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  • भोपाल की झील में देशभर के सेलिंग सितारों का दमखम, NSS भोपाल विजेता और NYSC गोवा उपविजेता

    भोपाल की झील में देशभर के सेलिंग सितारों का दमखम, NSS भोपाल विजेता और NYSC गोवा उपविजेता


    भोपाल  भोपाल की पहचान बड़े तालाब और उसकी खूबसूरत लहरों से भी जुड़ी है और अब यही झील देश के उभरते हुए सेलिंग खिलाड़ियों के लिए बड़े मंच के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रही है। राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल रैंकिंग सेलिंग चैंपियनशिप के तीसरे संस्करण का समापन रविवार को भोपाल के बोट क्लब में होगा। सुबह 11 बजे आयोजित होने वाले समापन और पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सहकारिता खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग शामिल होंगे। प्रतियोगिता में अलग-अलग वर्गों में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा।

    11 से 16 अगस्त तक आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग राज्यों से 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेलिंग खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता की रेस के दौरान खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर उनकी राष्ट्रीय रैंकिंग तय की जाएगी। यह रैंकिंग खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि बेहतर रैंकिंग के आधार पर उन्हें आगे राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करने के अवसर मिल सकते हैं।

    चैंपियनशिप में नेशनल सेलिंग स्कूल भोपाल यानी NSS ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विजेता का खिताब अपने नाम किया। NSS भोपाल की विजेता टीम में वायु चंद्रवंशी माही वर्मा तुलसी पटले एकलव्य वायम वंशिका शिकारवार आर्यन पाटीदार प्रार्थना मोई अंकित सिसोदिया समर पंचेश्वर और सिद्धि टंडन शामिल रहे। वहीं NYSC गोवा की टीम उपविजेता रही। गोवा की टीम में शशांक जाधव हृदय जोशी मोह रिजवान शिवम वाल्मीकि और हेमंत पपौला ने हिस्सा लिया। NSS भोपाल के खिलाड़ियों को मुख्य प्रशिक्षक जीएल यादव के साथ राम मिलन नरेंद्र एस राजपूत और अनिल शर्मा का मार्गदर्शन मिला।

    प्रतियोगिता के दौरान अपर लेक की लहरों पर खिलाड़ियों के बीच रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। अलग-अलग वर्गों में नाविकों ने हवा की दिशा और गति के साथ तालमेल बैठाते हुए अपनी तकनीक और संतुलन का प्रदर्शन किया। सेलिंग में केवल गति ही निर्णायक नहीं होती बल्कि हवा को समझना नाव को सही दिशा में मोड़ना और बदलती परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखना भी खिलाड़ी की सफलता में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह रही कि प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। भोपाल में राष्ट्रीय स्तर की सेलिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन पहले भी होता रहा है और बड़े तालाब को इस खेल के लिए अनुकूल माना जाता है।

    भोपाल धीरे-धीरे वाटर स्पोर्ट्स के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। शहर की प्राकृतिक झीलें सेलिंग के साथ रोइंग कयाकिंग और केनोइंग जैसे खेलों के लिए भी अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराती हैं। मध्यप्रदेश राज्य जल क्रीड़ा अकादमी की स्थापना 2007 में की गई थी। यहां सेलिंग रोइंग कयाकिंग केनोइंग और स्लालम जैसी विधाओं के लिए प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

    अकादमी से प्रशिक्षण लेकर कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन किया है। अब तक अकादमी के खिलाड़ियों द्वारा 28 अंतरराष्ट्रीय और 69 राष्ट्रीय पदक जीतने का दावा किया गया है। खिलाड़ी 37 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत और मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। ऐसे में राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं बल्कि प्रदेश में वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने और नई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन बनकर सामने आई है।

    समापन समारोह में विजेता और उपविजेता खिलाड़ियों के सम्मान के साथ प्रतियोगिता की उपलब्धियों को रेखांकित किया जाएगा। इसके साथ ही भोपाल की झीलों को वाटर स्पोर्ट्स और स्पोर्ट्स टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को भी नई मजबूती मिल सकती है। देशभर से आए खिलाड़ियों की भागीदारी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि भोपाल की झीलें सिर्फ शहर की खूबसूरती नहीं बल्कि खेल प्रतिभाओं को उड़ान देने वाला मजबूत मैदान भी बन सकती हैं।