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  • महाअष्टमी पर मां अष्टभुजा के दरबार में भक्तों का महाकुंभ, कन्या पूजन और भंडारे में उमड़े हजारों श्रद्धालु

    महाअष्टमी पर मां अष्टभुजा के दरबार में भक्तों का महाकुंभ, कन्या पूजन और भंडारे में उमड़े हजारों श्रद्धालु


    मऊगंज । मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के अष्टभुजा धाम नईगढ़ी में शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। रविवार को मां अष्टभुजा के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या 50 हजार से अधिक बताई गई। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तिमय माहौल बना रहा। मां के जयकारों से पूरा धाम गूंज उठा और श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देर तक लगी रहीं।
    महाअष्टमी के पावन अवसर पर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना तड़के ही शुरू हो गया था। सुबह करीब तीन बजे से ही मंदिर के बाहर भक्तों की कतारें लगने लगीं। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। भक्तों ने मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कई श्रद्धालु मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से भी अष्टभुजा धाम पहुंचे। रीवा सीधी सतना प्रयागराज और वाराणसी सहित कई स्थानों से आए भक्तों ने मां के दरबार में माथा टेका।
    दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। मंदिर परिसर में सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन हुआ और भजन-कीर्तन के माध्यम से भक्तों ने देवी की आराधना की। नवरात्रि के इस विशेष अवसर पर कई परिवारों ने बच्चों के मुंडन और कर्णछेदन जैसे धार्मिक संस्कार भी संपन्न कराए। मंदिर परिसर के आसपास मेले जैसा माहौल रहा और बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने धार्मिक गतिविधियों में भाग लिया।
    महाअष्टमी के अवसर पर अष्टभुजा धाम में विशेष हवन और पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके बाद नौ कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया गया। कन्याओं को भोजन कराया गया और दक्षिणा तथा उपहार भेंट कर आशीर्वाद लिया गया। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। जिले के दूसरे देवी मंदिरों और दुर्गा पंडालों में भी हवन कन्या पूजन और भंडारे आयोजित किए गए।
    महाअष्टमी पर केवल अष्टभुजा धाम ही नहीं बल्कि पूरे मऊगंज जिले में भक्ति का माहौल दिखाई दिया। मां जालपा धाम दूबी और बसदेईन माता वसिगड़ा देवी धाम सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भी सुबह से भक्तों की भीड़ रही। नईगढ़ी हनुमना शाहपुर खटखरी पहाड़ी और देवतालाब सहित कस्बों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सजे दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। जगह-जगह भजन और धार्मिक आयोजनों के बीच नवरात्रि का उत्साह नजर आया।
    इस अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और देवतालाब विधायक गिरीश गौतम भी अपने परिवार के साथ अष्टभुजा धाम पहुंचे। उन्होंने मां के दर्शन कर चुनरी अर्पित की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने अपने परिवार के साथ क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
  • भोपाल में गरबा की धूम, सीएम मोहन यादव ने दिया संस्कृति और संस्कारों को सहेजने का संदेश, नवरात्रि में दिखी भक्ति की झलक

    भोपाल में गरबा की धूम, सीएम मोहन यादव ने दिया संस्कृति और संस्कारों को सहेजने का संदेश, नवरात्रि में दिखी भक्ति की झलक


    भोपाल । भोपाल के जंबूरी मैदान में गुरुवार को भोजपाल गरबा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव की शुरुआत की। इस दौरान गरबा की आकर्षक प्रस्तुतियों और भक्ति गीतों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मुख्यमंत्री ने भजन गायन भी किया और प्रदेशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए मां दुर्गा से सभी के सुख समृद्धि और कल्याण की कामना की। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय संस्कृति परंपराओं और विरासत पर गर्व करने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और समाज कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए उसे अपनी जड़ों से जुड़ा रहना चाहिए। जिन समाजों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखा है वे विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति की उपासना का विशेष महत्व है। यहां कन्या को देवी का स्वरूप माना जाता है और मातृशक्ति के रूप में भी पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि नारी नारायणी हैं और शक्ति का प्रतीक हैं। मां दुर्गा के नौ स्वरूप हमें साहस पराक्रम और आत्मविश्वास की प्रेरणा देते हैं। शक्ति की भक्ति में ही सभी का कल्याण निहित है। नवरात्रि का पर्व केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि यह हमें अपनी परंपराओं को समझने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने का अवसर भी प्रदान करता है।
    मुख्यमंत्री ने लोगों से समाज में सद्भाव बढ़ाने और महिलाओं के सम्मान को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहारों की सार्थकता तभी है जब उनके माध्यम से समाज में प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत हो। लोगों को गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में खुशियां लाने का संकल्प भी लेना चाहिए। भोजपाल गरबा महोत्सव में भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भारतीय परंपराओं की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में भोजपाल महोत्सव मेला समिति के संयोजक विकास वीरानी और समिति के अध्यक्ष सुनील यादव सहित अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में भोजपाल गरबा महोत्सव लगातार भव्य और व्यापक होता गया है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोग आयोजन में शामिल होने पहुंचे हैं। गरबा केवल नृत्य का कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह शक्ति की आराधना से मिलने वाली शांति खुशी और उत्साह को सामूहिक रूप से व्यक्त करने का माध्यम है। ऐसे आयोजन लोगों को एक साथ लाने और आपसी मेलजोल बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खेल और शारीरिक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए ताकि लोग स्वस्थ और सक्रिय रह सकें।
    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में प्रमुख त्योहार और सांस्कृतिक आयोजन सामूहिक उत्साह के साथ मनाए जाएं। मकर संक्रांति पर पतंग उत्सव सर्दियों में भोपाल उत्सव और जन्माष्टमी जैसे आयोजनों के माध्यम से सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का अवसर देते हैं और समाज में एकता की भावना को मजबूत करते हैं।
    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया में भारत के बढ़ते मान सम्मान का भी उल्लेख किया। उन्होंने आशा जताई कि वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने तक भारत हर क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल होगा। उन्होंने भारतीय संस्कृति और गौरव का परचम पूरी दुनिया में ऊंचा रखने का आह्वान किया। साथ ही लोगों को आगामी दशहरे की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए अपनी परंपराओं को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश दिया। भोजपाल गरबा महोत्सव का शुभारंभ भक्ति उल्लास और सांस्कृतिक गौरव के माहौल में हुआ।

  • मैहर में देवी भक्ति का अनूठा नजारा, नृत्य-नाटिका और देवी गीतों ने मोहा मन, SP के भजन पर गूंजे जयकारे

    मैहर में देवी भक्ति का अनूठा नजारा, नृत्य-नाटिका और देवी गीतों ने मोहा मन, SP के भजन पर गूंजे जयकारे


    मैहर । मध्यप्रदेश के मैहर में शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर मां शारदा देवी मंदिर परिसर में शक्तिपर्व का आयोजन किया गया। बुधवार शाम मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में भक्ति संगीत और देवी आराधना का अनूठा संगम देखने को मिला। देर रात तक चले कार्यक्रम में कलाकारों ने देवी गीतों और नृत्य-नाटिका के माध्यम से मां आदिशक्ति की महिमा का गुणगान किया। भजनों की मधुर धुनों और कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम के दौरान ‘जब जिद पर आ गई पार्वती’ गीत विशेष आकर्षण का केंद्र रहा जिस पर मौजूद दर्शक उत्साह से झूम उठे।

    कार्यक्रम का शुभारंभ मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी और कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने मां शारदा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद मंच पर देवी आराधना से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और दर्शकों ने भाग लिया तथा भक्ति संगीत का आनंद लिया। नवरात्रि के दौरान आयोजित इस आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति और कला को भी मंच प्रदान किया।

    शक्तिपर्व में लोक भक्ति गायन की प्रस्तुति देने के लिए रीवा से रीता तिवारी अपने साथियों के साथ पहुंचीं। उन्होंने देवी गीतों के जरिए मां शक्ति की आराधना की। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को भक्ति के रंग में रंग दिया। वहीं मुंबई से आए अरविंद कुमार पटेल और उनके साथियों ने मां आदिशक्ति पर आधारित नृत्य-नाटिका का मंचन किया। कलाकारों ने नृत्य और अभिनय के माध्यम से देवी शक्ति की महिमा को मंच पर प्रस्तुत किया। इसके अलावा रवि त्रिपाठी और उनके साथियों ने भी भक्ति गायन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में प्रस्तुत ‘जब जिद पर आ गई पार्वती’ गीत को दर्शकों ने खास तौर पर पसंद किया और उत्साह के साथ कलाकारों का स्वागत किया।

    इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण मैहर के पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह का भजन गायन रहा। उन्होंने ‘अंगना पधारो महारानी मोरी शारदा भवानी’ भजन प्रस्तुत किया। मां शारदा की स्तुति में गाए गए इस भजन ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। पुलिस अधीक्षक की इस प्रस्तुति से आयोजन का माहौल और अधिक भक्तिमय हो गया। धार्मिक गीतों और संगीत के बीच उनकी प्रस्तुति कार्यक्रम के यादगार पलों में शामिल रही।

    शक्तिपर्व में पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह के साथ अपर कलेक्टर रोशन राय और नायब तहसीलदार शिवभूषण सिंह सहित अन्य अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। नवरात्रि के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम में भक्ति गायन और नृत्य-नाटिका के जरिए मां शारदा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई। मैहर में हुए इस आयोजन ने धार्मिक उत्सव को सांस्कृतिक रंगों से सजाया और दर्शकों को संगीत तथा देवी आराधना से जुड़ने का अवसर दिया।

  • शिवपुरी के जंगलों में मां बलारी का रहस्यमयी दरबार, सुबह बालिका तो दोपहर में युवा रूप की मान्यता, नवरात्र में बढ़ी भक्तों की भीड़

    शिवपुरी के जंगलों में मां बलारी का रहस्यमयी दरबार, सुबह बालिका तो दोपहर में युवा रूप की मान्यता, नवरात्र में बढ़ी भक्तों की भीड़


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित माधव टाइगर रिजर्व अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। इसी रिजर्व की पूर्वी रेंज के घने जंगलों और खूबसूरत वादियों के बीच सदियों पुराना मां बलारी माता मंदिर स्थित है। यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ अपनी अनूठी लोक मान्यताओं के कारण भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है। शारदीय नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की आवाजाही बढ़ गई है। दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु जंगल के रास्ते सफर कर मां के दरबार में पहुंच रहे हैं और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
    मां बलारी मंदिर की सबसे खास मान्यता देवी के बदलते स्वरूप से जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित मान्यता के अनुसार मां का मुखमंडल 24 घंटे के भीतर तीन बार आंशिक रूप से बदलता है। कहा जाता है कि सुबह देवी बाल रूप में दर्शन देती हैं जबकि दोपहर में उनका स्वरूप युवा दिखाई देता है। वहीं रात के समय वृद्ध स्वरूप की मान्यता है। इसी अनूठी मान्यता के चलते मंदिर के प्रति लोगों की श्रद्धा और आकर्षण बना हुआ है। नवरात्र के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचकर माता के दर्शन करने को उत्सुक हैं।
    मंदिर तक पहुंचने का रास्ता भी श्रद्धालुओं के लिए एक अलग अनुभव लेकर आता है। शिवपुरी शहर से मंदिर की दूरी करीब 25 किलोमीटर बताई गई है। यहां पहुंचने के लिए यात्रियों को कुछ दूरी कच्चे रास्ते पर तय करनी पड़ती है। इसके बाद करीब 7.4 किलोमीटर का मार्ग माधव टाइगर रिजर्व के जंगल से होकर गुजरता है। घने पेड़ों और प्राकृतिक हरियाली के बीच से गुजरने वाला यह रास्ता जहां प्रकृति के करीब होने का अनुभव देता है वहीं वन्यजीवों की मौजूदगी के कारण सावधानी बरतना भी जरूरी है।
    नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और वन क्षेत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने विशेष व्यवस्था की है। दी गई जानकारी के अनुसार इस अवधि में भक्तों को अपने वाहनों से मंदिर तक जाने की अनुमति दी गई है। हालांकि जंगल में प्रवेश के लिए चेकपोस्ट पर वाहनों की एंट्री अनिवार्य रखी गई है। इससे वन क्षेत्र में आने-जाने वाले वाहनों पर नजर रखी जा सके और श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित बनी रहे।
    जंगल के रास्ते पर सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। वन विभाग ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे रास्ते में अनावश्यक रूप से न रुकें और समूह में आगे बढ़ें। इसके साथ ही डीजे बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। जंगल में तेज आवाज और लापरवाही वन्यजीवों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। ऐसे में श्रद्धालुओं से धार्मिक यात्रा के दौरान शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपेक्षा की जा रही है।
    मां बलारी मंदिर धार्मिक आस्था और प्राकृतिक वातावरण का अनूठा संगम है। एक ओर यहां देवी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंच रही है तो दूसरी ओर माधव टाइगर रिजर्व की हरियाली इस स्थान को विशेष बनाती है। नवरात्र में मंदिर आने वाले भक्तों के लिए जरूरी है कि वे आस्था के साथ वन विभाग के नियमों का भी पालन करें। इससे धार्मिक परंपरा के साथ जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
  • भोपाल में गरबा महोत्सव की धूम, 4000 से ज्यादा प्रतिभागियों ने की रिहर्सल, खास थीम और महाआरती के साथ सजेगा पंडाल

    भोपाल में गरबा महोत्सव की धूम, 4000 से ज्यादा प्रतिभागियों ने की रिहर्सल, खास थीम और महाआरती के साथ सजेगा पंडाल


    भोपाल । भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित पांच दिवसीय अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव 2026 का दूसरा दिन आज उत्साह और पारंपरिक रंगों के बीच मनाया जाएगा। मंगलवार से शुरू हुए इस आयोजन में गरबा प्रेमियों के बीच खास उत्साह देखने को मिल रहा है। गुजराती लोकगीतों की धुन पर गरबा डांडिया और तीन ताली के जरिए प्रतिभागी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। रंग-बिरंगे परिधान रोशनी से सजा पंडाल और पारंपरिक संगीत इस आयोजन को खास बनाने की तैयारी में हैं। नवरात्र के अवसर पर आयोजित यह महोत्सव लोगों को धार्मिक आस्था के साथ भारतीय लोक संस्कृति से जुड़ने का अवसर दे रहा है।
    महोत्सव की तैयारियों को लेकर पहले से ही व्यापक स्तर पर अभ्यास किया गया है। पहली ग्राउंड रिहर्सल में चार हजार से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। इस दौरान गुजराती पारंपरिक गीतों की धुन और प्रशिक्षकों की काउंटिंग के साथ प्रतिभागियों ने गरबा डांडिया और तीन ताली का अभ्यास किया। सामूहिक नृत्य के दौरान तालमेल बनाए रखने और निर्धारित स्टेप्स को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया। सोमवार को दूसरी ग्राउंड रिहर्सल भी आयोजित की गई थी ताकि मुख्य आयोजन के दौरान प्रतिभागी पूरे उत्साह और बेहतर तालमेल के साथ प्रस्तुति दे सकें।
    इस बार महोत्सव में पारंपरिक गुजराती वेशभूषा के साथ अलग-अलग राज्यों की पोशाकों और विशेष थीम का आकर्षण भी देखने को मिल सकता है। पिछले आयोजनों में राजस्थानी परिधान महाकुंभ और श्रीनाथ जैसी थीम के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता दिखाई थी। इस बार भी प्रतिभागियों की वेशभूषा और पंडाल की सजावट उत्सव में चार चांद लगाने की तैयारी में है। पारंपरिक आभूषणों और रंगीन परिधानों के साथ गरबा करने वाले प्रतिभागियों के बीच उत्सव का माहौल और आकर्षक बनेगा।
    आयोजन में बढ़ती भागीदारी को देखते हुए गरबा सर्किल का आकार भी बढ़ाया गया है। पहले इसका आकार 100 फीट था जिसे बढ़ाकर 110 फीट कर दिया गया है। इससे प्रतिभागियों को सामूहिक नृत्य के दौरान अधिक जगह मिल सकेगी। बड़े गरबा सर्किल में एक साथ बड़ी संख्या में प्रतिभागियों के नृत्य करने से आयोजन की भव्यता बढ़ने की उम्मीद है। गरबा की पारंपरिक लय और डांडिया की खनक के बीच पूरा मैदान उत्सव के रंग में रंगा नजर आएगा।
    अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव में माता अम्बे की पूजा-अर्चना और महाआरती भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पारंपरिक नृत्य का यह संगम श्रद्धालुओं और गरबा प्रेमियों को आकर्षित करता है। रोशनी से सजे पंडाल में माता की आराधना के बाद गरबा और डांडिया का उत्साह देखने को मिलेगा। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में शहर के लोगों को परिवार और दोस्तों के साथ उत्सव का आनंद लेने तथा गुजराती संस्कृति की परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
    महोत्सव में प्रवेश के लिए पास अनिवार्य रखा गया है। आयोजकों के अनुसार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पास प्राप्त किए जा सकते हैं। एक कपल पास पर दो लोगों को प्रवेश मिलेगा और इनमें एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य है। पास अभिव्यक्ति मैनेजमेंट द्वारा निर्धारित दुकानों से खरीदे जा सकते हैं। इसके अलावा भेल दशहरा मैदान स्थित गरबा ग्राउंड पर बनाए गए दो ऑफलाइन स्टॉल से भी पास लेने की सुविधा है। ऑनलाइन पास के लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था भी की गई है। आयोजकों ने लोगों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत माध्यमों से ही पास खरीदें ताकि प्रवेश के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।
  • नवरात्र व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज? फलाहार से लेकर मसालों तक, यहां देखें पूरी लिस्ट

    नवरात्र व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज? फलाहार से लेकर मसालों तक, यहां देखें पूरी लिस्ट


    नई दिल्‍ली । शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना के साथ व्रत रखने की परंपरा है। इस दौरान कुछ श्रद्धालु नौ दिनों तक फलाहार करते हैं, तो कुछ पहले और अंतिम दिन उपवास रखते हैं। व्रत रखने वालों के लिए खानपान के कुछ पारंपरिक नियम भी बताए गए हैं, जिनमें अनाज, दालों, नमक और मसालों से जुड़े परहेज शामिल हैं। आइए जानते हैं कि नवरात्र के दौरान क्या खा सकते हैं और किन चीजों से बचने की परंपरा है।

    नवरात्र व्रत में क्या खा सकते हैं?

    नवरात्र के दौरान व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और व्रत के नियमों के अनुसार फल, दूध, मेवे और कुछ खास अनाजों से बने व्यंजन खा सकते हैं।

    1. कुट्टू, सिंघाड़े और राजगिरा का आटा

    व्रत में गेहूं के आटे की जगह कुट्टू, सिंघाड़े और राजगिरा के आटे का इस्तेमाल किया जाता है। इनसे पूरी, पराठे और अन्य फलाहारी व्यंजन बनाए जा सकते हैं।

    2. साबूदाना और समा के चावल

    साबूदाने की खिचड़ी, खीर और वड़े के अलावा समा के चावल से बनी खिचड़ी भी व्रत में खाई जाती है। इन्हें फलाहार के लोकप्रिय विकल्पों में गिना जाता है।

    3. व्रत में खाई जाने वाली सब्जियां

    कद्दू, लौकी, खीरा, आलू, अरबी, रतालू, गाजर और शकरकंद का सेवन किया जा सकता है। टमाटर और अदरक का इस्तेमाल भी कई घरों में व्रत के भोजन में किया जाता है।

    4. दूध और दूध से बने पदार्थ

    व्रत के दौरान दूध, दही, पनीर, मावा, छाछ, लस्सी, मक्खन और देसी घी का सेवन किया जा सकता है। इनका इस्तेमाल फलाहारी व्यंजन तैयार करने में भी होता है।

    5. मौसमी फल

    सेब, केला, अनार, पपीता और संतरा जैसे फल व्रत के लिए अच्छे विकल्प हैं। फल खाने से शरीर को ऊर्जा और जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं।

    6. सूखे मेवे और मखाना

    किशमिश, बादाम, काजू, अखरोट, मखाना और मूंगफली को व्रत के भोजन में शामिल किया जा सकता है। इन्हें सीधे खाने के अलावा खीर और दूसरे फलाहारी व्यंजनों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

    7. सेंधा नमक और चुनिंदा मसाले

    व्रत में सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। काली मिर्च, जीरा, हरी मिर्च, हरा धनिया और छोटी इलायची जैसे मसाले कई परंपराओं में स्वीकार्य हैं।

    नवरात्र व्रत में किन चीजों से बचना चाहिए?

    व्रत के पारंपरिक नियमों के अनुसार कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इनके नियम कुछ भिन्न हो सकते हैं।

    1. गेहूं, चावल और अन्य सामान्य अनाज

    व्रत के दौरान गेहूं, सामान्य चावल, सूजी, मैदा, जई और बेसन से बने व्यंजन नहीं खाए जाते। इनके स्थान पर व्रत में मान्य आटे और समा के चावल का उपयोग किया जाता है।

    2. दालें और दालों से बने खाद्य पदार्थ

    चना, अरहर, मूंग, मसूर और अन्य दालों का सेवन पारंपरिक नवरात्र व्रत में नहीं किया जाता। बेसन से बनी चीजों से भी परहेज रखा जाता है।

    3. सामान्य नमक और कुछ मसाले

    व्रत में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल करने की परंपरा है। कई परिवार हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला, धनिया पाउडर, हींग और राई का उपयोग भी नहीं करते।

    4. प्याज और लहसुन

    नवरात्र के दौरान सात्विक भोजन करने की परंपरा है। इसी वजह से प्याज और लहसुन से परहेज किया जाता है। कई श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक इनका सेवन नहीं करते।

    5. पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड

    बाजार में मिलने वाले पैकेट वाले जूस, प्रोसेस्ड स्नैक्स और सॉस या केचप से परहेज करना उचित माना जाता है। पैकेट पर लिखी सामग्री जांचना जरूरी है, क्योंकि कुछ उत्पादों में ऐसे तत्व हो सकते हैं जो व्रत के नियमों के अनुकूल न हों।

    6. मांसाहार और शराब

    नवरात्र के दौरान पारंपरिक रूप से मांस, मछली, अंडे और शराब का सेवन नहीं किया जाता। श्रद्धालु इन दिनों सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या अपनाते हैं।

    व्रत रखते समय इन बातों का भी रखें ध्यान
    अपनी परंपरा और व्रत के संकल्प के अनुसार ही भोजन चुनें।
    लंबे समय तक भूखे रहने के बजाय व्रत में मान्य फल, दूध और अन्य खाद्य पदार्थ उचित मात्रा में लें।
    पर्याप्त पानी पिएं, विशेषकर तब जब आप निर्जला व्रत नहीं रख रहे हों।
    मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग लंबे उपवास से पहले डॉक्टर की सलाह लें।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों, समुदायों और परिवारों में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं। इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में लें।

  • मां दुर्गा की भक्ति में डूबा मध्य प्रदेश, कहीं चांदी से सजा माता का गर्भगृह तो कहीं तड़के 3 बजे से दर्शन के लिए लगी कतारें

    मां दुर्गा की भक्ति में डूबा मध्य प्रदेश, कहीं चांदी से सजा माता का गर्भगृह तो कहीं तड़के 3 बजे से दर्शन के लिए लगी कतारें


    सतना। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होते ही मध्य प्रदेश में माता रानी की भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। रविवार 11 अक्टूबर को नवरात्र के पहले दिन सुबह से ही प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिरों में माता के जयकारे गूंजते रहे और भक्तों ने दर्शन पूजन कर परिवार की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। आगर मालवा के मां बगलामुखी मंदिर से लेकर उज्जैन के हरसिद्धि और गढ़ कालिका मंदिर तथा मैहर के मां शारदा धाम तक भक्तों में जबरदस्त उत्साह नजर आया। कई मंदिरों में तड़के ही पूजा अर्चना शुरू हो गई थी जबकि श्रद्धालु लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए।
    आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में मंगला आरती के साथ दर्शन की शुरुआत हुई। सुबह चार बजे से 11 बजे तक यहां 75 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन करने की जानकारी सामने आई है।
    नवरात्र के दौरान भक्तों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी भी की जा रही है। जिले के पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी के अनुसार मंदिर परिसर में पुलिस चौकी शुरू की जा रही है। यहां तैनात पुलिसकर्मी मंदिर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान परेशानी का सामना न करना पड़े।
    धार्मिक नगरी उज्जैन में भी नवरात्र के पहले दिन विशेष उत्साह देखने को मिला। यहां प्रसिद्ध हरसिद्धि मंदिर और गढ़ कालिका मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचे। वहीं नीमच जिले के भादवा माता मंदिर में घट स्थापना से पहले महाआरती की गई। मालवा की वैष्णो देवी के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में नवरात्र के अवसर पर भक्तों की आवाजाही बनी रही।
    सतना जिले के मैहर स्थित मां शारदा धाम में भी शारदीय नवरात्र मेले का आगाज हो गया। रविवार तड़के तीन बजे मंदिर के पट खुलते ही परिसर माता के जयकारों से गूंज उठा। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए पहुंचने लगी। मैहर में नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में भक्त मां शारदा के दर्शन करने आते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है।
    बड़वानी जिले के सेंधवा स्थित मां बड़ी बिजासन माता मंदिर में नवरात्र को खास बनाने के लिए गर्भगृह की दीवारों को करीब 90 किलो चांदी से सजाया गया है। मंदिर की इस सजावट को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आकर्षण देखा जा रहा है। भोपाल के कर्फ्यू वाली मंदिर में भी सुबह से भक्त पूजा अर्चना में जुटे रहे। उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित मां बिरासनी शक्तिपीठ में नवरात्र के पहले दिन घट पूजन और स्थापना की गई।
    मंदसौर के नालछा माता मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ रही। यह मंदिर जिले के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है। मंदिर की विशेष मान्यता है कि यहां भेरू और भवानी एक ही गादी पर विराजमान हैं। मंदिर के पुजारी गोविंद नागदा के अनुसार मान्यता है कि माता सुबह बाल्यावस्था दोपहर में युवावस्था और शाम को वृद्धावस्था के स्वरूप में दर्शन देती हैं।
    राजगढ़ के प्रसिद्ध जालपा माता मंदिर में भी सुबह की आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। घने जंगल के बीच ऊंची टेकरी पर स्थित इस मंदिर में कई भक्त करीब एक किलोमीटर की पहाड़ी चढ़कर दर्शन करने पहुंचे। मंदिर विवाह की तारीख तय करने की पारंपरिक पाती प्रथा के लिए भी जाना जाता है। मान्यता के अनुसार शुभ मुहूर्त नहीं मिलने पर परिवार ज्वार या गेहूं के दाने लेकर यहां पहुंचते हैं और पुजारी पारंपरिक तरीके से विवाह की तारीख बताते हैं।
    रीवा के करीब 450 वर्ष पुराने रानी तालाब कालिका मंदिर में सुबह साढ़े तीन बजे पट खोल दिए गए। चार बजे से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस के 25 जवान तैनात किए गए हैं। नवरात्र के पहले दिन प्रदेशभर के मंदिरों में उमड़ी भीड़ ने धार्मिक उत्साह और मां दुर्गा के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को एक बार फिर प्रदर्शित किया।

  • महाअष्टमी पर पीएम मोदी का संदेश: मां महागौरी से मांगी सुख-समृद्धि की कामना

    महाअष्टमी पर पीएम मोदी का संदेश: मां महागौरी से मांगी सुख-समृद्धि की कामना


    नई दिल्ली। जगज्जननी आदिशक्ति मां दुर्गा के पावन पर्व महाअष्टमी पर देशभर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा है। नवरात्रि के आठवें दिन मां के अष्टम स्वरूप मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और मां के आशीर्वाद की कामना की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए मां महागौरी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि मां की दिव्य आभा हर किसी के जीवन में सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए। पीएम ने इस अवसर पर एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया, जिसमें मां से शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना की गई है।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मां महागौरी की आराधना से जीवन में पवित्रता, आत्मसंयम और शक्ति का संचार होता है। उन्होंने कामना की कि मां की कृपा से सभी की इच्छाएं पूर्ण हों और जीवन में सुख, शांति और नई ऊर्जा आए।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संदेश में कहा कि महाअष्टमी शक्ति की उपासना का विशेष पर्व है। मां महागौरी का यह स्वरूप जीवन के अंधकार को दूर कर सात्त्विकता और सरलता का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कामना की कि मां की कृपा से हर घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास हो।

    राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस पावन अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं और मां से सभी के जीवन में धन-वैभव, सुख-शांति और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना की।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। महाअष्टमी के दिन मां महागौरी की विशेष आराधना होती है, जिन्हें पवित्रता, शांति और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा, कन्या पूजन और भंडारों का आयोजन किया जाता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

  • मां त्रिपुर सुंदरी का पंचमेवा श्रृंगार, श्रद्धालुओं में उमड़ा आस्था का सैलाब

    मां त्रिपुर सुंदरी का पंचमेवा श्रृंगार, श्रद्धालुओं में उमड़ा आस्था का सैलाब


    नरसिंहपुर । नरसिंहपुर जिले के परमहंसी गंगा आश्रम श्रीवनम की पहाड़ियों पर नवरात्र का पावन पर्व अपने चरम पर है। इस पावन अवसर पर नवरात्र के पांचवे दिन श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष और अद्भुत दृश्य देखने को मिला। राजराजेश्वरी मां त्रिपुर सुंदरी का पंचमेवा से श्रृंगार किया गया। काजू, किशमिश, बादाम, अंजीर और पिस्ता से मां के आभूषण और वस्त्रों को सजाया गया। इस अनोखे और आकर्षक श्रृंगार ने पूरे आश्रम परिसर को भक्ति और आस्था के रंगों से भर दिया।

    श्रद्धालु सुबह से ही आश्रम में पहुंचना शुरू हो गए थे। हर ओर उत्साह का माहौल नजर आ रहा था। भक्तों की आँखों में आस्था झलक रही थी और वे माता के दिव्य रूप को निहारते हुए उनके आशीर्वाद की कामना कर रहे थे। पंचमेवा के श्रृंगार में मां के आभूषण और वस्त्रों की सजावट इतनी मनमोहक थी कि हर भक्त मंत्रमुग्ध हो गया। विशेष रूप से काजू, किशमिश, बादाम, अंजीर और पिस्ता से बने गहनों और वस्त्रों ने मां के रूप को और भी दिव्य और मोहक बना दिया।

    मान्यता है कि राजराजेश्वरी मां त्रिपुर सुंदरी की साधना से भक्तों को भोग और मोक्ष दोनों का फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि नवरात्र के इन दिनों श्रद्धालु विशेष रूप से इस स्थान की ओर आकर्षित होते हैं। आश्रम में लगी भव्य सजावट और मां के पंचमेवा श्रृंगार को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आ रहे हैं। हर कदम पर भक्तों की श्रद्धा और भक्ति का अनुभव किया जा सकता है।

    श्रीवनम आश्रम की पहाड़ियों पर यह दृश्य अत्यंत मनोहारी था। मां के श्रृंगार के चारों ओर रंग-बिरंगे फूलों की सजावट और दीपों की रौशनी ने वातावरण को और भी पवित्र बना दिया। श्रद्धालु न केवल मां के दर्शन कर रहे थे बल्कि पंचमेवा श्रृंगार की अद्भुत कला और सजीवता की सराहना भी कर रहे थे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इस दिव्य अनुभव में लीन थे।

    भक्तों का कहना था कि इस पंचमेवा श्रृंगार ने न केवल मां के रूप को अद्भुत बना दिया बल्कि उनके मन को भी शांति और आनंद से भर दिया। यह अनुभव उन्हें जीवनभर याद रहेगा। इस अवसर पर आश्रम के महंत और पुजारी ने भी मां को विशेष भोग अर्पित किया और पंचमेवा के आभूषणों का महत्व समझाते हुए श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन दिया।

    पूरे परिसर में भक्ति का माहौल देखने लायक था। मंदिर के गर्भगृह से लेकर बाहरी हिस्सों तक हर जगह श्रद्धालुओं की श्रद्धा और उत्साह की चमक दिखाई दे रही थी। पंचमेवा के श्रृंगार के दर्शन करने वाले श्रद्धालु अपने हाथ जोड़कर मां के चरणों में शीश झुकाते और आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे। यही नवरात्र की असली भक्ति और आनंद की अनुभूति है।

    आस्था और भक्ति की इस अनूठी परंपरा ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं के दिलों को भी छू लिया। पंचमेवा श्रृंगार के माध्यम से मां त्रिपुर सुंदरी का दिव्य रूप भक्तों के सामने उतारा गया और उन्होंने इस अवसर को जीवन का अद्भुत अनुभव माना।