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  • नवरात्रि में बनाएं हेल्दी और कुरकुरी शकरकंदी चाट, मखाने से मूंगफली तक मिलेंगी स्वाद और क्रंच की खूबियां

    नवरात्रि में बनाएं हेल्दी और कुरकुरी शकरकंदी चाट, मखाने से मूंगफली तक मिलेंगी स्वाद और क्रंच की खूबियां

    नई दिल्ली: नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा की पूजा के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं। उपवास के दौरान अक्सर कुछ चटपटा और स्वादिष्ट खाने का मन करता है लेकिन फलाहार में इस्तेमाल होने वाली चीजों के विकल्प सीमित लगने लगते हैं। ऐसे में शकरकंदी से बनी चटपटी चाट एक अच्छा विकल्प हो सकती है।
    इसे शकरकंदी के साथ पनीर और ताजी सब्जियों का इस्तेमाल करके तैयार किया जा सकता है। इसमें मखाने और भुनी हुई मूंगफली डालने से स्वाद के साथ कुरकुरापन भी बढ़ जाता है। खास बात यह है कि इसे डीप फ्राई करने की जरूरत नहीं है। शकरकंदी और पनीर को एयर फ्रायर में तैयार करके यह चाट आसानी से बनाई जा सकती है।

    व्रत वाली शकरकंदी चाट बनाने के लिए सामग्री
    इस चाट को बनाने के लिए दो मध्यम आकार की शकरकंद और करीब 150 ग्राम पनीर लें। इसके अलावा एक खीरा छोटे टुकड़ों में कटा हुआ एक छोटी कटोरी भुने हुए मखाने एक मुट्ठी भुनी हुई मूंगफली और आधा कप अनार के दाने चाहिए। शकरकंदी के लिए दो चम्मच घी और पनीर के लिए एक चम्मच घी रखें। स्वाद के अनुसार सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाएं। चटनी बनाने के लिए एक मुट्ठी ताजा हरा धनिया चार हरी मिर्च दो नींबू का रस और जरूरत के अनुसार पानी लें। व्रत में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और मसालों के नियम अलग-अलग परिवारों में अलग हो सकते हैं इसलिए अपनी परंपरा के अनुसार सामग्री चुनें।

    शकरकंदी को ऐसे करें तैयार

    सबसे पहले शकरकंदी को अच्छी तरह धोकर छील लें। इसके बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें और करीब सात से आठ मिनट तक उबालें। उबलने के बाद पानी निकाल दें। अब शकरकंदी में घी सेंधा नमक और काली मिर्च डालकर अच्छी तरह मिलाएं। एयर फ्रायर को 180 डिग्री सेल्सियस पर सेट करें और शकरकंदी को लगभग 20 मिनट तक एयर फ्राई करें। बीच में एक बार टुकड़ों को देखकर जरूरत के अनुसार पलट दें ताकि वे अच्छी तरह पक सकें। एयर फ्रायर का समय टुकड़ों के आकार और मशीन के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है।

    पनीर और हरी चटनी से बढ़ेगा स्वाद

    अब पनीर को छोटे क्यूब्स में काट लें। इसमें एक चम्मच घी सेंधा नमक और थोड़ी काली मिर्च डालकर मिलाएं। पनीर को 180 डिग्री सेल्सियस पर करीब पांच से छह मिनट तक एयर फ्राई करें। इसके बाद हरी चटनी तैयार करें। इसके लिए मिक्सर में हरा धनिया हरी मिर्च नींबू का रस सेंधा नमक और थोड़ा पानी डालकर पीस लें। चटनी को अपनी पसंद के अनुसार गाढ़ा या थोड़ा पतला रखा जा सकता है।

    इस तरह तैयार होगी चटपटी व्रत वाली चाट
    अब एक बड़े बाउल में एयर फ्राई की हुई शकरकंदी और पनीर डालें। इसमें कटा हुआ खीरा भुने मखाने मूंगफली और अनार के दाने मिलाएं। ऊपर से तैयार हरी चटनी डालकर सभी चीजों को हल्के हाथ से मिलाएं। आपकी स्वादिष्ट शकरकंदी चाट तैयार है। इसे तुरंत परोसें ताकि मखाने और मूंगफली का कुरकुरापन बना रहे।

    चाट को और स्वादिष्ट बनाने के आसान टिप्स
    चाट को अधिक चटपटा बनाने के लिए इसमें उबले हुए आलू के छोटे टुकड़े भी मिला सकते हैं। यदि आपके व्रत में अनुमति हो तो थोड़ी इमली की चटनी या अतिरिक्त नींबू का रस डालकर खट्टा स्वाद बढ़ाया जा सकता है।

    दही पसंद करने वाले लोग ताजा फेंटा हुआ दही भी मिला सकते हैं। ऊपर से अनार के दाने और भुना जीरा डालने से स्वाद और आकर्षक हो जाता है। हालांकि दही और मसालों का इस्तेमाल अपनी व्रत परंपरा के अनुसार ही करें।
    नवरात्रि के दौरान यह चाट फलाहार में स्वाद का नया विकल्प दे सकती है। शकरकंदी और पनीर के साथ मखाने तथा मूंगफली इसे अलग-अलग बनावट और स्वाद देते हैं। इसे बनाने में ज्यादा मेहनत नहीं लगती और डीप फ्राई किए बिना भी स्वादिष्ट चाट का आनंद लिया जा सकता है।
  • Vijayasan Mata Mandir: दर्शन मात्र से दूर होते हैं कष्ट, गुप्त नवरात्र में उमड़ता है आस्था का सैलाब

    Vijayasan Mata Mandir: दर्शन मात्र से दूर होते हैं कष्ट, गुप्त नवरात्र में उमड़ता है आस्था का सैलाब


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित विजयासन माता मंदिरगुप्त नवरात्र के दौरान आस्था और भक्ति का अद्भुत केंद्र बन जाता है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाए जाने वाले गुप्त नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन काल में मां दुर्गा के स्वरूप विजयासन माता के दर्शन करने मात्र से ही भक्तों के जीवन से कष्ट, बाधाएं और संकट दूर हो जाते हैं। गुप्त नवरात्र का विशेष महत्व साधना और तंत्र-उपासना से जुड़ा माना जाता है। इस दौरान दस महाविद्याओं की पूजा का विधान है, जिसमें साधक विशेष व्रत, अनुष्ठान और मंत्र साधना के माध्यम से सिद्धि प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। विजयासन माता मंदिर में इन नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्तों का विश्वास है कि इस अवधि में मां की आराधना करने से शत्रु भय समाप्त होता है, मानसिक शांति मिलती है और जीवन में हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

    गुप्त नवरात्र के अवसर पर मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा रहता है। सुबह से देर रात तक मां के जयकारों से पहाड़ी गूंजती रहती है। नवरात्र के दौरान यहां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मेले का भी आयोजन होता है, जिसमें आसपास के जिलों ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई भक्त मनोकामना पूरी होने पर विशेष पूजा, चुनरी अर्पण और प्रसाद वितरण भी करते हैं। विजयासन माता की महिमा को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। मान्यता है कि मां अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं और हर कार्य में विजय प्रदान करती हैं। यही कारण है कि परीक्षा, मुकदमे, नौकरी, व्यापार या जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति में फंसे श्रद्धालु यहां आकर माता से प्रार्थना करते हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई आराधना कभी निष्फल नहीं जाती।

    विजयासन माता मंदिर का स्थान भी इसकी विशेषता को और बढ़ाता है। यह मंदिर सीहोर जिले के सलकनपुर गांव में एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। नवरात्र के दौरान इन सीढ़ियों पर भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं, लेकिन मां के दर्शन की आस्था हर थकान को भुला देती है। यदि पहुंचने की बात करें तो श्रद्धालु सड़क और रेल मार्ग से आसानी से सीहोर पहुंच सकते हैं। सीहोर रेलवे स्टेशन से सलकनपुर गांव सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। निकटतम हवाई अड्डा भोपाल है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। इंदौर मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह स्थान सुगम है। कुल मिलाकर, विजयासन माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह विश्वास का प्रतीक भी है, जहां भक्त मां की शरण में जाकर अपने जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं।

  • सर्वार्थसिद्धि योग में माघी गुप्त नवरात्र आरंभ, नौ दिनों में बनेंगे छह शुभ योग

    सर्वार्थसिद्धि योग में माघी गुप्त नवरात्र आरंभ, नौ दिनों में बनेंगे छह शुभ योग


    उज्जैन । साधना, तंत्र और मंत्र आराधना के लिए विशेष माने जाने वाले माघी गुप्त नवरात्र का शुभारंभ इस वर्ष सर्वार्थसिद्धि योग में हुआ है। सोमवार से प्रारंभ हुए इन गुप्त नवरात्रों में पूरे नौ दिनों तक देवी उपासना का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अत्यंत शुभ मानी जा रही है, जिसके कारण साधकों को मनवांछित फल मिलने की प्रबल संभावना है।

    माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक चलने वाले इन गुप्त नवरात्रों का उल्लेख श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में भी मिलता है। शास्त्रों के अनुसार वर्षभर में चार नवरात्र होते हैं, जिनमें चैत्र और अश्विन मास के नवरात्र प्राकट्य नवरात्र कहलाते हैं, जबकि माघ और आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त नवरात्र माने गए हैं। गुप्त नवरात्र विशेष रूप से तांत्रिक साधना, मंत्र-सिद्धि और यंत्र आराधना के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, जिन्हें साधक सामान्य जन से गुप्त रूप से करते हैं।

    इस बार पंचांग की गणना के अनुसार 19 जनवरी, सोमवार को प्रतिपदा तिथि पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वज्र योग और मकर राशि में चंद्रमा की साक्षी में माघी गुप्त नवरात्र का शुभारंभ हुआ। नवरात्र के दौरान कुल छह शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो साधना को और अधिक प्रभावशाली बना रहा है। साथ ही सूर्य का उत्तरायण काल भी इसी समय चल रहा है, जिसे शास्त्रों में शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

    शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में नवरात्र को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। शक्तिपीठ हरसिद्धि माता मंदिर सहित उज्जैन के अन्य देवी मंदिरों में प्रतिदिन माता का नित्य नए स्वरूप में श्रृंगार किया जाएगा। हरसिद्धि मंदिर में संध्या आरती के समय दीपमालिका प्रज्वलन का विशेष आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। मंदिर परिसर में पूरे नौ दिनों तक भक्तिमय वातावरण बना रहेगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्र के दौरान की गई साधना अत्यंत शीघ्र फल देने वाली होती है। साधक इस अवधि में शक्ति उपासना के साथ-साथ अपने आत्मिक और आध्यात्मिक विकास के लिए भी विशेष अनुष्ठान करते हैं। माना जाता है कि इन दिनों मां दुर्गा अपने साधकों की गुप्त तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें सिद्धि, सफलता और बाधाओं से मुक्ति का वरदान देती हैं। इस प्रकार सर्वार्थसिद्धि योग और अनेक शुभ ग्रह संयोगों के बीच प्रारंभ हुए माघी गुप्त नवरात्र श्रद्धालुओं और साधकों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर लेकर आए हैं।