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  • नेपाल त्रासदी में अपनों का इंतजार, बीमार माता-पिता से छिपाया बेटा-बहू के लापता होने का दर्द, टीवी-अखबार कराया बंद

    नेपाल त्रासदी में अपनों का इंतजार, बीमार माता-पिता से छिपाया बेटा-बहू के लापता होने का दर्द, टीवी-अखबार कराया बंद

    कानपुर। नेपाल में आई भीषण त्रासदी के बाद कानपुर के एक परिवार की उम्मीदें अब भी अपनों की वापसी पर टिकी हैं। श्यामनगर निवासी और अमेरिकी नागरिक पंकज मिश्रा, उनकी पत्नी रागिनी मिश्रा और छोटे भाई की पत्नी पूनम मिश्रा का 25 अगस्त के बाद से कोई पता नहीं चल सका है। परिवार को अब भी उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद है। वहीं, बेटे और बहू के लापता होने की खबर बुजुर्ग माता-पिता से इसलिए छिपाई जा रही है, क्योंकि दोनों हृदय रोगी हैं। उन्हें जानकारी न मिले, इसके लिए घर में आने वाला अखबार बंद करा दिया गया है और टीवी का कनेक्शन भी कटवा दिया गया है।

    श्यामनगर के ई-ब्लॉक निवासी राजेंद्र मिश्रा सेवानिवृत्त एयरफोर्स कर्मी हैं। परिवार में पत्नी सुमन मिश्रा और तीन बेटे पंकज, धीरज और अनुज हैं। पंकज पत्नी रागिनी और बेटे अरमान के साथ अमेरिका में रहते हैं। उनके छोटे भाई धीरज भी पत्नी पूनम, बेटे ध्रुव और बेटी मानसी के साथ अमेरिका में रहते हैं। पंकज, धीरज और पूनम सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि रागिनी सरकारी शिक्षिका हैं। परिवार के सभी सदस्य अमेरिका के नागरिक हैं।

    कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए काठमांडू गए थे
    परिवार के मुताबिक, 20 अगस्त को सभी लोग अमेरिका से फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे थे। इसके बाद दिल्ली से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए काठमांडू रवाना हुए। इससे पहले उन्होंने नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन भी किए थे। उनके साथ कुल 31 लोग थे, जिनमें 26 पर्यटक और पांच गाइड शामिल थे।

    श्यामनगर में रहने वाले सबसे छोटे भाई डॉ. अनुज मिश्रा ने बताया कि आखिरी बार 25 अगस्त को उनकी भाई पंकज से बात हुई थी। इसके बाद से पंकज, रागिनी और पूनम से संपर्क नहीं हो सका है। परिवार लगातार फोन मिलाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा। नेपाल में आई त्रासदी के बाद से परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार नेपाल के पीएमओ से भी संपर्क करने की कोशिश कर रहा है।

    माता-पिता को बताया- फोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा
    अनुज ने बताया कि उनके पिता राजेंद्र और मां सुमन दोनों हृदय रोगी हैं। ऐसे में परिवार ने उन्हें नेपाल में अपनों के लापता होने की जानकारी नहीं दी है। माता-पिता बार-बार बेटे और बहू से बात कराने के लिए कह रहे हैं तो परिजन उन्हें फोन पर संपर्क नहीं हो पाने की बात बताकर टाल रहे हैं।

    बुजुर्ग माता-पिता को किसी तरह खबर न मिल जाए, इसके लिए घर में आने वाला अखबार बंद करा दिया गया है। टीवी का कनेक्शन भी कटवा दिया गया है। परिवार इस समय एक तरफ अपनों के सुरक्षित लौटने की प्रार्थना कर रहा है, वहीं दूसरी ओर माता-पिता से सच्चाई छिपाने की मजबूरी से जूझ रहा है।

    ‘बहन राखी भेजती थी, इस बार मन बेचैन है’
    पीरोड में रहने वाले रागिनी मिश्रा के भाई प्रवीण द्विवेदी ने बताया कि रक्षाबंधन पर उनकी बहन हर साल राखी भेजती थीं। इस बार भी उन्होंने राखी भेजी थी, लेकिन अब बहन, बहनोई और उनकी देवरानी के लापता होने की खबर ने पूरे परिवार को बेचैन कर दिया है। प्रवीण ने कहा कि परिवार लगातार उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए बैठा है। हर फोन कॉल और हर नई सूचना के साथ परिजनों की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।

  • सोने के गहनों पर टैक्स हटाने की मांग से नेपाल की नीति पर चर्चा तेज

    सोने के गहनों पर टैक्स हटाने की मांग से नेपाल की नीति पर चर्चा तेज


    नई दिल्ली । नेपाल अपनी पर्यटन अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की कोशिशों में जुटा है और इसी क्रम में देश के पूर्व वित्त मंत्री सुरेंद्र पांडे ने एक नया और चर्चित सुझाव सामने रखा है। काठमांडू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि नेपाल को भारतीय पर्यटकों, खासकर शादी समारोहों को आकर्षित करने के लिए सोने के गहनों पर लगने वाले टैक्स को खत्म करने पर विचार करना चाहिए।

    पांडे का मानना है कि अगर नेपाल सरकार यह कदम उठाती है, तो देश को एक बड़े “शादी डेस्टिनेशन” के रूप में विकसित किया जा सकता है। भारत जैसे विशाल बाजार से आने वाले पर्यटकों के जरिए नेपाल न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा दे सकता है, बल्कि होटल, ट्रैवल और स्थानीय कारोबार को भी मजबूती मिल सकती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल में नियम और प्रक्रियाएं जितनी सरल होंगी, उतना ही अधिक विदेशी पर्यटक आकर्षित होंगे। खासतौर पर भारतीय यात्रियों के लिए सीमाओं पर प्रक्रियाएं आसान बनाने और वाहनों के प्रवेश को सरल करने की भी आवश्यकता है।

    पूर्व वित्त मंत्री ने सुझाव दिया कि नेपाल को भारत और चीन जैसे बड़े देशों को ध्यान में रखते हुए बड़े पर्यटन पैकेज तैयार करने चाहिए। उनका कहना है कि इन देशों से आने वाले पर्यटकों की संख्या बहुत अधिक है और सही रणनीति अपनाकर नेपाल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है।

    फिलहाल नेपाल में विदेशी यात्रियों को सीमित मात्रा में सोने और चांदी के गहने बिना कस्टम ड्यूटी के लाने की अनुमति है, लेकिन यह शर्त रहती है कि उन्हें निजी उपयोग के बाद वापस ले जाया जाए। इसी व्यवस्था को और लचीला बनाने की मांग अब तेज हो रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल पहले से ही प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ों, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत के कारण लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। भारत से हर साल लाखों लोग नेपाल की यात्रा करते हैं। ऐसे में यदि नियमों में ढील दी जाती है, तो यह देश के पर्यटन सेक्टर के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है।

    सुरेंद्र पांडे के इस सुझाव को नेपाल की आर्थिक रणनीति में एक नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में भारत-नेपाल पर्यटन संबंधों को और मजबूत कर सकता है।

  • नेपाल बॉर्डर पर सख्ती बढ़ी! भारतीयों के लिए ID कार्ड जरूरी, रोहिंग्या घुसपैठ के डर से हाई अलर्ट

    नेपाल बॉर्डर पर सख्ती बढ़ी! भारतीयों के लिए ID कार्ड जरूरी, रोहिंग्या घुसपैठ के डर से हाई अलर्ट




    नई दिल्ली। नेपाल ने भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब नेपाल में प्रवेश करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोरंग जिले की जोगबनी सीमा चौकी पर यह नई व्यवस्था लागू की गई है। नेपाल प्रशासन का कहना है कि बढ़ती अवैध घुसपैठ, संदिग्ध गतिविधियों और सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए जांच अभियान तेज किया गया है।

    मोरंग जिला सुरक्षा समिति के फैसले के बाद सीमा पर आने-जाने वाले लोगों की गहन जांच शुरू कर दी गई है। सहायक मुख्य जिला अधिकारी सरोज कोइराला ने साफ किया कि यह फैसला किसी द्विपक्षीय समझौते के तहत नहीं बल्कि नेपाल की आंतरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि खुली सीमा का फायदा उठाकर अवैध घुसपैठिए और अपराधी नेपाल में प्रवेश कर सकते हैं, इसलिए सतर्कता बढ़ाना जरूरी हो गया है।

    रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नेपाल प्रशासन को आशंका है कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों के बाद रोहिंग्या मुसलमान नेपाल की ओर रुख कर सकते हैं। इसी आशंका के चलते सीमा पर निगरानी और कड़ी कर दी गई है। नेपाली मीडिया ने भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि सीमा से लगे इलाकों में लोगों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर अलर्ट मोड में हैं।

    नेपाल प्रशासन ने खासतौर पर ट्रेनों के आने के समय अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए हैं, क्योंकि उस दौरान बड़ी संख्या में लोग सीमा पार करते हैं। जानकारी के मुताबिक एक साथ 500 से 1000 लोगों की आवाजाही होने पर पहचान पत्रों की जांच की जा रही है। इसके अलावा सीमा क्षेत्रों में प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड भी तैनात किए गए हैं ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    सुरक्षा एजेंसियों का यह भी कहना है कि सीमा पार फरार अपराधियों की आवाजाही रोकना भी इस अभियान का बड़ा उद्देश्य है। रिपोर्ट्स के अनुसार नेपाल के कई फरार कैदियों के भारत में छिपे होने की आशंका है, जिन्हें पकड़ने के लिए सीमा निगरानी मजबूत की गई है। फिलहाल यह फैसला जिला स्तरीय सुरक्षा समिति द्वारा लागू किया गया है और इसे नेपाल की आंतरिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

  • नेपाल यात्रा अचानक टली: लिपुलेख विवाद या बालेन शाह की नई रणनीति, भारत-नेपाल रिश्तों में बढ़ी हलचल!

    नेपाल यात्रा अचानक टली: लिपुलेख विवाद या बालेन शाह की नई रणनीति, भारत-नेपाल रिश्तों में बढ़ी हलचल!



    नई दिल्ली। भारत और नेपाल के रिश्तों के बीच एक बार फिर सियासी और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की प्रस्तावित नेपाल यात्रा अचानक टाल दिए जाने के बाद दोनों देशों के संबंधों को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले के पीछे लिपुलेख विवाद और नेपाल की नई राजनीतिक नेतृत्व शैली बड़ी वजह हो सकती है।

    जानकारी के मुताबिक, विक्रम मिस्री को 11 मई से दो दिवसीय नेपाल दौरे पर जाना था। इस यात्रा का उद्देश्य नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण देना और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की जमीन तैयार करना था। हालांकि अंतिम समय में यह दौरा स्थगित कर दिया गया। नेपाल सरकार ने भी इसकी पुष्टि की है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के दिनों में भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख क्षेत्र को लेकर तनाव बढ़ा है। भारत ने कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख मार्ग को सक्रिय किया है, जबकि नेपाल इस इलाके पर अपना दावा जताता रहा है। काठमांडू का कहना है कि यह क्षेत्र उसकी सीमा का हिस्सा है। इसी मुद्दे को लेकर नेपाल के भीतर राजनीतिक माहौल भी गर्म बना हुआ है।

    सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह ने विक्रम मिस्री से मुलाकात को लेकर सकारात्मक संकेत नहीं दिए थे। इसके बाद यात्रा को टालने का फैसला लिया गया। हालांकि आधिकारिक स्तर पर किसी टकराव की पुष्टि नहीं की गई है।

    बताया जा रहा है कि इस दौरे की रूपरेखा मॉरीशस में नेपाल के विदेश मंत्री और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच हुई बातचीत के दौरान तैयार की गई थी। भारत की कोशिश थी कि नई नेपाली सरकार के साथ रिश्तों को मजबूत किया जाए और दोनों देशों के बीच रुकी हुई द्विपक्षीय वार्ताओं को फिर से गति दी जाए।

    राजनयिक सूत्रों का मानना है कि नेपाल की नई सरकार फिलहाल संतुलित विदेश नीति अपनाने की कोशिश कर रही है। यही वजह है कि वह भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाकातों में सावधानी बरत रही है। हालांकि भारत की ओर से साफ किया गया है कि नेपाल के साथ संबंध सामान्य और सकारात्मक बने हुए हैं।

    भारत फिलहाल नेपाल में चल रही अपनी विकास परियोजनाओं और निवेश कार्यक्रमों पर भी नजर बनाए हुए है। दोनों देशों के बीच व्यापार, जल संसाधन, सुरक्षा सहयोग और सीमा प्रबंधन जैसे कई अहम मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है।

    कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत-नेपाल संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं। ऐसे में किसी एक यात्रा के टलने को रिश्तों में बड़ी दरार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन यह जरूर संकेत देता है कि नेपाल की नई राजनीतिक दिशा और क्षेत्रीय मुद्दे आने वाले समय में दोनों देशों की कूटनीति को प्रभावित कर सकते हैं।