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  • गरबा में मुस्लिम युवाओं के शामिल होने पर मुफ्ती की दो टूक, अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं पर रहें कायम

    गरबा में मुस्लिम युवाओं के शामिल होने पर मुफ्ती की दो टूक, अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं पर रहें कायम


    नई दिल्ली। नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों में मुस्लिम युवाओं के शामिल होने को लेकर भोपाल में धार्मिक बयान सामने आया है। मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मुस्लिम युवाओं से गरबा में शामिल नहीं होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम युवाओं का दूसरी कौम के धार्मिक त्योहार या धार्मिक रस्म में शामिल होना जायज नहीं है। उनके मुताबिक दूसरी कौम की मुशाबहत यानी अनुकरण से भी बचना चाहिए। मुफ्ती ने खास तौर पर मुस्लिम युवाओं को दोस्तों के साथ गरबा में जाने से भी परहेज करने की सलाह दी है।

    अपने वीडियो में मुफ्ती गुफरान खान नदवी ने गरबा में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी के सवाल पर इसे हराम बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में होने वाले गरबा या हिंदू धार्मिक रस्म में मुस्लिम लड़कों का शामिल होना उचित नहीं है। उनका कहना है कि कुछ मुस्लिम युवक अपने दोस्तों के साथ गरबा में जाना सामान्य बात समझते हैं लेकिन उन्हें इससे बचना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समाज के युवाओं से अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं के प्रति जागरूक रहने की बात कही।

    मुफ्ती ने कहा कि मुस्लिम समाज की अपनी धार्मिक परंपराएं और रीति रिवाज हैं और युवाओं को इन्हीं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने दूसरी कौम की धार्मिक रस्मों के अनुकरण को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इस तरह का अनुकरण मुस्लिम समाज के लिए फितने का कारण बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों का अपना धर्म और उसकी परंपराएं उनके लिए पर्याप्त हैं और उन्हें दूसरे धर्मों के त्योहारों की ओर आकर्षित होने की जरूरत नहीं है।

    मुफ्ती गुफरान खान नदवी ने अपने बयान में मस्जिद और नमाज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले मस्जिद के गेट तक भी नहीं आते थे वे अब वहां तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को मुस्लिम धार्मिक परंपराओं के प्रति बढ़ती दिलचस्पी से जोड़ते हुए कहा कि अगर कोई मस्जिद के गेट तक आया है तो आगे चलकर अंदर भी आ सकता है। उन्होंने लोगों को नमाज और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का संदेश दिया।

    गरबा में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी को लेकर यह अपील केवल मुफ्ती की ओर से ही नहीं आई है। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी भी मुस्लिम युवाओं और समाज के लोगों से गरबा में जाने से परहेज करने की अपील कर चुकी है। कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेख इस्माइल खान ने 6 अक्टूबर को जारी अपील में कहा था कि इसका उद्देश्य किसी धर्म या धार्मिक आयोजन का विरोध करना नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखना और विवाद की स्थिति से बचना है।

    कमेटी की ओर से कहा गया है कि हाल के दिनों में गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवाओं की मौजूदगी को लेकर सार्वजनिक तौर पर आपत्तियां सामने आई हैं। इसी को देखते हुए कमेटी ने अपने पदाधिकारियों को प्रदेश संभाग और जिला स्तर पर अभियान चलाने के लिए कहा है। इसके तहत स्थानीय उलेमा और सामाजिक संगठनों से संपर्क कर मुस्लिम युवाओं को गरबा आयोजनों से दूर रहने की अपील की जाएगी।

    कमेटी के मुताबिक जिला प्रशासन को भी इस पहल की जानकारी दी जाएगी। उसका कहना है कि किसी धार्मिक आयोजन का विरोध करना उद्देश्य नहीं है बल्कि विवाद से बचना और शांति बनाए रखना प्राथमिकता है। गरबा और मुस्लिम युवाओं की भागीदारी को लेकर सामने आए इन बयानों के बीच अब यह मुद्दा धार्मिक पहचान सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक आयोजनों में भागीदारी को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

  • नवरात्रि गरबा प्रैक्टिस के लिए ये 8 बॉलीवुड गाने प्लेलिस्ट में करें शामिल, बेसिक स्टेप्स से तेज फुटवर्क तक होगी तैयारी

    नवरात्रि गरबा प्रैक्टिस के लिए ये 8 बॉलीवुड गाने प्लेलिस्ट में करें शामिल, बेसिक स्टेप्स से तेज फुटवर्क तक होगी तैयारी

    नई दिल्ली: नवरात्रि में गरबा और डांडिया की धूम के बीच अगर इस बार गरबा नाइट में बिना झिझक डांस करना है तो अभी से प्रैक्टिस शुरू की जा सकती है। इसके लिए ऐसी प्लेलिस्ट तैयार की जा सकती है, जिसमें धीमी बीट से लेकर तेज गरबा बीट तक के गाने हों। इससे अलग-अलग तरह के स्टेप्स की रिहर्सल करने में मदद मिल सकती है। खासकर पहली बार गरबा करने वालों के लिए सही गानों के साथ अभ्यास करना उपयोगी हो सकता है। गरबा आमतौर पर गोल घेरे में लयबद्ध कदमों और ताली के साथ किया जाता है, जबकि डांडिया में स्टिक का इस्तेमाल होता है। प्रैक्टिस की शुरुआत बेसिक स्टेप्स से करना बेहतर रहेगा और धीरे-धीरे तेज बीट वाले गानों की ओर बढ़ा जा सकता है।

    गरबा की शुरुआती प्रैक्टिस के लिए ‘Chogada’ को प्लेलिस्ट में रखा जा सकता है। इसकी लय पर बेसिक दो-स्टेप, ताली और घूमने वाले स्टेप्स की प्रैक्टिस की जा सकती है। बेसिक स्टेप्स समझ आने के बाद ‘Dholi Taaro Dhol Baaje’ पर अभ्यास किया जा सकता है। इसकी तेज बीट पर लगातार स्टेप बदलने और ताल के साथ चलने की आदत डालने की कोशिश की जा सकती है। ‘Odhani’ पर पैरों के साथ हाथों के मूवमेंट पर ध्यान दिया जा सकता है। इस गाने पर हाथों की दिशा, ताली और घूमने वाले स्टेप्स को एक साथ करने की रिहर्सल की जा सकती है। इसके बाद ‘Dholida’ पर तेज कदमों और ऊर्जा से भरे मूवमेंट का अभ्यास किया जा सकता है।

    अगर गरबा अकेले के बजाय पार्टनर या दोस्तों के साथ करना है तो ‘Udi Udi Jaye’ को भी प्रैक्टिस प्लेलिस्ट में शामिल किया जा सकता है। इसकी अपेक्षाकृत आसान गति पर पार्टनर के साथ तालमेल और घूमने वाले स्टेप्स की रिहर्सल की जा सकती है। वहीं, गरबा नाइट में बीट तेज होने पर कदमों का तालमेल बनाए रखने के लिए ‘Kamariya’ पर तेज फुटवर्क और लगातार मूवमेंट का अभ्यास किया जा सकता है। प्रैक्टिस शुरू करने से पहले शरीर को तैयार करने के लिए ‘Shubhaarambh’ जैसे गाने पर हल्के स्टेप्स से शुरुआत की जा सकती है। इससे धीरे-धीरे रिदम पकड़ने के बाद तेज गानों पर अभ्यास बढ़ाया जा सकता है।

    जब बेसिक स्टेप्स से लेकर तेज फुटवर्क तक की तैयारी हो जाए तो ‘Nagada Sang Dhol’ पर ग्रुप के साथ डांस की प्रैक्टिस की जा सकती है। इस गाने पर फुल एनर्जी के साथ ग्रुप डांस के लिए रिहर्सल की जा सकती है। हालांकि अभ्यास के दौरान शुरुआत में बहुत तेज स्टेप्स करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। पहले पैरों की चाल और बीट का तालमेल समझना चाहिए। इसके बाद हाथों और घूमने वाले स्टेप्स को इसमें जोड़ा जा सकता है। ग्रुप में डांस करना हो तो सामने वाले की स्पीड के साथ तालमेल बनाना जरूरी है। लंबे समय तक प्रैक्टिस करने से पहले हल्का वार्मअप करना चाहिए। डांस के दौरान अपनी सुविधा के अनुसार स्टेप्स की स्पीड रखनी चाहिए, ताकि अभ्यास के दौरान पैरों, हाथों और शरीर की गतिविधियों में तालमेल बना रहे।