Tag: NEET paper leak

  • NEET-UG पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, NTA एक्सपर्ट्स पेपर तैयार करते समय याद कर लेते थे सवाल

    NEET-UG पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, NTA एक्सपर्ट्स पेपर तैयार करते समय याद कर लेते थे सवाल


    नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल 94 पेज की चार्जशीट के मुताबिक, पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले ही शुरू हो गई थी। आरोप है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पेपर तैयार करने वाले कुछ एक्सपर्ट्स ने सवालों को याद कर लिया और बाद में उन्हें पर्चियों के जरिए बाहर पहुंचाया।

    CBI ने 28 जुलाई को इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें NTA के तीन एक्सपर्ट्स समेत कोचिंग संचालकों, बिचौलियों और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।

    होटल लौटकर पर्चियों पर लिखते थे सवाल
    चार्जशीट के अनुसार, NTA कार्यालय में पेपर तैयार करने और मॉडरेशन के दौरान एक्सपर्ट्स सवाल याद कर लेते थे। इसके बाद होटल लौटने पर याद किए गए प्रश्नों और उनके विकल्पों को पर्चियों पर लिखा जाता था। संबंधित प्रश्नों को व्यवस्थित करने के लिए NCERT की किताबों में अध्याय और पैराग्राफ तक चिन्हित किए जाते थे। CBI का दावा है कि NTA कार्यालय में आने-जाने के दौरान एक्सपर्ट्स की तलाशी नहीं होती थी। उन्हें रफ वर्क के लिए सादे कागज भी दिए जाते थे। आरोप है कि एक्सपर्ट पीवी कुलकर्णी ने इन कागजों पर केमिस्ट्री के 135 प्रश्न और उनके विकल्प नोट किए। उन्होंने केमिस्ट्री पेपर का मराठी से अंग्रेजी में बैक-ट्रांसलेशन भी किया।

    कोचिंग संचालकों और बिचौलियों ने बनाया नेटवर्क
    जांच एजेंसी के मुताबिक, यह किसी एक व्यक्ति की साजिश नहीं थी। परीक्षा से कई महीने पहले ही कोचिंग संचालकों और बिचौलियों ने NTA के तीनों एक्सपर्ट्स से संपर्क किया था। बातचीत, मुलाकात और कथित पैसों के लेन-देन के जरिए पेपर लीक का नेटवर्क तैयार किया गया। इसके बाद लीक हुए सवालों को वॉट्सऐप, टेलीग्राम, PDF और तस्वीरों के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाया गया। कुछ कोचिंग संस्थानों में छात्रों को हाथ से लिखे प्रश्नों के जरिए परीक्षा की तैयारी भी कराई गई। CBI के मुताबिक, डिजिटल सबूतों से बचने के लिए यह तरीका अपनाया गया था।

    इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और चैट से मिले सबूत
    CBI ने कहा है कि फोरेंसिक जांच, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, चैट रिकॉर्ड, बरामद दस्तावेजों और गवाहों के बयानों से पेपर लीक नेटवर्क की पुष्टि हुई। चार्जशीट में मनीषा संजय वाघमारे, धनंजय लोखंडे, शुभम मधुकर खैरनार और यश यादव को नेटवर्क की अहम कड़ी बताया गया है। जांच के दौरान एक आरोपी द्वारा कथित तौर पर लीक पेपर के बदले अपने 10वीं-12वीं के प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक सुरक्षा के तौर पर दिए जाने की बात भी सामने आई है।

    डॉक्टर और कोचिंग संचालक भी आरोपी
    CBI ने डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी, पुणे के COO तेजस हर्षदकुमार शाह, रेणुकाई करियर सेंटर के मैनेजिंग पार्टनर शिवराज मोटेगांवकर और सिद्धिविनायक हॉस्पिटल के मालिक डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे को भी आरोपी बनाया है। जांच एजेंसी के अनुसार, NTA के बाहर से नेटवर्क संचालित करने और लीक पेपर छात्रों तक पहुंचाने में इनकी भूमिका थी। CBI ने पेपर लीक के पीछे अवैध कमाई और कुछ कोचिंग संस्थानों के परिणाम बेहतर दिखाने का उद्देश्य बताया है।

    13 आरोपियों के खाते और लॉकर फ्रीज
    CBI ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने 13 आरोपियों के बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट अकाउंट फ्रीज किया है। तीनों NTA एक्सपर्ट्स पर पेपर लीक, भ्रष्टाचार और लोक सेवक के तौर पर विश्वासघात समेत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। चार्जशीट में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा और जुर्माने का उल्लेख किया गया है।

    पेपर लीक के बाद दोबारा हुई थी परीक्षा
    NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी। पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई। इस पूरे विवाद ने परीक्षा व्यवस्था और पेपर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

  • NEET पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहली जज का एक हफ्ते में तबादला, अब अजय गुप्ता करेंगे सुनवाई

    NEET पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहली जज का एक हफ्ते में तबादला, अब अजय गुप्ता करेंगे सुनवाई


    नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत की जज अनु ग्रोवर बलिगा का तबादला कर दिया है। उन्होंने 25 जुलाई को ही इस अदालत का कार्यभार संभाला था और एक सप्ताह पूरा होने से पहले ही उन्हें नई जिम्मेदारी सौंप दी गई। उनकी जगह अब विशेष जज अजय गुप्ता इस अदालत की कार्यवाही संभालेंगे।

    137 न्यायाधीशों के साथ हुआ तबादला
    हाईकोर्ट ने कुल 137 न्यायाधीशों के तबादले किए हैं। 23 जुलाई को अधिसूचित इस विशेष अदालत का गठन पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े आपराधिक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए किया गया था। अब जज अनु ग्रोवर बलिगा को एनआईए अधिनियम के तहत गठित विशेष अदालत में नियुक्त किया गया है।

    आज चार्जशीट पर होगा विचार
    नीट पेपर लीक मामले की पहली सुनवाई 27 जुलाई को हुई थी, लेकिन बचाव पक्ष के आग्रह पर उसे स्थगित कर दिया गया था। अब सोमवार को अदालत सीबीआई द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने के साथ-साथ दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगी। सीबीआई इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

    सुप्रीम कोर्ट में भी अहम सुनवाई
    इधर, नीट पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं, इन याचिकाओं पर विचार करेगी।

    शीर्ष अदालत ने 28 जुलाई को राज्यों को निर्देश दिया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। साथ ही, जिन 18 वर्ष से कम आयु के प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा करने को कहा था। अदालत ने निष्पक्ष जांच पर जोर देते हुए कहा था कि कानून हाथ में लेने या किसी भी प्रकार की ज्यादती करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

    त्वरित न्याय के लिए बनी विशेष अदालत
    सरकार ने नीट पेपर लीक प्रकरण में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा की थी। सरकार का कहना है कि परीक्षा घोटालों के पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाना प्राथमिकता है। इसके साथ ही पेपर लीक से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करने के लिए संशोधन विधेयक लाने की भी तैयारी की जा रही है।

  • फतेहपुर से योगी का बड़ा ऐलान: NEET पेपर लीक के दोषियों की संपत्ति होगी जब्त, संसद में आएगा सख्त कानून

    फतेहपुर से योगी का बड़ा ऐलान: NEET पेपर लीक के दोषियों की संपत्ति होगी जब्त, संसद में आएगा सख्त कानून


    फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को फतेहपुर जिले के मदारीपुर कला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने विकास कार्यों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर भी सरकार का पक्ष रखा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले फतेहपुर आकांक्षी जिलों में शामिल था और रोजगार, स्वास्थ्य तथा बुनियादी सुविधाओं के मामले में काफी पीछे था। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में जिले की तस्वीर बदली है और अब यह आकांक्षी जिलों की श्रेणी से बाहर आ चुका है।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले युवाओं की नौकरियों में धांधली होती थी, जबकि वर्तमान सरकार पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे रही है। उन्होंने मेडिकल कॉलेज, सड़क, पुल, बिजली, अस्पताल, निवेश और कंपोजिट विद्यालय जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास अब केवल चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव तक पहुंच रहा है।

    विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ और नकल माफिया को संरक्षण मिला। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है। NEET परीक्षा से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दोषियों को केवल सजा ही नहीं मिलेगी, बल्कि उनकी संपत्तियां भी जब्त की जाएंगी। साथ ही पेपर लीक रोकने के लिए संसद में सख्त कानून लाने की भी बात कही।

    कानून-व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रदेश में माफिया और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं बची है। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों के सामने अब केवल जेल या फिर कड़ी कानूनी कार्रवाई का रास्ता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सरकारी जमीनों पर कब्जे किए थे, जिन्हें अब मुक्त कराया जा रहा है।

    अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया और राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने देश के युवाओं को नई पहचान दी है। उन्होंने फतेहपुर की जनता से विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए भाजपा को मजबूत समर्थन देने की अपील भी की।

  • 'विनीत जोशी का ट्रांसफर सजा नहीं, जवाबदेही तय करे सरकार', NEET विवाद पर विजेता दहिया का हमला

    'विनीत जोशी का ट्रांसफर सजा नहीं, जवाबदेही तय करे सरकार', NEET विवाद पर विजेता दहिया का हमला


    नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की पूर्व प्रवक्ता विजेता दहिया ने परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी का सिर्फ तबादला कर देना समस्या का समाधान नहीं है और न ही इसे सजा माना जा सकता है। उनका कहना है कि जब किसी विभाग में गंभीर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय होना सबसे जरूरी है।

    आईएएनएस से बातचीत में विजेता दहिया ने कहा कि NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र महीनों नहीं, बल्कि कई बार वर्षों तक दिन-रात मेहनत करते हैं। परीक्षा के बाद सफलता की उम्मीद लेकर बैठे छात्रों को जब यह पता चलता है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण पूरी परीक्षा प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है और दोबारा परीक्षा देनी पड़ सकती है, तो इसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि कई लोग इन घटनाओं से जुड़ी छात्र मौतों को केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का परिणाम मानते हैं।

    दहिया ने दावा किया कि छात्र आंदोलन को लेकर सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है। उनके अनुसार सरकार ने सिद्धांततः यह आश्वासन दिया है कि पेपर लीक प्रकरण से प्रभावित होकर जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने का भी भरोसा दिया गया है। हालांकि उन्होंने कहा कि आंदोलन की तीसरी और प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तथा जिम्मेदारी तय करने की रही है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार सुनिश्चित कराना है। उनका मानना है कि देश के लाखों छात्रों का भरोसा तभी लौटेगा, जब सरकार ठोस और प्रभावी कदम उठाएगी।

    विपक्षी दलों से फंडिंग मिलने के आरोपों को भी विजेता दहिया ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह आम लोगों के सहयोग से चल रहा है। कई लोग अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, पंखे, कूलर, कालीन और अन्य आवश्यक सामान उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार इतनी अधिक सहायता मिल जाती है कि अतिरिक्त सहयोग लेने से भी मना करना पड़ता है। उनके अनुसार यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि जनता और छात्रों का आंदोलन है।

    विजेता दहिया ने कहा कि वे अब सीजेपी की आधिकारिक प्रवक्ता नहीं हैं, लेकिन एक समर्थक के रूप में आंदोलन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही राजनीतिक दलों से अपील की गई थी कि यदि वे छात्रों का समर्थन करना चाहते हैं तो पार्टी के झंडों के बिना आंदोलन में शामिल हों। उन्होंने माना कि विभिन्न दलों के समर्थन से आंदोलन को मजबूती मिली है, लेकिन इसकी मूल भावना गैर-दलीय जन आंदोलन की ही है।

    उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी के तबादले का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी के कार्यकाल में इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आती है तो केवल विभाग बदल देना जवाबदेही तय करने के बराबर नहीं है। उनका कहना है कि वास्तविक सुधार तभी संभव होगा, जब जिम्मेदार लोगों के खिलाफ स्पष्ट कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।

  • देश की राजनीति में बड़ा झटका NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जवाबदेही का दिया संदेश

    देश की राजनीति में बड़ा झटका NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जवाबदेही का दिया संदेश

    नई दिल्ली: देशभर में NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए काम किया है और किसी भी परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे।

    धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे की जानकारी साझा करते हुए एक भावुक संदेश भी जारी किया। उन्होंने लिखा कि पिछले चार दशक से अधिक समय से वे छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उनका विश्वास हमेशा इस बात पर रहा है कि मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला होती है।

    उन्होंने अपने पत्र में कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया और अगले वर्ष से NEET परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने की घोषणा भी की गई।

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका मानना है कि सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसी भावना के तहत उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपने का निर्णय लिया।

    गौरतलब है कि NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को लेकर पिछले कई सप्ताह से देशभर में छात्र संगठन प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई राज्यों में परीक्षा प्रणाली में सुधार, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग उठाई जा रही थी।

    हालांकि, इस घटनाक्रम पर केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से इस्तीफा स्वीकार किए जाने अथवा नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

    नोट: यह खबर आपके द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है। यदि आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति भवन या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस्तीफा स्वीकार किए जाने या नए मंत्री की घोषणा होती है, तो उससे संबंधित स्थिति अलग हो सकती है।

  • NEET पेपर लीक पर मध्य प्रदेश में आक्रोश 20 जिलों में प्रदर्शन इंदौर से उठी सबसे बुलंद आवाज

    NEET पेपर लीक पर मध्य प्रदेश में आक्रोश 20 जिलों में प्रदर्शन इंदौर से उठी सबसे बुलंद आवाज


    भोपाल । NEET पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में मध्य प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सबसे बड़ा आंदोलन इंदौर के टंट्या भील चौराहे पर चल रहा है, जहां 30 जून को सिर्फ 5 छात्रों से शुरू हुआ धरना अब हजारों लोगों का आंदोलन बन चुका है।

    इंदौर में शनिवार को एक छात्रा नीम की पत्तियां लेकर प्रदर्शन में पहुंची। उसने कहा कि जिस तरह नीम बैक्टीरिया खत्म करती है, उसी तरह शिक्षा व्यवस्था में फैली गड़बड़ियों को भी साफ करने की जरूरत है। लगातार बारिश के बावजूद छात्र पिछले 25 दिनों से धरने पर डटे हुए हैं। आंदोलन स्थल पर पुलिस ड्रोन से निगरानी कर रही है।

    भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर भी छात्रों का धरना जारी है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

    ग्वालियर में आंदोलन को लेकर समर्थक और विरोधी आमने-सामने आ गए, जबकि जबलपुर में “कॉकरोच जनता पार्टी” के विरोध में “लाल हिट जनता पार्टी” ने प्रदर्शन किया। संगठन ने कहा कि छात्रों की मांगें उचित हैं, लेकिन विरोध का तरीका सही नहीं है।

    धार, मऊगंज, नर्मदापुरम, झाबुआ, सिंगरौली, भिंड, टीकमगढ़, शाजापुर, सतना, सीधी, रतलाम, रीवा, बैतूल, उमरिया, बड़वानी और श्योपुर सहित कई जिलों में भी रैलियां, धरने और ज्ञापन सौंपे गए। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई तथा कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

    प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग शामिल है। वहीं, विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया है, जिससे यह विरोध अब राज्यव्यापी रूप ले चुका है।

  • CJP और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा नहीं, कई मुद्दों पर सहमति; इस्तीफे पर कल होगा फैसला

    CJP और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा नहीं, कई मुद्दों पर सहमति; इस्तीफे पर कल होगा फैसला


    नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर जारी गतिरोध के बीच शुक्रवार को केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में अहम बैठक हुई। करीब 10 मिनट चली इस वार्ता में कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, जबकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। सरकार ने इस विषय पर विचार के लिए शनिवार तक का समय मांगा है।

    बैठक में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए, जबकि CJP का प्रतिनिधित्व सौरभ दास और आशुतोष रांका ने किया। वार्ता के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और घायल छात्रों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी। हालांकि, CJP ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    बैठक के बाद जेपी नड्डा ने बताया कि CJP ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े पांच सुझाव रखे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन प्रस्तावों पर आंतरिक स्तर पर चर्चा करेगी और शनिवार दोपहर होने वाली अगली बैठक में अपना विस्तृत पक्ष रखेगी।

    इससे पहले 20 जुलाई को भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन वह किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। अब शुक्रवार की बैठक को समाधान की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    उधर, NEET पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अब तक किए गए सुधारों और जांच की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं।

    CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि सरकार आंदोलन के दबाव में है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देर रात जारी किया गया संदेश भी इसी दबाव का परिणाम है। उनका कहना है कि संगठन अपनी प्रमुख मांगों से पीछे नहीं हटेगा और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा।

    इसी बीच, 26 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचकर उन्हें जूस पिलाया। हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वांगचुक और CJP के रुख में अंतर देखने को मिला।

    राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। एहतियात के तौर पर मध्य दिल्ली के कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं, कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर परिचालन प्रभावित होने की खबर है। प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों पर दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई जारी है।

  • दतिया पहुंचे सिंधिया का बड़ा दावा, बोले- भाजपा की जीत तय; पेपर लीक दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

    दतिया पहुंचे सिंधिया का बड़ा दावा, बोले- भाजपा की जीत तय; पेपर लीक दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई


    ग्वालियर । दतिया उपचुनाव के प्रचार अभियान ने रफ्तार पकड़ ली है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के स्टार प्रचारक ज्योतिरादित्य सिंधिया शुक्रवार को ग्वालियर पहुंचे, जहां से वे पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में चुनाव प्रचार के लिए दतिया रवाना हुए। ग्वालियर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए सिंधिया ने भरोसा जताया कि दतिया की जनता एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर विश्वास जताएगी और पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी भारी मतों से जीत दर्ज करेंगे।
    सिंधिया ने कहा कि दतिया उपचुनाव केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि विकास और क्षेत्र की प्रगति का चुनाव है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने दतिया के विकास के लिए लगातार काम किया है और आगे भी विकास की यह गति जारी रहेगी। उनके मुताबिक, जनता विकास के मुद्दे पर मतदान करेगी और भाजपा का परचम लहराएगी।
    चुनावी चर्चा के साथ-साथ सिंधिया ने देशभर में चर्चा का विषय बने NEET पेपर लीक मामले पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी देश का भविष्य हैं और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और जिन लोगों ने परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी की है, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है।
    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार परीक्षा में धांधली और पेपर लीक जैसे अपराधों पर कठोर कार्रवाई के लिए कानून को और मजबूत बना रही है। उन्होंने कहा कि दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है, ताकि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए।
    सिंधिया ने कहा कि लाखों छात्र दिन-रात मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल छात्रों के साथ अन्याय नहीं, बल्कि देश के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्पष्ट संदेश दिया है कि युवाओं के भविष्य से समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है।

    दतिया उपचुनाव को लेकर भाजपा ने अपने सभी वरिष्ठ नेताओं को प्रचार में उतार दिया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में है, जबकि कांग्रेस भी जीत के लिए जोरदार प्रचार अभियान चला रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में दतिया का चुनावी मुकाबला और अधिक रोचक होने की संभावना है।

  • NEET विवाद पर राहुल गांधी का प्रहार छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा पीएम से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रखी मांग

    NEET विवाद पर राहुल गांधी का प्रहार छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा पीएम से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रखी मांग


    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने NEET परीक्षा विवाद पेपर लीक और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने प्रेजेंटेशन के जरिए अपने आरोपों और मांगों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है लेकिन सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उसे नजरअंदाज कर रही है। राहुल ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ धक्का मुक्की की और उन्हें घसीटा गया जिससे उनके मुंह से खून निकल आया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने उनके कान में सरकार बदलने की बात कही।

    राहुल गांधी ने कहा कि NEET पेपर लीक का असर केवल परीक्षा देने वाले छात्रों तक सीमित नहीं है बल्कि लगभग साढ़े सात करोड़ छात्र और उनके परिवार इससे प्रभावित हुए हैं। उनका आरोप था कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं लेकिन किसी भी बड़े मामले में दोषियों को प्रभावी सजा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है और मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय हो रहा है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े वीडियो भी दिखाए और आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने भविष्य को लेकर आवाज उठा रहे थे तब उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है न कि उन्हें दबाना।

    राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार NEET परीक्षा की तैयारी पर लगभग उतनी ही राशि खर्च करते हैं जितना केंद्र सरकार पूरे शिक्षा बजट पर खर्च करती है। उनके अनुसार लाखों परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वर्षों तक आर्थिक और मानसिक संघर्ष करते हैं लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकार ने उसे कमजोर किया है।

    इस दौरान राहुल गांधी ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी रखीं। पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही। दूसरी मांग छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। तीसरी मांग प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है तो उसे जवाबदेही तय करनी होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे।

    राहुल गांधी ने यह भी कहा कि विपक्ष छात्रों की हर लोकतांत्रिक मांग के साथ खड़ा है और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को संसद से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और यदि परीक्षा प्रणाली पर भरोसा खत्म हो गया तो देश की प्रतिभा और विकास दोनों प्रभावित होंगे। इसी कारण विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार सरकार से जवाब मांगता रहेगा।

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    Rahul Gandhi, NEET Paper Leak, Dharmendra Pradhan, Student Protest, Indian Politics

  • NEET पेपर लीक के विरोध में इंदौर में सातवें दिन भी धरना जारी: कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    NEET पेपर लीक के विरोध में इंदौर में सातवें दिन भी धरना जारी: कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी


    इंदौर । इंदौर में NEET पेपर लीक मामले और छात्रों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। टंट्याभील चौराहे पर छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि बारिश के बावजूद धरनास्थल पर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने टेंट लगाकर अपना आंदोलन जारी रखा और नारेबाजी, कैंडल मार्च, हवन तथा क्रांतिकारी गीतों के माध्यम से अपनी मांगों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

    आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र संगठनों का कहना है कि देशभर में सामने आए NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के संबंध में कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।

    धरने में केवल NEET परीक्षा का मुद्दा ही नहीं बल्कि प्रदेश के छात्रों से जुड़े कई अन्य विषय भी शामिल किए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने छात्रवृत्ति का समय पर भुगतान, छात्रावास की बेहतर सुविधाएं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कुल 23 मांगों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखा है। उनका कहना है कि छात्रों की समस्याओं का लंबे समय से समाधान नहीं हो रहा है, इसलिए उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    धरनास्थल पर पिछले सात दिनों के दौरान कई प्रतीकात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों ने दिवंगत छात्रों की स्मृति में कैंडल मार्च निकाला, हवन किया और थाली बजाकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। उनका कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य छात्रों की आवाज शासन तक पहुंचाना है।

    प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारियों के सामने सभी मांगें रखी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में आगामी दिनों में विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

    छात्र संगठनों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। उनका आग्रह है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में भी शीघ्र कदम उठाए जाएं।