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  • हामिद अंसारी के नेहरू वाले बयान पर BJP का कांग्रेस पर हमला, सुधांशु त्रिवेदी ने लगाए वैचारिक बदलाव के आरोप

    हामिद अंसारी के नेहरू वाले बयान पर BJP का कांग्रेस पर हमला, सुधांशु त्रिवेदी ने लगाए वैचारिक बदलाव के आरोप

    नई दिल्ली । पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के जवाहरलाल नेहरू से जुड़े एक पुराने कथन के संदर्भ के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने 21 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंसारी के बयान को कांग्रेस की मौजूदा वैचारिक दिशा से जोड़ते हुए कई सवाल उठाए।

    विवाद की शुरुआत अंसारी के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने संविधान विशेषज्ञ और लेखक ए.जी. नूरानी की 2019 में प्रकाशित पुस्तक ‘द आरएसएस: ए मेनेस टू इंडिया’ का हवाला दिया। अंसारी ने पुस्तक में दर्ज एक संदर्भ के आधार पर नेहरू के विचारों का उल्लेख किया था। यह संदर्भ तत्कालीन विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया द्वारा दर्ज किए गए एक आधिकारिक रिकॉर्ड से जुड़ा बताया गया है।

    अंसारी के अनुसार, उस रिकॉर्ड में नेहरू के हवाले से कहा गया था कि भारत के लिए बड़ा खतरा कम्युनिज्म नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है। अंसारी ने यह बात नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जुड़े व्यापक संदर्भ में रखी थी।

    अंसारी के बयान के बाद भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अंसारी ने जिस पुस्तक और नेहरू के कथन का हवाला दिया, उससे कांग्रेस की मौजूदा विचारधारा पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की कांग्रेस अति-वामपंथ की दिशा में आगे बढ़ गई है।

    त्रिवेदी ने अपने बयान में कांग्रेस को ‘मुस्लिम लीग माओइस्ट कांग्रेस’ कहा। उन्होंने यह भी कहा कि अंसारी के संदर्भ से यह बात सामने आती है कि नेहरू के दौर में कम्युनिज्म को भी एक खतरे के रूप में देखा जाता था। इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस की वर्तमान राजनीतिक दिशा को लेकर सवाल खड़े किए।

    भाजपा नेता ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के राजनीतिक विमर्श को भी इस बहस से जोड़ते हुए निशाना साधा। उनका कहना था कि राहुल गांधी की ओर से व्यक्त किए जाने वाले विचारों को नेहरू के राजनीतिक संदर्भ से जोड़कर देखा जाना चाहिए। यह टिप्पणी भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी वैचारिक बहस का हिस्सा बन गई है।

    त्रिवेदी ने केरल में कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के राजनीतिक गठबंधन का भी उल्लेख किया। उन्होंने मुस्लिम लीग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और मोहम्मद इस्माइल से जुड़े राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कांग्रेस के मौजूदा गठबंधन पर सवाल उठाए।

    उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि आज की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को जिन्ना की मुस्लिम लीग से अलग पहचान के रूप में देखा जाता है, तो कांग्रेस को भी उसके ऐतिहासिक राजनीतिक संदर्भ से अलग करके देखने पर सवाल उठ सकते हैं।

    इस पूरे विवाद का केंद्र नेहरू से जुड़ा वह ऐतिहासिक कथन है, जिसे हामिद अंसारी ने ए.जी. नूरानी की पुस्तक के हवाले से सामने रखा। भाजपा ने इसे कांग्रेस की वैचारिक दिशा पर हमला करने के आधार के रूप में इस्तेमाल किया है। वहीं, इस बहस में नेहरू के कथन के ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं।

    नेहरू के पुराने कथन से शुरू हुई यह राजनीतिक बहस अब कांग्रेस की वर्तमान विचारधारा, नागरिक राष्ट्रवाद, हिंदू दक्षिणपंथी राजनीति और कांग्रेस के राजनीतिक गठबंधनों तक पहुंच गई है। हामिद अंसारी की टिप्पणी और सुधांशु त्रिवेदी की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को मौजूदा राजनीतिक विमर्श में चर्चा का विषय बना दिया है।

  • भोपाल में कांग्रेस विचार विभाग की बैठक, केप्टन डाबर बोले- नेहरू ने आधुनिक भारत बनाया, भाजपा ने अफवाह तंत्र खड़ा किया

    भोपाल में कांग्रेस विचार विभाग की बैठक, केप्टन डाबर बोले- नेहरू ने आधुनिक भारत बनाया, भाजपा ने अफवाह तंत्र खड़ा किया

    मध्यप्रदेश: की राजधानी भोपाल में आयोजित कांग्रेस विचार विभाग की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्र सरकार पर कई राजनीतिक एवं वैचारिक मुद्दों को लेकर तीखे आरोप लगाए। कांग्रेस विचार विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष केप्टन प्रवीण डाबर ने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जबकि भाजपा ने देश में अफवाहों का तंत्र खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि नेहरू की सोच वैज्ञानिक दृष्टिकोण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और आधुनिक विकास पर आधारित थी, जिसे आज भी देश की प्रगति का आधार माना जाता है।

    बैठक के दौरान केप्टन डाबर ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों के प्रतीक हैं। मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और प्रबंधन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    डाबर ने राम मंदिर के लिए नए मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यदि नियुक्ति के लिए केवल “राम भक्त” होने की शर्त रखी जाती है तो यह अन्य देवी-देवताओं के श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने सवाल किया कि भगवान को अलग-अलग वर्गों में बांटने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है और धार्मिक संस्थानों में समान भाव की भावना बनाए रखना अधिक आवश्यक है।

    प्रदेश कांग्रेस विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय हितों और देश की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर सतर्क रहने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के ऐसे समझौतों से बचना चाहिए जो देश के हितों को प्रभावित कर सकते हों। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से वैचारिक रूप से सक्रिय रहने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जनता के बीच संवाद बढ़ाने का आह्वान किया।

    बैठक में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मंदिरों के संचालन और धार्मिक संस्थाओं में संघ के प्रचारकों की भूमिका बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिरों का संचालन संतों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों के हाथों में रहना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि धर्म का मूल आधार इंसानियत और मानवता है तथा कांग्रेस सभी धर्मों के सम्मान और समानता में विश्वास करती है। उन्होंने मंदिरों के संचालन में शंकराचार्यों की भूमिका सुनिश्चित किए जाने की भी मांग रखी।

    बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सामाजिक सौहार्द, धार्मिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा को पार्टी की प्राथमिकता बताया। वहीं भाजपा और सरकार पर लगाए गए आरोपों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इन बयानों के बाद संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया का भी इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि इस तरह के मुद्दे प्रदेश की राजनीति में आगे भी बहस का विषय बने रह सकते हैं।

  • निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी पर सफाई दी, कहा- ‘जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है’

    निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी पर सफाई दी, कहा- ‘जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है’


    नई दिल्ली । हाल ही में बजट सत्र के दौरान झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के भाषण ने राजनीतिक माहौल गरम कर दिया। विवादित किताबों और टिप्पणियों के कारण उनकी ओर से उठाए गए आरोपों ने विपक्षी दल कांग्रेस में हड़कंप मचा दिया। इंडिया टीवी के कार्यक्रम आप की अदालत में दुबे ने खुलकर अपने बयान की सफाई दी। दुबे ने कहा जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है। प्रियंका गांधी कहीं भी होंगी तो सुनने आ जाएंगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें किसी से डर नहीं है क्योंकि उनके साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं।

    नेहरू और इंदिरा गांधी पर विवादित टिप्पणियों के सवाल पर दुबे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संसद में वही पढ़ा जो प्रकाशित किताबों में था। पंडित जवाहरलाल नेहरू को अय्याश कहे जाने के आरोप पर उन्होंने कहा कि यह शब्द उन्होंने खुद नहीं जोड़ा बल्कि यह किताब में लिखा था। इसी तरह इंदिरा गांधी के बारे में अश्लील टिप्पणी के आरोप पर दुबे ने बताया कि यह एमओ मथाई की किताब का संदर्भ था जिसमें उन्होंने कुछ भी नया नहीं जोड़ा।

    राहुल गांधी को किताब न पढ़ने देने के आरोप पर दुबे ने कहा कि उन्होंने उन्हें एक्सपोज़ होने से बचाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी बिना टोके बोलते तो वे पांच मिनट भी प्रभावी ढंग से नहीं बोल पाएंगे। उनके अनुसार राहुल गांधी संसद में सिर्फ किताब और संविधान लेकर आते हैं और वास्तविक बहस में उनका योगदान सीमित रहता है।

    दुबे के इस बयान के बाद कांग्रेस ने भी उनके खिलाफ कई आरोप लगाए लेकिन सांसद ने साफ किया कि विपक्ष उन्हें डरता है और वे केवल प्रकाशित सामग्री पढ़कर अपनी बात रखते हैं। संसद में उनके भाषण और विवादित टिप्पणियों ने राजनीतिक बहस को जोरदार मोड़ दिया है।