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  • NEET-UG पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, NTA एक्सपर्ट्स पेपर तैयार करते समय याद कर लेते थे सवाल

    NEET-UG पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, NTA एक्सपर्ट्स पेपर तैयार करते समय याद कर लेते थे सवाल


    नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल 94 पेज की चार्जशीट के मुताबिक, पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले ही शुरू हो गई थी। आरोप है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पेपर तैयार करने वाले कुछ एक्सपर्ट्स ने सवालों को याद कर लिया और बाद में उन्हें पर्चियों के जरिए बाहर पहुंचाया।

    CBI ने 28 जुलाई को इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें NTA के तीन एक्सपर्ट्स समेत कोचिंग संचालकों, बिचौलियों और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।

    होटल लौटकर पर्चियों पर लिखते थे सवाल
    चार्जशीट के अनुसार, NTA कार्यालय में पेपर तैयार करने और मॉडरेशन के दौरान एक्सपर्ट्स सवाल याद कर लेते थे। इसके बाद होटल लौटने पर याद किए गए प्रश्नों और उनके विकल्पों को पर्चियों पर लिखा जाता था। संबंधित प्रश्नों को व्यवस्थित करने के लिए NCERT की किताबों में अध्याय और पैराग्राफ तक चिन्हित किए जाते थे। CBI का दावा है कि NTA कार्यालय में आने-जाने के दौरान एक्सपर्ट्स की तलाशी नहीं होती थी। उन्हें रफ वर्क के लिए सादे कागज भी दिए जाते थे। आरोप है कि एक्सपर्ट पीवी कुलकर्णी ने इन कागजों पर केमिस्ट्री के 135 प्रश्न और उनके विकल्प नोट किए। उन्होंने केमिस्ट्री पेपर का मराठी से अंग्रेजी में बैक-ट्रांसलेशन भी किया।

    कोचिंग संचालकों और बिचौलियों ने बनाया नेटवर्क
    जांच एजेंसी के मुताबिक, यह किसी एक व्यक्ति की साजिश नहीं थी। परीक्षा से कई महीने पहले ही कोचिंग संचालकों और बिचौलियों ने NTA के तीनों एक्सपर्ट्स से संपर्क किया था। बातचीत, मुलाकात और कथित पैसों के लेन-देन के जरिए पेपर लीक का नेटवर्क तैयार किया गया। इसके बाद लीक हुए सवालों को वॉट्सऐप, टेलीग्राम, PDF और तस्वीरों के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाया गया। कुछ कोचिंग संस्थानों में छात्रों को हाथ से लिखे प्रश्नों के जरिए परीक्षा की तैयारी भी कराई गई। CBI के मुताबिक, डिजिटल सबूतों से बचने के लिए यह तरीका अपनाया गया था।

    इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और चैट से मिले सबूत
    CBI ने कहा है कि फोरेंसिक जांच, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, चैट रिकॉर्ड, बरामद दस्तावेजों और गवाहों के बयानों से पेपर लीक नेटवर्क की पुष्टि हुई। चार्जशीट में मनीषा संजय वाघमारे, धनंजय लोखंडे, शुभम मधुकर खैरनार और यश यादव को नेटवर्क की अहम कड़ी बताया गया है। जांच के दौरान एक आरोपी द्वारा कथित तौर पर लीक पेपर के बदले अपने 10वीं-12वीं के प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक सुरक्षा के तौर पर दिए जाने की बात भी सामने आई है।

    डॉक्टर और कोचिंग संचालक भी आरोपी
    CBI ने डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी, पुणे के COO तेजस हर्षदकुमार शाह, रेणुकाई करियर सेंटर के मैनेजिंग पार्टनर शिवराज मोटेगांवकर और सिद्धिविनायक हॉस्पिटल के मालिक डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे को भी आरोपी बनाया है। जांच एजेंसी के अनुसार, NTA के बाहर से नेटवर्क संचालित करने और लीक पेपर छात्रों तक पहुंचाने में इनकी भूमिका थी। CBI ने पेपर लीक के पीछे अवैध कमाई और कुछ कोचिंग संस्थानों के परिणाम बेहतर दिखाने का उद्देश्य बताया है।

    13 आरोपियों के खाते और लॉकर फ्रीज
    CBI ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने 13 आरोपियों के बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट अकाउंट फ्रीज किया है। तीनों NTA एक्सपर्ट्स पर पेपर लीक, भ्रष्टाचार और लोक सेवक के तौर पर विश्वासघात समेत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। चार्जशीट में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा और जुर्माने का उल्लेख किया गया है।

    पेपर लीक के बाद दोबारा हुई थी परीक्षा
    NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी। पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई। इस पूरे विवाद ने परीक्षा व्यवस्था और पेपर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

  • नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला: सीबीआई ने 13 आरोपितों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की

    नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला: सीबीआई ने 13 आरोपितों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। एजेंसी ने जांच के दौरान जुटाए गए सैकड़ों गवाहों के बयान, दस्तावेज और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों के खिलाफ अभियोजन की प्रक्रिया शुरू की है।’

    सीबीआई के अनुसार, चार्जशीट में 360 गवाहों के बयान, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्यों को शामिल किया गया है। जांच में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम-2024 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पाए गए हैं। फिलहाल सभी 13 आरोपित न्यायिक हिरासत में हैं।

    एजेंसी ने बताया कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद 12 मई को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के लिए 72 अधिकारियों और आठ साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की विशेष टीम गठित की गई। इसके बाद महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में 92 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।

    जांच के दौरान प्रश्नपत्र लीक की पूरी श्रृंखला का खुलासा हुआ। गिरफ्तार आरोपितों में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के तीन विषय विशेषज्ञ, कई कथित बिचौलिये तथा दो कोचिंग संस्थानों से जुड़े पदाधिकारी शामिल हैं।

    चार्जशीट में शामिल आरोपितों के नाम इस प्रकार हैं:

    • मनीषा मंधारे (जीवविज्ञान विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी (रसायन विज्ञान विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • मनीषा संजय हवलदार (भौतिकी विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • मनीषा संजय वाघमारे
    • धनंजय निवृत्ति लोखंडे
    • शुभम मधुकर खैरनार
    • यश यादव
    • मांगीलाल बिवाल
    • विकास बिवाल
    • दिनेश बिवाल
    • डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे
    • शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर (आरसीसी कोचिंग इंस्टीट्यूट, लातूर के संचालक)
    • तेजस हर्षदकुमार शाह (एपीएमए कोचिंग इंस्टीट्यूट, पुणे में भौतिकी संकाय एवं मुख्य परिचालन अधिकारी)

    सीबीआई ने जांच के दौरान आरोपितों के कथित आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल की है। एजेंसी ने कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज कर दिए हैं। मामले की आगे की सुनवाई विशेष अदालत में होगी, जबकि जांच के अन्य पहलुओं पर भी कार्रवाई जारी है।

  • देश की राजनीति में बड़ा झटका NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जवाबदेही का दिया संदेश

    देश की राजनीति में बड़ा झटका NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जवाबदेही का दिया संदेश

    नई दिल्ली: देशभर में NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए काम किया है और किसी भी परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे।

    धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे की जानकारी साझा करते हुए एक भावुक संदेश भी जारी किया। उन्होंने लिखा कि पिछले चार दशक से अधिक समय से वे छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उनका विश्वास हमेशा इस बात पर रहा है कि मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला होती है।

    उन्होंने अपने पत्र में कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया और अगले वर्ष से NEET परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने की घोषणा भी की गई।

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका मानना है कि सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसी भावना के तहत उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपने का निर्णय लिया।

    गौरतलब है कि NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को लेकर पिछले कई सप्ताह से देशभर में छात्र संगठन प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई राज्यों में परीक्षा प्रणाली में सुधार, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग उठाई जा रही थी।

    हालांकि, इस घटनाक्रम पर केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से इस्तीफा स्वीकार किए जाने अथवा नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

    नोट: यह खबर आपके द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है। यदि आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति भवन या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस्तीफा स्वीकार किए जाने या नए मंत्री की घोषणा होती है, तो उससे संबंधित स्थिति अलग हो सकती है।

  • पेपर लीक पर सरकार का बड़ा एक्शन, संशोधन बिल को कैबिनेट की मंजूरी; 27 जुलाई को संसद में पेश होने के आसार

    पेपर लीक पर सरकार का बड़ा एक्शन, संशोधन बिल को कैबिनेट की मंजूरी; 27 जुलाई को संसद में पेश होने के आसार


    नई दिल्ली। देशभर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों और NEET-UG पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पेपर लीक संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी गई है। अब इस विधेयक को 27 जुलाई को संसद के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

    इससे पहले गुरुवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के नाम एक वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल परीक्षा प्रणाली पर नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य और उनके परिवारों की उम्मीदों पर भी चोट पहुंचाती हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए कठोर कानून ला रही है।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि प्रस्तावित कानून में पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही परीक्षा में धांधली, पेपर लीक और संगठित नकल जैसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए कड़ी सजा सुनिश्चित करने का प्रावधान भी रखा गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों द्वारा तैयार किए गए मसौदे पर कैबिनेट में चर्चा के बाद उसे मंजूरी दे दी गई है।

    सरकार के अनुसार, यह विधेयक परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। संसद से पारित होने के बाद नए कानून के जरिए पेपर लीक जैसे मामलों में तेजी से सुनवाई और कठोर दंड सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

    यह पूरा विवाद 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद सामने आया था। मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। जांच एजेंसी महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली सहित कई राज्यों में छानबीन कर चुकी है और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होने से बचाना थी। इसी उद्देश्य से सीमित समय में परीक्षा प्रक्रिया पूरी कराई गई और निर्धारित समय पर परिणाम भी घोषित किए गए।

    उधर, इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश को पर्याप्त नहीं बताते हुए परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की मांग की। वहीं, CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि जिम्मेदारी तय किए बिना केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।

    सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन कानून परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम साबित होगा।

  • NEET UG परीक्षा को ऑनलाइन कराने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, 21 जून की री-एग्जाम पर बढ़ी नजर

    NEET UG परीक्षा को ऑनलाइन कराने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, 21 जून की री-एग्जाम पर बढ़ी नजर

    नई दिल्ली । देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को लेकर चल रहे विवाद में आज एक अहम मोड़ आया, जब Supreme Court of India ने परीक्षा को ऑनलाइन या कंप्यूटर आधारित मोड में कराने की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। यह याचिका जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच के समक्ष प्रस्तुत की गई थी, जिसमें परीक्षार्थियों की ओर से परीक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग उठाई गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस समय National Testing Agency पहले से ही कई प्रशासनिक और तकनीकी दबावों का सामना कर रही है, इसलिए इस मामले पर विस्तृत सुनवाई छुट्टियों के बाद की जाएगी।

    सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से यह भी टिप्पणी की गई कि मौजूदा परिस्थितियों में परीक्षा प्रणाली को अचानक बदलना आसान नहीं है और इसके लिए व्यापक तैयारी और मूल्यांकन की आवश्यकता होती है। अदालत ने संकेत दिया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे फिलहाल टालना उचित होगा। इस फैसले के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, क्योंकि लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की मांग उठती रही है।

    वर्तमान में NEET UG 2026 परीक्षा 21 जून को पुनः आयोजित की जा रही है। यह वही परीक्षा है जिसे पहले 3 मई को आयोजित किया गया था, लेकिन पेपर लीक के आरोपों और अनियमितताओं की जांच के बाद इसे रद्द करना पड़ा था। मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही है, जिससे परीक्षा की विश्वसनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पुनर्परीक्षा को लेकर National Testing Agency ने स्पष्ट किया है कि सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और एडमिट कार्ड 14 जून तक जारी कर दिए जाएंगे। वहीं, परीक्षा के बाद 24 जून तक आंसर की जारी होने की संभावना भी जताई गई है।

    इसी बीच शिक्षा नीति से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता अब पहले से अधिक महसूस की जा रही है। सरकार और परीक्षा एजेंसियों ने संकेत दिया है कि आने वाले वर्ष से NEET UG परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में स्थानांतरित करने की दिशा में गंभीर तैयारी चल रही है। इस संबंध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने भी पहले यह भरोसा जताया है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाएगा, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

    हाल ही में परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक भी आयोजित की गई थी, जिसमें शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, परीक्षा एजेंसी के प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित संस्थानों ने भाग लिया था। बैठक में परीक्षा को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों पर चर्चा की गई। इसके बावजूद ऑनलाइन परीक्षा को लेकर उठ रही मांगों पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। सुप्रीम कोर्ट का ताजा रुख यह संकेत देता है कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला विस्तृत सुनवाई और सभी पक्षों की दलीलों के बाद ही लिया जाएगा। फिलहाल छात्रों की नजर 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा और उसके बाद आने वाले परिणामों पर टिकी हुई है।

  • नीट परीक्षा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, एनटीए और सीबीआई से जवाब तलब किया है। मामले में परीक्षा प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

    नीट परीक्षा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, एनटीए और सीबीआई से जवाब तलब किया है। मामले में परीक्षा प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

    नई दिल्ली ।देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में शामिल नीट-यूजी को लेकर एक बार फिर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवाद और अनियमितताओं के आरोपों के बीच मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इस मामले में शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और केंद्रीय जांच एजेंसी से जवाब मांगा है। कोर्ट के इस कदम के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों की नजरें अब आगामी सुनवाई पर टिक गई हैं।

    नीट परीक्षा से जुड़े मामले पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि परीक्षा की दोबारा प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र और न्यायिक निगरानी में कराई जाए ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी या विवाद की संभावना न रहे। इसके साथ ही परीक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की भी मांग की गई।

    याचिका में सुझाव दिया गया कि इस समिति का नेतृत्व न्यायपालिका से जुड़े अनुभवी व्यक्ति के हाथों में हो और इसमें तकनीकी तथा जांच से जुड़े विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए। इसके पीछे उद्देश्य यह बताया गया कि परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूत बनाया जा सके। साथ ही यह भी मांग रखी गई कि परीक्षा परिणामों को केंद्रवार सार्वजनिक किया जाए ताकि किसी भी असामान्य पैटर्न या संभावित गड़बड़ी की पहचान आसानी से हो सके।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि पहले भी सुधार संबंधी सुझाव दिए जा चुके हैं और कई सिफारिशों पर सहमति भी बनी थी, लेकिन इसके बावजूद यदि ऐसी स्थितियां सामने आती हैं तो यह गंभीर विषय है। अदालत ने संबंधित पक्षों को परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सुधारात्मक कदमों और निगरानी संबंधी उपायों की जानकारी शपथ पत्र के रूप में देने का निर्देश दिया है।

    गौरतलब है कि नीट परीक्षा देशभर में मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है और इसमें लाखों छात्र हिस्सा लेते हैं। ऐसे में परीक्षा से जुड़ा कोई भी विवाद सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है। इसी कारण इस मामले को अत्यधिक संवेदनशील माना जा रहा है।

    मामले में जांच एजेंसियां भी सक्रिय हैं और कथित अनियमितताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और निष्पक्षता पर एक बार फिर व्यापक बहस छेड़ दी है। अब अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट हो सकेगा कि आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी और परीक्षा व्यवस्था में क्या नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • NEET UG: री-एग्जाम से पहले अलर्ट मोड पर सरकार…. अफवाहों पर नकेल कसने की तैयारी

    NEET UG: री-एग्जाम से पहले अलर्ट मोड पर सरकार…. अफवाहों पर नकेल कसने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    मेडिकल (Medical) की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) के री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार (Central government) पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गई है। 3 मई को हुई परीक्षा में पेपर लीक (Paper leak) और ग्रेस मार्क्स जैसे विवादों के बाद, अब सरकार सोशल मीडिया पर फैलने वाली झूठी अफवाहों और पैनिक फैलाने वाले पोस्ट्स पर सख्त नकेल कसने की तैयारी में है। छात्रों का भरोसा फिर से बहाल करने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने टेक जगत के दिग्गजों- गूगल (Google), मेटा (Meta) और टेलीग्राम (Telegram) को भी अपने साथ जोड़ लिया है, ताकि किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी को इंटरनेट पर फैलने से पहले ही रोका जा सके। बता दें कि आज 21 जून को NEET-UG का दोबारा एग्जाम हो रहा है।


    शिक्षा मंत्री ने लिया मोर्चा, दिए ‘फोकस्ड क्रैकडाउन’ के निर्देश

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को एक हाई-लेवल मीटिंग की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रतिनिधियों के अलावा केंद्रीय खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी भी मौजूद रहे। शिक्षा मंत्री ने सख्त हिदायत दी है कि परीक्षा से पहले ऑनलाइन एक्टिव होने वाले उन नेटवर्क्स पर सीधा और ‘फोकस्ड क्रैकडाउन’ किया जाए, जो एक सोची-समझी साजिश के तहत गलत जानकारी फैलाते हैं।


    टेलीग्राम और सीक्रेट ग्रुप्स पर खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर

    शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी चिंता टेलीग्राम चैनल्स, अनजान ग्रुप्स और बॉट्स को लेकर है, जो बड़े एग्जाम्स से ठीक पहले अचानक बहुत एक्टिव हो जाते हैं। ये ग्रुप्स व्यूज और पैसों के लालच में ‘पेपर लीक’ के झूठे दावे, क्लिकबेट मैसेज और बिना सिर-पैर की जानकारी सर्कुलेट करते हैं। इससे छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच दहशत का माहौल बन जाता है।

    खुफिया इनपुट्स से यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ चुनिंदा फोन नंबर्स का इस्तेमाल करके दर्जनों संदिग्ध चैनल ऑपरेट किए जा रहे हैं, जो इनकी संगठित गतिविधि की ओर इशारा करता है। इसके बाद एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल सर्विलांस और कड़ी कर दी गई है। उन ग्रुप्स पर खास नजर है जो छात्रों को एग्जाम से पहले “अंदर की जानकारी” या एडवांस में पेपर देने का दावा करते हैं।


    टेक कंपनियों ने दिया पूरा सहयोग का भरोसा

    राहत की बात यह है कि सरकार की इस सख्ती पर मेटा, गूगल और टेलीग्राम जैसी कंपनियों ने सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि परीक्षा से जुड़ी किसी भी भ्रामक या फेक जानकारी की पहचान करके उसे तेजी से ब्लॉक और रिमूव किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने कंपनियों से कहा है कि वे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और पुलिस एजेंसियों के साथ मिलकर काम करें, ताकि प्रोपेगेंडा और खौफ फैलाने वाले चैनल्स को तुरंत बंद किया जा सके।

    अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को भी परीक्षा से पहले डिजिटल सर्विलांस मजबूत करने को कहा गया है। उन एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स और तेजी से बढ़ रहे ग्रुप्स पर खास नजर रखी जा रही है, जो परीक्षार्थियों को परीक्षा से जुड़ी सामग्री एडवांस में देने या ‘इनसाइड इंफॉर्मेशन’ मुहैया कराने का दावा करते हैं।


    एग्जाम सेंटर पर कैसी होगी व्यवस्था?

    मंगलवार को री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए शिक्षा मंत्री ने साफ कर दिया था कि पिछली परीक्षा की सभी खामियों को पूरी तरह दूर किया जाना चाहिए। सभी राज्यों के जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ को-ऑर्डिनेशन मीटिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मकसद परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और मॉनिटरिंग के प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करना है। इसके साथ ही, अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि री-एग्जाम के दिन छात्रों के लिए ट्रांसपोर्टेशन (आवाजाही), पीने के पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं का खास ख्याल रखा जाए ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।


    क्यों हो रहा है नीट री-एग्जाम?

    आपको बता दें कि 3 मई को आयोजित की गई नीट-यूजी परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। इसके बाद ही री-एग्जाम की घोषणा की गई थी। इस पूरे विवाद (पेपर लीक के आरोप, ग्रेस मार्क्स विवाद और संगठित नकल) ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद सरकार अब हर स्तर पर सख्ती बरत रही है।

  • नीट यूजी परीक्षा रद्द, सीबीआई जांच के आदेश से हड़कंप, जल्द घोषित होगी नई परीक्षा तिथि

    नीट यूजी परीक्षा रद्द, सीबीआई जांच के आदेश से हड़कंप, जल्द घोषित होगी नई परीक्षा तिथि


    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक नीट यूजी को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है, जिसने लाखों छात्रों और अभिभावकों को प्रभावित किया है। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था ने 3 मई को हुई नीट यूजी परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की है। इस निर्णय के बाद अब परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, हालांकि नई तारीखों का ऐलान अभी नहीं किया गया है।

    यह परीक्षा देशभर में एमबीबीएस और अन्य मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 23 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा रद्द किए जाने का मुख्य कारण पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े गंभीर आरोप बताए जा रहे हैं, जिनकी पुष्टि के लिए विस्तृत जांच शुरू की गई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, परीक्षा के कुछ प्रश्नों और सामग्री के लीक होने की शिकायतें सामने आने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। इसके बाद जांच एजेंसियों को मामले की जानकारी भेजी गई और सभी तथ्यों की समीक्षा की गई। जांच रिपोर्ट और शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर यह पाया गया कि वर्तमान परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है, जिससे इसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती थी।

    इसी को ध्यान में रखते हुए परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया है और अब पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई है। इसके साथ ही परीक्षा से जुड़े सभी दस्तावेज, रिकॉर्ड और जानकारी जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराई जाएगी ताकि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा सके।

    इस फैसले के बाद छात्रों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां एक तरफ परीक्षा रद्द होने से निराशा है, वहीं दूसरी ओर यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि दोबारा परीक्षा अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाएगी।

    परीक्षा प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों ने पहले आवेदन किया था, उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। उनके आवेदन विवरण और परीक्षा केंद्र मान्य रहेंगे। इसके अलावा किसी भी अभ्यर्थी से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और पहले जमा की गई फीस से जुड़े नियमों पर भी विचार किया जा रहा है।

    नई परीक्षा की तिथियों की घोषणा जल्द ही आधिकारिक रूप से की जाएगी। साथ ही एडमिट कार्ड और अन्य जरूरी सूचनाएं भी नए शेड्यूल के अनुसार जारी की जाएंगी। प्राधिकरण ने छात्रों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी अफवाह से दूर रहें।

    इस पूरे घटनाक्रम ने देश की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि यह कदम लंबे समय में परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी था।

    अब सभी की नजरें आगामी जांच और नई परीक्षा कार्यक्रम पर टिकी हुई हैं, जो इस पूरे विवाद के बाद एक नई शुरुआत साबित हो सकती है।