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  • ‘बांग्लादेश की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं’, भारतीय उच्चायुक्त के बयान के विरोध में नाहिद इस्लाम और जमात का सख्त रुख

    ‘बांग्लादेश की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं’, भारतीय उच्चायुक्त के बयान के विरोध में नाहिद इस्लाम और जमात का सख्त रुख


    नई दिल्ली ।
    भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों के बीच एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है। बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख नेता नाहिद इस्लाम ने भारत के नवनियुक्त उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की एक टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि भारत और बांग्लादेश की पहचान, संप्रभुता और राष्ट्रीय अस्तित्व अलग-अलग हैं तथा दोनों देशों को इसी आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाना चाहिए।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब हाल ही में ढाका में कार्यभार संभालने वाले भारतीय उच्चायुक्त ने दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और बांग्लादेश एक ही आसमान और हवा साझा करते हैं। उनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक निकटता और सहयोग को रेखांकित करना था, लेकिन इस बयान को लेकर बांग्लादेश के कुछ राजनीतिक दलों ने अलग दृष्टिकोण अपनाया।

    चट्टोग्राम में आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान नाहिद इस्लाम ने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बांग्लादेश एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है तथा उसकी राष्ट्रीय पहचान किसी भी अन्य देश से अलग है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सभी देशों के साथ सम्मान और समानता के आधार पर संबंध चाहता है, लेकिन किसी भी प्रकार के प्रभाव या वर्चस्व की धारणा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके बयान को वहां मौजूद समर्थकों ने भी समर्थन दिया।

    नाहिद इस्लाम ने अपने संबोधन में भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े कुछ पुराने मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने सीमा सुरक्षा, सीमा पर होने वाली घटनाओं और जल संसाधनों से जुड़े मामलों को दोनों देशों के संबंधों में संवेदनशील विषय बताया। उनका कहना था कि इन मुद्दों का समाधान आपसी विश्वास और संवाद के माध्यम से होना चाहिए ताकि द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक वातावरण बना रहे।

    इस मुद्दे पर केवल एनसीपी ही नहीं, बल्कि जमात-ए-इस्लामी ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी नेतृत्व ने भारतीय उच्चायुक्त की टिप्पणी को लेकर स्पष्टीकरण की मांग उठाई है। इससे स्पष्ट है कि बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में भारत से जुड़े विषय अभी भी महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों के रूप में मौजूद हैं और विभिन्न दल इन पर अपने-अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत से जुड़े मुद्दों पर बयानबाजी का प्रभाव आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर लगातार संवाद जारी है, राजनीतिक बयान संबंधों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे रहे हैं।

    भारत और बांग्लादेश के संबंध दक्षिण एशिया की सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय साझेदारियों में गिने जाते हैं। दोनों देशों ने पिछले वर्षों में कई क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत किया है। हालांकि समय-समय पर राजनीतिक बयान और घरेलू मुद्दों से जुड़ी प्रतिक्रियाएं सार्वजनिक विमर्श को प्रभावित करती रही हैं। मौजूदा घटनाक्रम भी इसी क्रम की एक कड़ी माना जा रहा है, जिस पर दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।

  • सुप्रिया सुले ने की राहुल गांधी की खुलकर तारीफ, बोलीं ईमानदारी का ओलंपिक होता तो…

    सुप्रिया सुले ने की राहुल गांधी की खुलकर तारीफ, बोलीं ईमानदारी का ओलंपिक होता तो…


    नई दिल्ली। एनसीपी एसपी सांसद सुप्रिया सुले ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की खुलकर तारीफ की है। सोमवार 20 अप्रैल को उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को किसी भी जांच एजेंसी से डर नहीं लगता। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि अगर ईमानदारी के लिए ओलंपिक में कोई पदक होता, तो राहुल गांधी निश्चित रूप से उसे जीतते।

    महिला आरक्षण पर उठाए सवाल

    महिला आरक्षण को लेकर सुप्रिया सुले ने कहा कि हालिया विधेयक वास्तव में महिलाओं के आरक्षण का नहीं, बल्कि परिसीमन डिलिमिटेशन से जुड़ा मुद्दा था। उन्होंने दावा किया कि महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक पहले ही 2003 में पारित हो चुका है और इसे राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित भी किया जा चुका है।

    देवेंद्र फडणवीस पर साधा निशाना
    सुले ने देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि वे यह कहते हैं कि जनगणना के कारण 2029 तक महिला आरक्षण लागू होने में देरी हो रही है, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि जनगणना प्रक्रिया को तेज करने से किसने रोका। उनके मुताबिक, समय पर जनगणना पूरी कर इसे लागू किया जा सकता था।

    आदिवासी लड़कियों के लापता होने पर जताई चिंता
    उन्होंने महाराष्ट्र में आदिवासी लड़कियों के लापता होने के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। सुले ने कहा कि सत्ताधारी दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोप गलत हैं और लोकतंत्र में हर किसी को विरोध करने का अधिकार है।

    आईएएस अधिकारी के व्यवहार पर कार्रवाई की मांग

    सुप्रिया सुले ने MHADA के सीईओ संजीव जायसवाल से जुड़े एक कथित मामले का जिक्र करते हुए कहा कि गोरेगांव के मोतीलाल नगर में स्थानीय निवासियों को धमकाने के आरोप वाले वायरल वीडियो पर मुख्यमंत्री को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले पर ध्यान दिया होगा।

  • Maharashtra: सुनेत्रा पवार की जगह बेटे पार्थ को राज्यसभा भेजेगी NCP, आधी रात को लिया गया फैसला

    Maharashtra: सुनेत्रा पवार की जगह बेटे पार्थ को राज्यसभा भेजेगी NCP, आधी रात को लिया गया फैसला


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) की सात राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव (Rajya Sabha Election) से पहले राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। महायुति की सरकार में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party- NCP) ने इस संबंध में अपने उम्मीदवार को लेकर बड़ा फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार,सोमवार की रात प्रफुल्ल पटेल (Prafull Patel) के आवास पर पार्टी की कोर कमेटी की हुई बैठक में पार्थ पवार को राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने पर सहमति बनी है। इस अहम बैठक मुंबई में प्रफुल्ल पटेल के अलावा उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

    सूत्रों ने बताया कि बैठक में केवल राज्यसभा उम्मीदवार ही नहीं, बल्कि पार्टी की आगामी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। 26 फरवरी को होने वाली इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर मुहर लग सकती है, जहां सुनेत्रा पवार का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। यह बैठक मुंबई के वर्ली डोम में आयोजित होने की संभावना है।


    बीजेपी कोर कमेटी की आज बैठक

    दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी अपने उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। ABP माझा के मुताबिक, इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निवास पर मंगलवार की रात करीब 10 बजे कोर कमेटी की बैठक बुलाई गई है। पार्टी इस बार राज्यसभा की चार सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। इनमें रामदास अठावले का नाम लगभग तय माना जा रहा है, जबकि विनोद तावड़े, विजया रहाटकर और धैर्यशील पाटिल के नामों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।


    बीजेपी चार सांसद भेज सकती है

    महाराष्ट्र में इस बार राज्यसभा की 7 सीटें खाली हैं और 286 विधायकों के आधार पर एक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 वोटों की जरूरत होगी। आंकड़ों के अनुसार, सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के पास स्पष्ट बढ़त है। अकेले BJP के पास एक निर्दलीय को मिलाकर कुल (131+1) यानी 132 विधायकों का समर्थन है, जिससे वह 3 से 4 सांसद आसानी से भेज सकती है। वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) अपने 58 विधायकों के साथ एक सीट सुरक्षित कर सकती है, जबकि NCP (अजित पवार गुट) भी एक सीट जीतने की स्थिति में है क्योंकि अजित पवार की मौत के बाद उसके पास 40 विधायक हैं।


    महाविकास अघाड़ी के पास एक को भेजने की क्षमता

    इसके मुकाबले महाविकास अघाड़ी (MVA), जिसमें कांग्रेस, NCP (शरद पवार गुट) और शिवसेना (ठाकरे गुट) शामिल हैं, के पास कुल मिलाकर लगभग 49 विधायकों का समर्थन है। इस संख्या के आधार पर MVA केवल एक सीट ही सुरक्षित कर सकती है। राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से महायुति गठबंधन 6 सीटों पर मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है, जबकि विपक्षी गठबंधन को सीमित सफलता मिलने की संभावना है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव 2026 में सत्ता पक्ष का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन और अंतिम रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हैं।

  • अजित पवार विमान हादसा: एनसीपी MLC का दावा, क्या पायलट था आत्मघाती हमलावर?

    अजित पवार विमान हादसा: एनसीपी MLC का दावा, क्या पायलट था आत्मघाती हमलावर?


    मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अजित पवार की मौत और बारामती विमान हादसे को लेकर सवाल लगातार बढ़ रहे हैं। एनसीपी एमएलसी अमोल मितकरी ने इस घटना को 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या से जोड़ते हुए कहा कि यह सिर्फ दुर्घटना नहीं बल्कि बड़ी साजिश हो सकती है।

    मितकरी का विवादित दावा
    अकोला में जनसभा में मितकरी ने कहा, “जैसे LTTE ने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रची थी, उसी तरह अजित पवार के मामले में भी साजिश रची गई। क्या विमान उड़ा रहे कैप्टेन सुमित कपूर आत्मघाती थे? अगर उनकी पत्नी कह रही हैं कि वे जिंदा हैं, तो इस हादसे में वास्तव में कौन मरा?”

    उन्होंने सवाल उठाया कि महाराष्ट्र में इतनी शांति क्यों है जबकि घटना के आसपास कई सवाल हैं। मितकरी ने कहा कि केवल तकनीकी जांच पर्याप्त नहीं है और ब्लैक बॉक्स डेटा के अलावा सीसीटीवी फुटेज भी जनता के सामने आना चाहिए।

    जांच और सीसीटीवी की मांग

    एमएलसी ने पूछा कि कैप्टेन साहिल मदान और कैप्टेन को विमान उड़ाना था, वे कहाँ हैं और उनके मूवमेंट का सीसीटीवी फुटेज क्यों जारी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को केवल तकनीकी पक्ष तक सीमित नहीं रहना चाहिए और दृश्य साक्ष्य भी सामने लाना चाहिए।

    बारामती में प्रदर्शन

    बारामती में एनसीपी कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने प्रशासनिक भवन के बाहर इकट्ठा होकर जांच की मांग की। लोगों ने पवार की स्मृतियों से जुड़ी तख्तियां भी रखीं। स्थानीय निवासी बोले कि हादसे को 25 दिन हो गए हैं, लेकिन कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं। उपमंडलीय मजिस्ट्रेट को गहन जांच के लिए ज्ञापन भी सौंपा गया।

    सरकार की प्रतिक्रिया

    मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हादसे की सीबीआई जांच का अनुरोध कर चुकी है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि विमान हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट 28 फरवरी या उससे पहले आ जाएगी।
  • महाराष्ट्र की राजनीति में नई समस्या… अजित पवार के निधन के बाद उलझी NCP के दोनों गुटों के विलय की गुत्थी?

    महाराष्ट्र की राजनीति में नई समस्या… अजित पवार के निधन के बाद उलझी NCP के दोनों गुटों के विलय की गुत्थी?


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में एक नई असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जब अजित पवार (Ajit Pawar) के आकस्मिक निधन ने एनसीपी (NCP) के दोनों गुटों के विलय की संभावना को लेकर विरोधाभासी दावे सामने ला दिए हैं। शरद पवार (Sharad Pawar) ने यह संकेत दिया कि अजित पवार के साथ विलय को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत चल रही थी, जबकि देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और अजित पवार के गुट के अन्य वरिष्ठ नेता इस दावे से पूरी तरह इनकार कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन दावों की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि अजित पवार उनके साथ लगातार संपर्क में थे, लेकिन उन्होंने कभी भी विलय का विषय उठाया नहीं। फडणवीस ने यह भी कहा कि महायुति सरकार में अजित पवार की स्थिति मजबूत थी, और ऐसे में पार्टी छोड़ने या विलय की संभावना बेहद कम थी।

    एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल ने भी यह स्पष्ट किया कि 2023 में एनडीए में शामिल होने का फैसला अंतिम था और शरद पवार के साथ विलय पर कोई बातचीत नहीं हुई थी। तटकरे ने यह भी कहा कि अब एनसीपी (अजित पवार गुट) एनडीए का हिस्सा है, और शरद पवार पर निर्भर है कि वे अपनी पार्टी को सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल करना चाहते हैं या नहीं।


    शरद पवार का बयान: बंद दरवाजे की बातचीत

    इस बीच, शरद पवार ने इन दावों का जवाब देते हुए कहा कि विलय की चर्चा ‘बंद दरवाजे’ में हुई थी, जिसमें केवल अजित पवार, जयंत पाटिल, सुप्रिया सुले और रोहित पवार शामिल थे। उनका कहना था कि देवेंद्र फडणवीस और सुनील तटकरे जैसे लोग इस मामले से बाहर थे, और इसलिए उनके पास इस पर कोई सही जानकारी नहीं थी। इसके साथ ही, अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में नेतृत्व संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रफुल पटेल और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता अब सुनेत्रा पवार को उनके दिवंगत पति के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।


    पार्थ पवार को कम प्रोफाइल रखने की सलाह

    सुनेत्रा पवार को पार्टी के विधायक दल का नेता चुना गया है और उन्होंने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ भी ली है। शरद पवार ने इस स्थिति के बारे में भी कोई जानकारी नहीं होने की बात कही, जिससे पार्टी और परिवार के बीच तनाव और गहरा गया। खासतौर पर तब, जब भाजपा ने पार्थ पवार को हालिया विवादों के मद्देनजर लो प्रोफाइल बनाए रखने की सलाह दी। यह चर्चा भी उठी कि एनसीपी पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने पर विचार कर रही है, क्योंकि यह सीट उनकी मां सुनेत्रा के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई है।

    वहीं, पार्थ पवार और शरद पवार एक बंद कमरे में अपने पिता के मेमोरियल पर चर्चा कर रहे थे, जबकि उनकी मां सुनेत्रा पवार राज्य की उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले रही थीं। इस समय, भाजपा शरद पवार गुट को महायुति में शामिल करने को लेकर संकोच कर रही है, जिससे दोनों गुटों के विलय की संभावनाओं पर ब्रेक लग रहा है।


    एनसीपी का भविष्य और राजनीति की जटिलता

    इस स्थिति के चलते एनसीपी का भविष्य अब अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि दोनों गुट सत्ता पर नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भाजपा पर्दे के पीछे राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर रही है, जिससे एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की प्रक्रिया रुक गई है।

  • सुनेत्रा पवार को डिप्टी CM बनाने की मांग तेज, NCP नेताओं की CM फडणवीस से मुलाकात

    सुनेत्रा पवार को डिप्टी CM बनाने की मांग तेज, NCP नेताओं की CM फडणवीस से मुलाकात


    मुंबई । महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। उनके पद, विभागों और एनसीपी की भविष्य की दिशा को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। पार्टी के भीतर यह मांग उठने लगी है कि उपमुख्यमंत्री का पद अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को सौंपा जाए।

    इन्हीं मुद्दों को लेकर शुक्रवार को एनसीपी के वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने उनके आधिकारिक निवास वर्षा बंगले पहुंचे। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे शामिल थे। यह बैठक करीब आधे घंटे तक चली, जिसमें विभागों के बंटवारे और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा हुई।

    पोर्टफोलियो और नेतृत्व को लेकर मंथन

    अजित पवार के पास सरकार में वित्त, आबकारी और खेल जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी थी, साथ ही वे उपमुख्यमंत्री भी थे। अब पार्टी के भीतर इस बात पर गहन विचार चल रहा है कि इन विभागों की जिम्मेदारी किसे दी जाए और एनसीपी की राष्ट्रीय कमान किसके हाथ में होगी। पार्टी सूत्रों का दावा है कि एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर जो बातचीत अजित पवार कर रहे थे, उस पर अंतिम निर्णय शरद पवार ही लेंगे।

    प्रफुल्ल पटेल का बयान: जल्द हो फैसला

    मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद प्रफुल्ल पटेल ने मीडिया से कहा कि पार्टी ने जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जल्द निर्णय लेने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा, “अजित पवार के विभागों और एनसीपी से जुड़े फैसलों को लेकर अनिश्चितता नहीं होनी चाहिए। मौजूदा हालात में कार्यकर्ताओं और जनता की भावनाओं को देखते हुए देरी ठीक नहीं है।”

    NCP में टूट और मौजूदा राजनीतिक समीकरण

    शरद पवार द्वारा 1999 में स्थापित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जुलाई 2023 में दो हिस्सों में बंट गई थी, जब अजित पवार महायुति सरकार में शामिल हुए थे। उस समय उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने पर भी अजित पवार उसी पद पर बने रहे। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच कानूनी संघर्ष हुआ, जिसमें अजित पवार के गुट को मूल एनसीपी नाम और ‘एनालॉग अलार्म घड़ी’ चुनाव चिह्न मिला। फिलहाल अजित पवार का गुट सत्तारूढ़ महायुति का हिस्सा है, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी एसपी विपक्षी महा विकास अघाड़ी में शामिल है।

    आगे क्या?

    अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, विभागों का बंटवारा किस दिशा में होता है और एनसीपी के दोनों गुटों के भविष्य को लेकर शरद पवार क्या फैसला लेते हैं। आने वाले दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए अहम साबित हो सकते हैं।

  • महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ टला एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की तैयारी अंतिम दौर में थी, 8 फरवरी को होना था ऐलान

    महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ टला एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की तैयारी अंतिम दौर में थी, 8 फरवरी को होना था ऐलान


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में फरवरी के पहले हफ्ते एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता था। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों धड़ोंशरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपीके एक होने की पटकथा लगभग तैयार थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक 8 फरवरी 2026 को औपचारिक विलय की घोषणा होनी थी, लेकिन कुछ राजनीतिक और रणनीतिक कारणों से यह प्रक्रिया फिलहाल टाल दी गई।

    बीते कुछ महीनों से चाचा-भतीजे की बढ़ती नजदीकियां महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का केंद्र बनी रहीं। पुणे और बारामती क्षेत्र में स्थानीय निकाय स्तर पर दोनों गुटों के नेताओं का साथ आना इस बात का संकेत माना जा रहा था कि पार्टी में आई टूट स्थायी नहीं रहेगी। इसी बीच बंद कमरे में हुई कई बैठकों ने सियासी हलचल और तेज कर दी थी।

    जिला परिषद चुनाव के बाद ऐलान की रणनीति
    एक रिपोर्ट के अनुसार, विलय को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी। जिला परिषद और नगर निकाय चुनावों के बाद औपचारिक घोषणा की रणनीति तय की गई थी। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि बंटा हुआ जनाधार आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में नुकसान पहुंचा सकता है।

    एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने पुष्टि की कि दोनों गुटों के बीच लगातार संवाद चल रहा था। उन्होंने बताया कि 16 जनवरी को उनके आवास पर अहम बैठक हुई, जिसमें चुनाव साथ लड़ने और संगठनात्मक ढांचे को लेकर अंतिम दौर की चर्चा की गई। इसके अगले दिन 17 जनवरी को शरद पवार के आवास पर भी भविष्य की रणनीति पर मंथन हुआ।

    कैबिनेट फेरबदल पर भी हुई चर्चा
    एनसीपी (एसपी) नेता शशिकांत शिंदे ने भी स्वीकार किया कि विलय को लेकर बातचीत नई नहीं है और दोनों पक्षों की सहमति से आगे बढ़ रही थी। उनके अनुसार, अजित पवार पहले ही संकेत दे चुके थे कि स्थानीय निकाय चुनावों के बाद दोनों गुट साथ आ सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए चेहरों को सरकार में शामिल करने पर भी अनौपचारिक चर्चा हुई थी।

    दोनों गुटों ने हाल के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में गठबंधन किया था और 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनावों में भी साथ लड़ने की योजना बनाई गई थी।

    दुर्घटना के बाद रुकी प्रक्रिया
    28 जनवरी 2026 को विमान दुर्घटना में अजित पवार के असामयिक निधन के बाद विलय की आधिकारिक घोषणा पर फिलहाल विराम लग गया। हालांकि शिंदे ने संकेत दिए हैं कि प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और अनुकूल परिस्थितियों में इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विलय होता, तो यह शरद पवार की पार्टी के लिए सरकार में शामिल होने की दिशा में बड़ा कदम साबित होता। फिलहाल एनसीपी (एसपी) महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है, जबकि अजित पवार की एनसीपी सत्तारूढ़ महायुति में शामिल रही है। ऐसे में दोनों गुटों का एक होना राज्य की सत्ता राजनीति के समीकरण पूरी तरह बदल सकता था।

    भले ही 8 फरवरी को होने वाला संभावित ऐलान टल गया हो, लेकिन एनसीपी के दोनों गुटों के एक होने की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में इससे जुड़ा कोई बड़ा फैसला फिर सुर्खियों में आ सकता है।

  • महाराष्ट्र निकाय चुनाव में 4 बच्चों की मां का आवेदन स्वीकार, नियमों पर उठे सवाल, अब शरद पवार की पार्टी का क्या होगा?

    महाराष्ट्र निकाय चुनाव में 4 बच्चों की मां का आवेदन स्वीकार, नियमों पर उठे सवाल, अब शरद पवार की पार्टी का क्या होगा?


    महाराष्ट्र । महाराष्ट्र के नागपुर नगर निगम चुनाव में एक महिला उम्मीदवार का आवेदन स्वीकार कर लिया गया है जो चार बच्चों की मां हैं। यह मामला इसलिए विवादित हो गया है क्योंकि राज्य के नियमों के अनुसार दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार नगर निगम चुनाव में नहीं भाग ले सकते। इस बार दक्षिण-पश्चिम नागपुर के वार्ड 36 से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार पुष्पा मुकेश वाघमारे का नामांकन स्वीकार कर लिया गया, जबकि उनके चार बच्चे हैं।

    नियमों की अनदेखी या प्रशासन की गलती

    महाराष्ट्र में एक कानून के तहत 1995 में लागू किए गए महाराष्ट्र नगर निगम और नगर परिषद नगर पंचायत और औद्योगिक टाउनशिप द्वितीय संशोधन अधिनियम के अनुसार दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार नगर निगम चुनावों में भाग नहीं ले सकते। बावजूद इसके पुष्पा वाघमारे का नामांकन स्वीकार किया गया। महिला उम्मीदवार ने खुद अपने एफिडेविट में अपने चार बच्चों का विवरण दिया था और यह जानकारी स्पष्ट रूप से चुनाव अधिकारियों के पास थी, फिर भी उनका आवेदन मंजूर कर लिया गया।पुष्पा वाघमारे ने इस विवाद पर कहा मुझे नियमों के बारे में जानकारी नहीं थी क्योंकि मैं पहली बार चुनाव लड़ रही हूं। मेरा नामांकन स्वीकार कर लिया गया है और मैं अपनी जिम्मेदारी नहीं उठाऊंगी अगर इसमें कोई गलती हुई है। मैं चुनाव में बनी रहूंगी और मुझे बेवजह परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

    क्या शरद पवार के लिए यह परेशानी का कारण बनेगा

    यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है और सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह विवाद NCP के लिए राजनीतिक परेशानी का कारण बनेगा। शरद पवार की पार्टी के तहत इस तरह के नियमों की अनदेखी ने विरोधियों को मौक़ा दिया है। वैसे भी महाराष्ट्र में भाजपा ने 2017 तक लगातार तीन कार्यकालों तक नागपुर नगर निगम पर अपना नियंत्रण बनाए रखा था और अब देखना यह है कि शरद पवार के नेतृत्व में NCP इस विवाद को कैसे संभालती है।

    पुष्पा वाघमारे का समाज में अच्छा प्रभाव

    पुष्पा वाघमारे को उनके क्षेत्र में एक छोटे से कैटरिंग व्यवसायी के रूप में जाना जाता है और वे एक समाजसेवी भी हैं। स्थानीय महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता है, और उनका दावा है कि उनके क्षेत्र में जल निकासी की समस्या है, जो भारी बारिश के दौरान बाढ़ का कारण बनती है। वे इन समस्याओं को हल करने के लिए चुनाव में उतर रही हैं।

    नागपुर की चुनावी स्थिति और विवाद

    नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह नगर है। 2017 में हुए नगर निगम चुनाव तक भाजपा ने इस नगर निगम पर लगातार तीन कार्यकालों तक अपना नियंत्रण बनाए रखा था। अब जब NCP ने इस सीट पर अपनी उम्मीदवार उतारी है तो यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है। हालांकि यह साफ नहीं है कि प्रशासन की लापरवाही से पुष्पा का नामांकन स्वीकार किया गया या इसे जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया गया लेकिन इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा दिए हैं। राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या NCP इस विवाद से बचने के लिए जल्दी से कदम उठाएगी या पार्टी इसे अपने चुनावी अभियान का हिस्सा बनाएगी।

  • महानगर पालिका चुनावों से पहले महायुति को मिली बढ़त 66 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए

    महानगर पालिका चुनावों से पहले महायुति को मिली बढ़त 66 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में आगामी महानगरपालिका चुनावों से पहले भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को बड़ी बढ़त मिली है। शुक्रवार को नामांकन पत्रों की वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद महायुति के 66 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है। वहीं अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के दो उम्मीदवारों को भी निर्विरोध जीत मिली है।महानगरपालिका चुनावों में अब तक की स्थिति यह रही कि विपक्षी दलों और गठबंधनों के उम्मीदवारों ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है जिससे कुल 68 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। इनमें से 66 भाजपा और शिवसेना गठबंधन से हैं जबकि एनसीपी के दो उम्मीदवार भी निर्विरोध विजयी हुए हैं।

    प्रमुख क्षेत्रों में महायुति की बढ़त

    मुंबई महानगर क्षेत्र एमएमआर में कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में महायुति के सबसे अधिक 21 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए जिनमें से 15 भाजपा और 6 शिवसेना के थे। उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव जिले में भी भाजपा और शिवसेना ने समान सफलता हासिल की जहां दोनों दलों के छह-छह उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए।

    पनवेल और भिवंडी में महायुति की मजबूत पकड़

    पनवेल में भाजपा ने सात उम्मीदवारों को निर्विरोध जीत दिलाई है जबकि भिवंडी में जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी NCP का प्रभाव रहा है भाजपा के छह उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए।

    धुले और अहिल्यानगर में परिणाम

    धुले जिले में भाजपा के तीन उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। अहिल्यानगर में निर्विरोध चुनावों में एनसीपी को दो सीटें मिलीं जबकि भाजपा ने एक सीट पर विजय प्राप्त की।ठाणे में शिवसेना की सफलताएं और राज ठाकरे का विरोध ठाणे जिले में जहां सत्तारूढ़ महायुति के बीच राजनीतिक मतभेद थे शिवसेना ने छह सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज की है। हालांकि राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना MNS ने इन निर्विरोध चुनावों को लेकर आपत्ति जताई है और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

    राजनीतिक विश्लेषक की राय

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हाल ही में संपन्न नगर परिषद चुनावों में महायुति के क्लीन स्वीप के बाद इन निर्विरोध जीतों से राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन को मनोवैज्ञानिक बढ़त और नई ऊर्जा मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार निर्विरोध जीत के चलते महायुति को संगठनात्मक मजबूती मिलेगी और वे उन क्षेत्रों में भी पूरी ताकत से प्रचार कर सकेंगे जहां सीधा चुनावी मुकाबला बाकी है।महाराष्ट्र में बीएमसी समेत अन्य महानगरपालिका चुनावों के लिए 15 जनवरी को मतदान होगा और 16 जनवरी को परिणाम घोषित किए जाएंगे।

  • PMC चुनाव में सियासी सरगर्मी,अजित पवार से नहीं बनी बात, शरद पवार गुट फिर MVA में वापसी के लिए तैयार

    PMC चुनाव में सियासी सरगर्मी,अजित पवार से नहीं बनी बात, शरद पवार गुट फिर MVA में वापसी के लिए तैयार


    नई दिल्ली। पुणे महानगरपालिका (PMC) चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शरद पवार गुट की एनसीपी (NCP-SP) ने अजित पवार गुट के साथ गठबंधन की बातचीत टूटने के बाद फिर से महाविकास आघाड़ी (MVA) के साथ वार्ता शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार ने शरद पवार गुट की प्रमुख मांगों को ठुकरा दिया और 68 सीटों का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया।

    पिछले सात दिनों से दोनों एनसीपी गुटों के बीच संभावित गठबंधन पर चर्चा चल रही थी, लेकिन बातचीत अंततः असफल रही।

    अजित पवार ने जोर देकर कहा कि शरद पवार गुट के समर्थित उम्मीदवार केवल ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न पर ही चुनाव लड़ें। शरद पवार गुट का कहना है कि यदि यह शर्त मान ली जाती तो पुणे शहर में उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाता।

    अजित पवार ने 68 सीटों का प्रस्ताव ठुकराया
    अजित पवार ने तर्क दिया कि 2017 के PMC चुनाव में एनसीपी एकजुट थी, तब केवल 43 सीटें जीती थीं। इसलिए 68 सीटों की मांग अव्यवहारिक है।

    शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता ने कहा, अजित पवार की शर्तों को मान लेना हमारे लिए अस्वीकार्य था, क्योंकि इससे पुणे में हमारे उम्मीदवारों का अस्तित्व ही खत्म हो जाता।

    इस इनकार के बाद सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल सहित NCP-SP के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि PMC चुनाव एमवीए के साथ मिलकर लड़ा जाएगा।

    नतीजतन, पुणे में तीनों पारंपरिक एमवीए सहयोगी दलकांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी-एसपीके बीच नई वार्ता शुरू हो गई है। हालांकि पिंपरी-चिंचवड़ में दोनों एनसीपी गुटों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना बनी हुई है।

    शरद पवार गुट की MVA में वापसी
    पहले शरद पवार गुट और अजित पवार के गठबंधन की संभावना ने एमवीए में दरार पैदा कर दी थी जिसके चलते कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) अलग होकर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे थे। लेकिन अब एनसीपी-एसपी के एमवीए में लौटने से तीनों दलों के बीच समन्वय बैठकें फिर शुरू हो गई हैं।

    अजित पवार ने इस बीच शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे और पुणे में उनके नेतृत्व वाली शिवसेना नेताओं से संपर्क साधा। सूत्रों के मुताबिक एनसीपी की शिवसेना नेता उदय सामंत के साथ भी बातचीत चल रही है और अजित पवार समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।