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  • नेपाल बॉर्डर पर सख्ती बढ़ी! भारतीयों के लिए ID कार्ड जरूरी, रोहिंग्या घुसपैठ के डर से हाई अलर्ट

    नेपाल बॉर्डर पर सख्ती बढ़ी! भारतीयों के लिए ID कार्ड जरूरी, रोहिंग्या घुसपैठ के डर से हाई अलर्ट




    नई दिल्ली। नेपाल ने भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब नेपाल में प्रवेश करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोरंग जिले की जोगबनी सीमा चौकी पर यह नई व्यवस्था लागू की गई है। नेपाल प्रशासन का कहना है कि बढ़ती अवैध घुसपैठ, संदिग्ध गतिविधियों और सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए जांच अभियान तेज किया गया है।

    मोरंग जिला सुरक्षा समिति के फैसले के बाद सीमा पर आने-जाने वाले लोगों की गहन जांच शुरू कर दी गई है। सहायक मुख्य जिला अधिकारी सरोज कोइराला ने साफ किया कि यह फैसला किसी द्विपक्षीय समझौते के तहत नहीं बल्कि नेपाल की आंतरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि खुली सीमा का फायदा उठाकर अवैध घुसपैठिए और अपराधी नेपाल में प्रवेश कर सकते हैं, इसलिए सतर्कता बढ़ाना जरूरी हो गया है।

    रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नेपाल प्रशासन को आशंका है कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों के बाद रोहिंग्या मुसलमान नेपाल की ओर रुख कर सकते हैं। इसी आशंका के चलते सीमा पर निगरानी और कड़ी कर दी गई है। नेपाली मीडिया ने भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि सीमा से लगे इलाकों में लोगों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर अलर्ट मोड में हैं।

    नेपाल प्रशासन ने खासतौर पर ट्रेनों के आने के समय अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए हैं, क्योंकि उस दौरान बड़ी संख्या में लोग सीमा पार करते हैं। जानकारी के मुताबिक एक साथ 500 से 1000 लोगों की आवाजाही होने पर पहचान पत्रों की जांच की जा रही है। इसके अलावा सीमा क्षेत्रों में प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड भी तैनात किए गए हैं ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    सुरक्षा एजेंसियों का यह भी कहना है कि सीमा पार फरार अपराधियों की आवाजाही रोकना भी इस अभियान का बड़ा उद्देश्य है। रिपोर्ट्स के अनुसार नेपाल के कई फरार कैदियों के भारत में छिपे होने की आशंका है, जिन्हें पकड़ने के लिए सीमा निगरानी मजबूत की गई है। फिलहाल यह फैसला जिला स्तरीय सुरक्षा समिति द्वारा लागू किया गया है और इसे नेपाल की आंतरिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

  • नेपाल सरकार का बड़ा फैसला…. 2006 के बाद सार्वजनिक पदों पर रहे लोगों की संपत्ति की होगी जांच… 7 पूर्व PM भी दायरे में

    नेपाल सरकार का बड़ा फैसला…. 2006 के बाद सार्वजनिक पदों पर रहे लोगों की संपत्ति की होगी जांच… 7 पूर्व PM भी दायरे में


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) की सरकार ने बुधवार को अपनी कैबिनेट बैठक (Cabinet meeting.) में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। नए नवेले प्रधानमंत्री बालेन शाह (Prime Minister Balen Shah.) की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सरकार ने 2006 के बाद से सार्वजनिक पद पर रहे लोगों की संपत्ति की जांच के लिए एक पैनल का गठन किया। इस जांच के दायरे में नेपाल के सात पूर्व प्रधानमंत्री भी आएंगे। इसके अलावा सैकड़ों ऐसे मंत्रियों के भी नाम इस लिस्ट में शामिल होंगे, जो कि 2006 के बाद नेपाल सरकार में काम कर चुके हैं।

    सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ युवा और खेल मंत्री सस्मित पोखरेल ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश राजेंद्र कुमार भंडारी की अगुवाई में इस पांच सदस्यीय संपत्ति जांच आयोग का गठन किया जाएगा। जांच पैनल के सदस्यों में दो पूर्व जज चंडी राज ढकाल और पुरुषोत्तम पराजुली को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा नेपाल पुलिस के पूर्व उप महानिरीक्षक गणेश केसी और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश लमसाल भी इस आयोग के सदस्य होंगे।


    जांच के दायरे में 7 पूर्व PM

    बालेन शाह की सरकार के इस फैसले के बाद में नेपाल के सात पूर्व प्रधानमंत्री आ गए हैं। उनमें पुष्प कमल दहल (प्रचंड), शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली, सुशील कोइराला, बाबूराम भट्टाराई, झाला नाथ खनाल और माधव कुमार नेपाल जैसे दिग्गजों के नाम शामिल हैं। पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा कोइराला के परिवार की भी संपत्ति जांच की जा सकती है।

    आयोग को 2006 में नेपाल में हुए जन आंदोलन-द्वितीय से लेकर वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 तक प्रमुख राजनीतिक पदाधिकारियों और उच्च अधिकारियों की संपत्ति घोषणाओं को एकत्र करने और उनकी जांच करने का दायित्व सौंपा गया है।

    Gen-Z आंदोलन पर भी पैनल का गठन
    इसके अलावा नेपाल सरकार ने पिछले वर्ष हुए ‘जेन-G’ प्रदर्शनों की जांच रिपोर्ट के क्रियान्वयन के दौरान सुरक्षा तंत्र की भूमिका का अध्ययन करने के लिए बुधवार को तीन सदस्यीय एक पैनल का गठन किया है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल के अनुसार, इस संबंध में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीश प्रेम राज कार्की की अध्यक्षता में एक पैनल गठित करने का निर्णय लिया गया।

    इस पैनल में सशस्त्र पुलिस बल के पूर्व अतिरिक्त महानिरीक्षक सुबोध अधिकारी और नेपाल पुलिस के पूर्व अतिरिक्त महानिरीक्षक टेक प्रसाद राय को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। पैनल को गौरी बहादुर कार्की के नेतृत्व वाले जांच आयोग द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट को लागू करने के दौरान सुरक्षा संबंधी मामलों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बता दें कि पिछले साल आठ और नौ सितंबर को हुए इन प्रदर्शनों के दौरान 76 लोगों की मौत हो गई थी।

  • नेपाल को मिला सबसे युवा प्रधानमंत्री, बालेन्द्र शाह ने ली PM पद की शपथ

    नेपाल को मिला सबसे युवा प्रधानमंत्री, बालेन्द्र शाह ने ली PM पद की शपथ


    काठमांडू। नेपाल की राजनीति में शुक्रवार को एक नया इतिहास बना, जब रैपर और इंजीनियर से नेता बने बालेन्द्र शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 35 वर्ष की उम्र में वे देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गए हैं। इसके साथ ही वे मदेश क्षेत्र से इस पद तक पहुंचने वाले पहले नेता भी हैं।

    शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल की मौजूदगी में शीतल निवास में दोपहर 12:34 बजे शुभ मुहूर्त पर आयोजित हुआ। इस दौरान कार्यक्रम में हिंदू और बौद्ध परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। सात ब्राह्मणों ने शंखनाद किया, 108 युवा ब्राह्मणों ने स्वस्ति वाचन किया, जबकि 107 लामाओं ने बौद्ध मंत्रों का उच्चारण किया।

    भारी बहुमत के साथ सत्ता में एंट्री

    5 मार्च 2026 को हुए आम चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में पार्टी ने 182 सीटें हासिल कीं। बालेन्द्र शाह ने चार बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी शर्मा ओली को उनके गढ़ झापा-5 सीट से बड़े अंतर से हराया।

    इस चुनाव में पारंपरिक दलों को बड़ा झटका लगा। नेपाली कांग्रेस को 38 सीटें, CPN-UML को 25 और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी को सिर्फ 17 सीटों पर संतोष करना पड़ा। इस नतीजे को युवाओं की Gen-Z लहर का प्रभाव माना जा रहा है।

    कौन हैं बालेन्द्र शाह

    बालेन्द्र शाह, जिन्हें बालेन के नाम से भी जाना जाता है, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रमुख नेता हैं। करीब छह महीने पहले केपी शर्मा ओली की सरकार को युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद हटाया गया था। यह आंदोलन भ्रष्टाचार भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया प्रतिबंध के विरोध में हुआ था।

    बालेन इससे पहले काठमांडू के मेयर रह चुके हैं। वे पेशे से इंजीनियर हैं और रैप संगीत के जरिए युवाओं के मुद्दों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। शपथ लेने के बाद अब वे 15 से 18 मंत्रियों वाला छोटा मंत्रिमंडल बनाने की तैयारी में हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरना और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा। नेपाल की राजनीति में यह बदलाव एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है, जहां युवा नेतृत्व से बड़े परिवर्तन की उम्मीद की जा रही है।