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  • नेपाल के बाढ़ पीड़ितों के लिए आगे आए सोनू सूद बोले अगर अभी मदद नहीं करेंगे तो कब करेंगे कंपनियों से भी की बड़ी अपील

    नेपाल के बाढ़ पीड़ितों के लिए आगे आए सोनू सूद बोले अगर अभी मदद नहीं करेंगे तो कब करेंगे कंपनियों से भी की बड़ी अपील


    नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़ी तबाही मचाई है और इस मुश्किल समय में बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद एक बार फिर जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। सोनू सूद अपनी चैरिटी फाउंडेशन की टीम के साथ नेपाल पहुंचे हैं। उनके साथ बड़ी मात्रा में राहत सामग्री भी पहुंची है। इसमें कंबल और खाने पीने का सामान शामिल है। अभिनेता का कहना है कि सिर्फ तत्काल राहत पहुंचाना ही काफी नहीं है बल्कि आने वाले महीनों तक प्रभावित परिवारों की मदद जारी रखने की जरूरत है ताकि वे दोबारा अपनी सामान्य जिंदगी की ओर लौट सकें।

    नेपाल पहुंचने के बाद सोनू सूद ने राहत अभियान को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि उनकी टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों से मुलाकात कर रही है और उनकी जरूरतों को समझने की कोशिश कर रही है। कई परिवार ऐसे हैं जिन्होंने इस आपदा में अपना जरूरी सामान और रोजमर्रा की सुविधाएं खो दी हैं। ऐसे लोगों तक जरूरी सामग्री पहुंचाना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है। सोनू ने कहा कि उनकी टीम कंबल और भोजन जैसी जरूरी चीजें लेकर पहुंची है और आगे भी आवश्यकता के अनुसार सामान उपलब्ध कराया जाएगा।

    अभिनेता ने यह भी बताया कि राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचना आसान नहीं है। इसके लिए काफी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। हालांकि इन मुश्किलों के बावजूद उनकी टीम लगातार काम कर रही है। सोनू का कहना है कि प्रभावित लोगों की जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने में समय लगेगा। इसलिए राहत अभियान को कुछ दिनों तक सीमित रखने के बजाय लंबे समय तक जारी रखने की जरूरत है।

    सोनू सूद ने इस दौरान भारत सरकार की ओर से नेपाल को दी जा रही सहायता की भी सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि भारत सरकार ने संकट की इस घड़ी में नेपाल के लिए अच्छा काम किया है। उनके मुताबिक नेपाल को दी जा रही मदद के लिए प्रधानमंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण है और यह सहायता आगे भी जारी रहनी चाहिए। सोनू ने कहा कि जब वह प्रभावित परिवारों से सीधे मिलते हैं तो उन्हें महसूस होता है कि समस्या कुछ हफ्तों या कुछ महीनों में खत्म होने वाली नहीं है।

    सोनू सूद ने लोगों से भी अपनी क्षमता के अनुसार मदद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में जरूरतमंदों के साथ खड़ा होना हर व्यक्ति का फर्ज है। अभिनेता खुद प्रभावित लोगों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें किन चीजों की सबसे ज्यादा जरूरत है ताकि उसी हिसाब से आगे राहत सामग्री पहुंचाई जा सके।

    उन्होंने बड़ी कंपनियों से भी नेपाल के राहत अभियान में शामिल होने की अपील की। सोनू का कहना है कि कंपनियों को अपने CSR प्रयासों के जरिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना चाहिए। उनका मानना है कि सरकार और सामाजिक संस्थाओं के साथ कॉरपोरेट जगत भी आगे आए तो राहत और पुनर्वास का काम तेजी से किया जा सकता है।

    नेपाल में हुई इस आपदा के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और प्रभावित इलाकों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे समय में सोनू सूद का राहत अभियान जरूरतमंद परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है। अभिनेता इससे पहले भी आपदा और संकट के समय लोगों की मदद के लिए आगे आते रहे हैं। इस बार भी उनका फोकस सिर्फ राहत सामग्री बांटने पर नहीं बल्कि प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक संभालने पर है।

  • नेपाल की बाढ़ ने छीनी हजारों की जिंदगी और रोजी-रोटी, 10 मिनट में खाली हुआ देवीघाट; मलबे में दबे घरों के बीच अपनों की तलाश

    नेपाल की बाढ़ ने छीनी हजारों की जिंदगी और रोजी-रोटी, 10 मिनट में खाली हुआ देवीघाट; मलबे में दबे घरों के बीच अपनों की तलाश


    नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने देवीघाट कस्बे की तस्वीर ही बदल दी है। कभी लोगों की आवाजाही और कारोबार से गुलजार रहने वाला यह इलाका अब मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका है। नुवाकोट जिले में त्रिशूली और ताड़ी नदी के संगम पर बसे देवीघाट में बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। देखते ही देखते घर दुकानें सड़कें और दूसरी सुविधाएं पानी और मलबे की चपेट में आ गईं। स्थानीय लोगों के मुताबिक बाढ़ का मंजर इतना भयावह था कि उस वक्त किसी को अपना सामान बचाने की चिंता नहीं थी। हर किसी के सामने सिर्फ अपनी जान बचाने की चुनौती थी।

    30 अगस्त को जब लोग तबाही के चार दिन बाद अपने घरों और दुकानों के मलबे में जरूरी सामान तलाशने के लिए लौटे तो उन्हें एक बार फिर भागना पड़ा। अचानक बाढ़ का अलर्ट जारी हुआ और पूरे इलाके में अफरा तफरी मच गई। लोग सुरक्षित जगह की तलाश में ऊंचाई की ओर दौड़ने लगे। कुछ ही समय में पूरा कस्बा फिर से खाली हो गया। जिन लोगों ने अपने घरों में बचा हुआ सामान निकालने की उम्मीद में वापसी की थी उन्हें दोबारा अपनी जान बचाकर वहां से निकलना पड़ा। इस घटना ने लोगों के डर को और गहरा कर दिया है।

    देवीघाट में करीब 20 हजार लोगों की आबादी बताई जाती है लेकिन बाढ़ के बाद यहां हजारों लोगों के सामने अपना भविष्य बचाने का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 7 हजार लोगों की अब तक कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी है। बाढ़ के तेज बहाव में कई परिवार बिछड़ गए हैं और लोग अपनों की तलाश में भटक रहे हैं। कई घर पूरी तरह मलबे में दब चुके हैं जबकि कई मकानों की सिर्फ दीवारें बची हैं। दुकानों में रखा सामान कीचड़ और पानी में खराब हो चुका है।

    स्थानीय निवासी पवन नेगी बताते हैं कि इलाके में पहले भी बाढ़ आती रही है लेकिन इस बार जैसी तबाही उन्होंने कभी नहीं देखी। लोगों को उम्मीद थी कि पानी कुछ समय बाद उतर जाएगा और हालात सामान्य हो जाएंगे लेकिन इस बार बाढ़ ने घरों के साथ खेत और कारोबार भी तबाह कर दिए। अब प्रभावित परिवारों के सामने दोबारा जिंदगी शुरू करने की बड़ी चुनौती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इलाके को फिर से बसाने में कई साल लग सकते हैं।

    बाढ़ ने केवल लोगों के घर ही नहीं छीने बल्कि उनकी रोजी रोटी का साधन भी खत्म कर दिया है। कई लोगों की दुकानें बह गईं और पशुधन तक बाढ़ की भेंट चढ़ गया। बच्चों की पढ़ाई और परिवार के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। मेडिकल स्टूडेंट राधिका थापा भी अपने परिवार के साथ मलबे में कपड़े और जरूरी सामान तलाशती नजर आईं। उनका घर और दुकान दोनों बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।

    देवीघाट की नंदा थापा के मुताबिक अचानक लोगों की चीख सुनाई दी कि बाढ़ आ गई है। इसके बाद किसी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और हर कोई जान बचाने के लिए सुरक्षित जगह की ओर भागने लगा। अब वही लोग मलबे के बीच अपनी जिंदगी के बचे हुए निशान तलाश रहे हैं। नेपाल की इस त्रासदी ने साफ कर दिया है कि प्राकृतिक आपदा के कुछ मिनट भी इंसान की पूरी जिंदगी बदल सकते हैं। देवीघाट में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन लोगों ने अपना सब कुछ खो दिया है वे दोबारा अपनी जिंदगी कैसे शुरू करेंगे।

  • नेपाल में कुदरत का कहर और 10 सेकेंड की जिंदगी की जंग! सैकड़ों मौतों के बीच लापता लोगों की तलाश जारी

    नेपाल में कुदरत का कहर और 10 सेकेंड की जिंदगी की जंग! सैकड़ों मौतों के बीच लापता लोगों की तलाश जारी


    नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने पूरे देश को गहरे संकट में डाल दिया है। 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई और बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई। इस आपदा के बीच कुछ सेकेंड की सतर्कता कई लोगों के लिए जिंदगी और मौत के बीच का अंतर साबित हुई। रसुवा कस्टम ऑफिस के अधिकारी करबीर गैरे ने जब भोटेकोशी नदी में तेजी से बढ़ता बाढ़ का पानी देखा तो उन्होंने आसपास मौजूद लोगों को तुरंत ऊंचाई की तरफ भागने की चेतावनी दी। बताया गया कि चेतावनी के करीब 10 सेकेंड बाद ही तेज बहाव ने आसपास के ढांचों को अपनी चपेट में ले लिया। समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थान की ओर भेजने से कई जानें बच सकीं।

    नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन के अनुसार सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की तरफ से भोटेकोशी में बाढ़ की सूचना मिली थी। इसके कुछ ही मिनट बाद रसुवा नुवाकोट धादिंग और चितवन समेत प्रभावित क्षेत्रों में करीब 6 लाख एसएमएस अलर्ट भेजे गए। आपदा के दौरान समय पर चेतावनी और लोगों की सतर्कता ने राहत और बचाव के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बावजूद बाढ़ की भयावहता इतनी ज्यादा थी कि बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ गए।

    अब तक नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से 919 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें अकेले नेपाल में 903 लोगों की जान गई है जबकि तिब्बत में 16 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 4200 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की तलाश के साथ उनकी पहचान सुनिश्चित करने की चुनौती भी प्रशासन के सामने है। नेपाल पुलिस ने लापता लोगों के परिजनों से डीएनए सैंपल देने की अपील की है। माता पिता और बच्चों से डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए नमूने मांगे जा रहे हैं ताकि बरामद शवों की पहचान लापता लोगों के परिवारों से मिलान करके की जा सके।

    बाढ़ का असर नेपाल की सीमाओं से बाहर भी दिखाई दिया है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में नारायणी गंडक नदी से चार अज्ञात शव बरामद किए गए जिन्हें नेपाल प्रशासन को सौंप दिया गया। इनमें तीन महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। पहचान सुनिश्चित करने के लिए पोस्टमॉर्टम के दौरान डीएनए सैंपल लिए गए हैं जिन्हें नेपाल प्रशासन के साथ साझा किया जाएगा।

    इस बीच हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। त्रिशूली-3A समेत कई परियोजनाओं की सुरंगों के मुहानों पर जमा मलबा और कीचड़ हटाकर अंदर पहुंचने की कोशिश की जा रही है। नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ भारत और चीन के विशेषज्ञ भी बचाव अभियान में सहयोग कर रहे हैं। भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से सुरंगों के रास्ते खोलने का प्रयास किया जा रहा है।

    नेपाल की इस भीषण आपदा के बाद कई देशों ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत ने मानवीय सहायता के साथ मेडिकल और टनल रेस्क्यू टीम भेजी है। ब्रिटेन यूरोपीय संघ कनाडा अमेरिका और चीन की ओर से भी आर्थिक और मानवीय सहायता की घोषणा की गई है। ऐसे समय में राहत और बचाव अभियान के साथ लापता लोगों की तलाश सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। नेपाल अब इस त्रासदी से उबरने की कठिन चुनौती के बीच प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने और बाढ़ से तबाह हुए क्षेत्रों को दोबारा खड़ा करने की कोशिश में जुटा है।

  • बाढ़ और तबाही के बीच 6 कैलाश यात्री लापता, नेपाल आपदा का बिहार तक असर; परिवारों की बढ़ी चिंता

    बाढ़ और तबाही के बीच 6 कैलाश यात्री लापता, नेपाल आपदा का बिहार तक असर; परिवारों की बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। नेपाल में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा का असर अब भारत के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। बिहार के कई इलाकों में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। भागलपुर के नौगछिया में गंगा नदी का तटबंध टूटने के बाद बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए हैं। पानी फैलने से लोगों का सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें राहत और बचाव अभियान में जुटी हैं। प्रभावित परिवारों के लिए मुफ्त कम्युनिटी किचन अस्थायी मेडिकल कैंप और राहत शिविर शुरू किए गए हैं ताकि उन्हें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

    बगहा में भी नेपाल में आई भारी आपदा के बाद गंडक नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों को नदी का जलस्तर बढ़ने का डर सता रहा है। कई लोग संभावित खतरे को देखते हुए रातभर जागते रहे। प्रशासन की ओर से हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और निचले इलाकों के लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। पटना के आसपास के क्षेत्रों में भी बाढ़ का पानी कई घरों तक पहुंचने से परेशानी बढ़ गई है। कई परिवार अपने मवेशियों के साथ सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर चले गए हैं।

    बिहार के साथ उत्तर प्रदेश में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ाई है। रायबरेली में गंगा का पानी चेतावनी के निशान से ऊपर पहुंच गया है। इसके चलते कटरा क्षेत्र के गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई जगह जलभराव की स्थिति बन गई है और खेतों में खड़ी धान गन्ने और अरहर की फसलें पानी में डूब गई हैं। किसानों को फसल बर्बाद होने के साथ आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है।

    नेपाल की आपदा का असर उन भारतीय परिवारों पर भी पड़ा है जिनके परिजन वहां यात्रा पर गए हैं। जम्मू में गोरखा समुदाय के लोगों ने नेपाल त्रासदी में जान गंवाने वालों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इसके साथ ही नेपाल में लापता भारतीय और विदेशी नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भी प्रार्थना की गई।

    इसी बीच पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से नेपाल गए छह कैलाश यात्री 25 अगस्त की रात से संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए एक ट्रैवल ग्रुप के साथ नेपाल गए थे। यात्रियों के संपर्क में नहीं आने के बाद उनके परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। लापता यात्रियों में अरिंदम गांगुली और मौसुमी गांगुली के नाम सामने आए हैं।

    अरिंदम की दोस्त सुजाता बनर्जी के मुताबिक यात्रियों से पहले बातचीत हुई थी लेकिन इसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो सका। ट्रैवल एजेंसी से संपर्क करने पर परिवारों को बताया गया कि पिछली रात और सुबह यात्रियों से बात हुई थी लेकिन इसके बाद उनकी स्थिति की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई। इससे परिजन और अधिक चिंतित हैं।

    अब परिवारों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से नेपाल में फंसे छह यात्रियों की तत्काल तलाश शुरू करने और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की अपील की है। एक ओर नेपाल में प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है तो दूसरी ओर उसके प्रभाव से बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। ऐसे हालात में राहत और बचाव एजेंसियों के सामने प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ नेपाल में संपर्क से बाहर हुए भारतीय यात्रियों की जानकारी जुटाने की चुनौती भी बनी हुई है।