Tag: Natural Disaster

  • वेनेजुएला के बाद पाकिस्तान में भूकंप से हिली धरती, डेरा गाजी खान के पास 5.4 तीव्रता का झटका

    वेनेजुएला के बाद पाकिस्तान में भूकंप से हिली धरती, डेरा गाजी खान के पास 5.4 तीव्रता का झटका


    नई दिल्ली । दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंपों के बीच अब पाकिस्तान में भी धरती कांपने से लोगों में दहशत फैल गई। शनिवार सुबह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के डेरा गाजी खान क्षेत्र के पास 5.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। झटके महसूस होते ही लोग एहतियातन घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    भूकंप शनिवार सुबह पाकिस्तान के स्थानीय समयानुसार करीब 8 बजकर 53 मिनट पर आया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.4 दर्ज की गई जबकि इसका केंद्र डेरा गाजी खान के आसपास जमीन से लगभग 75 किलोमीटर की गहराई में था। विशेषज्ञों के अनुसार अपेक्षाकृत अधिक गहराई में केंद्र होने के कारण सतह पर नुकसान सीमित रहने की संभावना रहती है लेकिन इसके बावजूद झटके कई इलाकों में महसूस किए गए।

    भूकंप के बाद लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोग सुरक्षा के लिहाज से अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत दलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल किसी इमारत के गिरने या जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    पाकिस्तान भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है जहां समय-समय पर मध्यम और तेज तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। हाल के दिनों में भी देश के कई हिस्सों में धरती कांप चुकी है। शुक्रवार को बलूचिस्तान के विभिन्न इलाकों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। विशेषज्ञ लगातार लोगों को भूकंप के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करने और अफवाहों से बचने की सलाह देते रहे हैं।

    पाकिस्तान में आया यह भूकंप ऐसे समय दर्ज किया गया है जब वेनेजुएला हाल ही में आए शक्तिशाली भूकंपों से उबरने की कोशिश कर रहा है। वहां 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो बड़े भूकंपों ने भारी तबाही मचाई थी। कई इमारतें ढह गईं और हजारों लोग प्रभावित हुए। राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है तथा कई इलाकों में मलबे के नीचे फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

    वेनेजुएला में अस्पतालों और राहत शिविरों में बड़ी संख्या में घायलों का इलाज चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियां भी प्रभावित क्षेत्रों में सहायता पहुंचा रही हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई इलाकों तक पहुंचने में अब भी चुनौतियां बनी हुई हैं।

    दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लगातार आ रहे भूकंप यह याद दिलाते हैं कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था और लोगों में जागरूकता बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को हमेशा आपातकालीन तैयारियों और सुरक्षा उपायों के प्रति सतर्क रहना चाहिए।

  • ब्राज़ील में बारिश का कहर: बाढ़-भूस्खलन से 6 मौतें, हजारों लोग बेघर

    ब्राज़ील में बारिश का कहर: बाढ़-भूस्खलन से 6 मौतें, हजारों लोग बेघर


    नई दिल्ली। दक्षिण अमेरिका के ब्राज़ील के पूर्वोत्तर हिस्से में भारी बारिश ने तबाही मचा दी है। लगातार दो दिनों तक हुई मूसलाधार वर्षा के चलते बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई, जबकि हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि कई इलाकों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

    सबसे ज्यादा असर पेर्नंबुको राज्य में देखने को मिला, जहां बाढ़ और लैंडस्लाइड के कारण चार लोगों की जान चली गई। वहीं पड़ोसी पैराइबा में भी दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। तेज बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं और निचले इलाकों में पानी भर जाने से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

    अधिकारियों के मुताबिक करीब डेढ़ हजार परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी है। प्रशासन ने आपात अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है।

    मौसम विभाग ने भले ही आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता कम होने की संभावना जताई है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। प्रशासन का कहना है कि जमीन में नमी बढ़ने से भूस्खलन का जोखिम बना हुआ है, ऐसे में लोगों को सावधानी बरतनी होगी। यह आपदा एक बार फिर दिखाती है कि चरम मौसम की घटनाएं किस तरह बड़े पैमाने पर जन-धन का नुकसान कर रही हैं।

  • जापान में 7.4 तीव्रता का भूकंप, तटीय इलाकों में सुनामी का अलर्ट जारी

    जापान में 7.4 तीव्रता का भूकंप, तटीय इलाकों में सुनामी का अलर्ट जारी


    नई दिल्ली। जापान के उत्तरी हिस्से में सोमवार को जोरदार भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.4 मापी गई जिससे कई इलाकों में दहशत फैल गई। नेशनल ब्रॉडकास्टर NHK के मुताबिक भूकंप के तुरंत बाद तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी का अलर्ट जारी कर दिया गया।
    अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इवाते प्रीफेक्चर और होक्काइडो के कुछ हिस्सों में समुद्री लहरें करीब 3 मीटर तक ऊंची उठ सकती हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे तुरंत ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं।

    सरकार और आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन संभावित नुकसान का आकलन करने में जुटा हुआ है। जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि सुनामी की लहरें तट तक पहुंचना शुरू हो चुकी हैं और ये एक बार नहीं बल्कि कई बार आ सकती हैं। ऐसे में लोगों को बिना देरी किए प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की सलाह दी गई है।

  • लेक न्योस का खौफनाक सच 1986 की त्रासदी और दुनिया की सबसे खतरनाक झील

    लेक न्योस का खौफनाक सच 1986 की त्रासदी और दुनिया की सबसे खतरनाक झील

    नई दिल्ली:दुनिया में कई प्राकृतिक स्थल अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं लेकिन कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां सुंदरता के पीछे खतरनाक रहस्य छिपा होता है कैमरून की लेक न्योस ऐसी ही एक झील है जो देखने में शांत और आकर्षक लगती है लेकिन इसका इतिहास एक भयानक त्रासदी से जुड़ा है

    लेक न्योस कैमरून के ओकू ज्वालामुखी क्षेत्र में स्थित एक क्रेटर झील है जो एक निष्क्रिय ज्वालामुखी के गड्ढे में बनी है वैज्ञानिकों के अनुसार इस झील की गहराई में मौजूद मैग्मा लगातार कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ता रहता है यह गैस पानी में घुलकर झील के तल में जमा होती रहती है और जब दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है तो यह गैस अचानक विस्फोट की तरह बाहर निकल सकती है

    इस घटना को लीम्निक विस्फोट कहा जाता है 21 अगस्त 1986 को लेक न्योस से अचानक बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का घातक बादल निकला यह बादल लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आसपास की घाटी में फैल गया इस भयावह घटना में करीब 1800 लोगों की जान चली गई इसके अलावा हजारों मवेशी और कई पक्षी भी इस गैस के कारण मारे गए लोग ज्यादातर अपने घरों में सो रहे थे और उन्हें सांस लेने का मौका तक नहीं मिला

    गैस का यह बादल भारी होने के कारण जमीन के करीब ही फैल गया और इसमें ऑक्सीजन की कमी थी जिससे सांस लेना असंभव हो गया यह घटना इतिहास की सबसे दर्दनाक प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जाती है

    घटना के बाद वैज्ञानिकों ने लेक न्योस के रहस्य को समझने के लिए विस्तृत अध्ययन किया और पाया कि झील के नीचे जमा गैस ही इस त्रासदी का कारण थी इसके बाद इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए उपाय किए गए

    साल 2001 में झील में एक डीगैसिंग सिस्टम लगाया गया जिसमें पाइपों के जरिए धीरे धीरे गैस को बाहर निकाला जाने लगा ताकि दबाव खतरनाक स्तर तक न पहुंचे बाद में 2011 में और पाइप लगाए गए जिससे गैस के सुरक्षित निष्कासन को और बेहतर बनाया गया

    इस तकनीक की मदद से अब झील से कार्बन डाइऑक्साइड नियंत्रित तरीके से बाहर निकल रही है और बड़े विस्फोट का खतरा काफी हद तक कम हो गया है वैज्ञानिक अभी भी अन्य अफ्रीकी झीलों जैसे लेक मोनन पर नजर बनाए हुए हैं जहां ऐसी ही खतरनाक स्थिति बन सकती है जो यह याद दिलाती है कि प्रकृति जितनी सुंदर है उतनी ही अनिश्चित और खतरनाक भी हो सकती है