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  • दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद भी नेहा बोरा का इनकार, 10 हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरने से किया मना

    दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद भी नेहा बोरा का इनकार, 10 हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरने से किया मना

    नई दिल्ली । ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और एक जमानतदार देने से इनकार कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट से उनकी याचिका खारिज होने के बाद भी उन्होंने अपना रुख नहीं बदला। नेहा बोरा ने स्पष्ट कहा कि उनकी ओर से कोई शर्त नहीं रखी गई है और वह बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने नहीं जा रही हैं। यह मामला दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन और उसके बाद पुलिस की ओर से जारी नोटिस से जुड़ा है।

    मामले की शुरुआत 16 अक्टूबर को हुई थी, जब दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में विरोध प्रदर्शन और ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के सिलसिले में पुलिस ने नेहा बोरा को हिरासत में लिया था। इसके बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) की अदालत की ओर से उन्हें नोटिस जारी किया गया। इसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की संबंधित धाराओं के तहत जांच के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और एक जमानतदार प्रस्तुत करने को कहा गया था।

    नेहा बोरा ने इस नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी ओर से दलील दी गई कि नोटिस अस्पष्ट है और इसमें तथ्यात्मक गलतियां हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन से शांति भंग होने की कोई आशंका नहीं थी। ऐसे में बॉन्ड भरने का निर्देश अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को प्रभावित करता है। उन्होंने अदालत से नोटिस में हस्तक्षेप करने की मांग की थी।

    हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को इस याचिका को खारिज कर दिया और पुलिस की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पास नेहा बोरा के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध थी। अदालत के अनुसार, जारी किया गया नोटिस कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप था और इसे केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर जारी नहीं किया गया था।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्तर पर हाईकोर्ट विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की जगह लेकर उपलब्ध सामग्री के आधार पर उनकी संतुष्टि का दोबारा आकलन नहीं कर सकता। मामले में उपलब्ध सामग्री में नेहा बोरा का उल्लेख करने वाली छह प्राथमिकी, विभिन्न स्थानों पर हुई घटनाओं से संबंधित सामान्य डायरी की प्रविष्टियां और मंडी हाउस क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू होने की जानकारी शामिल थी। अदालत ने इन्हीं तथ्यों के आधार पर नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।

    हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बावजूद नेहा बोरा ने बॉन्ड भरने से साफ मना कर दिया है। उनका कहना है कि वह इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी। इस तरह मामला अब अदालत के फैसले के बाद भी उनके रुख को लेकर चर्चा में है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बॉन्ड भरने से इनकार करने के बाद उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई के संबंध में कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।

    यह मामला शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को सामने लाता है। फिलहाल हाईकोर्ट ने नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है, जबकि नेहा बोरा ने 10,000 रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड और जमानतदार देने से इनकार करने का अपना रुख कायम रखा है।

  • नेहा पच्चीसिया मामले में एमपी हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, एफआईआर चुनौती याचिका पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा

    नेहा पच्चीसिया मामले में एमपी हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, एफआईआर चुनौती याचिका पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा

    मध्य प्रदेश /कटनी की निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक यानी CSP नेहा पच्चीसिया से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। नेहा पच्चीसिया ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं हैं और उन्हें मामले में फंसाया गया है। मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

    नेहा पच्चीसिया के खिलाफ कटनी के कुठला थाने में मामला दर्ज किया गया है। यह प्रकरण जमीन के सौदे और पद के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोपों को लेकर है। मामले में नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी भी आरोपी बनाए गए हैं। क्षितिज राज बारापात्रे को मामले में मुख्य फाइनेंसर और मारूफ अहमद हनफी को कागजी खरीदार बताया गया है।

    हाई कोर्ट में दाखिल याचिका के जरिए नेहा पच्चीसिया ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है। उनकी ओर से आरोपों को गलत बताते हुए कानूनी कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं, सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि नेहा पच्चीसिया फिलहाल फरार हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी है।

    मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से नेहा पच्चीसिया के खिलाफ पर्याप्त भ्रष्टाचार संबंधी साक्ष्य होने का दावा किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सुनवाई पूरी कर ली और फैसला सुरक्षित रख लिया। अब इस मामले में अदालत के फैसले का इंतजार है।

    इस मामले से पहले नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत याचिका भी जिला अदालत में खारिज हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई से राहत पाने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया। एफआईआर दर्ज होने के बाद से नेहा पच्चीसिया के साथ क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के भी फरार होने की जानकारी दी गई है।

    तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। प्रत्येक आरोपी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद से तीनों के मोबाइल फोन बंद बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश के लिए एसआईटी, पुलिस की अलग-अलग टीमें और साइबर सेल संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

    नेहा पच्चीसिया का पुलिस सेवा में आने का सफर भी चर्चा में रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 20वीं रैंक हासिल कर पुलिस सेवा में प्रवेश किया था और बाद में कटनी में CSP के पद पर पदस्थ रहीं। वर्तमान मामले के सामने आने के बाद वह निलंबित हैं और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर की वैधता को लेकर हाई कोर्ट में कानूनी लड़ाई चल रही है।

    मामले में आगे की दिशा अब हाई कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी। अदालत ने बुधवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है। इस बीच पुलिस की ओर से फरार आरोपियों की तलाश और मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया जारी है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों पर अंतिम स्थिति अदालत की प्रक्रिया और जांच के आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • कटनी में सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन, निलंबन के निर्देश और कार्यालय सील

    कटनी में सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन, निलंबन के निर्देश और कार्यालय सील

    मध्य प्रदेश:के कटनी में पुलिस प्रशासन से जुड़े गंभीर आरोपों के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीएसपी नेहा पच्चीसिया को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के मुख्य सचिव को इस संबंध में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    यह मामला कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के एक प्रकरण से जुड़ा है। आरोप है कि हत्या के मामले में नामजद आरोपी रमेश लोधी पर दबाव बनाकर उसकी कंहवारा स्थित जमीन को कथित तौर पर वास्तविक मूल्य से काफी कम कीमत पर दूसरे व्यक्ति के नाम हस्तांतरित कराया गया। इसी प्रकरण में सीएसपी नेहा पच्चीसिया की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।

    जांच से जुड़े तथ्यों के अनुसार, संबंधित जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82.86 लाख रुपये बताया गया है, जबकि उसे कथित रूप से 18.20 लाख रुपये में मारूफ अहमद हनफी के नाम हस्तांतरित कराया गया। मामले में मारूफ अहमद हनफी को कथित फ्रंटमैन के तौर पर बताया गया है। जमीन के लेनदेन को लेकर पुलिस प्रशासन के स्तर पर भी जांच की जा रही है।

    आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कटनी में सीएसपी कार्यालय को भी सील कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय से मिले निर्देशों के बाद प्रशासनिक टीम ने की। कार्यालय सील करने का उद्देश्य मामले से संबंधित केस डायरी, सरकारी रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखना बताया गया है, ताकि जांच के दौरान किसी प्रकार की छेड़छाड़ या साक्ष्यों पर प्रभाव की आशंका न रहे।

    मामले में कुठला थाने में एफआईआर संख्या 0738/2026 दर्ज की गई है। सीएसपी नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। दर्ज धाराओं में 61, 198, 199(बी), 308(7) और 318(4) शामिल हैं।

    जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि जमीन के कथित सौदे में सीएसपी से करीबी बताए जा रहे क्षितिज राज बारापत्रे के खातों से धनराशि की फंडिंग की गई थी। इस पहलू की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे लेनदेन की प्रकृति और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, दबाव या पद के कथित दुरुपयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

    निलंबन की कार्रवाई के साथ गृह विभाग की ओर से विभागीय जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी जांच को भी तेज किए जाने की बात सामने आई है। अब जांच के दौरान जमीन सौदे, कथित वित्तीय लेनदेन, पुलिस पद के संभावित दुरुपयोग और संबंधित दस्तावेजों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।

    सरकार की इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

  • इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में हाई-प्रोफाइल ड्रग पार्टियां: 15000 में एंट्री, युवतियों को पैडलर बनाकर 5 राज्यों में एमडी ड्रग सप्लाई

    इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में हाई-प्रोफाइल ड्रग पार्टियां: 15000 में एंट्री, युवतियों को पैडलर बनाकर 5 राज्यों में एमडी ड्रग सप्लाई


    नई दिल्ली। इंदौर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें भोपाल का अबान शकील मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। पुलिस ने अबान को इंदौर में ड्रग डिलीवरी के इंतजार के दौरान गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि अबान गोवा, इंदौर, मुंबई, दिल्ली और भोपाल जैसे कई बड़े शहरों में एमडी ड्रग की सप्लाई में सक्रिय था। इस गिरोह में दो युवतियां भी पैडलर के रूप में शामिल थीं, जिन्हें अबान और उसके साथी वैभव उर्फ बाबा शर्मा मोटे कमीशन और ड्रग की फ्री खुराक का लालच देकर तस्करी के काम में जोड़ते थे।
    पुलिस ने अबान की निशानदेही पर दो युवतियों और बाबा शर्मा को भी गिरफ्तार किया है।

    इंदौर पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि अबान और बाबा शर्मा अंतरराज्यीय एमडी तस्कर गिरोह के सदस्य हैं और यह गिरोह चार से पांच राज्यों में ड्रग तस्करी कर रहा था। जांच के दौरान यह तथ्य भी उजागर हुआ कि इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में आरोपी बाबा शर्मा, अलीशा मसीह और नेहा पार्टीज का आयोजन करते थे। इन पार्टियों में एंट्री फीस 10 से 15 हजार रुपए तक ली जाती थी और रईसजादों को ड्रग खपाने का काम किया जाता था।

    पुलिस ने बताया कि अबान अपनी पार्टीज के जरिए युवाओं को आकर्षित करता था और बाद में उन्हें एमडी की खुराक देकर पार्टी कल्चर के नाम पर नशे का आदी बनाता था। इसके बाद वही युवतियां और अन्य सदस्य ड्रग सप्लाई के लिए आगे काम करते थे। गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से गोवा, दिल्ली, इंदौर, भोपाल, मुंबई सहित अन्य शहरों में पार्टीज आयोजित करते रहे हैं।

    अब तक इस मामले में कुल चार गिरफ्तारियां हुई हैं।

    इंदौर पुलिस ने अबान के साथ कनाड़िया, मुंबई और देवास से गिरोह के तीन और सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी वैभव उर्फ बाबा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह अबान और युवतियों के साथ मिलकर एमडी ड्रग्स की तस्करी करता था।

    पुलिस के मुताबिक, गिरोह गोवा सहित कई राज्यों के पब, बार और क्लबों में एमडी ड्रग की सप्लाई करता था और इसकी कीमत लगभग 10 हजार रुपए प्रति ग्राम थी। पुलिस अभी आरोपी से एमडी ड्रग्स के सोर्स के बारे में पूछताछ कर रही है और उसके बाद गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी भी संभव है।

    इस बीच, अबान शकील का नाम ड्रग तस्करी में फंसने के बाद भोपाल डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन (बीडीसीए) ने उसे अपनी प्रारंभिक सदस्यता से बर्खास्त कर दिया है। बीडीसीए ने एक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की है। अबान बीडीसीए का आजीवन सदस्य भी था। पुलिस ने बताया कि अबान कोहेफिजा इलाके में स्थित सैफिया कॉलेज मैदान के पास बने करोड़ों रुपए कीमत के बंगले में रहता था और उसके घर के पोर्च पर लग्जरी कारें खड़ी रहती थीं।
    इस मामले में इंदौर के कनाड़िया थाने में अपराध क्रमांक 37/2025 के तहत धारा 8/22 एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। अब तक आरोपियों से कुल 15.95 ग्राम एमडी ड्रग्स, बिना नंबर की इको स्पोर्ट्स कार, थार और एक एसयूवी जब्त की गई है। पुलिस का कहना है कि अबान थार जीप से भोपाल-इंदौर के पब और लाउंज में ड्रग सप्लाई करता था और उसके लिए लड़कियां भी पैडलर का काम करती थीं।

    इंदौर क्राइम ब्रांच और कनाड़िया पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अबान की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस ने मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच तेज कर दी है, जिससे जल्द ही गिरोह के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना है।