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  • सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी पर जताई चिंता, 54 हजार करोड़ के गबन मामले को लेकर CJI हैरान

    सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी पर जताई चिंता, 54 हजार करोड़ के गबन मामले को लेकर CJI हैरान


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी के जरिए 54,000 करोड़ रुपये के गबन को गंभीर अपराध करार दिया और कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने में बैंकों की सक्रिय भूमिका जरूरी है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए कि आरबीआई, बैंक और दूरसंचार विभाग जैसे सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर मानक संचालन प्रक्रिया  तैयार की जाए।

    सुप्रीम कोर्ट की चिंता

    प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे असामान्य और बड़े पैमाने के लेनदेन पर ग्राहकों को तुरंत सतर्क करें। उदाहरण के लिए, यदि कोई आमतौर पर 10-20 हजार रुपये निकालने वाला पेंशनभोगी अचानक लाखों रुपये निकालता है, तो बैंक को तत्काल अलर्ट जारी करना चाहिए। पीठ ने जोर देकर कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी से गबन की गई राशि कई छोटे राज्यों के बजट से भी अधिक है। यह बैंक अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण हो सकता है।

    CBI को जांच में शामिल किया गया

    सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट मामलों की पहचान और जांच का निर्देश दिया। गुजरात और दिल्ली की सरकारों को कहा गया कि वे इस जांच के लिए आवश्यक स्वीकृति दें। अदालत ने डिजिटल अरेस्ट पीड़ितों को मुआवजा देने में उदार दृष्टिकोण अपनाने की भी सिफारिश की।

    SOP और AI का इस्तेमाल

    अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने बताया कि आरबीआई ने बैंकों के लिए SOP का मसौदा तैयार किया है, जिसमें साइबर धोखाधड़ी रोकने के उपाय जैसे अस्थायी डेबिट होल्ड शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों के लिए AI टूल्स के उपयोग की सिफारिश भी की ताकि संदिग्ध लेनदेन पर तत्काल अलर्ट जारी किया जा सके।

    बैंकों पर कड़ी टिप्पणी
    पीठ ने कहा कि बैंकों का ध्यान ज्यादातर व्यवसायिक मोड पर है, जिससे वे अपराधियों के लिए मंच बन सकते हैं। न्यायमूर्ति बागची ने बताया कि अप्रैल 2021 से नवंबर 2025 के बीच साइबर धोखाधड़ी के जरिए 52,000 करोड़ रुपये से अधिक का गबन हुआ। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “ये बैंक अब एक बोझ बनते जा रहे हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि वे धन के रखवाले हैं और भरोसे को नहीं तोड़ना चाहिए। कई बार बैंक धोखेबाजों को ऋण देते हैं और फिर एनसीएलटी/एनसीएलएटी जैसी संस्थाएं सामने आती हैं।”

    डिजिटल अरेस्ट क्या है
    ‘डिजिटल अरेस्ट’ एक साइबर अपराध का बढ़ता स्वरूप है, जिसमें ठग पीड़ित को सरकारी अधिकारी या अदालत के रूप में पेश कर ऑडियो/वीडियो कॉल के माध्यम से डराते-धमकाते हैं। इसका उद्देश्य पीड़ितों को पैसे देने के लिए मजबूर करना होता है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सीबीआई को देशव्यापी जांच करने और आरबीआई से साइबर अपराधियों के खातों को फ्रीज़ करने में AI का उपयोग करने का निर्देश दे रखा है।

  • वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत के पास कितना है पेट्रोल भंडार? मंत्री पुरी ने दी जानकारी

    वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत के पास कितना है पेट्रोल भंडार? मंत्री पुरी ने दी जानकारी


    नई दिल्ली। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में जानकारी दी कि वैश्विक उथल-पुथल की स्थिति में भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार लगभग 74 दिन तक देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। पुरी ने कहा कि तेजी से विकास कर रहे भारत के लिए सुरक्षित और व्यवहार्य तेल भंडार बेहद जरूरी है, ताकि वैश्विक संकट की स्थिति में देश कमजोर न पड़े। उन्होंने बताया कि भारत के पश्चिमी और पूर्वी तट दोनों पर तेलशोधक संयंत्र मौजूद हैं, जो आपूर्ति बनाए रखने में मदद करते हैं।

    भारत की वैश्विक स्थिति

    अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। देश के पास विश्व की चौथी सबसे बड़ी शोधन क्षमता है, जो वर्तमान में लगभग 26 करोड़ मीट्रिक टन प्रति वर्ष है और बढ़कर 32 करोड़ मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो जाएगी। भारत दुनिया में पेट्रोलियम उत्पादों का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक भी है।

    पुरी ने बताया कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक स्तर पर किसी भी उथल-पुथल की स्थिति में देश अपनी जरूरतों को पूरा कर सके। आईईए के मुताबिक, आदर्श रूप से 90 दिनों का भंडार होना चाहिए।

    वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजना

    पुरी ने कहा कि वर्तमान में भारत के कुल भंडार लगभग 74 दिन तक पर्याप्त हैं। उन्होंने कहा, “मंत्री के रूप में मैं 74 दिनों के भंडार के साथ सुरक्षित महसूस करता हूं, लेकिन भविष्य में इसे और बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।

    पुरी ने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड के तहत तीन जगहों पर 53.3 लाख मीट्रिक टन की कुल क्षमता वाले भंडार स्थापित किए गए हैं, जिनमें उपलब्ध कच्चे तेल की मात्रा बाजार की स्थितियों के अनुसार बदलती रहती है। पुरी ने जोर देकर कहा कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार न केवल ऊर्जा सुरक्षा बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता का भी अहम घटक है।