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  • नेपाल में फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा…. भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अलर्ट जारी

    नेपाल में फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा…. भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अलर्ट जारी


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में 26 अगस्त को आई त्रासदी के बाद रविवार को भोटेकोशी नदी (Bhote Koshi River) का जलस्तर फिर बढ़ गया। इससे बाढ़ की नई चेतावनी जारी की गई है। अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों और बचावकर्मियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बाढ़ में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 780 हो गई है, जबकि 2,202 लोग अभी लापता हैं।

    राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने रविवार को कहा कि भोटेकोशी नदी (Bhote Koshi River) का जलस्तर फिर बढ़ने से लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। उधर, बाढ़ प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। 20 हजार से ज्यादा बचावकर्मियों ने आपदा के पांचवें दिन रविवार को भी लापता लोगों की तलाश और फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया।

    नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल (Foreign Minister Shishir Khanal) ने बताया कि अब तक 9500 लोगों को बचाया जा चुका है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ प्रभावित तीन जिलों के विभिन्न स्कूलों के 238 छात्र और 18 शिक्षक अभी लापता हैं।


    चीन की ओर बनी झील से खतरा

    माना जा रहा है कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर पराडिगखड पशुतांगखेड़ा में भूस्खलन के कारण यह बाढ़ आई थी। भोटेकोशी में पानी बढ़ने से घर, सड़कें और पुल बह गए। नेपाल में नए सिरे से बाढ़ की आशंका तब बढ़ी जब ढहने के बाद चीन की ओर झील बन गई। हालांकि, चीनी मीडिया के अनुसार, शनिवार को झील का आकार घटने लगा, जिससे खतरा घटा है।

    भारतीय टीम मदद में जुटी: बाढ़ के कारण एक दर्जन जलविद्युत प्रोजेक्ट में फंसे होने की आशंका है। इन्हें बचाने में भारत की 11 सदस्यीय टीम मदद कर रही है। त्रिशूली जलविद्युत परियोजना में सुरक्षाबल भारतीय सुरंग विशेषज्ञों की मदद से लोगों को निकालने में जुटे हैं। बारिश के बावजूद अभियान जारी है।


    गंडक-कोसी भी उफनाई
    पटना। नेपाल में तीन दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण गंडक और कोसी नदी में एक बार फिर उफान आ गया है। पिछले 24 घंटे में दोनों नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ऐसी आशंका है कि सोमवार दोपहर तक पश्चिमी एवं पूर्वी चंपारण, सारण और गोपालगंज से यह पानी गुजरेगा।


    149 भारतीयों को बचाया

    नेपाल में बाढ़ के बाद 149 भारतीयों को बचाया गया है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को इन लोगों की सूची जारी की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल में तैनात भारतीय फोरेंसिक टीम से भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने मुलाकात की। टीम मृतकों के डीएनए नमूनों की जांच करेगी।

  • UP: कुशीनगर में गंडक नदी में मिले 4 और शव, नेपाल बाढ़ के बाद अब तक 13 शव बरामद

    UP: कुशीनगर में गंडक नदी में मिले 4 और शव, नेपाल बाढ़ के बाद अब तक 13 शव बरामद


    नई दिल्ली।
    नेपाल (Nepal) में आई भीषण बाढ़ (Devastating floods) की तबाही का असर अब सीमा पार उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भी दिखने लगा है. कुशीनगर (Kushinagar) में गंडक नदी (Gandak River) से रविवार को चार और शव बरामद किए गए. पिछले चार दिनों में नदी से अब तक कुल 13 शव निकाले जा चुके हैं, जिनके नेपाल से बहकर आने की आशंका जताई जा रही है।

    रविवार को SDRF की टीम छितौनी बांध के भेड़ियारी ठोकर नंबर-3 के पास नदी की निगरानी कर रही थी. इसी दौरान जवानों को पानी में चार शव दिखाई दिए. टीम नदी में उतरी और सभी को बाहर निकाल लिया. इनमें दो महिलाएं और दो पुरुष हैं. इससे एक दिन पहले भी इसी इलाके में तीन शव मिले थे. बरामद शवों की जानकारी नेपाल के पड़ोसी जिले के अधिकारियों को दे दी गई है. हालांकि, अभी तक किसी की पहचान नहीं हो पाई है।

    खड्डा थाने के पुलिस अधिकारी संदीप कुमार सिंह के मुताबिक, जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद चारों शवों को मोर्चरी भेज दिया गया. कुशीनगर की मोर्चरी में जगह भर जाने के कारण बाकी शवों को गोरखपुर भेजा गया है. पुलिस शवों की पहचान कराने की कोशिश कर रही है, ताकि पता चल सके कि इनमें नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोग कौन हैं.


    नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही

    नेपाल में 26 अगस्त को तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद भारी बाढ़ आई थी. बर्फ, चट्टानों और मलबे के तेज बहाव ने कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया. बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा, जबकि कई हाइड्रोपावर स्टेशन भी तबाह हो गए. भोटेकोशी नदी के रास्ते आगे बढ़े बाढ़ के पानी ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई. नेपाल में रविवार तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 788 पहुंच गई थी. वहीं, 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए गए हैं।

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में 275 से ज्यादा भारतीय नागरिक संपर्क से बाहर हैं. इनके अलावा 128 भारतीय मूल के लोगों से भी संपर्क नहीं हो पाया है. रविवार को मंत्रालय ने 149 लोगों के सुरक्षित बचाए जाने की सूची जारी की. कुशीनगर में मिले शवों की पहचान होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि इनमें नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोग शामिल हैं या नहीं।

  • नेपाल में फंसे MP के 7 लोगों में से अनूपपुर की दो बहनें सुरक्षित मिली…. 5 की तलाश जारी

    नेपाल में फंसे MP के 7 लोगों में से अनूपपुर की दो बहनें सुरक्षित मिली…. 5 की तलाश जारी


    भोपाल/विदिशा/अनूपपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के एक परिवार ने राहत की सांस ली जब बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित नेपाल (Nepal floods) में फंसी दो बहनों (Two sisters) का पता चल गया, जबकि राज्य के पांच अन्य परिवार शनिवार को भी अपने प्रियजनों की खबर का बेसब्री और बेचैनी से इंतजार करते रहे. मध्य प्रदेश के कम से कम सात लोग नेपाल में लापता हैं या फंसे हुए हैं, जिनमें अनूपपुर की बहनें पलक और पल्लवी मांझी और रायसेन के भाई विकास और हिमांशु राजपूत शामिल हैं।

    लापता लोगों में टोरंटो में रहने वाली इंजीनियर स्वाति बागरेचा भी शामिल हैं, जो ईशा फाउंडेशन की 77 सदस्यों वाली तीर्थयात्रा के दौरान नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लापता हो गईं. इसके कारण विदिशा में उनके परिवार को लगातार चार दिनों तक बिना जवाब वाले फ़ोन कॉल्स का सामना करना पड़ा।

    अनूपपुर की पलक और पल्लवी मिलीं सुरक्षित, पोखरा में हैं दोनों बहनें
    परिवार ने बताया कि अनूपपुर जिले की रहने वाली और ग्वालियर में पढ़ाई व नौकरी करने वाली बहनें पलक और पल्लवी मांझी छुट्टी मनाने के दौरान इस आपदा में फंस गई थीं और दो दिनों तक उनसे संपर्क नहीं हो पाया था. कोटमा पुलिस स्टेशन के इंचार्ज रत्नाम्बर शुक्ला ने बताया कि शुक्रवार को परिवार को खबर मिली कि दोनों बहनें पोखरा में सुरक्षित हैं और रविवार को उनके घर लौटने की उम्मीद है।

    रायसेन, देवास और इंदौर के 4 अन्य लोगों का भी सुराग नहीं
    परिवार ने बताया कि पता चलने के बाद उनके पिता ने भी उनसे फोन पर बात की. जहां मांझी परिवार ने उनके सुरक्षित मिलने का जश्न मनाया, वहीं पांच अन्य लापता लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने राज्य की इमरजेंसी हेल्पलाइन से संपर्क किया है। रायसेन में, हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में काम करने वाले भाई विकास और हिमांशु राजपूत का परिवार उनकी जानकारी का इंतजार करते हुए परेशान रहा।

    देवास के शाहजहां अंसारी और इंदौर के शिबा प्रसाद मुखर्जी के रिश्तेदारों ने भी दिल्ली कंट्रोल रूम से संपर्क किया है, जिसे नेपाल में लापता या फंसे मध्य प्रदेश के लोगों की मदद के लिए बनाया गया था।

    कनाडा की इंजीनियर स्वाति बागरेचा 4 दिन से लापता
    विदिशा में 50 वर्षीय स्वाति बागरेचा का परिवार चार दिनों से बेचैनी और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि उनका मोबाइल फोन बजता तो है लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता. टोरंटो में रहने वाली इंजीनियर स्वाति, 8 अगस्त को ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्यों वाले ग्रुप के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए दिल्ली से निकली थीं. उनके भाई डॉ. प्रशांत बागरेचा ने बताया कि परिवार ने उनसे आखिरी बार 26 अगस्त को सुबह करीब 9 बजे बात की थी, जब वह इमिग्रेशन की औपचारिकताओं के लिए नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर पहुंच गई थीं।

    उन्होंने बताया, “उनका मोबाइल अभी भी बज रहा है, लेकिन वह हमारी कॉल का जवाब नहीं दे रही हैं. हम उनकी सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं.” परिवार के अनुसार, उनकी 14 साल की बेटी अनुष्का मुंबई में अपनी बड़ी बहन के साथ रुकी हुई थी। प्रशांत ने बताया कि लोकेशन लॉग से पता चला कि स्वाति का मोबाइल फोन चीनी बॉर्डर के पास कहीं एक्टिव था, लेकिन उसे ट्रेस करना मुश्किल हो रहा था क्योंकि नंबर टोरंटो में रजिस्टर्ड था. उन्होंने कहा कि परिवार ने नेपाल में कनाडाई और भारतीय दूतावासों से संपर्क किया है और उन्हें खोजने में मदद मांगी है।

    परिवार ने बताया कि स्थानीय विधायक मुकेश टंडन के दखल के बाद, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी परिवार से बात की और स्वाति को खोजने और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के प्रयास शुरू किए।

    26 अगस्त को नेपाल के रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से अचानक बाढ़ आ गई थी; बाढ़ का पानी बाद में त्रिशूली और गंडक नदी प्रणालियों में बह गया और निचले इलाकों को प्रभावित किया। जो परिवार अभी भी इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए बिना जवाब वाली हर कॉल ने डर और इस उम्मीद को और गहरा कर दिया है कि उनके अपने सुरक्षित हैं और जल्द ही घर लौट आएंगे।

  • आपदा के बीच नेपाल को राहत: चीन बॉर्डर के पास बनी ग्लेशियर झील का खतरा टला, पानी का स्‍तर घटा

    आपदा के बीच नेपाल को राहत: चीन बॉर्डर के पास बनी ग्लेशियर झील का खतरा टला, पानी का स्‍तर घटा


    बीजिंग। चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से बनी झील के अचानक फटने का खतरा फिलहाल कम हो गया है। चीनी अधिकारियों के मुताबिक झील का पानी धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से बाहर निकल रहा है और इसका आकार लगातार घट रहा है। इससे नीचे के इलाकों में अचानक बाढ़ आने की आशंका पहले के मुकाबले कम हुई है। हालांकि, अधिकारी अभी भी झील की 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं।

    यह झील उसी इलाके में बनी है, जहां बुधवार को ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

    तीन दिन में 21 हजार वर्ग मीटर घटा झील का क्षेत्र

    चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार गुरुवार से शनिवार सुबह तक लिए गए सैटेलाइट चित्रों में झील के पानी में लगातार कमी दर्ज की गई है। यह झील तिब्बत क्षेत्र में चीन-नेपाल सीमा के पास दो नदियों के संगम वाले इलाके में बनी है। शनिवार दोपहर तक इसके कुछ हिस्सों में जमीन भी दिखाई देने लगी थी।

    शनिवार सुबह झील का सतही क्षेत्र करीब 99 हजार वर्ग मीटर रह गया था। यह लगभग 14 फुटबॉल मैदानों के बराबर है। गुरुवार की तुलना में झील का क्षेत्रफल करीब 21 हजार वर्ग मीटर घट चुका है। पानी के प्राकृतिक बहाव से झील का आकार कम होने के कारण अधिकारियों ने फिलहाल इसके अचानक फटने के खतरे को कम माना है।

    बाढ़ के बाद मंडरा रहा था दूसरी आपदा का खतरा

    बुधवार को ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद चट्टान, बर्फ, कीचड़ और मलबे के साथ पानी तेजी से नीचे की ओर बहा था। इससे हिमालयी नदी तंत्र में भारी तबाही हुई। चीन और नेपाल को जोड़ने वाला एक सीमा बंदरगाह परिसर भी बाढ़ की चपेट में आ गया था।

    इसके बाद ग्लेशियर के मलबे से बनी झील में पानी बढ़ने पर इसके अचानक फटने की आशंका जताई गई थी। विशेषज्ञों को डर था कि अगर झील फटती है तो नीचे के इलाकों में दूसरी बार अचानक बाढ़ आ सकती है। इससे राहत और बचाव अभियान भी खतरे में पड़ सकता था।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगले दो-तीन दिनों में झील का जलस्तर और तेजी से घटता है तो निचले इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य अपेक्षाकृत सुरक्षित तरीके से जारी रखा जा सकेगा।

    30 मिनट पहले दी जाएगी खतरे की चेतावनी

    अधिकारियों के मुताबिक झील में किसी भी असामान्य बदलाव की स्थिति में बचाव दलों को तत्काल सूचना दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर हटाया जा सकता है। प्रशासन ने ऐसी व्यवस्था भी की है कि संभावित खतरे की स्थिति में 30 मिनट से अधिक पहले चेतावनी जारी की जा सके।

    रडार और ड्रोन से 24 घंटे निगरानी

    चीन की सरकारी इंजीनियरिंग और बचाव कंपनी चाइना एनेंग ने गुरुवार से झील की निगरानी शुरू कर दी है। इलाके में रडार और ड्रोन तैनात किए गए हैं, जिनकी मदद से झील और आसपास के क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    शुक्रवार को झील से पानी के शुरुआती बहाव के कारण कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकना पड़ा था। स्थिति का आकलन करने के बाद जोखिम को फिलहाल नियंत्रण में माना गया और अभियान फिर शुरू करने की अनुमति दी गई।

    नीचे एक और बड़ी झील मिली, 1.20 लाख वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्र

    अधिकारियों ने ग्लेशियर टूटने वाली जगह के नीचे एक और बड़ी झील की पहचान की है। एक इंजीनियर के मुताबिक इसका क्षेत्रफल 1.20 लाख वर्ग मीटर से ज्यादा है। यह मौजूदा झील से भी बड़ी है। इसलिए इस झील की भी लगातार निगरानी की जा रही है।

    चीन में 7 मौतें, 554 लोग अब भी लापता

    इस बीच चीन में आपदा से मरने वालों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक 554 लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता निचले इलाकों में राहत और बचाव अभियान को सुरक्षित रखना है।

  • नेपाल त्रासदी पर चीन की चुप्पी पर सवाल: सिर्फ 5 मौतों की जानकारी, तिब्बत में पीड़ितों से बात करने पर भी पाबंदी

    नेपाल त्रासदी पर चीन की चुप्पी पर सवाल: सिर्फ 5 मौतों की जानकारी, तिब्बत में पीड़ितों से बात करने पर भी पाबंदी


    नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 579 हो गई है, जबकि करीब 2 हजार लोग अब भी लापता हैं। भारत के भी सैकड़ों नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। आपदा का असर चीन के तिब्बत क्षेत्र से भी जुड़ा है, लेकिन चीन की ओर से अब तक सिर्फ 5 लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। इससे चीन की ओर से वास्तविक नुकसान और जनहानि की जानकारी छिपाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    चीन में तबाही, लेकिन जानकारी बेहद सीमित

    द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का सरकारी मीडिया भी इस आपदा को लेकर व्यापक रिपोर्टिंग नहीं कर रहा है। कुछ पत्रकार प्रभावित इलाकों में पहुंचते हैं, लेकिन वहां पीड़ितों और स्थानीय लोगों से बातचीत करने के बजाय रिपोर्टिंग मुख्य रूप से सरकारी राहत एवं बचाव प्रयासों तक सीमित रहती है। रिपोर्टों में चीन की ओर से किए जा रहे राहत कार्यों को प्रमुखता दी जाती है, जबकि आम लोगों की स्थिति सामने नहीं आ रही है।

    नेपाल में बाढ़ के प्रभाव को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि चीन के प्रभावित हिस्सों में भी नुकसान व्यापक हो सकता है। इसके बावजूद चीन की ओर से जनहानि और तबाही का विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    तिब्बत में पत्रकारों और स्थानीय लोगों पर पाबंदियों का आरोप

    चीन तिब्बत पर अपना दावा करता है, जबकि तिब्बत की स्वायत्तता और स्वतंत्रता की मांग लंबे समय से उठती रही है। रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत में अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों की पहुंच पर कड़े प्रतिबंध हैं। स्थानीय लोगों के पत्रकारों से बातचीत करने पर भी कार्रवाई का खतरा रहता है।

    तिब्बत में भाषा और संस्कृति से जुड़े मुद्दों को लेकर भी चीन की नीतियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होती रही है। ऐसे में मौजूदा आपदा के दौरान भी स्थानीय लोगों की आवाज और जमीनी हालात के सामने न आने पर सवाल उठ रहे हैं।

    चीन ने भेजी राहत टीम, शी जिनपिंग ने की बैठक

    जानकारी के मुताबिक, चीन ने प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव दल भेजे हैं। हालांकि, इन टीमों ने मौके पर किस स्तर पर और क्या काम किया, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    चीनी मीडिया ने बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की। वहीं, प्रीमियर ली कियांग ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा भी किया।

    दो और ग्लेशियरों पर नजर

    नेपाल के मौसम विभाग के अधिकारियों ने अब दो और ग्लेशियरों पर निगरानी बढ़ाने की कोशिश शुरू की है। ये दोनों ग्लेशियर उस ग्लेशियर के आसपास स्थित हैं, जिसके टूटने के बाद बुधवार को विनाशकारी बाढ़ आई थी। इससे प्रभावित क्षेत्रों में आगे किसी और आपदा की आशंका को लेकर निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

    4 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया

    नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के ताजा अपडेट के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक करीब 4,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। हालांकि लापता लोगों की संख्या अभी भी बढ़ रही है और ताजा आंकड़े के अनुसार 1,924 लोग लापता हैं।

    बचाव अभियान को तेज करने के लिए नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 15,000 से ज्यादा जवानों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है।

    लापता विदेशियों के आंकड़े अलग-अलग

    लापता विदेशी नागरिकों की संख्या को लेकर अलग-अलग सरकारी आंकड़े सामने आए हैं। एक सरकारी रिपोर्ट में 517 विदेशी नागरिकों और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के लापता होने की बात कही गई है।

    वहीं, नेपाल पुलिस के पहले जारी आंकड़ों में लापता विदेशी नागरिकों की संख्या 575 बताई गई थी। इनमें 36 देशों के नागरिक शामिल हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक लापता विदेशियों में 65 अमेरिकी, 62 यूक्रेनी और 33 ब्रिटिश नागरिक भी हैं।

    इसके अलावा प्रभावित इलाकों से 149 नेपाली पर्यटक और 1,407 स्थानीय नागरिक भी लापता बताए गए हैं। प्रशासन और सुरक्षा बल प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खोज, राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं।

  • बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडराया नया संकट, काठमांडो में खाने-पीने से ईंधन तक की सप्लाई पर असर

    बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडराया नया संकट, काठमांडो में खाने-पीने से ईंधन तक की सप्लाई पर असर


    काठमांडो। नेपाल में बुधवार को भोटेकोशी नदी तंत्र में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाने के बाद अब राजधानी काठमांडो की आपूर्ति व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। देश के प्रमुख सप्लाई रूट पृथ्वी हाईवे के बंद होने से काठमांडो घाटी में खाद्य सामग्री, ईंधन और अन्य जरूरी सामान की आवाजाही प्रभावित हुई है। हाईवे को पूरी तरह कब तक खोला जा सकेगा, इसकी अभी कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजधानी में जरूरी वस्तुओं की नियमित आपूर्ति बनाए रखना है।

    पृथ्वी हाईवे बंद होने से काठमांडो की सप्लाई क्यों प्रभावित?

    काठमांडो के लिए नागढुंगा से भरतपुर तक पृथ्वी हाईवे का करीब 180 किलोमीटर हिस्सा बेहद महत्वपूर्ण है। इसी मार्ग के जरिए राजधानी में बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ, पेट्रोलियम उत्पाद और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं पहुंचती हैं।

    बुधवार की बाढ़ में कम से कम 19 पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं त्रिशूली कॉरिडोर और आसपास के राजमार्गों पर करीब 40 किलोमीटर सड़क बह गई। काठमांडो घाटी ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता पुलिस अधीक्षक नरेश राज सुबेदी ने बताया कि अधिकारी रास्ता बहाल करने के लिए पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं, लेकिन शुक्रवार तक हाईवे खुलने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

    वैकल्पिक रास्तों से पहुंच रहा सामान

    सड़क विभाग के इंजीनियर राजीव मानंधर के मुताबिक शुक्रवार शाम तक गल्छी वाले हिस्से में बारी-बारी से एकतरफा यातायात शुरू कर दिया गया था। वहीं गलौंडी-घाटबेसी-जारेखेत हिस्से में दोनों दिशाओं से वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई थी।

    हालांकि बारिश होने पर इन रास्तों को दोबारा बंद करना पड़ सकता है। भूस्खलन के बाद सड़कों पर जमा मलबा हटाने का काम लगातार चल रहा है और शाम पांच बजे तक अर्थमूवर मशीनों की मदद ली जा रही है। इसके अलावा कुछ वैकल्पिक मार्गों के जरिए भी काठमांडो में जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।

    कालिमाटी बाजार में सब्जियों की आवक घटी

    पृथ्वी हाईवे बंद होने का असर काठमांडो के प्रमुख कालिमाटी फल एवं सब्जी बाजार में भी दिखाई दिया है। मंगलवार को यहां 775 टन सब्जियां, फल और मछली पहुंची थी। बुधवार को आवक 771 टन रही, लेकिन गुरुवार को यह घटकर सिर्फ 477 टन रह गई।

    बाजार विकास बोर्ड के सूचना अधिकारी बिनय श्रेष्ठ के अनुसार पृथ्वी हाईवे से आने वाला सामान रास्ते में फंसा हुआ है। इस मार्ग से सब्जियों की आपूर्ति पूरी तरह रुक गई है, हालांकि अन्य रास्तों से कुछ सामान बाजार तक पहुंच रहा है।

    चार-पांच दिन का ईंधन स्टॉक

    हाईवे बंद होने के कारण पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। हालांकि नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने फिलहाल लोगों को राहत दी है। निगम के मुताबिक थानकोट डिपो में मौजूद पेट्रोलियम उत्पाद चार से पांच दिन तक चलने के लिए पर्याप्त हैं।

    निगम के उप निदेशक मनोज कुमार ठाकुर ने कहा कि इस अवधि के भीतर पृथ्वी हाईवे के खुलने की उम्मीद है। इसलिए लोगों को ईंधन की उपलब्धता को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार भी जरूरी वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    कालाबाजारी पर सरकार की नजर

    आपदा के बीच सरकार को इस बात की भी चिंता है कि कहीं कारोबारी कृत्रिम कमी पैदा कर सामान महंगा न कर दें। वाणिज्य, आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने लोगों से बाजार में कालाबाजारी या कृत्रिम कमी से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की अपील की है।

    विभाग और स्थानीय प्रशासन बाजारों की निगरानी कर रहे हैं। वहीं उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय ने त्योहारों के मौसम तथा आपदा प्रबंधन की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक समन्वय इकाई बनाई है। संबंधित सरकारी एजेंसियों को भी इसी तरह की इकाइयां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    रसुवा से धादिंग तक भारी तबाही

    बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी तंत्र में अचानक आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में भारी नुकसान पहुंचाया। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता और प्रभावित लोगों में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।

    बाढ़ से सरकारी और निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान हुआ है। इसे हाल के वर्षों की बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है। सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से राहत अभियान के साथ-साथ राजधानी की आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।

    उपभोक्ता संगठनों ने मांगी सख्ती

    उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से वैकल्पिक मार्गों के जरिए जरूरी सामान की आपूर्ति बनाए रखने और संकट का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।

    उपभोक्ता अधिकार संरक्षण-नेपाल मंच के महासचिव विष्णु प्रसाद तिमिल्सिना ने कहा कि कालाबाजारी, कृत्रिम कमी और मनमाने तरीके से कीमत बढ़ाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि संकट के समय लोगों को यह भरोसा मिलना जरूरी है कि सरकार उनके साथ है और जरूरी वस्तुओं की कमी नहीं होने दी जाएगी

  • लिरुंग ग्लेशियर टूटने से त्रिशूली में आई प्रलयंकारी बाढ़, 35 मोटरेबल और 45 सस्पेंशन ब्रिज तबाह

    लिरुंग ग्लेशियर टूटने से त्रिशूली में आई प्रलयंकारी बाढ़, 35 मोटरेबल और 45 सस्पेंशन ब्रिज तबाह


    नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने उत्तरी इलाकों में भारी तबाही मचा दी। जिन क्षेत्रों में कभी पर्यटन और आबादी की रौनक दिखाई देती थी, वहां अब बाढ़ के बाद मलबा और तबाही का मंजर नजर आ रहा है। कई घर और बस्तियां पूरी तरह बह गईं, जबकि बड़ी संख्या में मकान मलबे में तब्दील हो गए।

    तिब्बत से निकलकर नेपाल आने वाली त्रिशूली नदी में अचानक आए तेज बहाव ने इस तबाही को और भयावह बना दिया। यह नदी तेज धारा और व्हाइट वाटर राफ्टिंग के लिए जानी जाती है, लेकिन बुधवार को इसका रूप बेहद विनाशकारी हो गया। नदी में पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा आया, जिसकी चपेट में आने से कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ।

    बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 35 मोटरेबल ब्रिज, 45 सस्पेंशन ब्रिज और करीब 40 किलोमीटर सड़क बुरी तरह प्रभावित हुई है। तेज बहाव के सामने मजबूत कंक्रीट के पुल भी टिक नहीं सके। कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे राहत और बचाव कार्य में भी मुश्किलें आ रही हैं।

    1,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता

    नेपाल में बाढ़ के बाद हुई तबाही में कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1,500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। उनकी तलाश लगातार की जा रही है।

    इस आपदा के बीच कई लोगों की जान भी बचाई गई है। हालांकि, बाढ़ और मलबे की तेज लहर ने जिन इलाकों को अपनी चपेट में लिया, वहां रहने वाले लोगों के लिए बच निकलना बेहद मुश्किल था।

    भूकंप और GLOF के बाद सामने आई नई वजह

    नेपाल में अचानक आई बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआत में कई तरह की आशंकाएं सामने आई थीं। पहले इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया और बाद में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की संभावना भी जताई गई।

    हालांकि, बाद में सैटेलाइट तस्वीरों और भूकंपीय आंकड़ों के विश्लेषण से एक अलग तस्वीर सामने आई। जांच के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लिरुंग ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा था। इसके बाद बड़ी मात्रा में मलबा और पानी नीचे की ओर तेजी से बढ़ा और त्रिशूली नदी में विनाशकारी बाढ़ की स्थिति बन गई।

    यानी जिस घटना ने शुरुआत में सिर्फ एक प्राकृतिक हलचल का रूप लिया था, उसने कुछ ही समय में नदी के बहाव को प्रलयंकारी बना दिया। अब नेपाल में राहत और पुनर्निर्माण के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों को फिर से जोड़ना है, जहां सड़कें, पुल और बस्तियां बाढ़ की चपेट में आकर तबाह हो गई हैं।

  • नेपाल ने भारत की रेस्क्यू टीम की पेशकश क्यों ठुकराई?

    नेपाल ने भारत की रेस्क्यू टीम की पेशकश क्यों ठुकराई?


    नई दिल्ली। नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। हादसे में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस बीच भारत समेत कई देशों ने नेपाल को राहत और बचाव के लिए विशेषज्ञ टीमें भेजने की पेशकश की, लेकिन नेपाल सरकार ने विदेशी रेस्क्यू टीमों को बुलाने से इनकार कर दिया है। नेपाल का कहना है कि उसके सुरक्षा बल राहत और बचाव अभियान चलाने में सक्षम हैं और फिलहाल उसे जमीनी टीमों के बजाय वित्तीय सहायता की जरूरत है।

    काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने अपनी विशेषज्ञ आपदा प्रबंधन टीमों को नेपाल भेजने का प्रस्ताव दिया था। भारत ने भी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम भेजने की पेशकश की थी। हालांकि, नेपाली सेना और पुलिस की सलाह के बाद सरकार ने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया।

    2015 के भूकंप से लिया सबक

    नेपाल सरकार के इस फैसले के पीछे 2015 का विनाशकारी भूकंप भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। उस समय बड़ी संख्या में विदेशी राहत और बचाव दल नेपाल पहुंचे थे। इससे राहत कार्यों के समन्वय और प्रबंधन में काफी दिक्कतें सामने आई थीं। इसी अनुभव को देखते हुए नेपाल इस बार विदेशी टीमों के बजाय अपने सुरक्षा बलों के जरिए अभियान चलाना चाहता है।

    नेपाल पुलिस और विभिन्न दूतावासों के आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ के बाद स्थिति अब भी गंभीर है। दूसरे देशों के नागरिकों को सहायता पहुंचाने और उनके परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम बनाई है।

    विदेश मंत्रालय के एक उप-सचिव स्तर के अधिकारी को रसुवा के तिमुरे में ग्राउंड ऑपरेशन्स टीम के साथ भेजा गया है। यह टीम सुरक्षा बलों के साथ समन्वय कर दूसरे देशों के दूतावासों और परिजनों को लापता लोगों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएगी। विदेश मंत्री शिसिर खनल ने भी संबंधित विभागों को विदेशी सरकारों के लगातार संपर्क में रहने के निर्देश दिए हैं।

    भारत से 47.5 टन राहत सामग्री पहुंची

    नेपाल ने विदेशी रेस्क्यू टीमों को भले ही आने की अनुमति नहीं दी है, लेकिन मानवीय और आर्थिक सहायता लेने से इनकार नहीं किया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, भारत अब तक नेपाल को 47.5 टन राहत सामग्री भेज चुका है।

    भारत ने नेपाल को बेली ब्रिज और प्रीफैब ट्रस ब्रिज उपलब्ध कराने की पेशकश भी की है, ताकि बाढ़ से क्षतिग्रस्त संपर्क व्यवस्था को बहाल करने में मदद मिल सके।

    कई देशों ने आर्थिक मदद का ऐलान किया

    भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और विश्व बैंक भी नेपाल के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा कर चुके हैं। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) के अध्यक्ष मासातो कांडा ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत की और पुनर्निर्माण के साथ-साथ पूर्व चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) को मजबूत करने में सहयोग का भरोसा दिया है।

    नेपाल सरकार ने अपने दूतावासों को भी निर्देश दिया है कि किसी भी तरह की वित्तीय सहायता केवल प्रधानमंत्री राहत कोष के माध्यम से ही स्वीकार की जाए।

  • ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता

    ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता


    भोपाल। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। इस आपदा के बीच भोपाल से भी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर की रहने वाली देविका अधिकारी के परिवार के चार सदस्य नेपाल हादसे के बाद से संपर्क से बाहर हैं। इनमें उनके बड़े भाई, छोटे भाई और दोनों भाभियां शामिल हैं।

    देविका अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद चारों से कोई संपर्क नहीं हो सका है। इस दौरान परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

    आखिरी बातचीत में कहा- ‘सबकी जान खतरे में है’

    देविका के मुताबिक, परिवार की आखिरी बार बड़े भाई से बातचीत हुई थी। उस समय उन्होंने बताया था कि ‘सबकी जान खतरे में है’ और वे लोग जान बचाने के लिए पहाड़ पर जाकर छिपे हुए हैं।

    परिवार के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्होंने बच्चों का ध्यान रखने की बात भी कही थी। इसके बाद से ही चारों का फोन संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार अब नेपाल में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन से मिलने वाली जानकारी का इंतजार कर रहा है।

    सरकार ने जारी की हेल्पलाइन

    नेपाल में लगातार बिगड़ते हालात के बीच भोपाल के नेपाली समाज और लापता लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने नेपाल में फंसे लोगों और उनके परिजनों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 011-26772005 और व्हाट्सऐप नंबर 9818963273 जारी किया है।

    परिजन इन नंबरों पर संपर्क कर नेपाल में फंसे या लापता लोगों से संबंधित जानकारी हासिल कर सकते हैं।

    392 लोगों की मौत, 1500 से ज्यादा लापता

    नेपाल में बाढ़ के बाद आई भीषण तबाही में अब तक 392 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद 290 भारतीय नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनकी तलाश की जा रही है।

    नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण सड़क और संपर्क व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं। इससे कई इलाकों का एक-दूसरे से संपर्क टूट गया है और राहत एवं बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।

    नेपाल की इस आपदा के बीच अब भोपाल समेत मध्य प्रदेश के उन परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है, जिनके अपने लोग वहां फंसे हुए हैं या जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

  • नेपाल में आई तबाही के बाद भोपाल के 29 लोग लापता…. गोसाईकुंडा तीर्थ गए थे घूमने

    नेपाल में आई तबाही के बाद भोपाल के 29 लोग लापता…. गोसाईकुंडा तीर्थ गए थे घूमने


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) का एक परिवार और उनसे जुड़े कुल 29 लोग नेपाल (Nepal) में अचानक आई भीषण बाढ़ (Devastating floods) के बाद से लापता हैं। परिवार की एक महिला ने उनके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ये सभी लोग जोड़े से नेपाल के रसुवा जिले में स्थित गोसाईकुंडा तीर्थ (Gosaikunda Pilgrimage) में घूमने गए थे। इसी दौरान वहां आई इस बाढ़ में फंस गए।

    महिला ने बताया कि परिवार के एक सदस्य से जो आखिरी बार बात हुई थी, उसमें उन्होंने कहा था कि हम लोग एक मकान की छत पर खड़े हुए हैं, लेकिन हमारा बचना मुश्किल है, आप लोग हमारे बच्चों को देख लेना, आप उनकी देखभाल करना।

    नेपाल में लापता हुए 29 सदस्यों की जानकारी देते हुए परिवार की महिला देवकी अधिकारी ने बताया, ‘मेरे जेठ-जेठानी, देवर-देवरानी, दीदी-जीजाजी को मिलाकर कुल 29 लोग वहां गए हैं। ये सभी लोग जोड़े से वहां एक तीर्थ की यात्रा करने गए हैं, जहां पर पूर्णिमा पर दर्शन करने जाते हैं।’


    खाना अधूरा छोड़कर भागे, सामान भी नहीं उठाया

    महिला ने बताया कि ये लोग बुधवार को जब निकले थे, तो वहां ऐसी कोई आशंका नहीं थी, कि आगे जाकर कोई खतरा हो सकता है। लेकिन आगे जाकर जब वे खाना खाने के लिए रुके थे, वहां उन्हें पता चला कि पीछे से कोई बाढ़ आ रही है, जिसमें जान का खतरा है। जिसके बाद वे जल्दबाजी में अधूरा खाना छोड़कर उठे और अपनी बस व सामान को छोड़कर वहां से भागे, और जैसे-तैसे पास में स्थिति पहाड़ पर चढ़कर वहां बने एक मकान की छत पर जाकर रूके।’


    ‘आधा घर डूब चुका है, अब हम लोग नहीं बचेंगे’

    महिला ने आगे कहा कि ‘वहां पहुंचकर उन्हें लगा था कि शायद वो बच जाएंगे। लेकिन जब ऐसा होना मुश्किल लगा तो उनमें से एक रिश्तेदार में घर पर फोन लगाकर पूरा घटनाक्रम बताया और कहा कि हमारी बस तो चली गई है और हम फिलहाल छत पर आकर रूके हैं, लेकिन अब हमारी जान को भी खतरा है। उन्होंने बताया कि ‘आधा घर डूब चुका है, और अब हम लोग नहीं बच पाएंगे। हमारे बच्चों को देख लेना’, महिला ने कहा, ‘बस उनके मुंह से इतना ही निकला था, कि फिर बगैर फोन कटे ही सामने से आवाज आना बंद हो गई।’


    बुधवार सुबह हुई बात के बाद कोई संपर्क नहीं हो पाया

    महिला ने बताया कि यह बात उनसे कल सुबह करीब साढ़े नौ बजे हुई थी और अब 24 घंटे से ज्यादा वक्त गुजरने के बाद भी वहां गए किसी भी व्यक्ति से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। महिला ने कहा, ‘जिस बस से वो लोग गए थे उसका भी कुछ पता नहीं है और उन 29 लोगों का भी फिलहाल कुछ पता नहीं चला है। एक की भी बॉडी अबतक नहीं मिली है।’


    बच्चों का रो रोकर बुरा हाल, सरकार से मांगी मदद

    महिला के अनुसार वहां गए सभी लोग आपस में परिचित थे और सभी कहीं ना कहीं एक-दूसरे के रिश्ते में लगते थे। उधर उनके लापता होने के बाद सभी के बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, कोई ससुराल में है तो कोई नौकरी करने गया हुआ है और वे सभी अपने माता-पिता के लिए परेशान हो रहे हैं। महिला ने सरकार से उन लोगों का पता लगाने में मदद करने की गुहार लगाई है।