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  • इजरायल के सामने कितनी देर तक टिक सकता है ईरान, देखें दोनों की मिलिट्री पावर

    इजरायल के सामने कितनी देर तक टिक सकता है ईरान, देखें दोनों की मिलिट्री पावर


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव का माहौल बन गया है. आज यानी शनिवार को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान की राजधानी तेहरान पर हमले किए. इसके बाद पूरे इलाके में हालात तेजी से बदल गए. इजरायल ने इसे प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक बताया और कहा कि संभावित हमले के खतरे को रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई है. जबकि ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की आशंका जताई गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार तेहरान इस्फहान कोम और खोर्रमाबाद समेत कई शहरों में इजरायल की ओर से मिसाइल और एयर स्ट्राइक की गई है. बताया जा रहा है कि इजरायल की और से ईरान पर हुए अचानक हमले में अमेरिका भी शामिल था.

    रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के घर को भी निशाना बनाकर तबाह कर दिया गया. हालांकि अयातुल्ला अली खामेनेई तेहरान में नहीं है उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है. इसी हमले के बीच एक बार फिर यही सवाल सामने आ गया है कि अगर ईरान और इजरायल के बीच यह टकराव लंबा चलता है तो सैन्य ताकत के मामले में कौन भारी पड़ सकता है.

    ईरान इजरायल में सैनिकों की संख्या में कौन आगे?

    अगर ईरान और इजरायल की बात करें तो सक्रिय सैनिकों की संख्या में ईरान आगे बताया जाता है. ईरान के पास करीब 6 लाख तक एक्टिव सैन्य बल और करीब 3.5 लाख रिजर्व सैनिक हैं. जबकि इजरायल के पास करीब 1.7 लाख सक्रिय सैनिक है. हालांकि इजरायल के पास 4.5 लाख प्रशिक्षित रिजर्व फोर्स है जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है. वहीं संख्या के मामले में भले ही ईरान आगे दिखाई देता है लेकिन ट्रेनिंग तकनीक और ऑपरेशन के एक्सपीरियंस में इजरायल को बड़ा माना जाता है.

    एयर पावर पर पकड़ किसकी मजबूत

    वायु सेना की बात करें तो इजरायल के पास 600 से ज्यादा आधुनिक लड़ाकू विमान है जिनमें एफ 35 जैसे स्टेल्थ जेट शामिल है. यह जेट रडार से बच निकलने की क्षमता रखते हैं और एडवांस हथियारों से लैस है. दूसरी और ईरान के पास करीब 500 से कुछ ज्यादा विमान हैं लेकिन ईरान के जेट कई पुराने मॉडल के है. ईरान पर बैन के कारण उसे अपग्रेड और मेंटेनेंस में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में हवा में मुकाबले की स्थिति में इजरायल ईरान के मुकाबले बहुत ज्यादा मजबूत है. वहीं ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल मानी जाती है. उसके पास हजारों की संख्या में अलग अलग रेंज की मिसाइल है जो क्षेत्रीय स्तर पर इजरायल के लिए बड़ा खतरा बन सकती है. वहीं इजरायल के पास संख्या कम जरूर है लेकिन उसकी मिसाइल तकनीक काफी उन्नत है और कुछ मिसाइलें लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम है.

    ईरान और इजरायल के रक्षा बजट में बड़ा अंतर

    अगर दोनों देशों के रक्षा बजट की बात करें तो इजरायल हर साल अपने सैन्य बजट पर ईरान से कई गुना ज्यादा खर्च करता है. अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आंकड़ों के अनुसार इजरायल ने 2024 में करीब 46.5 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किया था. उसे अमेरिका से सैन्य सहायता भी मिलती है. दूसरी ओर ईरान का बजट सीमित है और वह कम लागत वाली रणनीतियों जैसे मिसाइल और ड्रोन तकनीक पर ज्यादा ध्यान देता है. वहीं इजरायल का मल्टी लेयर एयर डिफेंस सिस्टम उसकी सबसे बड़ी ताकतों में गिना जाता है. आयरन डोम जैसे सिस्टम कम दूरी की मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने के लिए जाने जाते हैं. इसके अलावा मध्यम और लंबी दूरी की इंटरसेप्टर क्षमता भी उसके पास है. ईरान के पास भी घरेलू और रूसी तकनीक पर आधारित एयर डिफेंस सिस्टम हैं लेकिन तकनीकी रूप से वे इजरायल के मुकाबले कमजोर माने जाते हैं.

  • स्वदेशी फ्रिगेट और एएसडब्ल्यू शिप: भारतीय नौसेना के लिए साल 2026 का खास स्टार्ट

    स्वदेशी फ्रिगेट और एएसडब्ल्यू शिप: भारतीय नौसेना के लिए साल 2026 का खास स्टार्ट


    नई दिल्ली ।साल 2026 की शुरुआत भारतीय नौसेना के लिए बेहद खास होने जा रही है। नए साल के पहले तीन महीनों में नेवी में दो नई स्वदेशी वॉरशिप शामिल होने वाली हैं। यह कदम भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को बढ़ाने और 2047 तक पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

    इस क्रम में 27 फरवरी को चेन्नई पोर्ट पर स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘आईएनएस अंजदीप’ नेवी का हिस्सा बनेगा। यह शिप एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है और 25 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। अंजदीप की एक बार में लगभग 3,300 किलोमीटर तक की क्षमता इसे एंटी-सबमरीन ऑपरेशन के लिए बेहद प्रभावी बनाती है।

    इसी के साथ 14 मार्च को विशाखापत्तनम में प्रोजेक्ट 17ए के नीलगिरी क्लास का चौथा गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरि नौसेना में शामिल होगा। यह फ्रिगेट ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है जो एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप वारफेयर में सक्षम है। इसके अलावा एयर डिफेंस के लिए लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल बराक-8 और एयर डिफेंस गन लगी हैं। एंटी-सबमरीन वारफेयर के लिए इसमें स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र और एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर मौजूद हैं।

    आईएनएस तारागिरि लंबी दूरी से आने वाले हमलों को डिटेक्ट, ट्रैक और इंटरसेप्ट करने के लिए सोनार, मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। इसमें दो हेलिकॉप्टरों के लिए हैंगर की सुविधा भी मौजूद है। 6,700 टन वजनी इस फ्रिगेट की रफ्तार 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे है।

    प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सात नीलगिरी क्लास फ्रिगेट्स में से अब तक चार मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा बनाए जा चुके हैं। पहले आईएनएस नीलगिरी, हिमगिरि और उदयगिरि को नौसेना में शामिल किया जा चुका है। इन फ्रिगेट्स में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से प्राप्त किए गए हैं। इनकी नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री ताकत और अत्याधुनिक क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा।

    नीलगिरी क्लास के सभी वॉरशिप का डिजाइन नेवल डिजाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है और इनके नाम भारत की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं पर रखे गए हैं जैसे शिवालिक, सह्याद्रि, सतपुड़ा, नीलगिरी, हिमगिरि, तारागिरि, उदयगिरि, दूनागिरि, महेंद्रगिरि और विंध्यगिरि।

    चीन और पाकिस्तान की सबमरीन क्षमता से निपटने के लिए एंटी-सबमरीन वारफेयर (एएसडब्ल्यू) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। इससे भारतीय नौसेना को तेज रफ्तार, मजबूती और रणनीतिक बढ़त मिलेगी। साल 2026 के पहले तीन महीनों में इन दो वॉरशिप के शामिल होने से नौसेना की तैयारी और शक्ति में और मजबूती आएगी।