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  • महाराष्ट्र में नए सियासी उलटफेर के संकेत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस संग एनसीपी के दोनों धड़ों की गोपनीय बैठक से गरमाया राजनीतिक माहौल

    महाराष्ट्र में नए सियासी उलटफेर के संकेत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस संग एनसीपी के दोनों धड़ों की गोपनीय बैठक से गरमाया राजनीतिक माहौल

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़े सियासी फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं, जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक आवास पर मंगलवार देर रात राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं की ताबड़तोड़ बैठकें हुईं। इन गोपनीय मुलाकातों के बाद से ही कयासों का बाजार बेहद गर्म है और विपक्षी खेमे में भारी बेचैनी देखी जा रही है। सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी गठबंधन को बड़ा झटका देकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के पाले में जाने की तैयारी कर रही है।

    प्राप्त विवरण के अनुसार, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले दक्षिण मुंबई स्थित शरद पवार के आवास ‘सिल्वर ओक’ पर जाकर उनसे बेहद लंबी मंत्रणा की। इसके तुरंत बाद वे देर शाम सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करने पहुंचे। इस दौरान राजनीतिक तापमान तब और बढ़ गया जब सत्ताधारी एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल भी अलग से मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। हालांकि बैठक में शामिल किसी भी नेता या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस चर्चा के मुख्य एजेंडे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन दोनों ही गुटों के सूत्रों ने इस बात को स्वीकार किया है कि पर्दे के पीछे किसी बड़े राजनीतिक समझौते की पटकथा लिखी जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जुलाई 2023 में पार्टी के विभाजन के बाद यह पहली बार है जब शरद पवार की पार्टी सबसे बड़े रणनीतिक संकट का सामना कर रही है। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो शरद पवार गुट के कुल 10 विधायकों में से कम से कम आधे से अधिक विधायक भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में शामिल होने के प्रबल पक्ष में हैं। लंबे समय तक विपक्षी खेमे में रहने के कारण इन विधायकों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए आवश्यक विकास निधि जुटाने और प्रशासनिक मंजूरियां हासिल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, जिससे उनके जमीनी राजनीतिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे थे।

    पार्टी के प्रांतीय नेतृत्व ने हाल ही में अपने विधायकों की इस गंभीर भावना और चिंताओं से शीर्ष आलाकमान को विस्तार से अवगत कराया था। यद्यपि शरद पवार ने इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक अपनी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही पार्टी के अगले कदम को लेकर कोई सार्वजनिक घोषणा की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि वे अपने विधायकों के भारी दबाव के कारण इस नए विकल्प पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इस साल की शुरुआत में मुंबई महानगरपालिका चुनावों के बाद से ही दोनों धड़ों के एक होने या शरद गुट के कांग्रेस में विलय की खबरें आती रही हैं, लेकिन कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के कड़े विरोध के कारण अब बाजी पूरी तरह एनडीए की ओर मुड़ती हुई दिखाई दे रही है।

    संख्या बल के रणनीतिक गणित को देखें तो विधानसभा में शरद पवार गुट के पास वर्तमान में 10 विधायक और लोकसभा में 8 सांसद मौजूद हैं। हालांकि यह महाराष्ट्र के प्रमुख राजनीतिक दलों में संख्या के हिसाब से छोटा समूह प्रतीत हो सकता है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा नीत एनडीए के लिए इसकी उपयोगिता बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। केंद्र सरकार आगामी संसद सत्रों में सीमांकन विधेयक जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कानूनों को पारित कराने की योजना बना रही है, जिसके लिए उसे उच्च सदन और निम्न सदन दोनों में अतिरिक्त मतों की आवश्यकता है। ऐसे समय में एनडीए के शीर्ष रणनीतिकार शरद पवार गुट से मिलने वाले किसी भी संभावित वैधानिक समर्थन का खुले दिल से स्वागत करने के लिए तैयार दिख रहे हैं।

    यह राजनीतिक उथल-पुथल सिर्फ शरद पवार खेमे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अजित पवार गुट के भीतर भी भारी अंतर्विरोध और मंथन का दौर जारी है। इस साल जनवरी के अंत में एक दुखद विमान हादसे में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद से राज्य की राजनीति का पूरा परिदृश्य बदल चुका है। उनके निधन के बाद से दोनों गुटों के दोबारा एक होने की सुगबुगाहट तो तेज हुई थी, लेकिन नेतृत्व को लेकर बात नहीं बन सकी। अब सुनेत्रा पवार के नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर ही कानूनी आपत्तियां उठाई जा रही हैं, जिसने संगठन के आंतरिक असंतोष को उजागर कर दिया है। इन सभी बदलते हालातों के बीच दिल्ली से लेकर मुंबई तक की राजनीतिक नजरें अब शरद पवार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।

  • महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव में BJP का दबदबा कायम, शिंदे सेना और NCP भी मजबूत स्थिति में

    महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव में BJP का दबदबा कायम, शिंदे सेना और NCP भी मजबूत स्थिति में

    नई दिल्‍ली । महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के बाद अब जिला परिषद चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। शुरुआती रुझानों के अनुसार, भाजपा 145 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना 85 सीटों पर और अजित पवार गुट की एनसीपी करीब 80 सीटों पर आगे चल रही है।

    बता दें कि राज्यभर में कुल 731 जिला परिषद और 1462 पंचायत समिति सीटों के लिए रविवार को मतदान कराया गया था, जिसमें लगभग 2 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। यह चुनाव पहले 5 फरवरी को प्रस्तावित थे, लेकिन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के कारण इन्हें स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद 8 फरवरी को मतदान संपन्न हुआ और अब इसके नतीजे सामने आ रहे हैं।

    भाजपा को सांगली, सतारा और पनवेल में बढ़त

    अब तक सामने आए रुझानों के मुताबिक, भाजपा ने सांगली, सतारा और पनवेल जैसे अहम क्षेत्रों में बढ़त बना ली है। दूसरी ओर, अजित पवार का पारंपरिक गढ़ माने जाने वाले बारामती इलाके में एनसीपी का प्रदर्शन मजबूत नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एनसीपी को यह बढ़त अजित पवार के हालिया निधन के बाद बनी सहानुभूति के चलते मिली हो सकती है। अजित पवार को पुणे और मराठवाड़ा क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं में शुमार थे और इन इलाकों में उनकी गहरी पकड़ रही है। ऐसे में उनके निधन के बाद मतदाताओं में भावनात्मक जुड़ाव का असर चुनावी नतीजों में झलकता दिखाई दे रहा है।

    विपक्ष को करारा झटका

    731 जिला परिषद सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरती दिख रही है। महायुति के सहयोगी दलों में एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना दूसरे स्थान पर है, जबकि अजित पवार की एनसीपी तीसरे नंबर पर बनी हुई है। विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार संघर्ष कर रहे विपक्ष को इन नतीजों से एक बार फिर करारा झटका लगा है। कांग्रेस महज 30 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना केवल 21 सीटों पर ही बढ़त दर्ज कर पाई है। वहीं पुणे और सोलापुर जैसे प्रमुख जिलों में एनसीपी ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए मुकाबला अपने पक्ष में कर लिया है।

    सोलापुर-पुणे में एनसीपी का दबदबा, सतारा में BJP ने बनाई बढ़त

    जिला परिषद चुनावों के रुझानों में सोलापुर और पुणे जिलों में एनसीपी का प्रदर्शन काफी मजबूत नजर आ रहा है। सोलापुर में पार्टी अब तक 24 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि कांग्रेस यहां अपना खाता खोलने में भी नाकाम रही है। पुणे जिले में भी एनसीपी को बढ़त मिलती दिख रही है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक सहानुभूति लहर से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं सतारा जिले में भाजपा ने स्पष्ट बढ़त हासिल की है। यहां भाजपा 32 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि एनसीपी 17 और शिवसेना 10 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।