Tag: Negotiation

  • ट्रंप ने दोहा बैठक का किया ऐलान, तेहरान ने कहा- कोई कार्यक्रम तय नहीं, अमेरिका-ईरान रिश्तों में नई कूटनीतिक उलझन

    ट्रंप ने दोहा बैठक का किया ऐलान, तेहरान ने कहा- कोई कार्यक्रम तय नहीं, अमेरिका-ईरान रिश्तों में नई कूटनीतिक उलझन


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक असमंजस की स्थिति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने बातचीत का अनुरोध किया है और दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच अगले दिन कतर की राजधानी दोहा में बैठक होगी। हालांकि, ट्रंप के इस बयान के कुछ ही समय बाद ईरान ने ऐसी किसी भी प्रस्तावित बैठक से साफ इनकार कर दिया। दोनों देशों के विपरीत दावों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है और यह संकेत दिया है कि दोनों पक्षों के बीच संवाद की प्रक्रिया अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर एक संक्षिप्त संदेश जारी करते हुए कहा कि ईरान की ओर से बैठक का अनुरोध किया गया है और यह बातचीत दोहा में आयोजित होगी। उनके इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना गया जब पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों के बाद क्षेत्रीय तनाव लगातार बना हुआ है और कई देश किसी भी संभावित कूटनीतिक पहल पर नजर बनाए हुए हैं।

    दूसरी ओर, ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने स्पष्ट किया कि इस सप्ताह कतर में अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी तकनीकी स्तर की बैठक की कोई योजना तय नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि विभिन्न मध्यस्थ देशों के माध्यम से बातचीत की प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी है, लेकिन जिन बैठकों की चर्चा मीडिया में की जा रही है, उनकी पुष्टि नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, किसी भी औपचारिक तकनीकी वार्ता से पहले समय, स्थान और अन्य आवश्यक शर्तों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनना जरूरी होगा।

    ईरानी पक्ष के इस बयान से स्पष्ट संकेत मिला कि बैकचैनल संपर्क और औपचारिक वार्ता के बीच अभी भी अंतर बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में दोनों देश सार्वजनिक बयानों और वास्तविक कूटनीतिक प्रयासों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में आधिकारिक घोषणा से पहले किसी भी संभावित बैठक को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है।

    हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव, समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे प्रभाव ने अमेरिका और ईरान के बीच संवाद की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चाहता है कि दोनों देशों के बीच किसी प्रकार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संवाद जारी रहे ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सके। हालांकि दोनों पक्ष अब भी कई प्रमुख मुद्दों पर अलग-अलग रुख अपनाए हुए हैं।

    इसी बीच ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। 4 से 9 जुलाई के बीच आयोजित होने वाले राजकीय कार्यक्रम में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन इस अवसर पर देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। इसे भारत और ईरान के बीच जारी राजनयिक संपर्कों के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

    फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। एक ओर ट्रंप का सार्वजनिक दावा है तो दूसरी ओर तेहरान का आधिकारिक खंडन। ऐसे में अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच वास्तव में कोई औपचारिक बैठक होती है या कूटनीतिक संपर्क केवल मध्यस्थ देशों के माध्यम से ही आगे बढ़ता है।

  • ईरान समझौते पर आगे बढ़ने की कोशिश स्विट्जरलैंड यात्रा टलने के बावजूद अमेरिका प्रतिबद्ध

    ईरान समझौते पर आगे बढ़ने की कोशिश स्विट्जरलैंड यात्रा टलने के बावजूद अमेरिका प्रतिबद्ध

    नई द‍िल्‍ली । वाशिंगटन में ईरान के साथ तकनीकी वार्ता के अगले चरण को लेकर चल रही तैयारी के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance की स्विट्जरलैंड यात्रा को फिलहाल टाल दिया गया है। यह यात्रा उस प्रक्रिया का हिस्सा थी जिसमें दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए प्रारंभिक समझौते को लागू करने और उसके क्रियान्वयन से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से बातचीत होनी थी। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि यात्रा स्थगित होने के बावजूद बातचीत की प्रक्रिया जारी है और दोनों पक्ष जल्द से जल्द अगले चरण की तकनीकी चर्चा शुरू करने के लिए तैयार हैं।

    व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि तकनीकी बातचीत की तारीख अभी अंतिम रूप में तय नहीं हुई है और स्थिति लगातार बदल रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल किसी भी समय प्रस्थान के लिए तैयार है लेकिन वार्ता की व्यवस्था और समय तय करना आसान प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल उपराष्ट्रपति उसी दिन यात्रा नहीं कर रहे हैं और आगे की जानकारी परिस्थितियों के अनुसार साझा की जाएगी।

    अमेरिकी प्रशासन ने यह संकेत दिया कि जैसे ही अगले चरण की बातचीत को लेकर कोई निश्चित कार्यक्रम तय होगा उसे सार्वजनिक किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि बातचीत की प्रक्रिया में कोई देरी नहीं की जा रही है बल्कि समन्वय से जुड़े तकनीकी कारणों के चलते समय में बदलाव हुआ है। प्रशासन ने यह भी दोहराया कि उनका उद्देश्य जल्द से जल्द तकनीकी वार्ता शुरू करना है ताकि समझौते के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाया जा सके।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब वाशिंगटन और तेहरान दोनों ही पक्ष समझौते के बाद निगरानी और अनुपालन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की तैयारी कर रहे हैं। इन वार्ताओं में सबसे अहम विषय यह माना जा रहा है कि समझौते को जमीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाए और उसकी प्रभावी निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाए।

    उपराष्ट्रपति ने पहले संकेत दिया था कि तकनीकी बातचीत कुछ ही दिनों में शुरू हो सकती है और इसके लिए स्विट्जरलैंड संभावित स्थान हो सकता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि इस प्रक्रिया का समन्वय चुनौतीपूर्ण है क्योंकि दोनों पक्षों के बीच समय और स्थान को लेकर लगातार बदलाव की स्थिति बनी रहती है। उन्होंने कहा था कि योजना के अनुसार स्विट्जरलैंड जाने की तैयारी थी लेकिन यह स्थिति परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

    अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि बातचीत का मुख्य फोकस तकनीकी विवरणों पर होगा जिनमें निगरानी प्रक्रिया सत्यापन तंत्र और ईरान के संवर्धित यूरेनियम से जुड़े प्रबंधन जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार इन तकनीकी पहलुओं पर सहमति बनना ही बड़े समझौते की सफलता की असली परीक्षा होगी।

    व्हाइट हाउस ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशासन केवल बयानों पर नहीं बल्कि व्यावहारिक कार्यों पर भरोसा करता है और इसी आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। अमेरिका का कहना है कि बातचीत में प्रगति तभी मानी जाएगी जब जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम सामने आएंगे और समझौते का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।