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  • कमल हासन की देशवासियों से अपील: संकट के समय राजनीति नहीं, राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए

    कमल हासन की देशवासियों से अपील: संकट के समय राजनीति नहीं, राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने देशवासियों से एकजुटता और जिम्मेदारी की अपील की है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा समय केवल आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह ऐसा दौर है जब पूरे देश को मिलकर राष्ट्रहित में सोचने और कार्य करने की आवश्यकता है।

    कमल हासन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि ईरान क्षेत्र में जारी संघर्षऔर समुद्री व्यापार मार्गों में बाधाओं का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत जैसे देशों पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं। इसके कारण पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल सरकारों के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी जिम्मेदारी का समय है। कमल हासन ने लोगों से अपील की कि वे ईंधन और बिजली की खपत कम करने जैसे छोटे-छोटे कदम उठाकर देश की आर्थिक स्थिरता में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई विकसित देश पहले ही ऊर्जा संरक्षण को लेकर सख्त नीतियां अपना चुके हैं और नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है।

    अपने संदेश में उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि संकट के समय भारत ने हमेशा एकजुटता दिखाई है। उन्होंने 1962 के युद्ध और 1965 के खाद्य संकट का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय देशवासियों ने त्याग और सहयोग की मिसाल पेश की थी। उन्होंने कहा कि आज भले ही परिस्थितियां उतनी गंभीर न हों, लेकिन सामूहिक जिम्मेदारी उतनी ही आवश्यक है।

    कमल हासन ने यह भी कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, कोल गैसीफिकेशन और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने इस प्रयास को सकारात्मक बताते हुए कहा कि विदेशी तेल और गैस पर निर्भरता कम करना दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी है।

    उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से भी अपील की कि वे मिलकर ईंधन पर लगने वाले करों में संतुलन लाएं और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुलभ और किफायती बनाएं। उनका कहना था कि यदि बस, ट्रेन और मेट्रो जैसे साधनों को बढ़ावा दिया जाए तो निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और ईंधन की बचत संभव होगी।

    कमल हासन ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री से सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक संयुक्त बैठक बुलाने का भी आग्रह किया, ताकि ऊर्जा संकट और उससे जुड़ी चुनौतियों पर सामूहिक रणनीति बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि देश को इस समय राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सोचने की आवश्यकता है, क्योंकि राष्ट्रहित सबसे महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि देशवासी मिलकर ऊर्जा बचत और जिम्मेदारी से खपत की दिशा में कदम उठाते हैं, तो भारत इस वैश्विक संकट से और अधिक मजबूत होकर बाहर निकल सकता है। उनके अनुसार, आज बचाया गया हर यूनिट बिजली और हर लीटर ईंधन भविष्य की पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण निवेश है।

  • राम मंदिर में दर्शन के बाद बिट्टा बोले भगवान को राजनीति से ऊपर रखें

    राम मंदिर में दर्शन के बाद बिट्टा बोले भगवान को राजनीति से ऊपर रखें


    नई दिल्ली: अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चा के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने अयोध्या धाम पहुंचकर राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान उन्होंने देश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी और लोगों को एक मजबूत संदेश देने की कोशिश की।

    दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में बिट्टा ने कहा कि वह वर्षों से भगवान राम और हनुमान जी के दर्शन करते आ रहे हैं और उनकी कृपा से ही उनका जीवन सुरक्षित रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा देश में शांति बनाए रखने का प्रयास किया और अपने जीवन में न गोली चलने दी न दंगे-फसाद होने दिए और न ही बम विस्फोट होने दिए।

    उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि भगवान राम को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। उनका साफ कहना था कि राम पहले हैं और सियासत बाद में। उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक को धर्म और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि समाज में एकता और शांति बनी रहे।

    बिट्टा ने अपने बयान में अनुच्छेद 370 हटाने और राम मंदिर निर्माण का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे देश को आतंकवाद से मुक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उनके अनुसार ये फैसले राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा को मजबूत करते हैं।

    उन्होंने अपनी पहचान को लेकर भी एक भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनका धर्म भारत माता है और उनकी जाति वंदे मातरम् है। इस दौरान उन्होंने सिख समाज से भी अपील की कि वे खुलकर सामने आएं और देश विरोधी गतिविधियों का विरोध करें। उन्होंने कहा कि जब तक समाज एकजुट होकर ऐसे मुद्दों पर आवाज नहीं उठाएगा तब तक समस्याएं बनी रहेंगी।

    फिल्म धुरंधर में सिख किरदार को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने कहा कि आज का दौर सोशल मीडिया का है और अब सच्चाई छिप नहीं सकती। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्में बननी चाहिए जिससे लोगों के सामने सही तथ्य आ सकें और इतिहास की वास्तविकता सामने आए।

    इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने ईरान से जुड़े युद्ध के हालात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध का असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी दुनिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे संघर्षों का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और संसाधनों पर भी पड़ता है जिसमें भारत भी अछूता नहीं रह सकता।

    बिट्टा का यह दौरा और बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश में धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है। उनके संदेश को एकता और राष्ट्रहित के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • वंदे मातरम् के 150 वर्ष: देशभर में भारतीय सेना के विशेष बैंड कार्यक्रम, देशभक्ति की धुनों से गूंजेंगे शहर

    वंदे मातरम् के 150 वर्ष: देशभर में भारतीय सेना के विशेष बैंड कार्यक्रम, देशभक्ति की धुनों से गूंजेंगे शहर



    नई दिल्ली
    । राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए भारतीय सेना ने देशभर में विशेष बैंड परफॉर्मेंस आयोजित करने की व्यापक योजना बनाई है। यह आयोजन केवल एक सांगीतिक प्रस्तुति नहीं होगा बल्कि राष्ट्र की एकता सांस्कृतिक विरासत और देशभक्ति की भावना को सशक्त करने का प्रयास भी होगा। सेना के ये विशेष कार्यक्रम 19 से 26 जनवरी 2026 तक देश के प्रमुख शहरों में आयोजित किए जाएंगे।भारतीय सेना के अनुसार प्रत्येक बैंड परफॉर्मेंस लगभग 45 मिनट की होगी और इन्हें दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे के बीच आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में मिलिट्री बैंड और आर्मी सिम्फनी बैंड द्वारा वंदे मातरम् सहित कई देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। संगीत के माध्यम से आम जनता को राष्ट्र के इतिहास बलिदान और एकता की भावना से जोड़ना इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य है।

    इन विशेष प्रस्तुतियों के लिए देश के लगभग हर क्षेत्र को शामिल किया गया है। बिहार में पटना और गया उत्तर प्रदेश में लखनऊ और प्रयागराज उत्तराखंड में देहरादून छत्तीसगढ़ में रायपुर ओडिशा में गोपालपुर और कर्नाटक में बेंगलुरु में सेना के बैंड कार्यक्रम होंगे। मध्य प्रदेश में जबलपुर महाराष्ट्र में मुंबई और पुणे तेलंगाना में हैदराबाद हिमाचल प्रदेश में शिमला राजस्थान में जयपुर और लद्दाख के कारगिल जैसे सामरिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों को भी इस आयोजन में शामिल किया गया है।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट पर 18 जनवरी 2026 को आर्मी सिम्फनी बैंड की विशेष प्रस्तुति होगी जिसे इस श्रृंखला का प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है। वहीं पश्चिम बंगाल के नैहाटी में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जो वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जन्मस्थली है। इस आयोजन को सांस्कृतिक और भावनात्मक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारतीय सेना का कहना है कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रीय गीतों और स्वतंत्रता संग्राम के सांस्कृतिक पक्ष से जोड़ना है। सेना के अधिकारियों के अनुसार संगीत एक ऐसा माध्यम है जो बिना शब्दों के भी देशप्रेम और एकता का संदेश देता है। यही कारण है कि इन प्रस्तुतियों को सार्वजनिक और निःशुल्क रखा गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें।विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि ऐसे आयोजन युवाओं में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करते हैं और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं। सेना के इन कार्यक्रमों में विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षिक संस्थानों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जा रही है जिससे यह आयोजन केवल सैन्य नहीं बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय उत्सव का रूप ले सके।