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  • इम्युनिटी बढ़ाने के 5 आसान तरीके, रोज अपनाएं और रहें स्वस्थ

    इम्युनिटी बढ़ाने के 5 आसान तरीके, रोज अपनाएं और रहें स्वस्थ


    नई दिल्ली मौसमी मौसम में गर्मी और शुरुआत के साथ बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता अलग-अलग होती है, इसलिए इसे बढ़ाने के लिए कुछ आसान से उपाय अपनाना चाहिए।

    भारत सरकार का आयुष मंत्रालय इम्युनिटी बढ़ाने के लिए पांच आसान और प्रभावी सलाह देता है, जिसके अनुसार प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए इन पांच इम्यूनिटी को मजबूत बनाया जा सकता है।

    पाठ्यपुस्तक के अनुसार इन पांच प्रयोगों में समानता से न सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है बल्कि स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। ये सुझाव कोई भी उम्र के लोग आसानी से अपना सकते हैं। विशेषज्ञ के अनुसार इन प्रयोगों को लंबे समय तक जारी रखने से बीमारियां कम होती हैं और शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान रहता है।

    गहरी नींद लेना : अच्छी और गहरी नींद रोग प्रतिरोधक क्षमता का आधार है। रात में कम से कम 7 से 8 घंटे की मीठी नींद लेनी चाहिए। नींद पूरी न होने से शरीर का रक्षा तंत्र ख़राब हो जाता है। सोने से पहले मोबाइल और टीवी से दूर रहें और रात का खाना देखें।

    अच्छा और प्रोफेशनल: बिजनेसमैन और प्लास्टिक आहार इम्युनिटी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। साधारण फल, हरे पत्तेदार मसाला, दालें, अनाज और मेवे रोजमर्रा। आयुर्वेद में हल्दी दूध, अदरक, तुलसी, मिलावट और गिलोय जैसे घरेलू नुस्खों को इम्युनिटी बूस्टर माना जाता है। जंक फूड और अधिकांश ताला-भुना भोजन से जिम्मेदारी लें।

    व्यायाम करें : नियमित व्यायाम या योगासन से शरीर मजबूत होता है और प्रतिरक्षा प्रणाली सक्रिय रहती है। प्रतिदिन 30 से 45 मिनट व्यायाम, योग, प्राणायाम या व्यायाम करें। व्यायाम से रक्त संचार अच्छा होता है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए फायदेमंद होता है।

    तनाव का प्रबंधन करें: तनाव लगातार प्रतिरक्षा को ख़राब करता है। ध्यान, प्राणायाम, संगीत सिद्धांत या हॉबी रखें तनाव कम करने के अच्छे तरीके। आयुर्वेद में तनाव मुक्त जीवन को स्वस्थ जीवन का आधार माना गया है।

    क्लिनिकल लाइव: शरीर में पानी की कमी से रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। समरस्लैम में एक दिन में पर्याप्त पानी सुनिश्चित करना जरूरी है। साथ ही पानी, छाछ, नारियल पानी या प्लांट टी जैसे प्राकृतिक पेय पदार्थ। साबुत पानी शरीर के टॉक्सिन को बाहर निकालने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।

  • आयुर्वेद के अनुसार नहाने का सही तरीका: दोष के हिसाब से चुनें पानी का तापमान

    आयुर्वेद के अनुसार नहाने का सही तरीका: दोष के हिसाब से चुनें पानी का तापमान


    नई दिल्ली स्नान सिर्फ शरीर की सफाई नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य से शरीर का अहम हिस्सा है। आयुर्वेद के अनुसार सही तरीकों से स्नान करने से शरीर के दोष वात, पित्त और कफ बने रहते हैं। हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है, संस्थान के पानी का तापमान भी एक जैसा होना चाहिए।

    गुनगुना पानी सबसे अच्छा है

    यदि आपके शरीर में रूखापन, ठंडे हाथ-पैर, जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं बनी हुई हैं, तो यह वात दोष का संकेत हो सकता है।

    गुनगुने पानी से स्नान करें
    संस्थान के बाद तेल से अभ्यंग (मालिश) जरूर करें
    इससे शरीर का रूखापन कम होगा और त्वचा को पोषण मिलेगा

    गुनगुना पानी वात को शांति देता है और शरीर को आराम का अनुभव कराता है।

    कफ प्रकृति: गर्म पानी से मिलेगा फायदा

    यदि शरीर में भारीपन, सुस्ती, बार-बार सर्दी या बलगम की समस्या रहती है, तो यह कफ दोष बढ़ने का संकेत है।

    गर्म पानी से स्नान करें
    सुबह का समय नहाना बहुत खतरनाक है
    ठंडा पानी से परहेज़, क्योंकि इससे कफ और बढ़ सकता है

    गर्म पानी शरीर को सक्रिय करता है और कफ को कम करने में मदद करता है।

    पित्त प्रकृति: सामान्य या ठंडा पानी सही

    यदि आपको गर्मी अधिक लगती है, पसीना अधिक आता है, मुंहासे या जलन की समस्या रहती है, तो यह पित्त दोष का संकेत है।

    सामान्य या साधारण ठंडे पानी से स्नान करें
    बहुत ज्यादा ठंडा पानी का उपयोग न करें
    इससे शरीर का सबसे अच्छा स्टॉक रहता है

    यह विधि शरीर की गर्मी को शांत करती है और पित्त को नियंत्रित करती है।

    स्नान से जुड़े कुछ जरूरी नियम

    बहुत ज्यादा ठंडा या बहुत ज्यादा गर्म पानी रोज न लें
    भोजन के तुरंत बाद स्नान न करें
    सुबह स्नान करना सबसे अच्छा माना जाता है
    मौसम और शरीर की स्थिति के अनुसार पानी की तापमान में गिरावट

    शरीर की प्रकृति की प्रशंसा, संभवतः पूरा लाभ

    आयुर्वेद के अनुसार अगर आप अपनी प्रकृति के अनुसार स्नान करते हैं, तो यह सिर्फ शरीर को साफ नहीं करता है, बल्कि कई शर्तों से भी सिखाता है।