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  • गड़े धन का लालच बना मौत का जाल! MP में तंत्र-मंत्र के नाम पर हत्या, नरबलि और करोड़ों की ठगी का काला खेल

    गड़े धन का लालच बना मौत का जाल! MP में तंत्र-मंत्र के नाम पर हत्या, नरबलि और करोड़ों की ठगी का काला खेल


    भोपाल । रातों-रात अमीर बनने का सपना, खेतों में दबे खजाने की कहानियां और तंत्र-मंत्र के जरिए अकूत संपत्ति मिलने का झांसा आज भी लोगों को अंधविश्वास की ऐसी अंधेरी दुनिया में धकेल रहा है, जहां अंत अक्सर हत्या, ठगी और बर्बादी के रूप में होता है। मध्य प्रदेश में हाल के दिनों में सामने आए कई मामलों ने यह साबित कर दिया है कि गड़े धन का मिथक अब केवल अफवाह नहीं, बल्कि संगठित अपराध और अंधविश्वास का खतरनाक हथियार बन चुका है।

    भोपाल के सूखी सेवनिया इलाके में एक पिता ने कथित तांत्रिक के बहकावे में आकर अपनी 17 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी। तांत्रिक ने दावा किया था कि खेत में दबे खजाने तक पहुंचने के लिए लड़की की बलि जरूरी है। पिता ने बेटी की हत्या कर शव खेत में दफना दिया। कई महीने बाद जब खेत की जुताई हुई तो कंकाल मिलने से पूरे मामले का खुलासा हुआ।

    रायसेन जिले में भी गड़े धन की तलाश एक व्यापारी की जिंदगी पर भारी पड़ गई। कथित तांत्रिक ने करोड़ों के खजाने का लालच देकर पूजा कराई और फिर नरबलि की बात कहकर व्यापारी की हत्या कर शव रेत में दफना दिया। पुलिस जांच में यह सनसनीखेज वारदात सामने आई।

    बालाघाट में एक तांत्रिक के कहने पर 11 लोग एक महिला के घर में गड़ा धन तलाशने घुस गए। महिला के जागने पर उस पर चाकू से हमला कर दिया गया। हालांकि आरोपियों को कोई खजाना नहीं मिला और वे घर का सामान लूटकर फरार हो गए। पुलिस ने बाद में गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया।

    मंदसौर में भी कथित तांत्रिकों ने किसान को नोटों की बारिश और गड़ा धन निकालने का सपना दिखाकर करीब 12 लाख रुपये ठग लिए। पूजा-पाठ, भूत-प्रेत और नरबलि का डर दिखाकर लगातार पैसे वसूले जाते रहे। आखिरकार जब नोटों की गड्डियों में असली मुद्रा की जगह छोटे नोट निकले तो पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।

    राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी इस गंभीर समस्या की पुष्टि करते हैं। वर्ष 2024 में देशभर में टोना-टोटका से जुड़ी 54 हत्याएं दर्ज की गईं, जिनमें अकेले मध्य प्रदेश में 17 मामले सामने आए। इस तरह अंधविश्वास से जुड़ी हत्याओं के मामलों में प्रदेश देश में पहले स्थान पर है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि प्राचीन समय में युद्ध के दौरान लोग अपनी संपत्ति जमीन में छिपा देते थे। समय के साथ यह मान्यता बन गई कि ऐसे खजानों की रक्षा अदृश्य शक्तियां करती हैं और विशेष तांत्रिक क्रियाओं से ही उन्हें प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन शास्त्रों में तंत्र-मंत्र से गड़ा धन निकालने, नोटों की बारिश कराने या रातों-रात अमीर बनने का कोई प्रमाण नहीं मिलता। कथित तांत्रिक इसी अज्ञानता और लालच का फायदा उठाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भ्रामक वीडियो और फर्जी दावों ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में जरूरत है कि लोग वैज्ञानिक सोच अपनाएं, अंधविश्वास से दूर रहें और किसी भी तरह के चमत्कार या गड़े धन के दावों पर भरोसा करने से पहले सतर्क रहें। क्योंकि खजाने की तलाश में उठाया गया एक गलत कदम कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए तबाह कर सकता है।

  • स्मार्ट पुलिसिंग की मिसाल बना हरियाणा: CrPIS सिस्टम को मिला राष्ट्रीय मंच पर सम्मान, बढ़ी प्रदेश की प्रतिष्ठा

    स्मार्ट पुलिसिंग की मिसाल बना हरियाणा: CrPIS सिस्टम को मिला राष्ट्रीय मंच पर सम्मान, बढ़ी प्रदेश की प्रतिष्ठा


    नई दिल्ली ।हरियाणा पुलिस ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता और तकनीकी नवाचार का परिचय देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अपराध जांच और अपराधियों की पहचान की प्रक्रिया को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विकसित की गई CrPIS यानी क्राइम एंड क्रिमिनल पर्सोनल इंफॉर्मेशन सिस्टम को देशभर में सराहना मिली है। इस उपलब्धि ने हरियाणा पुलिस को स्मार्ट और तकनीक आधारित पुलिसिंग के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में ला खड़ा किया है।

    नई दिल्ली में आयोजित 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन के दौरान हरियाणा राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो द्वारा विकसित इस अत्याधुनिक प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया। अपराध नियंत्रण और जांच प्रक्रिया को नई दिशा देने वाली इस प्रणाली की सफलता को देखते हुए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने हरियाणा पुलिस को सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस प्रदान कर सम्मानित किया।

    CrPIS प्रणाली का विकास रिकॉर्ड समय में किया गया और इसे प्रभावी रूप से लागू भी किया गया। यही वजह रही कि राष्ट्रीय स्तर पर इसकी विशेष चर्चा हुई। यह प्रणाली अपराधियों और अपराध से जुड़ी सूचनाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण करने के साथ-साथ संदिग्धों की पहचान और जांच प्रक्रिया को अधिक तेज, सटीक और प्रभावशाली बनाने में मदद करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जांच एजेंसियों को अपराधों की गुत्थियां सुलझाने में काफी आसानी होगी और अपराध नियंत्रण की दिशा में भी महत्वपूर्ण परिणाम सामने आएंगे।

    सम्मेलन के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस अत्याधुनिक प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर देशभर से पहुंचे पुलिस अधिकारियों, फॉरेंसिक विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने हरियाणा पुलिस की इस पहल की खुलकर सराहना की। विशेषज्ञों ने इसे तकनीक आधारित पुलिसिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

    हरियाणा पुलिस लगातार डिजिटल और वैज्ञानिक जांच प्रणाली को मजबूत करने के लिए नए प्रयोग कर रही है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व और पुलिस महानिदेशक के मार्गदर्शन में राज्य में स्मार्ट पुलिसिंग को बढ़ावा देने के लिए कई तकनीकी परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। CrPIS की सफलता भी इसी दूरदर्शी सोच और नवाचार की संस्कृति का परिणाम मानी जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक दौर में अपराधों का स्वरूप लगातार बदल रहा है। ऐसे में पारंपरिक जांच पद्धतियों के साथ-साथ तकनीकी साधनों का उपयोग बेहद जरूरी हो गया है। CrPIS जैसी प्रणाली न केवल जांच की गति बढ़ाएगी बल्कि अपराधियों के डेटा का व्यवस्थित प्रबंधन कर कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगी।

    राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान हरियाणा पुलिस के लिए गौरव का विषय है। साथ ही यह देशभर की पुलिस एजेंसियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। CrPIS की सफलता ने साबित कर दिया है कि नवाचार, तकनीक और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से पुलिसिंग को अधिक सक्षम और जनहितकारी बनाया जा सकता है। आने वाले समय में यह प्रणाली अपराध जांच और कानून व्यवस्था के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर सकती है।