब्त

    नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय से जुड़ा एक बड़ा रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI ने शनिवार को रक्षा उत्पादन विभाग में तैनात लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। CBI ने इस कार्रवाई के दौरान उनके घर से करीब 2.36 करोड़ रुपये नकद जब्त किए हैं। जांच एजेंसी ने इस मामले में उनकी पत्नी कर्नल काजल बाली को भी आरोपी बनाया है, जिनके आवास से 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

    CBI के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा पर आरोप है कि वे रक्षा उत्पादों के निर्माण और निर्यात से जुड़ी निजी कंपनियों को अवैध लाभ पहुंचाने के बदले रिश्वत लेते थे। इस मामले में बिचौलिया विनोद कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। तीनों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद 23 दिसंबर तक CBI की हिरासत में भेज दिया गया है।यह मामला 19 दिसंबर को मिली एक गोपनीय सूचना के आधार पर दर्ज किया गया था। CBI को जानकारी मिली थी कि बेंगलुरु स्थित एक निजी कंपनी के लिए रक्षा मंत्रालय और अन्य सरकारी विभागों में अनुचित तरीके से काम करवाने के बदले लेफ्टिनेंट कर्नल रिश्वत ले रहे हैं। जांच में सामने आया कि कंपनी की ओर से विनोद कुमार नामक बिचौलिया लेफ्टिनेंट कर्नल को पैसे पहुंचाने का काम कर रहा था।

    CBI की जांच में यह भी सामने आया कि 18 दिसंबर को विनोद कुमार ने बेंगलुरु की उसी कंपनी के कहने पर लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा को 3 लाख रुपये की रिश्वत दी थी। इसके तुरंत बाद CBI ने कार्रवाई करते हुए आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया।जांच एजेंसी का कहना है कि यह कंपनी मूल रूप से दुबई की है, जिसके भारत में संचालन की जिम्मेदारी राजीव यादव और रवजीत सिंह नाम के दो व्यक्तियों के पास थी। ये दोनों लगातार लेफ्टिनेंट कर्नल शर्मा के संपर्क में थे और कंपनी को सरकारी स्तर पर फायदा पहुंचाने के लिए साजिश रच रहे थे। CBI के अनुसार, इन लोगों ने कई सरकारी मंत्रालयों और विभागों से अवैध लाभ लेने की कोशिश की।

    गिरफ्तारी के बाद CBI ने दिल्ली, श्रीगंगानगर, बेंगलुरु और जम्मू समेत कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। दिल्ली स्थित लेफ्टिनेंट कर्नल शर्मा के आवास से 3 लाख रुपये रिश्वत की रकम, 2.23 करोड़ रुपये नकद और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। वहीं राजस्थान के श्रीगंगानगर में उनकी पत्नी कर्नल काजल बाली के घर से 10 लाख रुपये नकद मिले।काजल बाली वर्तमान में डिवीजन ऑर्डनेंस यूनिट DOU श्रीगंगानगर में कमांडिंग ऑफिसर के पद पर तैनात हैं। CBI को संदेह है कि इस अवैध लेन-देन में उनकी भूमिका भी हो सकती है, इसलिए उनके खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी उनके कार्यालय में भी दस्तावेजों की जांच कर रही है।

    CBI अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रिश्वतखोरी का यह नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं।रक्षा मंत्रालय जैसे संवेदनशील विभाग में तैनात एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की गिरफ्तारी से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। यह मामला न सिर्फ भ्रष्टाचार की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर भी सवाल खड़े करता है।