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  • नेपाल में फिर बाढ़ और भूस्खलन से फिर भारी तबाही, बूढ़ी गंडकी नदी में समाए 45 मकान और छह पुल

    नेपाल में फिर बाढ़ और भूस्खलन से फिर भारी तबाही, बूढ़ी गंडकी नदी में समाए 45 मकान और छह पुल


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में बाढ़ (Flood) और भूस्खलन (Landslide) ने फिर से भारी तबाही मचाई है। गोरखा जिले (Gorkha District) में रविवार तड़के करीब 4:30 बजे आई बाढ़ में 45 मकान और छह पुल बूढ़ी गंडकी नदी (Budhi Gandak River) में समा गए। जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। सैलाब में 10 लापता हैं। सेना ने 9 विदेशी समेत 82 लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया है। अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वालों को ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने को कहा है।

    अचानक आए सैलाब से बिहार में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। ताजा आपदा ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी की विनाशकारी बाढ़ की याद ताजा कर दी है। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि रविवार तड़के बाढ़ की सूचना मिली। फिर से आए सैलाब ने भारी तबाही मचाई है। अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है। जानकारी के अनुसार, बाढ़ चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका-6 क्षेत्र से नीचे की ओर आई और नदी किनारे की बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया।

    राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के प्रवक्ता शांति महत के अनुसार, चुमनुब्री में लोकपा और चुम्लिंग के बीच जबर्दस्त भूस्खलन हुआ। इससे नदी का प्रवाह रुक गया और बाद में अवरुद्ध पानी के बहाव से बाढ़ आ गई। नेपाली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बूढ़ी गंडक नदी में आई बाढ़ से सल्लेरी, पायूका और जगत में नदी किनारे स्थित मकान बह गए। बाढ़ में कई पुल बह गए हैं। नेपाल की सेना ने पोस्ट में लिखा, बूढ़ी गंडक नदी में बाढ़ आने के बाद नेपाली सेना की एक टुकड़ी को खोज और बचाव अभियान में लगाया गया है। इस टुकड़ी ने 6 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।


    भूस्खलन से प्रवाह रुकने के बाद अचानक आई बाढ़

    चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष नीमा लामा ने बताया कि भूस्खलन के कारण चुमके खोला नामक जलधारा का प्रवाह बाधित हो गया था। इसके बाद पानी का बहाव बढ़ा और अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। इस घटना के कारण नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया।

    प्रशासन को आशंका है कि तेज बहाव से नदी के किनारे बसे अन्य इलाकों में भी नुकसान हो सकता है। बाढ़ में 341 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के मुख्य कैंप और निर्माण उपकरण भी बह गए। इसके अलावा दो टेलीफोन टावर और बिजली के 50 खंभे गिरने से संचार एवं विद्युत आपूर्ति के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।


    437 सुरक्षाकर्मी और चार हेलिकॉप्टर बचाव कार्य में जुटे

    घटना के बाद प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 437 सुरक्षाकर्मियों और चार हेलिकॉप्टर को राहत और बचाव कार्य में उतारा गया है। इसके अलावा नेपाल पुलिस के 50 कर्मियों की एक टीम को तैयार रखा गया है। प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 82 लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।


    नदी किनारे रहने वालों को चेतावनी

    बाढ़ के बाद प्रशासन ने बूढ़ी गंडकी नदी के किनारे स्थित बस्तियों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। लोगों से नदी के करीब जाने से बचने और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। प्रशासन की प्राथमिकता नदी किनारे बसे लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित इलाकों की स्थिति का आकलन करना है।


    बिहार में भी बाढ़ का खतरा बढ़ा

    बिहार में भी खतरा बढ़ गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह नदी आगे चलकर त्रिशूली से मिलती है। फिर दोनों का पानी देवघाट के पास नारायणी नदी में पहुंचता है। यही नदी भारत में गंडक के नाम से बिहार में आती है और आगे गंगा में मिल जाती है। अगर पानी का बहाव बढ़ता है, तो बिहार के कई जिलों में बाढ़ आ सकती है।

  • नेपाल की बूढ़ी गंडक नदी में फिर भयंकर बाढ़ आने का अलर्ट… लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील

    नेपाल की बूढ़ी गंडक नदी में फिर भयंकर बाढ़ आने का अलर्ट… लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में बुधी गंडक नदी (Budhi Gandak River) में बड़ी बाढ़ आने की चेतावनी जारी की गई है. नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने लोगों को सतर्क रहने को कहा है. प्राधिकरण ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है. साथ ही नदी के पास जाने से बचने की सलाह दी है।

    NDRRMA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी दी. पोस्ट के मुताबिक, चुमानुम्ब्री ग्रामीण नगरपालिका-6 की तरफ से बुधी गंडक नदी में बाढ़ का पानी आ रहा है. इसे देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने के लिए कहा गया है. अधिकारियों ने साफ कहा है कि जब तक बाढ़ का पानी गुजर नहीं जाता, तब तक नदी के करीब न जाएं।


    त्रिशूली दोभान तक नदी के पास जाने से बचें

    NDRRMA ने त्रिशूली दोभान तक नदी के किनारे जाने से मना किया है. प्रशासन का कहना है कि बाढ़ का पानी आने के दौरान नदी के आसपास रहना खतरनाक हो सकता है. ऐसे में लोगों को नदी से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

    प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि वे चेतावनी को गंभीरता से लें. बाढ़ का पानी गुजरने तक नदी के पास जाने या वहां रुकने से बचें. खासकर नदी के किनारे रहने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. प्राधिकरण ने लोगों को ऊंचाई वाली जगहों पर जाने की सलाह दी है. बाढ़ के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा हो सकता है. ऐसे में सुरक्षित और ऊंची जगह पर रहना जरूरी है।

    NDRRMA ने कहा कि लोगों को प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए. नदी के पास जाने से बचना चाहिए और बाढ़ की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए. अगर आसपास पानी का स्तर बढ़ता दिखाई दे, तो सुरक्षित जगह पर जाना जरूरी है।


    ‘बाढ़ का पानी गुजरने तक सतर्क रहें’

    प्राधिकरण ने कहा है कि जब तक बाढ़ का पानी पूरी तरह गुजर नहीं जाता, तब तक नदी के आसपास जाने से बचें. लोगों को जल्दबाजी में नदी पार करने या किनारे के करीब जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें. बाढ़ का खतरा टलने तक ऊंचाई वाली सुरक्षित जगहों पर रहें और नदी से दूर रहें।

    इससे पहले भी नेपाल की बुधी गंडक नदी में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ था. सितंबर 2026 में गोरखा जिले के नामरुंग इलाके में बाढ़ के कारण मनास्लु ट्रेक का रास्ता बंद हो गया था. बाढ़ में दो पुल बह गए थे. इनमें बूढ़ी गंडकी नदी पर बना एक झूला पुल भी शामिल था. बाढ़ से दो जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा था।

  • नेपाल में भारी बारिश ने मचाई तबाही…बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में 21 लोगों की मौत

    नेपाल में भारी बारिश ने मचाई तबाही…बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में 21 लोगों की मौत


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी बारिश (Heavy rain) ने तबाही मचाई है। बाढ़ (Floods), भूस्खलन (Landslides) और अन्य बारिश संबंधी घटनाओं में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।


    पिछले महीने की विनाशकारी बाढ़ में भी हजारों लोग प्रभावित

    लगातार हो रही बारिश से देश के कई हिस्सों में नई बाढ़ आ गई। इससे कई घर बह गए और सड़क यातायात बाधित हुआ। नेपाल अभी भी पिछले महीने अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से उबर रहा है। उस बाढ़ में कम से कम 1,453 लोग मारे गए थे, जबकि 5,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।

    बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने से कितने लोग प्रभावित?
    शनिवार रात पाल्पा जिले के माथागढी ग्रामीण नगर पालिका में भूस्खलन से एक घर दब गया। इसमें पांच लोगों की जान चली गई, जिनके शव रविवार सुबह बरामद किए गए। पिछले चार दिनों में बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने जैसी घटनाओं में 16 अन्य लोग मारे गए, जिससे कुल मृतकों की संख्या 21 हो गई। देश में पिछले पांच दिनों में मानसून से संबंधित 439 घटनाएं दर्ज की गईं। सुरक्षा कर्मियों ने बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित 1,284 लोगों को बचाया।


    नदियों का जलस्तर क्यों बढ़ा और क्या हुआ?

    लुम्बिनी प्रांत के रुपन्देही जिले में तिनाऊ नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया। शनिवार रात बुटवल में नदी किनारे के छह घर बाढ़ के पानी में बह गए। काठमांडू पोस्ट ने यह रिपोर्ट दी। लगातार बारिश के कारण तिनाऊ और आसपास की धाराएं उफान पर थीं। लगभग 200 घर खतरे में थे, जिससे सुरक्षा कर्मियों ने रात भर में करीब 1,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।


    अन्य जिलों में क्या स्थिति रही?

    चितवन जिले में रविवार सुबह नारायणी नदी और रियू धारा भी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगीं। देवघाट में नारायणी नदी 9.23 मीटर पर पहुंच गई, जो उसके खतरे के स्तर 9 मीटर से अधिक है। रियू नदी 3.92 मीटर पर पहुंच गई, जबकि उसका खतरे का निशान 3.8 मीटर है। भारी बारिश से चितवन में कई जगहों पर भूस्खलन और कीचड़ धंसने की घटनाएं हुईं, जिससे सड़कें अवरुद्ध हो गईं। करनाली प्रांत में भी भूस्खलन के कारण राजमार्गों पर यातायात बाधित हुआ। शनिवार को नारायणी और सप्तकोशी नदियों की बाढ़ से नवलपरासी पश्चिम और सप्तरी जिलों में 389 घर जलमग्न हो गए। इससे सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। अधिकारियों ने बाढ़ और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने का आग्रह किया है।


    मनांग में हिमस्खलन, दो की मौत, 10 लापता

    मनांग जिले में रविवार को हिमस्खलन की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और 10 अन्य लापता हो गए। पुलिस ने बताया कि 7,126 मीटर ऊंचे हिमलूंग हिमाल शिखर के बेस कैंप पर एक टेंट दब गया। इसमें नौ पर्वतारोही और 13 सहायक कर्मचारी शरण लिए हुए थे। उप पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र थापा के अनुसार, शुरुआत में 12 लोग लापता हुए थे, जिनमें से दो के शव मिले और 10 अभी भी लापता हैं। सभी लापता व्यक्ति नेपाली नागरिक हैं। बचाव अभियान के लिए एक हेलीकॉप्टर भेजा गया है। लापता लोग हिमालयन हॉलिडेज नेपाल और इमेजिन नेपाल ट्रेक्स से संबंधित हैं। नेपाल के पहाड़ी जिलों में लगातार बारिश और बर्फबारी के कारण यह घटना हुई। पर्यटन विभाग के महानिदेशक राम कृष्ण लामिछाने ने स्थिति पर नजर रखने की बात कही।

  • नेपाल में भारतीय विमानों की सुरक्षा पर सवाल…. काठमांडू एयरपोर्ट पर 26 साल से यात्रियों की खुद जांच करता है भारत

    नेपाल में भारतीय विमानों की सुरक्षा पर सवाल…. काठमांडू एयरपोर्ट पर 26 साल से यात्रियों की खुद जांच करता है भारत


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) के काठमांडू (Kathmandu) स्थित त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Tribhuvan International Airport) से उड़ान भरने वाले भारतीय विमानों (Indian aircraft) की सुरक्षा व्यवस्था पिछले 26 सालों से भारत खुद संभाव रहा है। नेपाल में इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल दिसंबर 1999 में कंधार हाईजैक (फ्लाइट IC814) के बाद शुरू हुई एक ‘अस्थायी’ व्यवस्था आज स्थायी रूप ले चुकी है जिसके तहत भारतीय सुरक्षाकर्मी नेपाल की धरती पर यात्रियों और उनके सामान की अतिरिक्त तलाशी लेते हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया से नेपाली एजेंसियों को दूर रखा जाता है और नेपाल के किसी भी मंत्रालय यानि गृह या नागरिक उड्डयन के पास इस विदेशी सुरक्षा तैनाती को वैध ठहराने वाला कोई भी दस्तावेज नहीं है। यह स्थिति अब नेपाल की संप्रभुता और दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को लेकर एक नई बहस छेड़ रही है। काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भारतीय रजिस्टर्ड विमान में उड़ान भरने वाले किसी भी यात्री को विमान में चढ़ने से ठीक पहले एक अतिरिक्त सुरक्षा जांच से गुज़रना पड़ता है।


    काठमांडू एयरपोर्ट पर 26 साल से क्यों खुद जांच करता है भारत?

    काठमांडू पोस्ट के मुताबिक एयरपोर्ट एप्रन पर एक ऊंचे प्लेटफॉर्म पर बने स्क्रीनिंग पॉइंट पर जहां भारतीय सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं वहां यात्रियों की तलाशी ली जाती है और उनके सामान की अच्छी तरह से हाथ से जांच की जाती है। यह कोई छिपी हुई बात नहीं है और न ही यह कोई नई बात है। लेकिन पच्चीस साल से ज्यादा समय बीतने के बाद यह अब विमान में चढ़ने की प्रक्रिया का ही एक हिस्सा बन गया है।

    पोस्ट को नेपाल के सिविल एविएशन अथॉरिटी के एक अधिकारी ने बताया है कि एयर इंडिया और इंडिगो दोनों ही त्रिभुवन में तीन शिफ्ट में भारतीय स्टाफ तैनात करते हैं। एक उड़ान के लिए काम करने वाले 12 से 15 लोगों में से छह से आठ भारतीय कर्मचारी एप्रन पर तैनात होते हैं। वे सुरक्षाकर्मियों वाले भारी जूते पहनते हैं। यात्रियों को एक-एक करके चारों तरफ से घिरी हुई ट्रॉली में भेजा जाता है जहां भारतीय स्टाफ उनके शरीर और उनके हैंड बैगेज की तलाशी लेते हैं।

    उन्होंने कहा कि नेपाली स्टाफ मदद तो करते हैं लेकिन उन्हें असल तलाशी प्रक्रिया से दूर रखा जाता है। अधिकारी ने कहा ‘भारत जाने वाली उड़ानों के लिए एप्रन एरिया में मुख्य ड्यूटी में नेपाली स्टाफ को कोई भूमिका नहीं दी जाती है।’ इस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर स्टाफिंग और तलाशी के बारे में जानकारी दी।


    नेपाली अधिकारियों को सुरक्षा जांच से क्यों रखा जाता है दूर?

    उन्होंने कहा कि कोई भी नेपाली एजेंसी ऐसा कोई दस्तावेज नहीं दिखा सकती जिससे मूल रूप से इसकी मंजूरी मिली हो। पोस्ट ने बताया है कि नेपाली मीडिया ऑउटलेट ‘कांतिपुर’ ने संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय, नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से कई बार पूछा कि क्या वे संबंधित रिकॉर्ड ढूंढ सकते हैं। हर बार उन्होंने इस सवाल के लिए किसी दूसरी एजेंसी का जिक्र किया। कंधार विमान अपहरण मामले के बाद ये प्रक्रिया शुरू हुई थी लेकिन नेपाल ने इसको लेकर कभी लिखित सहमति नहीं दी।

    पोस्ट ने लिखा है कि नेपाल की संप्रभुता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं लेकिन किसी भी सरकार ने इस व्यवस्था की समीक्षा करने की कोशिश नहीं की। पोस्ट का कहना है कि भारत ने बार-बार और ज्यादा सुविधाओं की मांग की है जिसमें काठमांडू से जाने वाली अपनी उड़ानों में स्काई मार्शल तैनात करने की अनुमति भी शामिल है। नेपाली अधिकारियों ने हर बार इस मांग को ठुकरा दिया है या चुपचाप टाल दिया है।


    कंधार कांड के बाद नेपाल ने दी थी भारत को यह इजाजत

    पोस्ट के मुताबिक कई अधिकारियों, राजनयिकों और विदेश मंत्रियों ने ‘कांतिपुर’ को बताया कि नेपाल ने इस व्यवस्था को हटाने के लिए कभी कोई औपचारिक प्रयास या राजनयिक पत्राचार नहीं किया। पोस्ट से बात करते हुए भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि भारत ने नेपाल के विदेश मंत्री स्तर की यात्रा के दौरान यह प्रस्ताव रखा था लेकिन इसे ठुकरा दिया गया था। उनके अनुसार इसके बजाय नेपाल ने भारतीय अधिकारियों को अलग से सुरक्षा स्क्रीनिंग करने की इजाजत देने के लिए मौखिक सहमति दी थी। वे कहते हैं कि उस सहमति में असल में क्या शामिल था इस पर और बारीकी से विचार करने की ज़रूरत है।

  • नेपाल में बाढ़ का संकट थमा नहीं, कई इलाकों में फिर भारी बारिश और आंधी का अलर्ट, बढ़ी नई आफत की आशंका

    नेपाल में बाढ़ का संकट थमा नहीं, कई इलाकों में फिर भारी बारिश और आंधी का अलर्ट, बढ़ी नई आफत की आशंका


    नई दिल्ली । नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ से पैदा हुआ संकट अभी खत्म नहीं हुआ है और इसी बीच मौसम ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। बुधवार को देश के कई हिस्सों में तेज बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि ऊंचे पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और बिजली चमकने का खतरा बताया गया है। बाढ़ से पहले ही प्रभावित लोगों के सामने मौसम की नई चुनौती खड़ी हो गई है।

    मौसम विभाग ने मधेश, कोशी, बागमती, गंडकी और लुंबिनी प्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश की चेतावनी दी है। पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। कोशी, बागमती और गंडकी के ऊंचे हिस्सों में बारिश के साथ बिजली चमक सकती है और बर्फबारी भी हो सकती है। लुंबिनी और कर्णाली के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में भी बर्फ गिरने की संभावना जताई गई है।

    26 अगस्त की बाढ़ ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 1,377 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं 5,326 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा में 6,827 लोग घायल हुए हैं। बाढ़ के कारण 7,570 घर टूट गए या क्षतिग्रस्त हुए हैं। बड़ी संख्या में परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी मुश्किलें पैदा हुई हैं।

    प्राकृतिक आपदा का असर नेपाल के कारोबार और खासकर चीन के साथ होने वाले व्यापार पर भी पड़ा है। रसुवागढ़ी और तातोपानी सीमा मार्गों को नुकसान पहुंचने के कारण सामान से भरे करीब 500 से 600 कंटेनर अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए हैं। इसके अलावा 200 से अधिक नेपाली कंटेनर बाढ़ के पानी में बह चुके हैं। इससे सीमा के रास्ते होने वाली सामान की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।

    फंसे हुए सामान को वैकल्पिक रास्ते से आगे भेजने की कोशिश की जा रही है। करीब 176 ट्रकों को कोराला मार्ग से भेजने की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन इस रास्ते से सामान को पहुंचने में करीब 10 से 12 दिन लग रहे हैं। इससे व्यापारिक गतिविधियों को सामान्य स्थिति में लौटने में समय लग सकता है।

    बाढ़ से नेपाल को आर्थिक रूप से भी भारी नुकसान हुआ है। शुरुआती आकलन में देश को चार लाख करोड़ नेपाली रुपये से अधिक के नुकसान की बात सामने आई है। इसमें घरों, सड़कों तथा सरकारी और निजी संपत्तियों को हुआ नुकसान शामिल है। नुकसान का विस्तृत आकलन पूरा होने के बाद यह आंकड़ा करीब 30 प्रतिशत तक और बढ़ सकता है।

    नेपाल सरकार के सामने अब प्रभावित क्षेत्रों में राहत और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने की बड़ी चुनौती है। सरकार के अनुमान के अनुसार देश के पुनर्निर्माण और टूटे हुए ढांचे की मरम्मत के लिए चार से पांच अरब डॉलर तक की जरूरत पड़ सकती है। इसी वजह से नेपाल दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से सहायता मांग रहा है। ऐसे समय में भारी बारिश, आंधी और बर्फबारी की नई चेतावनी ने पहले से प्रभावित इलाकों में चिंता और बढ़ा दी है।

  • नेपाल: बाढ़ का तांडव देखने वाले बच्चों को सदमे से निकालने का प्रयास… कल से खुलेंगे 65 स्कूल

    नेपाल: बाढ़ का तांडव देखने वाले बच्चों को सदमे से निकालने का प्रयास… कल से खुलेंगे 65 स्कूल


    काठमांडू।
    नेपाल में जल प्रलय (Nepal floods) के दो हफ्ते पूरे होने वाले हैं लेकिन नुवाकोट, रसुवा और आसपास के जिलों में जिन बच्चों ने बाढ़ का तांडव देखा या अपनों को खोया, वे एक अदृश्य डर से जूझ रहे हैं। कोई आधी रात को चौंककर उठ जाता है, कोई गुमसुम हो जाता है, तो कोई आपदा की याद दिलाने वाली किसी भी आवाज से सहम जाता है।

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों (Flood-Affected Areas) को फिर से बसाने की कवायद के बीच इन बच्चों को सदमें से बाहर लाने की कोशिशें भी जारी हैं। मेडिकल टीमें मानसिक सेहत सुधारने के लिए काउंसलिंग भी करा रही है। नुवाकोट के बिधुर में प्रशासन बुधवार से 65 स्कूलों को खोलने की तैयारी भी कर रहा है। बाढ़ से पहले बिदुर में कुल 79 स्कूल चल रहे थे। बिदुर की डिप्टी मेयर प्रभा बोगटी (Deputy Mayor Prabha Bogti) ने कहा, स्कूल इस बात का बंदोबस्त करेंगे कि वे आसानी से अपनी कक्षाओं में शामिल हो सकें।

    इस बीच, आपदा के 13वें दिन नेपाल में राष्ट्रीय शोक मनाया गया। इस दौरान राष्ट्र ध्वज को आधा झुका दिया गया और दीये और मोमबत्तियां जलाकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी गई।


    चुनौतीपूर्ण, अर्नोल्ड को याद आया सिलक्यारा

    2023 में भारत में सुरंग से 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाने वाले ऑस्ट्रेलियाई सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स चिलिमे जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। उन्होंने कहा, नेपाल का अभियान सिलक्यारा से अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यहां एक साथ कई स्थानों पर बचाव कार्य चल रहा है।

    1,380 लोगों की गई जान
    5,500 से अधिक लापता
    121 के सुरंगों में फंसे होने की आशंका


    भारत के सीमांत क्षेत्रों में जापानी इंसेफेलाइटिस का खतरा

    महराजगंज, कुशीनगर समेत कई सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ जैसे हालात के कारण मादा क्यूलेक्स मच्छर के पनपने और अंडों को सुरक्षित रखने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं।

    नेपाल आपदा ने भारत के पूर्वी सीमांत क्षेत्रों में जापानी इंसेफेलाइटिस के लिए जमीन तैयार कर दी है। अगर निवारक उपायों की दिशा में मजबूत कदम नहीं उठाए गए तो लोगों को दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। आपदा से महराजगंज और कुशीनगर समेत कई इलाकों में महीनों दल-दल बने रहने की संभावना है। प्रभावित क्षेत्रों में अब हाईग्रेड फीवर के मरीज भी लगातार बढ़ रहे हैं जिसे जापानी इंसेफेलाइटिस का संकेत माना जाता है। ऐसे में ग्रामीणों ने गहरी चिंता जताई है। महराजगंज के सेहगीबर्वा निवासी रामधारी निशाद, कुशीनगर के तमकोही राज निवासी लोकेश और पीपरी घाट निवासी उज्वल सिंह कहते हैं बाढ़ का दूषित पानी गांव के किनारे तक पानी पहुंच गया है। लोग बीमार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को बुखार की चपेट में आने वालों की जापानी इंसेफेलाइटिस की जांच करनी चाहिए।

    जंतु विशेषज्ञ सुनील कुमार कहते हैं, क्यूलेक्स नाम की मादा मच्छर जापानी इंसेफेलाइटिस के लिए मुख्य रोग वाहक है। यह आमतौर पर तराई वाले क्षेत्रों में देखने को मिलता है। गोरखपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले महराजगंज, कुशीनगर और देवरिया गंडक नदी के आस-पास बसे हुए हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में नमी वाला वातावरण रहता है, जिससे यहां खतरा ज्यादा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 से लेकर 2019 तक गोरखपुर मंडल में करीब 1125 लोगों की मौत दर्ज की गई।

  • 11 दिन बाद भी नेपाल में तबाही का असर बरकरार, चीन-नेपाल व्यापार मार्ग तबाह होने से आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

    11 दिन बाद भी नेपाल में तबाही का असर बरकरार, चीन-नेपाल व्यापार मार्ग तबाह होने से आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

    नई दिल्ली । नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और हिमस्खलन के 11 दिन बाद भी तबाही का मंजर जारी है। चीन-नेपाल के बीच जमीनी व्यापार का प्रमुख केंद्र ग्यिरोंग पोर्ट और उससे जुड़ी सीमा चौकी पूरी तरह तबाह हो चुकी है। लगातार सामने आ रहीं तस्वीरें इसकी भयावह स्थिति बयां कर रही हैं। चीन ने नेपाल में हुई इस तबाही से हुए नुकसान पर भले ही चुप्पी साध रखी हो, लेकिन इस आर्थिक गलियारे के ठप होने से नेपाल की अर्थव्यवस्था और आपूर्ति शृंखला पर असर साफ दिखने लगा है। भारत के जाने-माने भू-रणनीतिकार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक ब्रह्मा चेलानी का कहना है कि इस रास्ते होने वाला व्यापार पूरी तरह ठप होने से काठमांडो को अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए भारत पर और अधिक निर्भर होना पड़ेगा।

    महंगाई का दिखने लगा असर

    बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत ट्रांस-हिमालय कनेक्टिविटी नेटवर्क में चीन ग्यिरोंग क्रॉसिंग को एक रणनीतिक केंद्र मानता है। ग्यिरोंग बंद होने से आपूर्ति शृंखला बाधित हो गई है। इससे चीनी सामानों की कमी हो रही है और नेपाल के घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। यहां दोनों देशों के बीच ट्रकों की आवाजाही, माल की चेकिंग, क्लियरेंस और स्टोरेज के लिए बड़े ड्राई पोर्ट और गोदाम बने थे।

    लाखों टन मलबा साफ करने के बाद ही शुरू हो पाएगा मार्ग

    तबाही के बाद व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह बहाल करने में अभी काफी समय लगेगा। भारी मालवाहक ट्रैफिक सुरक्षित रूप से फिर से शुरू होने से पहले इंजीनियरों को लाखों टन मलबा साफ करना होगा, ऊंचे पहाड़ी रास्तों को स्थिर करना होगा, हिमस्खलन के कारण ऊपर की ओर बनी झीलों के खतरे को कम करना होगा और बह चुके पुलों का पुनर्निर्माण करना होगा।

    चमत्कार: दो और जिंदगियां बचाई गईं

    अब इसे कुदरत का करिश्मा कहें या चमत्कार, नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के 11वें दिन शनिवार को मलबे में दबे एक चार मंजिला मकान से एक बुजुर्ग महिला को जिंदा निकाला गया। परिजनों ने महिला के जीवित मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी और उनका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी कर दिया था। वहीं, बचाव दलों ने अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना से जुड़ी एक सुरंग से एक चीनी नागरिक को भी सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की है। नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के अनुसार, नुवाकोट जिले के बिदुर शहर में 60 वर्षीय चंडिका श्रेष्ठ एक चार मंजिला इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पर कीचड़ और मलबे के नीचे फंसी हुई थीं।

    अब तक 1,344 की मौत

    26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आए हिमस्खलन के बाद भोटेकोशी नदी में आई इस विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। देश भर में मृतकों का आंकड़ा 1,344 तक पहुंच गया है, जबकि 589 विदेशी नागरिकों सहित लगभग 5,000 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें भारत के भी 250 से अधिक नागरिक शामिल हैं। तेज धारा देख पहाड़ की ओर भागे 130 लोग, सामने ही बह गया एक साथी… गोरखपुर। पिपराइच निवासी आशुतोष उपाध्याय हाइड्रो पावर में काम कर रहे थे। बचकर किसी तरह पहुंचे हैं। बताया अचानक सभी लोग भागने लगे। नदी की तेज होती धारा देखकर मैं और करीब 130 लोग जान बचाने के लिए पहाड़ की ओर भागे। हम लोग तो बच गए पर एक साथी सामने ही बह गया।

  • नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा बढ़ा, त्रिशूली परियोजना के लापता कर्मियों की तलाश में भारतीय और नेपाली दल जुटे

    नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा बढ़ा, त्रिशूली परियोजना के लापता कर्मियों की तलाश में भारतीय और नेपाली दल जुटे

    नई दिल्ली ।नेपाल में आई भीषण बाढ़ और अचानक आई जल आपदा के बाद हालात अब भी बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार गुरुवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 1252 हो गई और करीब 5083 लोगों के लापता होने का अनुमान है। शव नहीं मिलने या पहचान नहीं होने के कारण कई परिवार प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी कर रहे हैं।

    त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कई कर्मचारी भी बाढ़ के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। इसी बीच परियोजना में काम करने वाले एक कर्मचारी ने आरोप लगाया कि बाढ़ आने से पहले चीन की कंपनी के एक सुपरवाइजर ने 265 कर्मचारियों को सुरंग के भीतर छोड़ दिया और खुद बाहर निकल गया।

    कर्मी के अनुसार सुरंग के अंदर मौजूद मजदूरों ने एक तेज आवाज सुनी थी। इसके बाद उन्होंने अपने सुपरवाइजर से सुरंग से बाहर निकलने की अनुमति मांगी थी। इस घटना से परियोजना में काम कर रहे लोगों की सुरक्षा और आपदा के समय प्रबंधन की तैयारियों को लेकर सवाल उठे हैं।

    लापता लोगों की तलाश में भारत भी नेपाल की मदद कर रहा है। भारतीय सुरंग बचाव दल नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे पावर हाउस में बचाव अभियान चला रहा है। भारतीय दूत ने स्याब्रूबेसी स्थित भारतीय टनल बचाव दल के आधार शिविर का दौरा किया और अभियान की प्रगति की जानकारी ली।

    बचाव दलों ने विशेष उपकरणों की मदद से सुरंग के भीतर करीब 100 मीटर तक का निरीक्षण किया है। अब सुरंग के और अंदर जाने के लिए भारी उपकरण लाने की तैयारी की जा रही है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय और नेपाली दल बचाव कार्य जारी रखे हुए हैं।

    इस बीच नेपाल के उत्तरी हिस्सों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश होने के कारण जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है। इसका असर भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के अलावा रसुवा और नुवाकोट जिलों से होकर बहने वाली छोटी नदियों और जलधाराओं पर भी पड़ सकता है।

    नेपाल में हालिया तबाही के बाद हिमनदों की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। तिब्बती पठार के ग्लेशियरों में बदलाव और उनके अस्थिर होने की आशंका को भविष्य में अचानक बाढ़ के संभावित कारणों से जोड़ा जा रहा है। पिछले कुछ दशकों में इस क्षेत्र के ग्लेशियरों में उल्लेखनीय कमी आने की बात भी सामने आई है।

    26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आई थी। इससे उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी नुकसान हुआ। मौजूदा परिस्थितियों में लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता फिर बढ़ा दी है।

    राहत सामग्री के वितरण को व्यवस्थित करने के लिए नेपाल सरकार ने सिंगल विंडो व्यवस्था लागू की है। इसके तहत निजी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को नेपाल में राहत सामग्री सीधे भेजने या ले जाने से पहले अनुमति लेना जरूरी होगा। सीमा पर राहत सामग्री के लिए निर्धारित कस्टम प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही उसे आगे ले जाने की अनुमति दी जाएगी।

    बाढ़ के बाद जारी बचाव अभियान में भारत की सहायता से सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। वहीं नेपाल में दोबारा बढ़ते जलस्तर और संभावित आपदा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन तथा बचाव एजेंसियां सतर्क हैं। लगातार निगरानी, समय पर चेतावनी और प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।

  • नेपाल में फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा…. भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अलर्ट जारी

    नेपाल में फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा…. भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अलर्ट जारी


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में 26 अगस्त को आई त्रासदी के बाद रविवार को भोटेकोशी नदी (Bhote Koshi River) का जलस्तर फिर बढ़ गया। इससे बाढ़ की नई चेतावनी जारी की गई है। अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों और बचावकर्मियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बाढ़ में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 780 हो गई है, जबकि 2,202 लोग अभी लापता हैं।

    राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने रविवार को कहा कि भोटेकोशी नदी (Bhote Koshi River) का जलस्तर फिर बढ़ने से लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। उधर, बाढ़ प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। 20 हजार से ज्यादा बचावकर्मियों ने आपदा के पांचवें दिन रविवार को भी लापता लोगों की तलाश और फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया।

    नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल (Foreign Minister Shishir Khanal) ने बताया कि अब तक 9500 लोगों को बचाया जा चुका है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ प्रभावित तीन जिलों के विभिन्न स्कूलों के 238 छात्र और 18 शिक्षक अभी लापता हैं।


    चीन की ओर बनी झील से खतरा

    माना जा रहा है कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर पराडिगखड पशुतांगखेड़ा में भूस्खलन के कारण यह बाढ़ आई थी। भोटेकोशी में पानी बढ़ने से घर, सड़कें और पुल बह गए। नेपाल में नए सिरे से बाढ़ की आशंका तब बढ़ी जब ढहने के बाद चीन की ओर झील बन गई। हालांकि, चीनी मीडिया के अनुसार, शनिवार को झील का आकार घटने लगा, जिससे खतरा घटा है।

    भारतीय टीम मदद में जुटी: बाढ़ के कारण एक दर्जन जलविद्युत प्रोजेक्ट में फंसे होने की आशंका है। इन्हें बचाने में भारत की 11 सदस्यीय टीम मदद कर रही है। त्रिशूली जलविद्युत परियोजना में सुरक्षाबल भारतीय सुरंग विशेषज्ञों की मदद से लोगों को निकालने में जुटे हैं। बारिश के बावजूद अभियान जारी है।


    गंडक-कोसी भी उफनाई
    पटना। नेपाल में तीन दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण गंडक और कोसी नदी में एक बार फिर उफान आ गया है। पिछले 24 घंटे में दोनों नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ऐसी आशंका है कि सोमवार दोपहर तक पश्चिमी एवं पूर्वी चंपारण, सारण और गोपालगंज से यह पानी गुजरेगा।


    149 भारतीयों को बचाया

    नेपाल में बाढ़ के बाद 149 भारतीयों को बचाया गया है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को इन लोगों की सूची जारी की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल में तैनात भारतीय फोरेंसिक टीम से भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने मुलाकात की। टीम मृतकों के डीएनए नमूनों की जांच करेगी।

  • UP: कुशीनगर में गंडक नदी में मिले 4 और शव, नेपाल बाढ़ के बाद अब तक 13 शव बरामद

    UP: कुशीनगर में गंडक नदी में मिले 4 और शव, नेपाल बाढ़ के बाद अब तक 13 शव बरामद


    नई दिल्ली।
    नेपाल (Nepal) में आई भीषण बाढ़ (Devastating floods) की तबाही का असर अब सीमा पार उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भी दिखने लगा है. कुशीनगर (Kushinagar) में गंडक नदी (Gandak River) से रविवार को चार और शव बरामद किए गए. पिछले चार दिनों में नदी से अब तक कुल 13 शव निकाले जा चुके हैं, जिनके नेपाल से बहकर आने की आशंका जताई जा रही है।

    रविवार को SDRF की टीम छितौनी बांध के भेड़ियारी ठोकर नंबर-3 के पास नदी की निगरानी कर रही थी. इसी दौरान जवानों को पानी में चार शव दिखाई दिए. टीम नदी में उतरी और सभी को बाहर निकाल लिया. इनमें दो महिलाएं और दो पुरुष हैं. इससे एक दिन पहले भी इसी इलाके में तीन शव मिले थे. बरामद शवों की जानकारी नेपाल के पड़ोसी जिले के अधिकारियों को दे दी गई है. हालांकि, अभी तक किसी की पहचान नहीं हो पाई है।

    खड्डा थाने के पुलिस अधिकारी संदीप कुमार सिंह के मुताबिक, जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद चारों शवों को मोर्चरी भेज दिया गया. कुशीनगर की मोर्चरी में जगह भर जाने के कारण बाकी शवों को गोरखपुर भेजा गया है. पुलिस शवों की पहचान कराने की कोशिश कर रही है, ताकि पता चल सके कि इनमें नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोग कौन हैं.


    नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही

    नेपाल में 26 अगस्त को तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद भारी बाढ़ आई थी. बर्फ, चट्टानों और मलबे के तेज बहाव ने कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया. बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा, जबकि कई हाइड्रोपावर स्टेशन भी तबाह हो गए. भोटेकोशी नदी के रास्ते आगे बढ़े बाढ़ के पानी ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई. नेपाल में रविवार तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 788 पहुंच गई थी. वहीं, 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए गए हैं।

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में 275 से ज्यादा भारतीय नागरिक संपर्क से बाहर हैं. इनके अलावा 128 भारतीय मूल के लोगों से भी संपर्क नहीं हो पाया है. रविवार को मंत्रालय ने 149 लोगों के सुरक्षित बचाए जाने की सूची जारी की. कुशीनगर में मिले शवों की पहचान होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि इनमें नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोग शामिल हैं या नहीं।