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  • बुध-शनि 9 अक्टूबर से बनाएंगे षडाष्टक योग, 4 राशियों को रहना होगा सावधान

    बुध-शनि 9 अक्टूबर से बनाएंगे षडाष्टक योग, 4 राशियों को रहना होगा सावधान


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की चाल और उनके बीच बनने वाले कोण को विशेष महत्व दिया जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 9 अक्टूबर से बुध और शनि की स्थिति से षडाष्टक योग बनने जा रहा है। ज्योतिष में इस योग को अनुकूल नहीं माना जाता और मान्यता है कि इसके प्रभाव से कुछ राशियों को मानसिक तनाव, काम में रुकावट, आर्थिक उलझनों और रिश्तों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब दो ग्रह एक-दूसरे से छठे और आठवें भाव की स्थिति में होते हैं, तब षडाष्टक योग बनता है। इसे ग्रहों के बीच करीब 150 डिग्री के कोण से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, इसके प्रभाव को लेकर ज्योतिषीय मान्यताएं व्यक्ति की जन्मकुंडली और ग्रहों की स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं।

    क्या होता है षडाष्टक योग?

    ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक, षडाष्टक योग के दौरान ग्रहों की स्थिति को चुनौतीपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में मानसिक दबाव बढ़ सकता है, कामकाज में अड़चनें आ सकती हैं और आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए।

    इस दौरान निवेश, बड़े आर्थिक लेन-देन, करियर से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों और पारिवारिक रिश्तों में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, ये ज्योतिषीय मान्यताएं हैं और इनके वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

    मेष राशि

    मेष राशि के जातकों के लिए 9 अक्टूबर से शुरू होने वाली यह अवधि कुछ मामलों में चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों या वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है।

    ज्योतिषीय सलाह के अनुसार, इस दौरान गुस्से और जल्दबाजी पर नियंत्रण रखना बेहतर रहेगा। किसी भी कागजी प्रक्रिया पर हस्ताक्षर करने या निवेश का फैसला लेने से पहले दस्तावेजों को अच्छी तरह जांच लेना चाहिए।

    कर्क राशि

    कर्क राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक और मानसिक स्तर पर सावधानी बरतने वाला बताया जा रहा है। अनावश्यक खर्च बढ़ने से बजट प्रभावित हो सकता है। ऐसे में खर्चों की प्राथमिकता तय करना जरूरी होगा।

    पारिवारिक जीवन में भी छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ाने से बचने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, शांत रहकर परिस्थितियों को संभालने से तनाव कम किया जा सकता है।

    तुला राशि

    तुला राशि के जातकों को इस अवधि में स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम में बदलाव के कारण होने वाली परेशानियां या पहले से चली आ रही कोई समस्या दोबारा परेशान कर सकती है।

    नौकरीपेशा लोगों को अधूरे काम पूरे करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। कार्यस्थल पर किसी तरह के विवाद या अनावश्यक बहस से दूरी बनाए रखना बेहतर माना जा रहा है।

    मकर राशि

    मकर राशि के जातकों के लिए यह अवधि धैर्य की परीक्षा लेने वाली हो सकती है। कारोबार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और योजनाओं के मुताबिक काम समय पर पूरा नहीं होने से तनाव हो सकता है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान उधार के लेन-देन में सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही किसी भी कारोबारी फैसले में जल्दबाजी करने से बचना बेहतर रहेगा। निजी और पेशेवर मामलों में गोपनीय जानकारी साझा करते समय भी सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

  • आज से शनि के पुष्य नक्षत्र में मंगल, 17 अक्टूबर तक 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

    आज से शनि के पुष्य नक्षत्र में मंगल, 17 अक्टूबर तक 3 राशियों को रहना होगा सतर्क


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में मंगल को साहस, ऊर्जा, भूमि, पराक्रम और सेना का कारक ग्रह माना गया है। वहीं शनि के स्वामित्व वाले पुष्य नक्षत्र को ज्योतिष में महत्वपूर्ण नक्षत्र माना जाता है, जो पोषण, स्थिरता और शुभता से जुड़ा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 24 सितंबर 2026 को मंगल पुनर्वसु नक्षत्र से निकलकर पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। मंगल यहां 17 अक्टूबर 2026 तक रहेंगे।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार मंगल के शनि के नक्षत्र में आने से इस अवधि में कुछ लोगों को विचारों के टकराव, गुस्सा, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों या कामकाज में अचानक आने वाली रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर मिथुन, तुला और मकर राशि के जातकों को इस दौरान निर्णय लेते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    मिथुन राशि

    मंगल का पुष्य नक्षत्र में गोचर मिथुन राशि से जुड़े जातकों के दूसरे भाव को प्रभावित करेगा। यह भाव धन, वाणी और परिवार से संबंधित माना जाता है।

    ज्योतिषीय फलादेश के अनुसार इस दौरान बातचीत के दौरान गुस्सा या कठोर शब्द परेशानी बढ़ा सकते हैं। परिवार के सदस्यों या कार्यस्थल पर किसी से विवाद की स्थिति बन सकती है। अचानक आने वाला कोई बड़ा खर्च आर्थिक बजट को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इस अवधि में बिना पूरी जानकारी के बड़ा निवेश करने या किसी को बड़ी रकम उधार देने से बचने की सलाह दी जाती है।

    तुला राशि

    तुला राशि के जातकों के लिए मंगल का यह गोचर दसवें भाव में होगा, जिसे कर्म, करियर और कारोबार से जोड़ा जाता है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों या सहकर्मियों के साथ मतभेद हो सकते हैं। ऑफिस में किसी विवाद या राजनीति का हिस्सा बनने से बचना बेहतर रहेगा। इस दौरान जल्दबाजी में नौकरी बदलने या किसी कारोबारी समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले उसके सभी पहलुओं की अच्छी तरह जांच कर लेने की सलाह दी जाती है। अपने काम पर फोकस बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

    मकर राशि

    मकर राशि के स्वामी शनि हैं और मंगल का पुष्य नक्षत्र में गोचर मकर राशि के सातवें भाव को प्रभावित करेगा। ज्योतिष में सातवें भाव का संबंध दांपत्य जीवन, साझेदारी और व्यापार से माना जाता है।

    इस अवधि में जीवनसाथी के साथ छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव या मतभेद बढ़ने की आशंका बताई गई है। ऐसे में बातचीत के दौरान धैर्य रखना जरूरी होगा। कारोबार में पार्टनरशिप करने वाले लोगों को लेन-देन और कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि गलतफहमी की स्थिति बन सकती है। स्वास्थ्य को लेकर भी लापरवाही न बरतें। खासकर ब्लड प्रेशर (BP) और जोड़ों से जुड़ी परेशानी होने पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मंगल के अशुभ प्रभाव से बचने के ज्योतिषीय उपाय

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मंगल के नक्षत्र परिवर्तन के दौरान हनुमान जी की पूजा करना शुभ माना जाता है। इसके लिए मंगलवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ किया जा सकता है। हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने की भी मान्यता है।

    इसके अलावा मंगलवार को जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर में लाल मसूर की दाल, गुड़ या लाल वस्त्र दान करने की सलाह दी जाती है। ये उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।

  • आर्द्रा नक्षत्र में मंगल का प्रवेश, मेष से मकर तक इन 5 राशियों के लिए मुश्किल समय

    आर्द्रा नक्षत्र में मंगल का प्रवेश, मेष से मकर तक इन 5 राशियों के लिए मुश्किल समय


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को ऊर्जा, साहस और पराक्रम का कारक माना जाता है, जबकि राहु को छाया ग्रह कहा गया है। अब मंगल राहु के स्वामित्व वाले आर्द्रा नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, आर्द्रा नक्षत्र बदलाव, उथल-पुथल और मानसिक तनाव से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में मंगल की उग्र ऊर्जा के कारण कुछ राशियों के लिए यह अवधि चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    मंगल 2 सितंबर तक आर्द्रा नक्षत्र में रहेंगे। इस दौरान कुछ राशियों को आर्थिक, करियर, पारिवारिक और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। आइए जानते हैं किन 5 राशियों को सतर्क रहना होगा।

    मेष राशि
    मेष राशि के स्वामी मंगल हैं। ऐसे में इस अवधि में गुस्सा और जल्दबाजी बढ़ सकती है। कार्यस्थल पर सहकर्मियों से विवाद से बचें। वाहन चलाते समय सावधानी रखें। जल्दबाजी में लिया गया आर्थिक फैसला नुकसान करा सकता है।

    वृषभ राशि
    वृषभ राशि वालों को वाणी और धन से जुड़े मामलों में संयम रखना होगा। गुस्से में कही गई बात रिश्तों में तनाव पैदा कर सकती है। अचानक होने वाले खर्च से बजट प्रभावित हो सकता है। इस दौरान किसी को उधार देने में सावधानी बरतें।

    सिंह राशि
    सिंह राशि के जातकों को मानसिक तनाव और कार्यक्षेत्र में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। ऑफिस की राजनीति से दूर रहें और अपने काम पर ध्यान दें। स्वास्थ्य को लेकर भी लापरवाही न करें।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि के लोगों को इस दौरान गुप्त विरोधियों और विवादों से सावधान रहने की जरूरत है। किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। कानूनी और दस्तावेजों से जुड़े मामलों में पूरी जांच के बाद ही कदम उठाएं। जोखिम वाले निवेश से दूरी रखना बेहतर होगा।

    मकर राशि
    मकर राशि वालों को पारिवारिक और आर्थिक मामलों में संयम रखना होगा। जीवनसाथी या बिजनेस पार्टनर के साथ मतभेद बढ़ सकते हैं। अचानक होने वाला बड़ा खर्च आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है, इसलिए लेन-देन में सावधानी बरतें।

    अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय
    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मंगल की उग्रता को शांत रखने के लिए मंगलवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ किया जा सकता है। जरूरतमंद व्यक्ति को लाल मसूर की दाल, गुड़ या तांबे के बर्तन का दान करने की भी परंपरा है। बड़े फैसले लेते समय जल्दबाजी से बचें और जरूरी मामलों में अनुभवी लोगों की सलाह लें।

  • अगस्त के पहले सप्ताह में 3 राशियों को रहना होगा सतर्क! चंद्रमा के अशुभ योग बढ़ा सकते हैं मुश्किलें

    अगस्त के पहले सप्ताह में 3 राशियों को रहना होगा सतर्क! चंद्रमा के अशुभ योग बढ़ा सकते हैं मुश्किलें


    नई दिल्ली। अगस्त 2026 का पहला सप्ताह ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान चंद्रमा की चाल में होने वाले बदलाव से विष योग और ग्रहण प्रभाव जैसी अशुभ स्थितियां बनने की संभावना है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इन योगों का असर सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन मिथुन, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    क्या है विष योग और ग्रहण प्रभाव?
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा का संबंध शनि जैसे क्रूर ग्रह से बनता है, तब विष योग का निर्माण होता है। इसे मानसिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और कार्यों में बाधा का कारण माना जाता है। वहीं, राहु या केतु के प्रभाव में चंद्रमा आने पर निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है और आर्थिक व पारिवारिक चुनौतियां बढ़ने की आशंका रहती है।

    इन 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के लोगों के लिए अगस्त का पहला सप्ताह मानसिक तनाव और चिड़चिड़ेपन वाला हो सकता है। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा। कारोबार में जोखिम भरे फैसलों से बचें। स्वास्थ्य के लिहाज से सिरदर्द या पेट संबंधी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि के जातकों के खर्च अचानक बढ़ सकते हैं। परिवार में किसी बात को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है, इसलिए वाणी पर संयम रखें। कानूनी मामलों में देरी संभव है। वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    मीन राशि
    मीन राशि वालों के लिए इस दौरान कार्यों में रुकावट और मानसिक दबाव बढ़ सकता है। विरोधी सक्रिय रह सकते हैं, इसलिए सतर्क रहें। आर्थिक मामलों में किसी पर भी बिना जांच-पड़ताल भरोसा न करें और निवेश सोच-समझकर करें।

    अशुभ प्रभाव कम करने के उपाय
    – प्रतिदिन भगवान शिव का जलाभिषेक कर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
    – शनिवार को काली उड़द, सरसों का तेल या काले वस्त्र का दान करें।
    – बड़े आर्थिक फैसले या संपत्ति से जुड़े सौदे जल्दबाजी में न लें।
    – महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले परिवार के वरिष्ठ सदस्यों की सलाह लेना लाभकारी माना गया है।

  • देवशयनी एकादशी आज, इन 3 राशियों को अगले 4 महीने रहना होगा सावधान

    देवशयनी एकादशी आज, इन 3 राशियों को अगले 4 महीने रहना होगा सावधान


    नई दिल्‍ली । आज 25 जुलाई 2026, शनिवार को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पावन देवशयनी एकादशी मनाई जा रही है. इसी के साथ चार महीनों के लिए चातुर्मास का आरंभ हो गया है और सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु योग निद्रा में लीन हो गए हैं. धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह दिन बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इस दिन बनने वाले कुछ खास योग और ग्रहों की स्थिति का प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिलता है.

    जहां एक ओर यह एकादशी कई राशियों के लिए शुभ फल लेकर आई है, वहीं ज्योतिषीय गणना के अनुसार कुछ ऐसी राशियां भी हैं जिन्हें आज और चातुर्मास के इन चार महीनों के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. आज उदया तिथि, ब्रह्म योग और ज्येष्ठा नक्षत्र का संयोग है. इसकी वजह से तीन राशियों के लिए अगले चार महीने थोड़े चुनौती भरे हो सकते हैं.

    आइए जानते हैं कि आज देवशयनी एकादशी से अवसर पर किन राशियों को संभलकर चलने की आवश्यकता है:

    1. कर्क राशि (Cancer)
    कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय मानसिक उथल-पुथल और संभलकर चलने वाला हो सकता है. चातुर्मास के दौरान आपको अपने पेशेवर और पारिवारिक जीवन में तालमेल बिठाने में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है.

    चुनौतियां: आर्थिक मामलों में किसी भी तरह का बड़ा जोखिम लेने से बचें. निवेश करने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार कर लें अन्यथा नुकसान उठाना पड़ सकता है. परिवार में किसी बात को लेकर अनबन या गलतफहमी पैदा हो सकती है, इसलिए अपनी वाणी पर संयम रखें.

    बचाव और उपाय: मानसिक शांति बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करें, उन्हें माखन-मिश्री का भोग लगाएं.

    2. वृश्चिक राशि (Scorpio)
    वृश्चिक राशि के जातकों को इस अवधि में स्वास्थ्य और पैतृक मामलों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है. ग्रहों की स्थिति आपके पक्ष में थोड़ी प्रतिकूल हो सकती है, जिससे बनते हुए कार्यों में रुकावटें आ सकती हैं.

    चुनौतियां: गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें और दफ्तर में किसी भी प्रकार के वाद-विवाद या बहस में पड़ने से बचें. पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद लंबा खींच सकते हैं. इसके अलावा, खानपान में लापरवाही के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं परेशान कर सकती हैं.

    बचाव और उपाय: नकारात्मकता से दूर रहने के लिए भगवान विष्णु के मंदिर जाएं और पीली मिठाई या केसर का दान करें.

    3. धनु राशि (Sagittarius)
    धनु राशि के जातकों के लिए आज से शुरू हो रहा चातुर्मास खर्चों में बढ़ोतरी लेकर आ सकता है. आर्थिक संतुलन बनाए रखना इस दौरान आपके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी.

    चुनौतियां: आमदनी के मुकाबले फिजूलखर्ची और अनावश्यक खर्चे बढ़ सकते हैं, जिससे आपका बजट बिगड़ सकता है. पेशेवर जीवन में सहकर्मियों या वरिष्ठों के साथ वैचारिक मतभेद होने की संभावना है. जल्दबाजी में लिया गया कोई भी निर्णय आपको भारी पड़ सकता है.

    बचाव और उपाय: आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने और बाधाओं को दूर करने के लिए केले के वृक्ष की पूजा करें . उसमें जल व चना दाल अर्पित करें.