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  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का किसानों से सीधा संवाद, प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक और सिंचाई योजनाओं पर दिया विकास का नया रोड

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का किसानों से सीधा संवाद, प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक और सिंचाई योजनाओं पर दिया विकास का नया रोड

    मध्य प्रदेश। झाबुआ में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशभर के किसानों से ऑनलाइन संवाद करते हुए कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और आधुनिक बनाने की दिशा में सरकार की विभिन्न योजनाओं और प्राथमिकताओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, आधुनिक तकनीकों के विस्तार और कृषि आधारित रोजगार के नए अवसर विकसित करने के लिए लगातार काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में “कृषक कल्याण वर्ष” के अंतर्गत बलराम कृषि महोत्सव-2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसकी शुरुआत इंदौर से हुई थी और आगामी दिनों में आलीराजपुर, बड़वानी, खरगौन, बुरहानपुर तथा खंडवा सहित कई जिलों में भी महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने इसे किसानों को नई तकनीकों, सरकारी योजनाओं और विशेषज्ञों की सलाह से जोड़ने का महत्वपूर्ण अभियान बताया।

    डॉ. यादव ने मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताए जाने का उल्लेख करते हुए प्रशासन को किसानों की हरसंभव सहायता के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को तीन लाख रुपये तक का कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा मात्र पांच रुपये में बिजली कनेक्शन देने और डेयरी विकास योजनाओं में 40 लाख रुपये तक की परियोजनाओं पर 33 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था भी की गई है।

    मुख्यमंत्री ने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक सलाह, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण के उपाय अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के प्राकृतिक खेती अभियान के तहत झाबुआ जिले में 50 कृषि सखियों का चयन किया गया है। वर्तमान में जिले में तीन हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है और किसानों की फसलों का प्रमाणीकरण भी कराया जा रहा है, जिससे उन्हें बाजार में बेहतर अवसर मिल सकें।

    उन्होंने कहा कि “एक जिला-एक उत्पाद” योजना के तहत झाबुआ के कड़कनाथ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास जारी हैं। वर्ष 2025 के दौरान कड़कनाथ पालन से एक हजार से अधिक नए हितग्राहियों को जोड़ा गया। साथ ही पशुपालन, बकरी पालन, डेयरी और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर किसानों की नियमित आय सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि जिले में मत्स्य पालन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। 760 से अधिक तालाबों में लगभग तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन किया जा रहा है। वहीं खरीफ-2026 सीजन में कपास की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि धार जिले के बदनावर स्थित पीएम मित्रा पार्क के विकसित होने से झाबुआ के कपास उत्पादकों को खेत से उद्योग तक बेहतर बाजार और मूल्य संवर्धन का लाभ मिलेगा।

    झाबुआ के टमाटर उत्पादन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले में हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में टमाटर की खेती हो रही है। यहां स्थापित प्रसंस्करण इकाई में टमाटर सॉस, केचअप और डिहाइड्रेटेड उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी आपूर्ति देश के कई राज्यों में की जा रही है। इससे किसानों को बेहतर बाजार और अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पूरी होने पर लगभग 32 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और करीब 50 हजार किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे जल संरक्षण के साथ कृषि उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि बलराम कृषि महोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि तकनीक, प्रसंस्करण, विपणन और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने का व्यापक अभियान है। प्रदेश के सभी जिलों में 13 नवंबर तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती, डिजिटल कृषि सेवाओं, स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन तकनीक, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही उत्कृष्ट किसानों का सम्मान, हितग्राहियों को लाभ वितरण और विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी के माध्यम से खेती को अधिक समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाएगा।

  • कृषक कल्याण वर्ष-2026: वैज्ञानिक तकनीक और कृषि रथ से किसानों तक पहुँची आधुनिक खेती की जानकारी

    कृषक कल्याण वर्ष-2026: वैज्ञानिक तकनीक और कृषि रथ से किसानों तक पहुँची आधुनिक खेती की जानकारी


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। इस महाअभियान का उद्देश्य कृषि को आधुनिक तकनीक, परम्परागत ज्ञान और प्राकृतिक संतुलन के साथ नई ऊँचाइयों तक ले जाना तथा अन्नदाता के सम्मान और समग्र उत्थान को सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में बुरहानपुर जिले में जिला स्तरीय कार्यक्रम एवं संवाद-सत्र का आयोजन किया गया, जहाँ मुख्यमंत्री की इस पहल के अंतर्गत “कृषि रथ” को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम में बुरहानपुर विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस, जनप्रतिनिधि एवं प्रगतिशील कृषकगण उपस्थित रहे।

    कृषि रथ के माध्यम से जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में पहुँचकर किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इसमें जैविक एवं प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग प्रबंधन, फसल विविधीकरण, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उपाय, विभागीय योजनाएँ, ई-टोकन आधारित उर्वरक वितरण व्यवस्था तथा पराली प्रबंधन से संबंधित जानकारियाँ शामिल हैं। विशेष रूप से किसानों को उनकी मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों के अनुसार सही फसल और खेती के उपयुक्त कॉम्बिनेशन की जानकारी दी जा रही है, जिससे उत्पादन लागत कम हो और लाभ अधिक मिले।

    बुरहानपुर जिले में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, पशुपालन विभाग और सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम द्वारा ग्राम पंचायत पातोंडा, चिंचाला और एमागिर्द में कृषक चौपालों का आयोजन किया गया। इन चौपालों में उर्वरक वितरण की ई-टोकन प्रणाली, प्राकृतिक खेती के प्रमुख घटक जैसे जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और दसपर्णी अर्क बनाने की विधियों की विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए मिट्टी नमूना लेने की सही विधि और संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह दी गई।

    कृषकों को दलहन एवं तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए जायद फसल के रूप में उड़द और मूंगफली की खेती के बारे में जानकारी दी गई और बुवाई के लिए प्रेरित किया गया। जिले के विभिन्न गांवों में आयोजित हो रही कृषक चौपालों में पराली प्रबंधन, सरकारी योजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी किसानों को जागरूक किया जा रहा है।

    कृषक कल्याण वर्ष-2026 के अंतर्गत ग्राम बाकड़ी में भी कृषि रथ पहुँचा, जहाँ चौपाल लगाकर किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की बारीक जानकारी दी गई। जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कीट एवं रोग प्रबंधन, फसल विविधीकरण और उर्वरकों के संतुलित उपयोग जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया। कृषि रथ गांव-गांव पहुँचकर किसानों को जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य कर रहा है।

    इसके साथ ही राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत बुरहानपुर जिले में प्रत्येक गुरुवार को महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि उपज मंडी, शनवारा में “प्राकृतिक हाट बाजार” का आयोजन किया जा रहा है। कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने हाट बाजार का अवलोकन करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है और इससे सुरक्षित व पौष्टिक उत्पाद उपलब्ध होते हैं। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।