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  • गर्मियों में मिलने वाला औषधीय फल, शरीर के लिए बेहद फायदेमंद

    गर्मियों में मिलने वाला औषधीय फल, शरीर के लिए बेहद फायदेमंद


    नई दिल्ली । प्रकृति ने इंसानों को स्वास्थ्य के लिए अनेक ऐसे फल और पौधे दिए हैं, जो बिना किसी दवा के शरीर को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इन्हीं में से एक है लसोड़ा, जिसे ‘इंडियन चेरी’ के नाम से भी जाना जाता है। यह एक जंगली फल है, जो पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।

    लसोड़ा का वैज्ञानिक नाम कॉर्डिया डाइकोटोमा है। यह एक तेजी से बढ़ने वाला पर्णपाती वृक्ष होता है, जो आमतौर पर 10 से 20 मीटर तक ऊंचा हो सकता है। इसके फल, पत्ते और बीज सभी औषधीय गुणों से युक्त होते हैं और आयुर्वेद में इनका लंबे समय से उपयोग किया जाता रहा है।

    इस फल में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक और आयरन जैसे कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन्हीं गुणों के कारण इसे प्राकृतिक रूप से शरीर को पोषण देने वाला फल माना जाता है। बिहार वन एवं पर्यावरण विभाग के अनुसार, यह न केवल स्वास्थ्य बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहद उपयोगी वृक्ष है, क्योंकि इसे आसानी से उगाया जा सकता है और यह प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

    लसोड़े का स्वाद पकने पर मीठा होता है, जबकि कच्चे फल का उपयोग गोंद जैसी सामग्री के रूप में किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका उपयोग सब्जी, अचार और चटनी बनाने में भी किया जाता है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लसोड़े में मौजूद उच्च फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। इसमें मौजूद आयरन शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने में सहायक है। वहीं कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    इसके अलावा इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट शरीर को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और इम्युनिटी को मजबूत बनाते हैं। यही कारण है कि इसे एक प्राकृतिक स्वास्थ्य रक्षक फल माना जाता है।

    गर्मियों के मौसम में आसानी से मिलने वाला यह फल न केवल ताजे रूप में खाया जा सकता है, बल्कि अचार और सब्जी के रूप में भी इसका उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे नियमित आहार में शामिल करने से शरीर को प्राकृतिक रूप से बेहतर पोषण मिलता है और कई बीमारियों से बचाव संभव है।

  • हार्ट हेल्थ और उम्र कम करने के लिए जरूरी एंटीऑक्सिडेंट रिच डाइट: कैसे लें रोजाना

    हार्ट हेल्थ और उम्र कम करने के लिए जरूरी एंटीऑक्सिडेंट रिच डाइट: कैसे लें रोजाना


    नई दिल्ली एक मशहूर कहावत है ‘ईट द रेनबो’। इसका मतलब है अपनी थाली में अलग-अलग रंगों वाले नेचुरल फूड शामिल करें। यह सिर्फ कहावत नहीं बल्कि साइंस-बेस्ड सलाह भी है। रेड स्ट्रॉबेरी, बैंगनी प्लम, हरी पत्तेदार सब्जियां और नीली ब्लूबेरी जैसे रंगीन फूड्स में पॉलीफेनॉल्स जैसे पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं। लंदन के किंग्स कॉलेज की हालिया स्टडी के मुताबिक लंबे समय तक पॉलीफेनॉल रिच डाइट लेने से हार्ट हेल्थ बेहतर रहती है।

    डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के अनुसार, एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। फ्री रेडिकल्स अनस्टेबल मॉलिक्यूल होते हैं जो सेल्स को डैमेज करते हैं और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस पैदा करते हैं। एंटीऑक्सिडेंट्स इन्हें न्यूट्रलाइज कर शरीर को सुरक्षा प्रदान करते हैं। विटामिन A, C, E, बीटा-कैरोटीन, लाइकोपीन, ल्यूटिन, सेलेनियम और पॉलीफेनॉल जैसे तत्व इन फूड्स में होते हैं।

    एंटीऑक्सिडेंट्स सेल्स को डैमेज होने से बचाते हैं, ब्लड वेसल्स को हेल्दी रखते हैं और इंफ्लेमेशन कम करते हैं। जब शरीर में स्तर बैलेंस्ड रहता है, तो इम्यून सिस्टम भी प्रभावी ढंग से काम करता है।

    हार्ट हेल्थ के लिए यह बेहद जरूरी है क्योंकि हार्ट डिजीज की शुरुआत अक्सर आर्टरीज में इंफ्लेमेशन और अंदरूनी डैमेज से होती है। LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल जब ऑक्सिडाइज्ड होता है तो आर्टरीज की वॉल्स पर जमाव बनता है और ब्लड फ्लो प्रभावित होता है। एंटीऑक्सिडेंट्स इस प्रोसेस को कंट्रोल करते हैं, ब्लड फ्लो बेहतर रखते हैं और दिल पर दबाव कम करते हैं।

    एंटीऑक्सिडेंट्स इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मदद करते हैं। विटामिन C, E और बीटा-कैरोटीन संक्रमण से लड़ने वाली इम्यून सेल्स को मजबूत बनाते हैं। इसके अलावा, एजिंग स्पीड कम करने में भी यह सहायक होते हैं। ऑक्सिडेटिव डैमेज की वजह से सेल्स, डीएनए, प्रोटीन और बॉडी फैट डैमेज होते हैं जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज होती है। एंटीऑक्सिडेंट रिच फूड यह डैमेज कम कर सेल्स की उम्र बढ़ाते हैं।

    सप्लीमेंट की जरूरत आमतौर पर तब होती है जब डाइट संतुलित न हो, या व्यक्ति प्रदूषण, स्मोकिंग, क्रॉनिक स्ट्रेस या कमजोर इम्यून सिस्टम से प्रभावित हो। रोजाना पर्याप्त एंटीऑक्सिडेंट्स के लिए 4-5 सर्विंग फल और सब्जियां लेना पर्याप्त माना जाता है। हाई-डोज सप्लीमेंट्स लेने से नेचुरल बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे मेटाबॉलिक प्रोसेस और इम्यून सिस्टम पर असर पड़ सकता है।

    एंटीऑक्सिडेंट फूड को डाइट में शामिल करने के लिए किसी महंगे प्लान की जरूरत नहीं। कोशिश करें कि थाली में अलग-अलग रंग के फल और सब्जियां हों और प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह नेचुरल ऑप्शन चुनें।एंटीऑक्सिडेंट्स रिच फूड कोई ट्रेंड नहीं बल्कि हेल्थ स्ट्रैटेजी है। यह हार्ट हेल्थ बेहतर रखता है, इम्यूनिटी मजबूत करता है और उम्र बढ़ने की रफ्तार को संतुलित करता है। रंगीन और नेचुरल डाइट लंबे समय तक सेहतमंद रहने में अहम भूमिका निभाती है।