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इंदौर में विशाल चुनरी यात्रा शुरू, बड़ा गणपति से बिजासन माता मंदिर तक निकलेगा जुलूस, कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन
इंदौर । नवरात्रि के पावन अवसर पर इंदौर में मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी विशाल चुनरी यात्रा की शुरुआत हो गई है। रविवार को बड़ा गणपति चौराहे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यात्रा का शुभारंभ किया। इस दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। लाखों सितारों से सुसज्जित ढाई किलोमीटर से अधिक लंबी चुनरी बिजासन माता को अर्पित की जाएगी।आयोजन को लेकर शहर में व्यापक तैयारियां की गई हैं और यात्रा मार्ग पर व्यवस्था संभालने के लिए तीन हजार चुनरी रक्षकों को तैनात किया गया है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने निर्धारित कार्यक्रमों के तहत पहले लालबाग पहुंचे। इसके बाद वे एमवाय अस्पताल में मशीन के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां से मुख्यमंत्री बड़ा गणपति चौराहे पहुंचे और चुनरी यात्रा की शुरुआत की। वे कार्यक्रम स्थल पर करीब 10 से 12 मिनट तक रुके और संक्षिप्त संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने लोगों को नवरात्रि दशहरा और दीपावली की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद वे सुसज्जित वाहन में पहुंचे और वहां से रवाना हो गए।यात्रा बड़ा गणपति मंदिर से शुरू होकर वायरलेस चौराहा और कालानी नगर होते हुए एरोड्रम थाना क्षेत्र से गुजरेगी। इसके बाद श्रद्धालुओं का जत्था पंचशील नगर और बाबू मुराई कॉलोनी से होते हुए एयरपोर्ट प्रवेश द्वार के रास्ते बिजासन माता मंदिर पहुंचेगा। यात्रा का प्रमुख आकर्षण लाखों सितारों से सजी विशाल चुनरी है जिसे माता को अर्पित किया जाएगा। नवरात्रि के दौरान आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी की उम्मीद है।आयोजन को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए तीन हजार चुनरी रक्षकों की तैनाती की गई है। ये रक्षक प्रमुख चौराहों पर यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने में सहयोग करेंगे। यात्रा संयोजकों ने नागरिकों से भी व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है। यात्रा के दौरान कई प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्ट रहेगा ताकि भीड़ के बीच वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा सके।यात्रा के कारण गंगवाल और राजमोहल्ला चौराहे पर सिटी बसों तथा बड़े वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा। नगर निगम चौराहे पर भी बड़े वाहनों के लिए डायवर्जन रहेगा। महेश नगर में कार और दोपहिया वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। गोराकुंड और अंतिम चौराहे से बड़ा गणपति की ओर आने वाले वाहनों को दूसरे रास्तों से भेजा जाएगा। टोरी कॉर्नर पर मल्हारगंज की ओर से आने वाले वाहनों को गोराकुंड की तरफ मोड़ा जाएगा जबकि गोपाल बिल्डिंग के पास वाहनों को कैलाश मार्ग की ओर डायवर्ट किया जाएगा।एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भी यात्रा मार्ग पर संभावित भीड़ और यातायात बदलाव को ध्यान में रखने की सलाह दी गई है। एरोड्रम जाने के लिए वाहन चालक मरीमाता से किला मैदान और टाटा स्टील होते हुए 60 फीट एसएफए टर्निंग तथा पंचशील मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा छोटा बांगड़दा से सुपर कॉरिडोर होते हुए एयरपोर्ट पहुंचने का विकल्प भी रहेगा। भंवरकुआं अन्नपूर्णा और महू नाका की ओर से आने वाले यात्री चंदन नगर सिरपुर जवाहर टेकरी और चोइथराम अस्पताल चौराहे से नावदा तथा ग्राम रिजलाय होते हुए हिंकारगिरी के रास्ते एयरपोर्ट जा सकेंगे।यात्रा संयोजक सुदर्शन गुप्ता ने नागरिकों से सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक बड़ा गणपति मंदिर से बिजासन माता मंदिर तक के मार्ग पर अनावश्यक आवागमन से बचने की अपील की है। जरूरी काम होने पर वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को उड़ान के समय से पर्याप्त पहले घर से निकलने को कहा गया है ताकि रास्ते में संभावित जाम के कारण परेशानी न हो। -

इंदौर में चुनरी यात्रा को लेकर ट्रैफिक अलर्ट, कई प्रमुख रास्तों पर डायवर्जन, एयरपोर्ट जाने वालों के लिए वैकल्पिक मार्ग जारी
इंदौर । इंदौर में नवरात्रि के अवसर पर आज विशाल चुनरी यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे। बड़ा गणपति मंदिर से शुरू होकर बिजासन माता मंदिर तक पहुंचने वाली इस यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। लाखों सितारों से सुसज्जित ढाई किलोमीटर से अधिक लंबी चुनरी माता को अर्पित की जाएगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ और यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए तीन हजार चुनरी रक्षकों की तैनाती की गई है।यात्रा सुबह 10 बजे बड़ा गणपति मंदिर से शुरू होगी। इसके बाद श्रद्धालुओं का जत्था वायरलेस चौराहा और कालानी नगर होते हुए एरोड्रम थाना क्षेत्र से गुजरेगा। यात्रा पंचशील नगर और बाबू मुराई कॉलोनी से होते हुए एयरपोर्ट प्रवेश द्वार के रास्ते बिजासन माता मंदिर पहुंचेगी। यात्रा संयोजक और भाजपा के पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता के मुताबिक आयोजन को व्यवस्थित बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रमुख चौराहों पर तैनात चुनरी रक्षक यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करेंगे। आपसी तालमेल बनाए रखने के लिए उनके पास वॉकी-टॉकी भी रहेंगे।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में बदलाव हुआ है। वे एयरपोर्ट पहुंचने से पहले लालबाग गए और इसके बाद एमवाय अस्पताल में मशीन के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां से उनके बड़ा गणपति चौराहे पहुंचकर चुनरी यात्रा में शामिल होने का कार्यक्रम है। आयोजन में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधियों के भी मौजूद रहने की जानकारी दी गई है।यात्रा के चलते शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहने की संभावना है। गंगवाल और राजमोहल्ला चौराहे पर सिटी बसों और बड़े वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा जाएगा। नगर निगम चौराहे पर भी बड़े वाहनों और सिटी बसों के लिए डायवर्जन रहेगा। महेश नगर में कार और दोपहिया वाहनों की आवाजाही को बदला जाएगा। गोराकुंड और अंतिम चौराहे पर बड़ा गणपति की ओर आने वाले वाहनों को दूसरे मार्गों से निकाला जाएगा। टोरी कॉर्नर पर मल्हारगंज की ओर से आने वाले वाहन गोराकुंड की तरफ भेजे जाएंगे जबकि गोपाल बिल्डिंग के पास वाहनों को कैलाश मार्ग की ओर डायवर्ट किया जाएगा।कर्णावतपुरा तिराहे और बड़वाली चौकी से बड़ा गणपति की ओर जाने वाले वाहन भी वैकल्पिक मार्गों से गुजरेंगे। वायरलेस चौराहे और कालानी नगर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए भी अलग-अलग स्थानों पर डायवर्जन की व्यवस्था की गई है। दिलीप नगर टी से बिजासन माता मंदिर की ओर जाने वाले वाहनों को दूसरे रास्तों से भेजा जाएगा। सुपर कॉरिडोर चौराहे से बिजासन टी की ओर जाने वाले वाहन चालकों को भी यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करना होगा।एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। एरोड्रम की ओर जाने के लिए वाहन चालक मरीमाता से किला मैदान और टाटा स्टील होते हुए 60 फीट एसएफए टर्निंग तथा पंचशील मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। दूसरा विकल्प छोटा बांगड़दा से सुपर कॉरिडोर होते हुए एयरपोर्ट पहुंचने का है। भंवरकुआं और अन्नपूर्णा सहित महू नाका की ओर से आने वाले वाहन चंदन नगर और सिरपुर होते हुए जवाहर टेकरी तथा चोइथराम अस्पताल चौराहे से नावदा और ग्राम रिजलाय के रास्ते हिंकारगिरी होकर एयरपोर्ट जा सकेंगे।आयोजकों ने नागरिकों से सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक यात्रा मार्ग पर अनावश्यक आवागमन से बचने की अपील की है। जरूरी काम से निकलने वाले लोगों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को उड़ान के समय को ध्यान में रखकर घर से पर्याप्त समय पहले निकलना चाहिए ताकि सड़क पर संभावित जाम के कारण परेशानी न हो। -

500 साल पुरानी आस्था का चमत्कारी धाम, जहां ज्वाला से प्रकट हुईं मां अष्टभुजा, नवरात्रि में उमड़ता है लाखों भक्तों का सैलाब
मऊगंज । मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के नईगढ़ी में स्थित मां अष्टभुजा का धाम करीब 500 वर्षों से श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। नवरात्रि के पावन अवसर पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मंदिर की घंटियों की ध्वनि और माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठता है। लोक मान्यताओं के अनुसार इस धाम का इतिहास एक ऐसी घटना से जुड़ा है जिसे श्रद्धालु मां आदिशक्ति के प्राकट्य की कथा के रूप में याद करते हैं। कभी घने जंगलों और सुनसान पगडंडियों के लिए पहचाना जाने वाला यह इलाका आज मां अष्टभुजा की आराधना के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध है। मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।स्थानीय लोकश्रुति के अनुसार लगभग पांच सौ वर्ष पहले इस क्षेत्र के घने जंगल में अचानक आग जैसी प्रचंड ज्वाला दिखाई दी थी। उसी समय लालगंज का एक यादव वहां से गुजर रहा था। जंगल को जलने से बचाने की भावना से उसने अपने लोटे का पानी उस ज्वाला पर डाल दिया। मान्यता है कि पानी अर्पित करते ही ज्वाला शांत हो गई और वहां पिंडी स्वरूप प्रकट हुआ। श्रद्धालु इसी घटना को मां अष्टभुजा के प्राकट्य से जोड़ते हैं। हालांकि यह कथा स्थानीय जनविश्वास और परंपरा का हिस्सा है जो पीढ़ियों से सुनाई जाती रही है। इसी मान्यता ने इस स्थान को धार्मिक पहचान दिलाई और समय के साथ यहां मंदिर विकसित हुआ।नईगढ़ी के नाम से जुड़ी एक अन्य रोचक लोककथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि उस समय सेंगर वंश के राजा प्रताप सिंह इस क्षेत्र में गढ़ी बनवा रहे थे। मान्यता के अनुसार माता ने राजा को स्वप्न में दर्शन देकर इस भूमि को अपनी आराधना के लिए छोड़ने का संदेश दिया। कथा के मुताबिक माता ने राजा को एक श्वेत खरगोश और श्यामवर्णी श्वान का संकेत दिया था। सुबह राजा ने वैसा ही दृश्य देखा और उस स्थान पर नई गढ़ी बसाने का निर्णय लिया। लोकविश्वास में इसी घटना को नईगढ़ी नगर के नामकरण से जोड़ा जाता है। मंदिर के पास बहने वाली देवलहा नदी और देवलहा जलप्रपात भी इस क्षेत्र की पहचान का हिस्सा हैं।वर्तमान मंदिर के निर्माण का श्रेय करीब 135 वर्ष पहले दुवगवां निवासी साधुराम कोड़रिया को दिया जाता है। बाद के वर्षों में मोतीलाल पांडेय सुमेदा और पटवारी राजेंद्र धर द्विवेदी हटवा सहित कई श्रद्धालुओं ने मंदिर के विकास और जीर्णोद्धार में योगदान दिया। समय के साथ यह धाम केवल स्थानीय लोगों का पूजा स्थल नहीं रहा बल्कि आसपास के जिलों और दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बन गया। सोमवार और गुरुवार को यहां विशेष रूप से भक्त पहुंचते हैं। नवरात्रि और आषाढ़ तथा श्रावण में आयोजित हरियाली पुजाई के दौरान मंदिर परिसर में विशेष रौनक रहती है।मां अष्टभुजा के दरबार से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना माता के आशीर्वाद से पूरी होती है। यहां मुंडन संस्कार कर्ण छेदन सत्यनारायण कथा भजन कीर्तन और भंडारे जैसे धार्मिक आयोजन होते हैं। कुछ भक्त अपनी मनौती पूरी होने पर पारंपरिक रूप से विशेष अर्पण भी करते हैं। इन मान्यताओं को श्रद्धालु अपनी आस्था का हिस्सा मानते हैं। मंदिर के आसपास लगने वाली दुकानों से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है और मेले के समय क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं।श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से धर्मशाला पेयजल और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मेले के दौरान भीड़ को व्यवस्थित करने और दर्शन को सुगम बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं। करीब पांच शताब्दियों से चली आ रही लोकआस्था और लगभग 135 वर्ष पुराने मंदिर की परंपरा ने नईगढ़ी धाम को क्षेत्र की विशिष्ट धार्मिक पहचान दी है। नवरात्रि में यहां पहुंचने वाले भक्त माता के दर्शन कर सुख समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं। -

मां दुर्गा की आराधना का विशेष फल, विवाह की बाधाओं से मनोकामनाओं तक के लिए जानें 7 शक्तिशाली मंत्र
नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र का पर्व मां दुर्गा की आराधना और शक्ति की उपासना के लिए बेहद खास माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त माता के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और सुख समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र में मां दुर्गा के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। मान्यता है कि माता की भक्ति से जीवन की परेशानियों का सामना करने का साहस मिलता है। मां दुर्गा के कुछ विशेष मंत्र विवाह में आने वाली बाधाओं से लेकर धन ऐश्वर्य और शिक्षा में एकाग्रता तक के लिए जपे जाते हैं। आइए जानते हैं इन सात मंत्रों का महत्व और जाप करने की विधि।
विवाह में आने वाली बाधाओं के लिए मंत्र
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाह में देरी या बाधाओं से परेशान लोग मां दुर्गा की आराधना करते हुए इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। मंत्र है ॐ क्रीं क्लीं विवाह बाधा निवारणाय फट्। मान्यता है कि नवरात्र के दौरान माता के सामने बैठकर श्रद्धापूर्वक 108 बार मंत्र का जाप करने से मन में विश्वास और सकारात्मकता बढ़ती है। जाप के दौरान अच्छे जीवनसाथी और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है।
स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए मंत्र
मां दुर्गा को शक्ति और रक्षा का प्रतीक माना जाता है। स्वास्थ्य की कामना के लिए भक्त इस मंत्र का जाप करते हैं। मंत्र है ॐ ह्रीं नमो भगवती रोग नाशाय ह्रीं ॐ फट्। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र के जाप से भक्त को मानसिक संबल और शांति मिल सकती है। हालांकि किसी भी बीमारी में मंत्र जाप को चिकित्सा का विकल्प नहीं मानना चाहिए और आवश्यक उपचार जारी रखना चाहिए।
धन और ऐश्वर्य की कामना के लिए मंत्र
धन और समृद्धि की कामना करने वाले भक्त मां दुर्गा के साथ मां लक्ष्मी की भी आराधना करते हैं। मंत्र है ॐ ह्रीं कमले मोक्षं साधय ऐश्वर्यं देहि श्रीं ॐ नमः। मान्यता है कि श्रद्धा से इस मंत्र का जाप करने पर व्यक्ति को सकारात्मक सोच और अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पण की प्रेरणा मिलती है। आर्थिक समृद्धि के लिए मेहनत और उचित वित्तीय योजना भी जरूरी है।
विद्यार्थियों के लिए विशेष मंत्र
पढ़ाई में एकाग्रता और ज्ञान की प्राप्ति के लिए मां सरस्वती की उपासना भी की जाती है। मंत्र है ॐ ऐं वाग्देव्यै वरदायै ॐ नमः। विद्यार्थी नवरात्र में नियमित रूप से इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार इससे मन को शांत रखने और पढ़ाई के प्रति सकारात्मक भाव बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। बेहतर परिणाम के लिए नियमित अभ्यास और समय का सही उपयोग भी महत्वपूर्ण है।
मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मंत्र
मां दुर्गा के भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति और जीवन में शुभता की कामना के लिए इस मंत्र का जाप करते हैं। मंत्र है ॐ क्लीं हुं मातंग्यै मनोवांछितं सिद्धयै फट्। मान्यता के अनुसार नवरात्र के दिनों में संकल्प लेकर 11 बार मंत्र का जाप किया जा सकता है। जाप के दौरान मन को शांत रखते हुए अपने उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
शत्रुओं और बाधाओं से रक्षा के लिए मंत्र
जीवन में विरोध और कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए भक्त मां दुर्गा से साहस और सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं। मंत्र है ॐ ह्लीं शत्रू नाशाय फट्। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मंत्र का 11 या 21 बार जाप करने से व्यक्ति को मानसिक शक्ति मिल सकती है। इसका भाव किसी के प्रति दुर्भावना रखने के बजाय नकारात्मक परिस्थितियों से निपटने का साहस प्राप्त करना होना चाहिए।
मां दुर्गा के ध्यान का मंत्र
माता की आराधना में ध्यान मंत्र का भी विशेष महत्व है। मंत्र है ॐ जटा जूट समायुक्तमर्धेन्दु कृत लक्षणाम्। लोचनत्रय संयुक्तां पद्मेन्दुसद्यशाननाम्॥ इस मंत्र के माध्यम से मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप का ध्यान किया जाता है। भक्त नवरात्र के दौरान 11 बार इसका जाप कर सकते हैं। विद्यार्थियों सहित सभी भक्त पूजा के समय मन को एकाग्र करने और आध्यात्मिक शांति के लिए ध्यान कर सकते हैं।
नवरात्र में मंत्र जाप के लिए सुबह स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर बैठना और मां दुर्गा के सामने दीपक जलाना शुभ माना जाता है। अपनी श्रद्धा और सुविधानुसार मंत्र का जाप करें। धार्मिक परंपराओं में मंत्रों के उच्चारण और विधि का महत्व बताया गया है इसलिए कठिन मंत्रों का सही उच्चारण जानने के लिए किसी जानकार से मार्गदर्शन लिया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण है सच्चे मन से माता का स्मरण करना और अपने व्यवहार में सकारात्मकता तथा सद्भाव बनाए रखना। -

शिवपुरी में नवरात्रि पर ट्रैफिक प्लान लागू, रात 10 बजे तक फिजिकल रोड पर कार और भारी वाहनों की एंट्री बंद
शिवपुरी। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन माता की प्रतिमाएं लेने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए शिवपुरी में यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। शहर के फिजिकल क्षेत्र में रविवार को सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक कुछ प्रमुख मार्गों पर कार टैक्सी और भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। यातायात पुलिस ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सड़क पर जाम की स्थिति से बचने के लिए यह व्यवस्था लागू की है। इस दौरान फिजिकल रोड पर केवल दोपहिया वाहन ही चल सकेंगे। वहीं नवरात्रि के दौरान इस मार्ग पर डीजे वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद रहेगी। ऐसे में माता की प्रतिमाएं लेने जाने वाले लोगों और इस क्षेत्र से गुजरने वाले वाहन चालकों को बदले हुए ट्रैफिक रूट का ध्यान रखना होगा।जानकारी के अनुसार शिवपुरी के फिजिकल रोड पर कई मूर्तिकार माता की प्रतिमाएं तैयार करते हैं। नवरात्रि शुरू होने से पहले और पहले दिन जिले के अलग-अलग इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां प्रतिमाएं लेने पहुंचते हैं। इसके कारण सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ जाती है और भीड़ के चलते यातायात प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी स्थिति को देखते हुए यातायात पुलिस ने फिजिकल क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने का निर्णय लिया है ताकि लोगों को आवागमन में परेशानी न हो और प्रतिमाएं लेने आने वाले श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से अपना काम पूरा कर सकें।
नई व्यवस्था के तहत पुराने बस स्टैंड से फिजिकल होते हुए आकाशवाणी और पीजी कॉलेज की ओर जाने वाले मार्ग पर कार टैक्सी और भारी वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा। इस सड़क पर केवल दोपहिया वाहन चालकों को जाने की अनुमति होगी। सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक लागू इस व्यवस्था के दौरान चार पहिया वाहन चालकों को निर्धारित वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करना होगा। इससे फिजिकल रोड पर भीड़ को नियंत्रित करने और वाहनों की आवाजाही को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यातायात पुलिस के मुताबिक धर्मवीर घाटी से फिजिकल रोड की ओर भी केवल दोपहिया वाहन ही जा सकेंगे। कार और अन्य चार पहिया वाहनों के साथ भारी वाहन चालकों को दो बत्ती होते हुए परशुराम तिराहे के रास्ते आगे जाना होगा। वाहन चालकों से अपील की गई है कि वे प्रतिबंधित मार्ग पर जाने की कोशिश न करें और अपनी यात्रा के दौरान वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। इससे अनावश्यक जाम से बचा जा सकेगा और दूसरे वाहन चालकों को भी परेशानी नहीं होगी।
नवरात्रि के दौरान फिजिकल रोड पर डीजे वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। यातायात प्रभारी रणवीर यादव ने बताया कि निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य धार्मिक आयोजन के दौरान भीड़ को व्यवस्थित रखना और सड़क पर यातायात को सुरक्षित बनाए रखना है।
नवरात्रि के पहले दिन माता की प्रतिमाएं लेने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण शिवपुरी के फिजिकल क्षेत्र में यातायात व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को घर से निकलने से पहले अपने मार्ग की जानकारी रखने और पुलिस के निर्देशों का पालन करने की जरूरत है। खासतौर पर कार टैक्सी और भारी वाहन चालकों को सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक लागू प्रतिबंधों का ध्यान रखना चाहिए। बदले हुए ट्रैफिक रूट का पालन करने से न केवल जाम की समस्या कम होगी बल्कि श्रद्धालुओं को भी माता की प्रतिमाएं लेने में सुविधा मिल सकेगी।
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मां की भक्ति तभी सार्थक जब महिलाओं का हो सम्मान, शिवराज ने रील शेयर कर देशवासियों से कही बड़ी बात
भोपाल। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए महिलाओं के सम्मान का संदेश दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक रील साझा कर लोगों से अपील की कि मां दुर्गा की पूजा अर्चना और व्रत उपवास के साथ घर परिवार और समाज में बेटियों बहनों तथा माताओं का सम्मान करना भी अपनी जिम्मेदारी समझें। शिवराज ने कहा कि यदि हम अपनी बेटी बहन और मां का सम्मान नहीं करते हैं तो मां की उपासना का कोई लाभ नहीं है। उनका यह संदेश नवरात्रि के धार्मिक महत्व के साथ महिलाओं के प्रति सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी को भी रेखांकित करता है।शिवराज सिंह चौहान ने अपने संदेश में कहा कि नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री की आराधना को समर्पित है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु मां की भक्ति में लीन रहते हैं और व्रत उपवास रखकर परिवार की सुख समृद्धि तथा खुशहाली की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हमें अपनी अंतरात्मा और हृदय से यह भी विचार करना चाहिए कि हम अपने आसपास की महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। पूजा पाठ के वास्तविक अर्थ को जीवन में उतारना और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव रखना भी जरूरी है।केंद्रीय मंत्री ने अपने संदेश में बहनों भाइयों और बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी लोग नवरात्रि के दौरान व्रत रखें उपवास करें और मां की उपासना करें लेकिन इसके साथ ही अपनी बेटियों बहनों और माताओं को पूरा सम्मान भी दें। उन्होंने कहा कि बेटियां देवियों के समान हैं और बहनों तथा माताओं में भी देवी का स्वरूप देखा जाता है। ऐसे में हर व्यक्ति को अपने जीवन में महिलाओं के सम्मान को सर्वोपरि रखने का संकल्प लेना चाहिए।शिवराज सिंह चौहान की अपील का मुख्य संदेश यही रहा कि देवी आराधना केवल मंदिरों में पूजा करने या धार्मिक परंपराओं का पालन करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसका प्रभाव हमारे व्यवहार और विचारों में भी दिखाई देना चाहिए। परिवार में बेटियों को सम्मान देना उनकी बात सुनना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसी तरह बहनों और माताओं के प्रति आदर का भाव रखना भी आवश्यक है। महिलाओं की गरिमा और उनके अधिकारों का सम्मान करने से ही समाज में सकारात्मक वातावरण बन सकता है।नवरात्रि के दौरान देशभर में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होते हैं और श्रद्धालु भक्ति भाव से माता के दर्शन करते हैं। ऐसे अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मूल्यों को जोड़ते हुए लोगों से महिलाओं के सम्मान का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने अपने संदेश के अंत में मां शैलपुत्री से सभी पर कृपा और आशीर्वाद बनाए रखने की कामना की तथा देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए जय माता दी कहा।उनका संदेश इस बात पर जोर देता है कि त्योहारों की सार्थकता तभी बढ़ती है जब उनसे मिलने वाली सीख को रोजमर्रा के जीवन में अपनाया जाए। नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ बेटियों बहनों और माताओं को सम्मान देना तथा उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। -

मां दुर्गा की भक्ति में डूबा मध्य प्रदेश, कहीं चांदी से सजा माता का गर्भगृह तो कहीं तड़के 3 बजे से दर्शन के लिए लगी कतारें
सतना। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होते ही मध्य प्रदेश में माता रानी की भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। रविवार 11 अक्टूबर को नवरात्र के पहले दिन सुबह से ही प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिरों में माता के जयकारे गूंजते रहे और भक्तों ने दर्शन पूजन कर परिवार की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। आगर मालवा के मां बगलामुखी मंदिर से लेकर उज्जैन के हरसिद्धि और गढ़ कालिका मंदिर तथा मैहर के मां शारदा धाम तक भक्तों में जबरदस्त उत्साह नजर आया। कई मंदिरों में तड़के ही पूजा अर्चना शुरू हो गई थी जबकि श्रद्धालु लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए।
आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में मंगला आरती के साथ दर्शन की शुरुआत हुई। सुबह चार बजे से 11 बजे तक यहां 75 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन करने की जानकारी सामने आई है।नवरात्र के दौरान भक्तों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी भी की जा रही है। जिले के पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी के अनुसार मंदिर परिसर में पुलिस चौकी शुरू की जा रही है। यहां तैनात पुलिसकर्मी मंदिर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान परेशानी का सामना न करना पड़े।धार्मिक नगरी उज्जैन में भी नवरात्र के पहले दिन विशेष उत्साह देखने को मिला। यहां प्रसिद्ध हरसिद्धि मंदिर और गढ़ कालिका मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचे। वहीं नीमच जिले के भादवा माता मंदिर में घट स्थापना से पहले महाआरती की गई। मालवा की वैष्णो देवी के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में नवरात्र के अवसर पर भक्तों की आवाजाही बनी रही।सतना जिले के मैहर स्थित मां शारदा धाम में भी शारदीय नवरात्र मेले का आगाज हो गया। रविवार तड़के तीन बजे मंदिर के पट खुलते ही परिसर माता के जयकारों से गूंज उठा। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए पहुंचने लगी। मैहर में नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में भक्त मां शारदा के दर्शन करने आते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है।बड़वानी जिले के सेंधवा स्थित मां बड़ी बिजासन माता मंदिर में नवरात्र को खास बनाने के लिए गर्भगृह की दीवारों को करीब 90 किलो चांदी से सजाया गया है। मंदिर की इस सजावट को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आकर्षण देखा जा रहा है। भोपाल के कर्फ्यू वाली मंदिर में भी सुबह से भक्त पूजा अर्चना में जुटे रहे। उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित मां बिरासनी शक्तिपीठ में नवरात्र के पहले दिन घट पूजन और स्थापना की गई।मंदसौर के नालछा माता मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ रही। यह मंदिर जिले के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है। मंदिर की विशेष मान्यता है कि यहां भेरू और भवानी एक ही गादी पर विराजमान हैं। मंदिर के पुजारी गोविंद नागदा के अनुसार मान्यता है कि माता सुबह बाल्यावस्था दोपहर में युवावस्था और शाम को वृद्धावस्था के स्वरूप में दर्शन देती हैं।राजगढ़ के प्रसिद्ध जालपा माता मंदिर में भी सुबह की आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। घने जंगल के बीच ऊंची टेकरी पर स्थित इस मंदिर में कई भक्त करीब एक किलोमीटर की पहाड़ी चढ़कर दर्शन करने पहुंचे। मंदिर विवाह की तारीख तय करने की पारंपरिक पाती प्रथा के लिए भी जाना जाता है। मान्यता के अनुसार शुभ मुहूर्त नहीं मिलने पर परिवार ज्वार या गेहूं के दाने लेकर यहां पहुंचते हैं और पुजारी पारंपरिक तरीके से विवाह की तारीख बताते हैं।रीवा के करीब 450 वर्ष पुराने रानी तालाब कालिका मंदिर में सुबह साढ़े तीन बजे पट खोल दिए गए। चार बजे से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस के 25 जवान तैनात किए गए हैं। नवरात्र के पहले दिन प्रदेशभर के मंदिरों में उमड़ी भीड़ ने धार्मिक उत्साह और मां दुर्गा के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को एक बार फिर प्रदर्शित किया। -

भोपाल में नवरात्रि की धूम, घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना शुरू, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही राजधानी भोपाल में मां दुर्गा की भक्ति और आराधना का माहौल बन गया है। नौ दिनों तक चलने वाले शक्ति उपासना के इस पर्व के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जा रही है। शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं और श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। तलैया स्थित काली माता मंदिर पीर गेट की कर्फ्यू वाली माता मंदिर और प्लेटिनम प्लाजा स्थित माता मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भक्त मां के दर्शन कर परिवार की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं।ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम के अनुसार इस वर्ष पूरे नौ दिनों की नवरात्रि का संयोग बना है। नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस बार माता रानी का आगमन हाथी पर माना गया है जिसे शुभता समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व है। पंडित गौतम के मुताबिक रविवार को घटस्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक निर्धारित बताया गया है। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के कारण अभिजीत काल में घटस्थापना को बेहतर माना गया है। प्रदोष काल में अखंड ज्योति स्थापित करने की परंपरा निभाई जाएगी जबकि तांत्रिक साधक मध्यरात्रि में विशेष पूजा करेंगे।नवरात्रि के नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा के साथ विशेष भोग अर्पित करेंगे। घरों में कलश स्थापना के बाद दीप प्रज्ज्वलित कर मंत्र जाप दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाएगा। कई श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखेंगे और सात्विक भोजन के साथ संयमित दिनचर्या अपनाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों में झूठ बोलने क्रोध करने और परिवार में विवाद से बचना चाहिए। माता पिता की सेवा गुरुजनों का सम्मान और महिलाओं के प्रति आदर का भाव रखने पर भी विशेष जोर दिया जाता है। भक्त देवी मां के दर्शन के दौरान नारियल लाल चुनरी लाल फूल कुमकुम और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सकते हैं। यदि पूजन सामग्री उपलब्ध न हो तो श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप और मां के नामों का स्मरण भी किया जा सकता है।पंचांग के अनुसार नवरात्रि के दौरान 18 अक्टूबर को महाअष्टमी और 19 अक्टूबर को महानवमी मनाई जाएगी। इसके बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। अंतिम दिनों में मंदिरों में विशेष पूजा अनुष्ठान और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की उम्मीद है।नवरात्रि के उत्साह का असर मां दुर्गा की प्रतिमाओं के बाजार में भी दिखाई दे रहा है। हबीबगंज बंगाली कॉलोनी स्थित प्रतिबिंब दक्षिणेश्वर कालीबाड़ी कला केंद्र में इस बार मां दुर्गा की करीब 160 प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। केंद्र के मूर्तिकार उत्तम कुमार नंदी के मुताबिक मूर्ति निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री महंगी होने से लागत बढ़ गई है। पहले 35 रुपये में मिलने वाली सामग्री अब 45 रुपये में मिल रही है। इसके बावजूद प्रतिमाओं की मांग बनी हुई है। केंद्र में पिछले 10 से 12 वर्षों से प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं और पश्चिम बंगाल तथा कोलकाता से आए करीब 12 से 13 कारीगर इस काम में जुटे हैं। यहां तैयार सबसे ऊंची प्रतिमा 12 फीट की है। प्रतिमाएं श्रद्धालुओं की पसंद के अनुसार बुक की जा रही हैं। नवरात्रि के आगमन के साथ भोपाल में आस्था उत्साह और भक्ति का माहौल है। श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना कर सुख शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। -

उज्जैन में मां दुर्गा के स्वागत की तैयारी तेज, मिट्टी की प्रतिमाओं से सजेंगे पंडाल, 1000 स्थानों पर स्थापना को लेकर प्रशासन अलर्ट
उज्जैन । उज्जैन में नवरात्रि पर्व को लेकर उत्साह बढ़ने लगा है और शहर से लेकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में दुर्गा उत्सव की तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। दुर्गा पंडालों को सजाने के साथ ही आयोजक माता की प्रतिमाओं की स्थापना के लिए व्यवस्थाएं जुटा रहे हैं। मूर्ति निर्माण करने वाले कलाकार भी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। इस बार उज्जैन में 4 फीट से लेकर 16 फीट तक की दुर्गा प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। अलग-अलग आकार और स्वरूपों में बनाई गई इन प्रतिमाओं के जरिए श्रद्धालुओं को मां दुर्गा के पारंपरिक और आकर्षक रूपों के दर्शन होंगे।मूर्ति कलाकार विजय पाल के अनुसार बंगाल और कोलकाता से आए कारीगर प्रतिमा निर्माण में जुटे हैं। यहां पारंपरिक स्वरूपों के साथ पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाई गई प्रतिमाएं भी तैयार की जा रही हैं। महिषासुर मर्दिनी के रूप में मां दुर्गा की प्रतिमाएं भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी। कलाकारों को एक प्रतिमा तैयार करने में करीब चार से पांच दिन का समय लगता है। प्रतिमा की ऊंचाई डिजाइन और बारीक कारीगरी के अनुसार निर्माण में लगने वाला समय अलग-अलग हो सकता है।इस बार प्रतिमा निर्माण की लागत बढ़ने का असर कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। कलाकारों के मुताबिक कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण दुर्गा प्रतिमाओं के दाम लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इससे आयोजक समितियों को अपने बजट के अनुसार प्रतिमाओं का चयन करना पड़ रहा है। इसके बावजूद नवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं और आयोजन समितियों में उत्साह बना हुआ है। कई स्थानों पर पंडालों की सजावट और अन्य तैयारियां भी साथ-साथ की जा रही हैं।इस बार प्रतिमाओं के निर्माण में पर्यावरण का ध्यान रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। कलाकारों के अनुसार प्रतिमाओं के लिए कोलकाता से मिट्टी मंगाई जाती है। इन प्रतिमाओं को पूरी तरह मिट्टी से तैयार किया जा रहा है और इनमें प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी पीओपी का इस्तेमाल नहीं किया जाता। प्रतिमाओं को रंगने के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। इससे पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है। मिट्टी से बनी प्रतिमाएं पारंपरिक शिल्पकला और धार्मिक आस्था से भी जुड़ी हुई हैं।उज्जैन जिले में इस बार नवरात्रि के दौरान एक हजार से अधिक स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की तैयारी है। शहर के विभिन्न इलाकों और आसपास के क्षेत्रों में आयोजन समितियां पंडालों की व्यवस्था करने में जुटी हैं। प्रतिमाओं की स्थापना के साथ ही श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं बनाना भी आयोजकों के लिए जरूरी होगा। नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पंडालों तक पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने भी समितियों से सावधानी बरतने की अपील की है।पुलिस और प्रशासन ने दुर्गा उत्सव समितियों को पंडालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और निगरानी की व्यवस्था मजबूत रखने के लिए कहा है। इसके साथ ही देर रात तेज आवाज में डीजे नहीं बजाने की अपील भी की गई है। इसका उद्देश्य धार्मिक आयोजन के दौरान व्यवस्था बनाए रखना और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी से बचाना है। आयोजकों को सुरक्षा और अनुशासन से जुड़े निर्देशों का पालन करने की जरूरत होगी।कुल मिलाकर उज्जैन में नवरात्रि के स्वागत की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। एक हजार से अधिक स्थानों पर प्रतिमा स्थापना की तैयारी और 16 फीट तक की भव्य प्रतिमाएं इस बार के उत्सव को खास बना सकती हैं। पारंपरिक शिल्पकला के साथ पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं पर जोर और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की अपील से नवरात्रि आयोजन को व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है। -

नवरात्र शुरू होने से पहले निपटा लें ये 5 जरूरी काम, पूजा में बाधा से बचने के लिए अभी कर लें तैयारी
नई दिल्ली: शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले हैं। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू होगी और इसके बाद लगातार नौ दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। नवरात्र के दौरान पूजा में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए कुछ जरूरी तैयारियां पहले ही पूरी करने की सलाह दी जाती है। इनमें घर की साफ-सफाई से लेकर पूजा सामग्री जुटाने और ऐसे काम पूरे करने तक की बातें शामिल हैं, जिन्हें नवरात्र के दौरान करना वर्जित माना जाता है।नवरात्र से पहले सबसे पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करने की बात कही गई है। घर के कोने-कोने की सफाई के साथ टूटी-फूटी और कबाड़ की चीजों को भी बाहर कर देना चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल की भी अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। भगवान के वस्त्र और पूजा के बर्तनों को धोकर साफ करने के साथ पूजा सामग्री रखने की जगह को भी व्यवस्थित करना जरूरी बताया गया है। पूजा स्थल पर मौजूद निर्माल्य को हटा देना चाहिए और जो पूजा सामग्री खत्म हो गई है, उसकी सूची बनाकर उसे पहले ही खरीद लेना चाहिए।
यदि नवरात्र में अखंड ज्योति जलानी है या घटस्थापना करनी है, तो उससे जुड़ी सभी जरूरी सामग्री एक दिन पहले ही लाकर रख लेने की सलाह दी गई है। पूजा के लिए साफ चौकी की व्यवस्था भी पहले कर लेनी चाहिए, ताकि नवरात्र के पहले दिन पूजा की तैयारियों में जल्दबाजी न करनी पड़े। घर की सफाई और पूजा स्थल की व्यवस्था पहले से पूरी होने पर नौ दिनों तक पूजा-पाठ के दौरान जरूरी चीजें आसानी से उपलब्ध रह सकती हैं।
नवरात्र से पहले घर में रखी तामसिक चीजों को हटाने की भी बात कही गई है। इनमें लहसुन-प्याज, नॉनवेज और शराब जैसी चीजें शामिल हैं। यदि किसी कारण से इन्हें घर से पूरी तरह हटाना संभव न हो, तो इन्हें अलग स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। इन्हें पूजा स्थल या उस जगह के पास नहीं रखना चाहिए, जहां भोग तैयार किया जाता है। जिन घरों में नॉनवेज भोजन बनाया जाता है, वहां भोग, प्रसाद और व्रत का भोजन तैयार करने के लिए अलग बर्तनों की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। नॉनवेज बनाने वाले बर्तनों में भोग या व्रत का भोजन नहीं बनाना चाहिए।
नवरात्र के दौरान बाल और नाखून कटवाना वर्जित माना जाता है। खासतौर पर नवरात्र का व्रत रखने वाले लोगों को इन नौ दिनों में बाल और नाखून नहीं कटवाने की सलाह दी जाती है। इसलिए यह काम नवरात्र शुरू होने से पहले ही पूरा कर लेना बेहतर बताया गया है। इन तैयारियों के अलावा घटस्थापना के मुहूर्त की जानकारी भी पहले से रखना जरूरी है। 11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना के लिए सुबह का शुभ मुहूर्त 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। नवरात्र की पूजा के लिए घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई तथा आवश्यक सामग्री की व्यवस्था पहले से करने से तैयारियों को समय पर पूरा किया जा सकता है।