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  • एमपी में बारिश के बीच NDRF-SDRF तैनात, अचानक बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

    एमपी में बारिश के बीच NDRF-SDRF तैनात, अचानक बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

    मध्य प्रदेश: में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन और राहत व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में इन दिनों बारिश दर्ज की जा रही है। पश्चिमी मध्य प्रदेश को छोड़कर कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई है। मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की टीमों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में संभावित जलभराव, अचानक बाढ़ और अन्य आपदा जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए राहत एवं बचाव व्यवस्था पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी आकस्मिक स्थिति में प्रभावित लोगों तक राहत और सहायता तेजी से पहुंचाई जा सके।

    सरकार के अनुसार, पिछले एक महीने के दौरान आपदा प्रबंधन से जुड़ी राहत और बचाव टीमों ने 2,783 से अधिक लोगों को विभिन्न परिस्थितियों में सुरक्षित बाहर निकाला है। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई इलाकों में जलस्तर बढ़ने और आवागमन प्रभावित होने जैसी स्थितियां बनी हैं। ऐसे में राहत दलों को जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रखा गया है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अब तक बारिश के कारण प्रदेश में जान-माल का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य में पुलिस और संबंधित टीमों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। उनका जोर इस बात पर रहा कि मौसम की स्थिति अचानक बदलने पर प्रशासन के पास तत्काल प्रतिक्रिया देने की क्षमता बनी रहे।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो से चार दिनों के दौरान किसी बड़ी परेशानी की आशंका नहीं बताई गई है। इसके बावजूद सरकार ने एहतियाती स्तर पर तैयारियों को मजबूत रखने का फैसला किया है। खासतौर पर निचले इलाकों, जलभराव वाले क्षेत्रों और ऐसे स्थानों पर निगरानी बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है, जहां अचानक पानी बढ़ने की संभावना रहती है।

    NDRF और SDRF की टीमें जरूरत के अनुसार राहत और बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रखने का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। प्रशासन की ओर से स्थानीय स्तर पर भी संसाधनों और राहत व्यवस्थाओं को तैयार रखने पर जोर दिया गया है।

    बारिश के दौरान नदी-नालों और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय है। जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में लोगों को समय पर चेतावनी देने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    सरकार का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बारिश के दौरान उत्पन्न होने वाली आकस्मिक परिस्थितियों को देखते हुए राहत दलों को सक्रिय रखा गया है। मुख्यमंत्री की समीक्षा के बाद प्रशासनिक मशीनरी को मौसम से जुड़े बदलावों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

    राज्य में मानसून के दौरान हर वर्ष अलग-अलग क्षेत्रों में अतिवृष्टि, जलभराव और अचानक बाढ़ जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं। ऐसे में पहले से की गई तैयारी नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। इसी उद्देश्य से सरकार ने राहत एवं बचाव दलों की तैनाती, अधिकारियों के समन्वय और स्थानीय स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बारिश के दौरान लोगों की सुरक्षा बनाए रखना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत पहुंचाना है।

  • केरल के वायनाड में भारी बारिश बनी बड़ी आफत, मुख्यमंत्री ने बुलाई आपात बैठक; राहत-बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी

    केरल के वायनाड में भारी बारिश बनी बड़ी आफत, मुख्यमंत्री ने बुलाई आपात बैठक; राहत-बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी

    नई दिल्ली । केरल के वायनाड जिले में एक बार फिर भारी बारिश के बीच भूस्खलन की गंभीर घटना सामने आई है। सुरंग सड़क परियोजना के निर्माण स्थल के पास हुए इस हादसे के बाद कई श्रमिकों और पर्यटकों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही राज्य सरकार ने हालात की समीक्षा के लिए आपात बैठक बुलाई और राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित क्षेत्र में व्यापक स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

    यह घटना वायनाड के अनाक्कम्पॉयिल-कल्लाडी सुरंग सड़क परियोजना के वायनाड छोर पर मीनाक्षी पुल के समीप कलाड़ी क्षेत्र में हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान निकाली गई मिट्टी का बड़ा ढेर लगातार बारिश के कारण अचानक ढह गया। पिछले 24 घंटों में क्षेत्र में हुई अत्यधिक वर्षा से जमीन की पकड़ कमजोर हो गई, जिसके चलते मिट्टी खिसककर निर्माण स्थल के हिस्से पर आ गिरी और वहां मौजूद लोगों के फंसने की आशंका पैदा हो गई।

    राज्य सरकार ने घटना को गंभीर मानते हुए वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित मंत्रियों को तत्काल प्रभावित क्षेत्र में पहुंचने के निर्देश दिए हैं। राहत एवं बचाव अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ तेज गति से कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

    घटनास्थल से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि निर्माण कार्य में लगे कई श्रमिक और आसपास मौजूद कुछ पर्यटक अब भी मलबे में फंसे हो सकते हैं। प्रभावित क्षेत्र पर्यटकों के बीच लोकप्रिय माना जाता है और घटना के समय वहां कई निजी वाहन भी खड़े थे। श्रमिकों को परियोजना स्थल तक पहुंचाने वाली एक बस के मलबे में दबने की आशंका भी व्यक्त की गई है, जिसके कारण खोज अभियान और अधिक सतर्कता के साथ चलाया जा रहा है।

    राहत कार्य में स्थानीय प्रशासन, पुलिस, दमकल विभाग और अन्य आपातकालीन एजेंसियां संयुक्त रूप से लगी हुई हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की टीम भी मौके पर पहुंचकर अभियान में शामिल हो चुकी है। आधुनिक मशीनों और विशेष उपकरणों की सहायता से मलबा हटाने का कार्य लगातार जारी है। लगातार बारिश और अस्थिर पहाड़ी ढलानों के कारण बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, फिर भी टीमें पूरी सावधानी के साथ अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।

    स्थानीय अधिकारियों के अनुसार मेप्पडी क्षेत्र में पिछले 24 घंटों के दौरान लगभग 226 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से कहीं अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक वर्षा के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी की पकड़ कमजोर होने से भूस्खलन का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसी कारण प्रशासन ने आसपास के संवेदनशील इलाकों की भी निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से अनावश्यक रूप से प्रभावित क्षेत्र में जाने से बचने की अपील की है।

    वायनाड पहले भी भारी वर्षा और भूस्खलन की घटनाओं का सामना कर चुका है। ऐसे में इस बार प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है और राहत अभियान को लगातार मजबूत किया जा रहा है। फिलहाल बचाव कार्य जारी है तथा फंसे हुए लोगों की वास्तविक संख्या और नुकसान का आकलन अभियान पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

  • कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम की छत भरभराकर गिरी, 5 मजदूरों की मौत; 50 से अधिक लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका

    कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम की छत भरभराकर गिरी, 5 मजदूरों की मौत; 50 से अधिक लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला क्षेत्र में बुधवार को एक बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया, जब निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक ढह गई। इस दुर्घटना में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे के समय निर्माण कार्य जारी था और कई श्रमिक गोदाम के भीतर काम कर रहे थे। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    हादसा तारातला स्थित ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर ब्रेस ब्रिज के समीप हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर के समय अचानक तेज आवाज के साथ निर्माणाधीन ढांचे का एक बड़ा हिस्सा धराशायी हो गया। छत गिरते ही वहां मौजूद मजदूरों को संभलने का मौका नहीं मिला और कई लोग मलबे के नीचे दब गए। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के बाद राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर शुरू किया गया। शुरुआती चरण में कई लोगों को मलबे से बाहर निकालने में सफलता मिली, जबकि बड़ी संख्या में श्रमिकों के अभी भी फंसे होने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि मलबे के नीचे दबे लोगों की सही संख्या का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना को भी राहत कार्य में शामिल किया गया है। सेना के जवानों ने स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर बचाव अभियान की कमान संभाली है। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, अग्निशमन विभाग, नागरिक सुरक्षा इकाइयों और पुलिस की विशेष टीमें लगातार मलबा हटाने के काम में जुटी हुई हैं। भारी लोहे के ढांचे और बीम हटाने के लिए क्रेन तथा अन्य मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।

    अधिकारियों का कहना है कि राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है क्योंकि ढहे हुए हिस्से में बड़ी मात्रा में लोहे और निर्माण सामग्री का मलबा फैला हुआ है। ऐसे में फंसे हुए लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचने के लिए सावधानी बरती जा रही है। कई घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।

    स्थानीय लोगों ने भी शुरुआती घंटों में बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने मलबे में दबे श्रमिकों को निकालने का प्रयास किया और राहत एजेंसियों के पहुंचने तक प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई। घटना के बाद इलाके में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

    प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक स्तर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि निर्माणाधीन संरचना की छत अचानक क्यों गिरी और क्या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा था। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है।

    फिलहाल बचाव अभियान सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि मलबे के नीचे अब भी कई लोग फंसे हो सकते हैं, इसलिए राहत कार्य देर रात तक जारी रह सकता है। इस हादसे ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दुर्घटना के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।