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  • खड़गे की टिप्पणी पर एनडीए नेताओं का विरोध, प्रधानमंत्री मोदी के दिवंगत पिता पर बयान को लेकर माफी की मांग तेज

    खड़गे की टिप्पणी पर एनडीए नेताओं का विरोध, प्रधानमंत्री मोदी के दिवंगत पिता पर बयान को लेकर माफी की मांग तेज


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले समेत एनडीए के कई नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। इन नेताओं ने टिप्पणी को अनुचित बताते हुए खड़गे से माफी मांगने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार से जुड़े विषयों पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने नागपुर में बातचीत के दौरान कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे एक ऐसी राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष हैं, जो लगभग 60 से 70 वर्षों तक सत्ता में रही है। ऐसे में पार्टी के प्रमुख का प्रधानमंत्री का अपमान करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां करना गलत है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    आठवले ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उनके पद के प्रति सम्मान से जुड़ा विषय है। उन्होंने खड़गे की टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के बयान से प्रधानमंत्री का अपमान हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए नेता ऐसी टिप्पणियों को सहन नहीं करेंगे।

    उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस मामले में कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खड़गे और राहुल गांधी सहित कांग्रेस के नेताओं की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माता-पिता को लेकर समय-समय पर की गई टिप्पणियां भारतीय संस्कृति और मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। पाठक ने कहा कि देश की जनता इस तरह के बयानों को स्वीकार नहीं करेगी और संबंधित नेताओं को माफी मांगनी चाहिए।

    पाठक ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल सत्ता से बाहर रहने के कारण निराश हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं के बयानों का असर चुनावों में भी दिखाई दे सकता है। उनके मुताबिक, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ आचरण करने वाले नेताओं को जनता चुनाव के दौरान जवाब देती है।

    मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने भी खड़गे की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत माता-पिता को लेकर लगातार अनुचित टिप्पणियां कर रहे हैं और उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। सारंग ने कहा कि लोकतंत्र में इस तरह की भाषा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

    सारंग ने कहा कि भारतीय परंपराओं में दिवंगत व्यक्तियों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करना उचित नहीं माना जाता। उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता पहले भी इस तरह के बयान देते रहे हैं। सारंग के अनुसार, यदि कोई बात अनजाने में एक बार कही जाती है, तो उसे अलग तरह से देखा जा सकता है, लेकिन उन्होंने दावा किया कि खड़गे ने तीन बार ऐसी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जनता इस मामले पर अपना जवाब देगी।

    महाराष्ट्र भाजपा विधायक राम कदम ने भी खड़गे से माफी की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी नेता के दिवंगत माता-पिता को राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। कदम ने कहा कि खड़गे को अपने बयान के लिए हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए।

    राम कदम ने यह भी पूछा कि यदि किसी नेता के अपने पिता के बारे में इसी तरह की अभद्र टिप्पणी की जाए, तो उसे कैसा महसूस होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास राजनीतिक मुद्दों की कमी है और इसी कारण इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टिप्पणी से प्रधानमंत्री के साथ देश के लोगों की भावनाएं भी आहत हुई हैं।

    भाजपा विधायक पलटू राम ने भी खड़गे की टिप्पणी को निंदनीय बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं के बीच प्रधानमंत्री मोदी और एनडीए नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर प्रतिस्पर्धा चल रही है। उन्होंने खड़गे और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक संवाद में मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।

  • आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों के चुनाव पर रोक, NDA ने YSRCP पर लगाया साजिश का आरोप

    आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों के चुनाव पर रोक, NDA ने YSRCP पर लगाया साजिश का आरोप

    अमरावती। आंध्र प्रदेश में शहरी निकाय चुनावों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य चुनाव आयोग ने 100 शहरी निकायों में जारी चुनाव प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) पर चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया है। वहीं, आयोग अब गुरुवार को इस पर फैसला करेगा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर पाने वाले उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय दिया जाए या नहीं।

    मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री और जनसेना प्रमुख पवन कल्याण तथा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पीवीएन माधव ने संयुक्त बयान जारी कर चुनाव आयोग के फैसले का सम्मान करने की बात कही। गठबंधन नेताओं ने कहा कि उनकी सरकार निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आयोग ने रोकी प्रक्रिया

    शहरी निकाय चुनावों को लेकर विवाद वाईएसआरसीपी की याचिका के बाद बढ़ा। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को उम्मीदवारों की अंतिम सूची 25 अक्टूबर तक जारी करने की प्रक्रिया टालने का निर्देश दिया था। इसके बाद आयोग ने राज्य के सभी 100 शहरी निकायों में चल रही चुनाव प्रक्रिया रोक दी।

    अब आयोग को यह तय करना है कि जिन क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर सके, वहां नामांकन की अंतिम तारीख बढ़ाई जाए या नहीं। इस निर्णय पर राज्य की राजनीतिक गतिविधियों की नजर बनी हुई है।

    एनडीए का आरोप, चुनाव रोकने की कोशिश कर रही YSRCP

    चंद्रबाबू नायडू, पवन कल्याण और पीवीएन माधव ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि गठबंधन सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने और स्थानीय निकायों में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    बयान में कहा गया, “हमने 2024 का चुनाव आंध्र प्रदेश के पुनर्निर्माण के वादे के साथ लड़ा था। लोगों ने हम पर भरोसा किया और गठबंधन को सरकार चलाने की जिम्मेदारी दी। पिछले दो वर्षों में हमने कल्याण, विकास और सुशासन पर ध्यान दिया है। हमने लोगों का विश्वास बहाल किया है।”

    एनडीए नेताओं ने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी शुरुआत से ही स्थानीय निकाय चुनावों को बाधित करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने का तत्काल कारण सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है। विपक्ष पर लगाए गए साजिश के आरोप एनडीए नेताओं के राजनीतिक दावे हैं।

    स्थानीय निकायों के चुनाव को विकास के लिए बताया जरूरी

    एनडीए नेताओं ने कहा कि मजबूत स्थानीय निकाय राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, समय पर चुनाव होने से स्थानीय प्रशासन को मजबूती मिलती है और 16वें वित्त आयोग तथा केंद्र सरकार से मिलने वाली धनराशि से जुड़े प्रावधानों के लिहाज से भी चुनाव महत्वपूर्ण हैं।

    गठबंधन का कहना है कि स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की मौजूदगी विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करती है। इसलिए चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।

    पिछली सरकार के चुनावों को लेकर भी उठाए सवाल

    एनडीए नेताओं ने वाईएसआरसीपी की पिछली सरकार के दौरान हुए चुनावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय राज्य में हिंसा और धमकियों के कारण भय का माहौल बना था तथा विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने में परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

    बयान में गठबंधन नेताओं ने कहा कि वाईएसआरसीपी ने उस समय चुनावी जीत का जश्न मनाया, जबकि अब कानून के अनुसार चुनाव कराने की प्रक्रिया में बाधाएं खड़ी की जा रही हैं।

    एनडीए में शामिल टीडीपी, जनसेना और भाजपा ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपना भरोसा जताते हुए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने में सहयोग देने की बात कही है।

    आयोग के अगले फैसले पर टिकी निगाहें

    आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों की चुनाव प्रक्रिया पर लगी रोक के बाद अब राज्य चुनाव आयोग के अगले फैसले का इंतजार है। खास तौर पर उन क्षेत्रों में नामांकन की समयसीमा बढ़ाने का मुद्दा महत्वपूर्ण है, जहां कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल नहीं कर पाए।

    आयोग का निर्णय आगे की चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय करेगा। फिलहाल इस मुद्दे ने सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी वाईएसआरसीपी के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।

  • CEC विवाद पर NDA नेताओं का विपक्ष पर हमला, बोले आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अराजकता फैलाने की अनुमति किसी को नहीं

    CEC विवाद पर NDA नेताओं का विपक्ष पर हमला, बोले आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अराजकता फैलाने की अनुमति किसी को नहीं

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से जुड़े विवाद और विपक्षी गठबंधन इंडिया तथा CJP के विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करना सभी का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर अराजकता फैलाना उचित नहीं है। नेताओं ने चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। इस मुद्दे पर भाजपा, जनता दल यूनाइटेड और बिहार सरकार के नेताओं ने अलग-अलग बयान देते हुए विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए।

    भाजपा नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि भारतीय संविधान सभी को आंदोलन करने का अधिकार देता है, लेकिन किसी को भी अराजक स्थिति पैदा करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का अर्थ अराजकता नहीं हो सकता। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे किसी के दबाव में न आएं और न ही किसी के बहकावे में आकर कदम उठाएं। तिवारी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं के बाद दो से तीन महीने के भीतर उसने नया राजनीतिक एजेंडा सामने रख दिया और अब चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। उनके अनुसार, इस तरह के आरोप लोकतंत्र और संविधान को बदनाम करने का प्रयास हैं।

    मृत्युंजय तिवारी ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को लेकर यह आरोप भी लगाया कि कुछ राजनीतिक समूह विदेशी शक्तियों के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष की गतिविधियों और उसके राजनीतिक उद्देश्यों पर सवाल उठाए। उनके बयान में आंदोलन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के बीच अंतर पर जोर दिया गया। NDA नेताओं का कहना है कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए और उसके जरिए अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

    जनता दल यूनाइटेड के नेता श्याम रजक ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करना गलत नहीं है। यदि किसी व्यक्ति या संगठन को विरोध दर्ज कराना है, तो वह लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी आंदोलन के अधिकार का समर्थन करती है, लेकिन प्रशासन की भी जिम्मेदारी है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे। रजक के मुताबिक, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को कई तरह के फैसले लेने पड़ते हैं और दिल्ली में उठाए गए कदमों को इसी प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति के समक्ष इंडिया गठबंधन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के बारे में रजक ने कहा कि राष्ट्रपति ने साक्ष्य मांगे हैं और सुप्रीम कोर्ट भी प्रमाणों की अपेक्षा कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं और वह बिना प्रमाण के बातें कर रहा है। रजक ने कहा कि केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें साबित करने के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करना जरूरी है। उन्होंने विपक्ष पर जनता को भ्रमित करके सत्ता हासिल करने और परिवारवाद तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उनके अनुसार, जनता ऐसे राजनीतिक प्रयासों को पहले ही खारिज कर चुकी है।

    बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने राहुल गांधी के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने वोट चोरी से जुड़े सबूत जमा करने की बात कही थी। श्रवण कुमार ने कहा कि राहुल गांधी कोई कागज जमा नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी चुनाव से पहले बिहार सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक अभियान चलाते हैं। मंत्री ने कहा कि जहां विपक्ष की सरकार बनती है, वहां वह वोट चोरी का आरोप नहीं लगाता, जबकि बिहार में NDA की सरकार बनने पर ऐसे आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने विपक्ष के इस रुख पर सवाल उठाते हुए चुनाव संबंधी दावों के समर्थन में प्रमाण पेश करने की जरूरत दोहराई। इस तरह CEC विवाद को लेकर NDA और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

  • शरद पवार ने NCP विलय की अटकलों पर साफ किया रुख, बोले- हम कहीं नहीं जाएंगे, साथ आना है तो हमारे साथ आएं

    शरद पवार ने NCP विलय की अटकलों पर साफ किया रुख, बोले- हम कहीं नहीं जाएंगे, साथ आना है तो हमारे साथ आएं

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में NCP (SP) के संभावित विलय और NDA के साथ जाने को लेकर चल रही अटकलों के बीच शरद पवार ने सोमवार को पार्टी का रुख स्पष्ट कर दिया। मुंबई में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए NCP (SP) प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी कहीं नहीं जाने वाली है। उन्होंने साफ कहा कि यदि किसी को उनके साथ आना है तो वह उनके साथ आए। शरद पवार के इस बयान से पार्टी के किसी दूसरे दल में विलय करने और सत्ता पक्ष के साथ जाने की चर्चाओं के बीच उनका रुख सामने आ गया है।

    शरद पवार ने कहा कि पार्टी को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। पिछले कई महीनों से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि NCP (SP) भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA के साथ जा सकती है। इसके साथ ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर भी चर्चा होती रही है। सोमवार को मुंबई में आयोजित पार्टी की बैठक में शरद पवार ने इन चर्चाओं के बीच स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी सत्ता हासिल करने के लिए किसी दूसरे दल में विलय नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि अब संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा।

    पार्टी की राज्य इकाई की बैठक करीब ढाई घंटे तक चली। इस दौरान संगठन से जुड़े मुद्दों के साथ सूखे की स्थिति और किसानों की समस्याओं पर भी चर्चा हुई। शरद पवार ने कहा कि बैठक में उन्हें सूखे को लेकर कई तरह की मांगें और सुझाव मिले हैं। उन्होंने सूखा राहत के मुद्दे पर सरकार को आंदोलन की चेतावनी भी दी। बैठक में किसानों से जुड़े विषयों पर चर्चा के साथ सूखे की स्थिति को लेकर पार्टी की आगे की रणनीति पर भी विचार किया गया। शरद पवार ने इस मुद्दे को लेकर सरकार के सामने मांगें रखने की बात कही।

    शरद पवार के बयान में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को भी अप्रत्यक्ष संदेश माना गया। सुनेत्रा पवार अजित पवार गुट से जुड़ी हैं। NCP के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर लंबे समय से राजनीतिक चर्चाएं चल रही थीं। ऐसे समय में शरद पवार ने कहा कि NCP (SP) कहीं नहीं जा रही है और अगर किसी को उनके साथ आना है तो वह उनके साथ आए। उनके इस रुख के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।

    NCP (SP) फिलहाल महा विकास आघाड़ी का हिस्सा है। इस गठबंधन में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूटीबी) और कांग्रेस भी शामिल हैं। शरद पवार के बयान से पार्टी की मौजूदा राजनीतिक दिशा को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है। वहीं, बैठक में सूखे और किसानों की समस्याओं को लेकर भी पार्टी ने सरकार पर दबाव बनाने का संकेत दिया। इस तरह सोमवार की बैठक में संगठन को मजबूत करने, विलय की अटकलों और सूखा राहत जैसे प्रमुख मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे।

  • अनुप्रिया पटेल ने CEC पर विपक्ष के आरोपों का किया बचाव, बोलीं- संवैधानिक पदों पर व्यक्तिगत हमला आदत

    अनुप्रिया पटेल ने CEC पर विपक्ष के आरोपों का किया बचाव, बोलीं- संवैधानिक पदों पर व्यक्तिगत हमला आदत

    नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री और अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों पर व्यक्तिगत हमला करना विपक्ष की आदत बन गई है। अनुप्रिया पटेल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

    अनुप्रिया पटेल ने विपक्ष के आरोपों को लेकर कहा कि आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विपक्ष को अपनी हार का अंदाजा पहले से ही हो गया है। उनके अनुसार, इसी वजह से विपक्ष चुनाव से पहले ही हार के लिए कारण तलाश रहा है और भविष्य में अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग के सिर पर डालने की तैयारी कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं और उनके पदाधिकारियों पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बनाने के बजाय संस्थागत प्रक्रिया पर चर्चा होनी चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ने एनडीए और विपक्ष के बीच चुनावी मुकाबले का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले चुनावों में एनडीए गठबंधन के सामने विपक्ष को लगातार पराजय का सामना करना पड़ा है। उनका कहना था कि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी विपक्ष की ओर से अभी से अलग-अलग मुद्दे उठाए जा रहे हैं।

    उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दलों ने संगठनात्मक और चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। अनुप्रिया पटेल ने अपनी पार्टी की तैयारियों को लेकर कहा कि अपना दल आगामी चुनाव के लिए पूरी मुस्तैदी के साथ तैयार है।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन की जीत सुनिश्चित करने में अपना दल ने योगदान दिया था। पार्टी ने दोनों चुनावों में गठबंधन के साथ मिलकर राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी की थी। अनुप्रिया पटेल ने कहा कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में भी उनकी पार्टी पूरी ताकत के साथ गठबंधन के साथ मैदान में उतरेगी।

    अनुप्रिया पटेल ने यह भी दावा किया कि आगामी चुनाव में एनडीए गठबंधन रिकॉर्ड जीत दर्ज करेगा। हालांकि, चुनाव अभी दूर है और राजनीतिक दलों की तैयारियां जारी हैं। ऐसे में उनके बयान को आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन की रणनीति और राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच अनुप्रिया पटेल का बयान राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। विपक्ष जहां चुनाव प्रक्रिया और आयोग की भूमिका को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रख रहा है, वहीं अनुप्रिया पटेल ने इन आरोपों का बचाव करते हुए विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाया है। उन्होंने संवैधानिक पदों पर व्यक्तिगत हमलों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और आगामी चुनाव में एनडीए की तैयारियों को लेकर विश्वास जताया।

  • बिहार में UCC को लेकर एनडीए के घटक दलों का अलग-अलग रुख….

    बिहार में UCC को लेकर एनडीए के घटक दलों का अलग-अलग रुख….


    पटना।
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) के समान आचार संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड- Uniform Civil Code- UCC) को लेकर की गई घोषणा के बाद बिहार (Bihar) में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (National Democratic Alliance) के दलों का अलग-अलग रुख सामने आ रहा है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) साथ देने के मूड में है तो उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने ड्राफ्ट देखने के बाद फैसले की बात कही है। चिराग पासवान ने भी ड्राफ्ट देखने पर ही बात रखने का एलान किया है। लेकिन, सबसे बड़ा और कड़ा रुख जनता दल यूनाईटेड का है। जदयू ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के पुराने स्टैंड का हवाला देते हुए यूसीसी के खिलाफ बयान दिया है।


    जदयू विधायक बोले- लागू नहीं होने देंगे

    जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा या राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद का अब तक सीधा बयान नहीं आया है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने सिर्फ इतना कहा है कि इसपर कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात करेंगे। लेकिन, जनता दल यूनाईटेड के विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने साफ शब्दाें में एलान किया कि इसे बिहार में लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए की सरकार है और जदयू के मुखिया नीतीश कुमार ने शुरुआत से ही यूसीसी का विरोध किया है। इसलिए, एनडीए सरकार में जदयू इसे लागू नहीं होने देगा।


    चिराग पासवान को देखना है ड्राफ्ट, तब बोलेंगे

    चिराग पासवान ने केंद्र की अपनी एनडीए सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर आंख बंद कर भरोसा नहीं है। एनडीए शासित 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने के अमित शाह के बयान के बाद चिराग ने कहा कि वह ड्राफ्ट देखे बगैर कुछ नहीं कह सकते। चिराग ने कहा कि उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रस्तावित यूसीसी का मसौदा पहले सार्वजनिक किया जाए, उसके सभी हितधारकों पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाए और व्यापक विमर्श के बाद ही पार्टी अपना अंतिम रुख स्पष्ट करेगी।


    उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी के अंदर विमर्श करना है

    केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रह चुके और इस समय राज्यसभा के सांसद उपेंद्र कुशवाहा को अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अंदर यूसीसी पर विचार-विमर्श करना है। उन्होंने अमित शाह के बयान के बाद कहा कि क्या प्रस्ताव आता है, वह देखकर ही निर्णय होगा। मतलब, वह सीधे तौर पर अमित शाह के फैसले पर मुहर लगाने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट आने के बाद वह पार्टी के अंदर उसपर विमर्श करेंगे, फिर निर्णय लेंगे।


    मांझी की पार्टी का रुख साफ, हम शाह के साथ

    केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का रुख इसपर सामने नहीं आया है, लेकिन उनके बेटे, बिहार सरकार के मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. संतोष सुमन ने कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह बयान दिया है तो वह हितकारी ही होगा। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू करने में हर्ज तो नहीं दिखता है, बस घटक दलों से इसपर विमर्श कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता देश के लिए दूरगामी तौर पर बेहतर ही होगा।


    गिरिराज सिंह के बयान से तल्खी, बाकी मौन स्वीकृत

    बिहार में यूसीसी लागू हो या नहीं, इसपर प्रदेश के पार्टी नेता चुप्पी साधे हैं। मौन स्वीकृति की बड़ी वजह यह है कि एनडीए के घटक दलों से तकरार न हो। चूंकि पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और देश के मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह का बयान है तो इसपर सभी की स्वीकृति स्वाभाविक है। इस बीच, हंगामा केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के रुख को लेकर है। एनडीए के घटक दलों के अलग-अलग सुर के बीच गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने तुष्टीकरण की नीति के तहत इसे आजादी के समय लागू नहीं होने दिया। गिरिराज ने कहा कि यूसीसी को लागू होने से रोक कर कांग्रेस ने देश को गर्त में धकेल दिया। गिरिराज सिंह के इस बयान के बाद यूसीसी के खिलाफ बोलने वाले एनडीए के दल असहज महसूस कर रहे हैं। इसलिए, ड्राफ्ट देखने की बात पर जोर दिया जा रहा है।

  • 2029 से पहले NDA के सभी 21 राज्यों में लागू होगा UCC: अमित शाह

    2029 से पहले NDA के सभी 21 राज्यों में लागू होगा UCC: अमित शाह

    मुंबई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि वर्ष 2029 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में UCC लागू हो चुका है और उन्हें भरोसा है कि बाकी राज्यों में भी इसे तय समयसीमा से पहले लागू किया जाएगा।

    अमित शाह ने रविवार को मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। UCC के तहत विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में धर्म से अलग समान कानून की व्यवस्था किए जाने का प्रावधान है।

    आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का किया जिक्र

    गृह मंत्री ने केंद्र सरकार की सुरक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा को हर क्षेत्र में प्राथमिकता दी गई है।

    शाह ने कहा कि 2014 से पहले देश की राजनीति में भ्रष्टाचार, जातिवाद और परिवारवाद का बोलबाला था, जबकि भाजपा सरकार आने के बाद राजनीति का आधार प्रदर्शन और कामकाज बना है। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश और रक्षा नीति भी मजबूत हुई है तथा इसमें ‘इंडिया फर्स्ट’ को प्राथमिकता दी जा रही है।

    भारत की आर्थिक प्रगति का भी किया उल्लेख

    अमित शाह ने भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत पहले कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन अब दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने पहली तिमाही में GDP की 7.8 प्रतिशत वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

    गृह मंत्री ने अनुच्छेद 370, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की स्थिति का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक ये ऐसे मुद्दे थे, जो लंबे समय तक देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती बने रहे।

    मणिपुर में NRC पर नेताओं से बातचीत जारी

    मणिपुर में 1951 को आधार वर्ष मानकर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने से जुड़े सवाल पर शाह ने कहा कि राज्य के नेताओं और राजनीतिक दलों के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय होने के बाद इसकी जानकारी दी जाएगी।

    अवैध घुसपैठ को लेकर गृह मंत्री ने सरकार का रुख दोहराते हुए कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान की जाएगी और उन्हें देश से बाहर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक अवैध घुसपैठिए की पहचान कर उसे हटाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मातृभाषा को प्राथमिकता देने की वकालत

    भाषा को लेकर जारी बहस के बीच अमित शाह ने मातृभाषा को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य के नेतृत्व को इस विषय का समाधान निकालना चाहिए। शाह ने आरोप लगाया कि कुछ लोग भाषा के मुद्दे पर लोगों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

    सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोगों के विरोध करने के अधिकार का सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा कि देश में इमरजेंसी नहीं लगाई जा सकती।

    चीन पर संवेदनशील जानकारी साझा करने से इनकार

    चीन और अन्य संवेदनशील रणनीतिक मुद्दों पर अमित शाह ने सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी साझा करने से सशस्त्र बलों को कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को देश की रक्षा क्षमता पर पूरा भरोसा है।

    17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा ‘सेवा संकल्प अभियान’

    अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ की भी घोषणा की। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा।

    17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन है। अभियान में भाजपा, NDA के सहयोगी दल, सामाजिक संगठन और आम लोग शामिल होंगे। इसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा जिलों, लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों तथा बूथ स्तर तक ले जाया जाएगा।

    शाह ने कहा कि अभियान के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन, उनकी उपलब्धियों और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को सामने रखा जाएगा। अभियान के तहत 12 तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गांवों में स्थानीय भाषाओं में संगीत और नाटक के कार्यक्रम भी होंगे, जिन्हें ‘अनटोल्ड स्टोरीज ऑफ नमो सेवा’ नाम दिया गया है।

    फडणवीस बोले- जनकल्याण पर रहेगा जोर

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार और भाजपा मिलकर ‘सेवा संकल्प अभियान’ में हिस्सा लेंगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में NDA के सभी सहयोगी दल अभियान के साथ हैं।

    फडणवीस के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन का अपना महत्व है। अभियान का उद्देश्य आम लोगों के जीवन में बदलाव लाना और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाना है।

  • आरक्षण पर NDA में घमासान: चिराग ने मांगा मांझी का इस्तीफा, बोले- क्रीमी लेयर की बात है तो पहले पद छोड़ें

    आरक्षण पर NDA में घमासान: चिराग ने मांगा मांझी का इस्तीफा, बोले- क्रीमी लेयर की बात है तो पहले पद छोड़ें


    नई दिल्ली। आरक्षण के मुद्दे पर NDA के दो सहयोगी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे की मांग कर दी है। विवाद की शुरुआत HAM की ओर से SC-ST आरक्षण में उप-कोटा और आरक्षण नीति की समीक्षा की मांग के बाद हुई। मांझी ने भी पलटवार करते हुए कहा कि अगर चिराग को गरीबों की चिंता नहीं है तो उन्हें पहले खुद इस्तीफा दे देना चाहिए।

    उप-कोटा की मांग से बढ़ा विवाद

    मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) का कहना है कि SC और ST आरक्षण का लाभ समाज के सबसे कमजोर और लंबे समय से पिछड़े समुदायों तक भी पहुंचना चाहिए। बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण की समीक्षा की जरूरत बताते हुए कहा कि पार्टी आरक्षण खत्म करने के पक्ष में नहीं है, बल्कि इसे ज्यादा न्यायपूर्ण बनाने की मांग कर रही है।

    जीतन राम मांझी बिहार के मुशहर समाज से आते हैं, जिसे दलित समुदाय के सबसे पिछड़े समूहों में माना जाता है। HAM का तर्क है कि पासवान और रविदास जैसे कुछ समुदायों को आरक्षण का अपेक्षाकृत ज्यादा लाभ मिला है, जबकि कई अन्य दलित समुदाय अभी भी पिछड़े हुए हैं।

    संतोष कुमार सुमन का दावा है कि उनके मुशहर समुदाय से अब तक एक भी व्यक्ति IAS अधिकारी नहीं बन पाया है। इसी आधार पर पार्टी SC आरक्षण के भीतर ज्यादा पिछड़े समुदायों के लिए अलग व्यवस्था की मांग कर रही है।

    2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा है विवाद

    आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण का मौजूदा विवाद सुप्रीम कोर्ट के 2024 के अहम फैसले से जुड़ा है। कोर्ट ने राज्यों को SC और ST वर्ग के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति दी थी, ताकि आरक्षण का लाभ इन वर्गों में सबसे ज्यादा पिछड़े समुदायों तक पहुंचाया जा सके।

    हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका में SC-ST वर्ग के सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ चुके लोगों को आरक्षण के लाभ से बाहर करने की मांग भी की गई है। याचिका में 2024 के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि संविधान पीठ के सात में से चार जजों ने SC-ST में भी क्रीमी लेयर के सिद्धांत पर विचार की बात कही थी।

    हालांकि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि SC और ST वर्ग पर क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता। फिलहाल क्रीमी लेयर की व्यवस्था OBC आरक्षण में लागू है।

    चिराग बोले- क्रीमी लेयर की बात है तो पहले इस्तीफा दें

    केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने HAM की मांग का विरोध करते हुए कहा कि जो लोग SC आरक्षण में क्रीमी लेयर की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले खुद आरक्षण का लाभ छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर जीतन राम मांझी क्रीमी लेयर के पक्ष में हैं तो उन्हें केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए। चिराग ने मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे की भी मांग की।

    चिराग की पार्टी LJP (रामविलास) लंबे समय से SC आरक्षण में उप-कोटे का विरोध करती रही है। उनका कहना है कि SC समाज के सभी समुदायों को एकजुट रहना चाहिए और संविधान में SC आरक्षण को आर्थिक आधार पर बांटने का प्रावधान नहीं है।

    चिराग ने कहा कि उप-कोटा या क्रीमी लेयर लागू करने से सामाजिक न्याय का उद्देश्य कमजोर हो सकता है और दलित समाज के भीतर विभाजन बढ़ सकता है।

    मांझी का पलटवार- गरीबों को लाभ से वंचित करना चाहते हैं

    चिराग के बयान पर जीतन राम मांझी ने भी पलटवार किया। गया में उन्होंने कहा कि चिराग के रुख से गरीब और जरूरतमंद लोगों को आरक्षण के लाभ से वंचित किया जा सकता है।

    मांझी ने कहा कि व्यापक जनहित में आरक्षण के भीतर बंटवारा जरूरी है। उन्होंने चिराग पर गरीबों की चिंता नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर चिराग को गरीबों की चिंता नहीं है तो उन्हें पहले अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

    आरक्षण को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन भी हो रहे हैं। ऐसे में NDA के भीतर दो सहयोगी दलों के बीच खुली बयानबाजी ने गठबंधन के अंदर सामाजिक न्याय और आरक्षण को लेकर मतभेदों को फिर चर्चा में ला दिया है।

  • NDA-NA परीक्षा 2 के लिए UPSC ने जारी किया कार्यक्रम, तय तारीख पर दो पालियों में होगी परीक्षा

    NDA-NA परीक्षा 2 के लिए UPSC ने जारी किया कार्यक्रम, तय तारीख पर दो पालियों में होगी परीक्षा

    नई दिल्ली । संघ लोक सेवा आयोग ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और नौसेना अकादमी परीक्षा यानी NDA-NA परीक्षा 2 की तारीख घोषित कर दी है। परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह महत्वपूर्ण अपडेट है। आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा निर्धारित तारीख पर आयोजित की जाएगी और इसे दो अलग-अलग शिफ्ट में संपन्न कराया जाएगा।

    NDA और NA परीक्षा भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारी बनने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। इसके माध्यम से योग्य उम्मीदवारों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय नौसेना अकादमी में प्रशिक्षण एवं आगे की सैन्य शिक्षा के अवसर मिलते हैं। परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को आयोग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार अपनी तैयारी और परीक्षा संबंधी व्यवस्थाएं पूरी करनी होंगी।

    NDA-NA परीक्षा 2 के आयोजन को लेकर उम्मीदवारों के बीच लंबे समय से तारीख का इंतजार था। अब परीक्षा कार्यक्रम स्पष्ट होने के बाद अभ्यर्थी अपनी तैयारी को अंतिम चरण में ले जा सकते हैं। परीक्षा दो शिफ्ट में होने के कारण उम्मीदवारों को अपने निर्धारित पेपर और परीक्षा केंद्र से संबंधित जानकारी पर विशेष ध्यान देना होगा।

    परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए एडमिट कार्ड भी महत्वपूर्ण दस्तावेज होगा। उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के लिए आयोग द्वारा निर्धारित नियमों और आवश्यक दस्तावेजों का पालन करना होगा। परीक्षा केंद्र पर पहुंचने से पहले अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड में दर्ज केंद्र, रिपोर्टिंग समय और अन्य निर्देशों को ध्यान से देख लेना चाहिए।

    NDA-NA परीक्षा में गणित और सामान्य योग्यता से जुड़े विषयों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए उम्मीदवारों के लिए अब बचे समय में पाठ्यक्रम के महत्वपूर्ण हिस्सों का दोहराव, पिछले प्रश्नपत्रों का अभ्यास और समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना उपयोगी रहेगा। दो शिफ्ट में परीक्षा आयोजित होने के कारण अभ्यर्थियों को परीक्षा पैटर्न और अपनी तैयारी के अनुरूप रणनीति बनानी होगी।

    UPSC की परीक्षाओं में समय प्रबंधन के साथ प्रश्नों को सही तरीके से हल करना भी महत्वपूर्ण होता है। उम्मीदवारों को परीक्षा के दौरान दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा और निर्धारित समय के भीतर अपने प्रश्नपत्र को पूरा करना होगा। परीक्षा से पहले मॉक टेस्ट और पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास अभ्यर्थियों को वास्तविक परीक्षा परिस्थितियों के लिए तैयार करने में मदद कर सकता है।

    NDA-NA परीक्षा 2 को लेकर उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा से संबंधित किसी भी महत्वपूर्ण सूचना के लिए आयोग की आधिकारिक अधिसूचनाओं पर नजर बनाए रखें। परीक्षा की तारीख, शिफ्ट, एडमिट कार्ड और केंद्र से जुड़ी जानकारी में किसी भी बदलाव या नए निर्देश की स्थिति में आयोग की सूचना को ही अंतिम माना जाएगा।

    परीक्षा की तारीख घोषित होने के साथ अब अभ्यर्थियों के पास अपनी तैयारी को व्यवस्थित करने का स्पष्ट समय-सारिणी आधार उपलब्ध है। उम्मीदवारों को अंतिम दिनों में नए विषयों पर अत्यधिक निर्भर रहने के बजाय पहले से तैयार पाठ्यक्रम के रिवीजन, अभ्यास और कमजोर हिस्सों को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

    NDA-NA परीक्षा में सफल उम्मीदवारों के लिए आगे चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरण महत्वपूर्ण होते हैं। लिखित परीक्षा के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया जाता है। इसलिए लिखित परीक्षा को केवल एक चरण मानकर तैयारी करने के बजाय अभ्यर्थियों को आगे की चयन प्रक्रिया की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।

    परीक्षा कार्यक्रम जारी होने के बाद अब उम्मीदवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती अपनी तैयारी को अंतिम रूप देना है। निर्धारित तारीख तक नियमित अध्ययन, प्रश्नपत्र अभ्यास और समय प्रबंधन के जरिए अभ्यर्थी परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

  • उत्तर प्रदेश में एनडीए की रणनीति में चिराग पासवान की भूमिका पर चर्चा तेज, अमित शाह से मुलाकात के निकले सियासी मायने

    उत्तर प्रदेश में एनडीए की रणनीति में चिराग पासवान की भूमिका पर चर्चा तेज, अमित शाह से मुलाकात के निकले सियासी मायने


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल जहां अपने संगठन को मजबूत करने की तैयारी में जुटे हैं, वहीं लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास ने भी उत्तर प्रदेश में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इसी क्रम में पार्टी के जमुई से सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी अरुण भारती ने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक के बाद यूपी की राजनीति में संभावित गठबंधन और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    अरुण भारती और अमित शाह की मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की बात सामने आई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, एलजेपी रामविलास की ओर से उत्तर प्रदेश में चलाए जा रहे पंडित-पासी-पासवान नारे का भी उल्लेख हुआ। बताया जा रहा है कि अमित शाह ने पार्टी की इस राजनीतिक पहल की सराहना की। इससे संकेत मिलता है कि एलजेपी रामविलास उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक आधार को विस्तार देने की रणनीति पर काम कर रही है।

    केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की अगुवाई वाली लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने संगठन विस्तार के साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की रणनीति अपनाई है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी की गतिविधियों में आई तेजी ने राज्य की राजनीति में उसकी संभावित भूमिका को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।

    एलजेपी रामविलास पहले ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। पार्टी की इस घोषणा के बाद संगठन को मजबूत करने और चुनावी आधार तैयार करने की कोशिशें जारी हैं। ऐसे में अमित शाह और अरुण भारती की मुलाकात को लेकर कई तरह के राजनीतिक संकेत निकाले जा रहे हैं। हालांकि, इस बैठक के बाद बीजेपी और एलजेपी रामविलास के बीच किसी औपचारिक चुनावी समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

    मुलाकात के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी और एलजेपी रामविलास के बीच सीटों को लेकर तालमेल हो सकता है। राजनीतिक हलकों में संभावना जताई जा रही है कि दोनों दल चुनावी रणनीति और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संभावित सहयोग पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, फिलहाल सीट बंटवारे या गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।

    उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जातीय और सामाजिक समीकरण चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। एलजेपी रामविलास की ओर से पंडित-पासी-पासवान नारे के जरिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों को जोड़ने की कोशिश को इसी रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। पार्टी यदि अपना संगठनात्मक आधार मजबूत करने में सफल रहती है तो वह आगामी चुनाव में एनडीए के सामाजिक समीकरण को प्रभावित करने वाली भूमिका निभा सकती है।

    चिराग पासवान की राष्ट्रीय राजनीति में एनडीए के साथ सक्रिय भूमिका रही है और ऐसे में उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी की बढ़ती गतिविधियों को बीजेपी के लिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में पार्टी की वास्तविक चुनावी ताकत और संभावित सीटों को लेकर तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है। इसके लिए संगठन विस्तार और जमीनी सक्रियता का असर देखना महत्वपूर्ण होगा।

    अरुण भारती की अमित शाह से हुई मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उत्तर प्रदेश चुनाव में अभी समय है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। आने वाले महीनों में एलजेपी रामविलास की प्रदेश में सक्रियता, बीजेपी के साथ उसके संबंध और सीटों को लेकर होने वाली बातचीत से तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल इस मुलाकात ने इतना जरूर संकेत दिया है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के भीतर संभावित राजनीतिक तालमेल को लेकर गतिविधियां बढ़ रही हैं।