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  • ईरान-इजरायल तनाव फिर चरम पर, नेतन्याहू ने दोहराई सैन्य कार्रवाई की चेतावनी, तेहरान बोला- बातचीत विफल हुई तो युद्ध के लिए तैयार

    ईरान-इजरायल तनाव फिर चरम पर, नेतन्याहू ने दोहराई सैन्य कार्रवाई की चेतावनी, तेहरान बोला- बातचीत विफल हुई तो युद्ध के लिए तैयार


    नई दिल्ली ।
    मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों के समानांतर इजरायल की ओर से आए सख्त बयानों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ तो ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। इसके जवाब में ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह बातचीत को प्राथमिकता देता है, लेकिन वार्ता विफल होने की स्थिति में हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।

    इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके देश ने पहले भी अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं और भविष्य में भी आवश्यकता पड़ने पर ऐसा करने से पीछे नहीं हटेगा। उनका कहना था कि ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर इजरायल किसी भी संभावित खतरे को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि यदि सुरक्षा संबंधी चिंताएं दूर नहीं हुईं तो आगे भी सैन्य विकल्प खुले रहेंगे।

    इजरायल लंबे समय से यह रुख अपनाता रहा है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसी कारण वह अपने सुरक्षा हितों के अनुरूप स्वतंत्र कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित मानता है। हालिया बयान को भी इसी नीति का विस्तार माना जा रहा है, जिसने क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है।

    इस बीच अमेरिका लगातार दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने की कोशिशों में जुटा हुआ है। वॉशिंगटन का मानना है कि बढ़ते सैन्य तनाव से क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है और कूटनीतिक प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं। इसी वजह से सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता देने की अपील की जा रही है।

    दूसरी ओर ईरान ने भी अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि वह मौजूदा वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहता है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि कूटनीतिक समाधान ही सबसे बेहतर विकल्प है और इसी दिशा में प्रयास जारी हैं। हालांकि, साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि बातचीत किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंचती या देश की सुरक्षा को चुनौती मिलती है तो ईरान आवश्यक जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार रहेगा।

    ईरानी संसद के शीर्ष नेतृत्व ने कहा कि देश अपनी रक्षा क्षमता और राष्ट्रीय हितों से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं करेगा। उनका कहना था कि परमाणु कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है और शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक विकसित करना ईरान का वैध अधिकार है। उन्होंने दोहराया कि देश अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करता रहेगा, लेकिन अपने अधिकारों की रक्षा भी करेगा।

    विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं। एक ओर कूटनीतिक वार्ता जारी है, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों की सख्त बयानबाजी से तनाव बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। यदि संवाद सफल रहता है तो क्षेत्र में स्थिरता की संभावना मजबूत हो सकती है, लेकिन बातचीत विफल होने पर हालात फिर से सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों की सफलता पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • तनाव के बीच इजरायल ने रोकी सैन्य कार्रवाई, नेतन्याहू की चेतावनी- किसी भी हमले का जवाब होगा पहले से ज्यादा सख्त

    तनाव के बीच इजरायल ने रोकी सैन्य कार्रवाई, नेतन्याहू की चेतावनी- किसी भी हमले का जवाब होगा पहले से ज्यादा सख्त

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने की घोषणा की है। हालांकि इस घोषणा के साथ उन्होंने स्पष्ट चेतावनी भी दी कि यदि भविष्य में इजरायल की सुरक्षा को किसी प्रकार का खतरा पैदा किया गया या फिर से हमला किया गया, तो उसका जवाब पहले की तुलना में अधिक कठोर और व्यापक होगा।

    देश के नाम अपने संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने दावा किया कि हाल की सैन्य कार्रवाइयों का उद्देश्य उन खतरों को समाप्त करना था, जिन्हें इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मानता रहा है। उनके अनुसार, सरकार ने ऐसे कदम उठाए जिनका लक्ष्य संभावित खतरों को समय रहते नियंत्रित करना था।

    प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि इजरायल किसी भी ऐसे प्रयास को स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी संप्रभुता या नागरिकों की सुरक्षा को प्रभावित करे। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय मौजूदा परिस्थितियों और सुरक्षा आकलन के आधार पर लिया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इजरायल अपनी सतर्कता कम करेगा।

    नेतन्याहू ने यह भी संकेत दिया कि पिछले कुछ समय में हुए घटनाक्रमों ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि इजरायल ने अपनी रक्षा नीति के तहत उन सभी गतिविधियों पर नजर बनाए रखी है, जिन्हें वह अपने हितों के लिए खतरा मानता है। उनके अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां और रक्षा बल भविष्य की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न संगठनों और समूहों का भी उल्लेख किया तथा कहा कि इजरायल किसी भी प्रकार की आक्रामक गतिविधि का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे।

    विश्लेषकों का मानना है कि सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा क्षेत्रीय तनाव को अस्थायी रूप से कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से दी गई चेतावनियां यह भी दर्शाती हैं कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और भविष्य में घटनाक्रम किस दिशा में जाएंगे, इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।

    पश्चिम एशिया लंबे समय से भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा चुनौतियों का केंद्र रहा है। ऐसे में किसी भी सैन्य गतिविधि का प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा बाजार और वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और संवाद की अपील लगातार की जाती रही है।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, आने वाले दिनों में दोनों देशों के कदम और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के प्रयास यह तय करेंगे कि क्षेत्र में तनाव कम होता है या फिर नई चुनौतियां सामने आती हैं। फिलहाल इजरायल की ओर से सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा को तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, जबकि सुरक्षा संबंधी चेतावनी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि स्थिति पर सतर्क निगरानी जारी रहेगी।

  • ईरान- अमेरिका तनाव फिर चरम पर, ट्रम्प-नेतन्याहू पर इनाम वाले बिल की चर्चा; पश्चिम एशिया में बढ़ा कूटनीतिक और सैन्य संकट

    ईरान- अमेरिका तनाव फिर चरम पर, ट्रम्प-नेतन्याहू पर इनाम वाले बिल की चर्चा; पश्चिम एशिया में बढ़ा कूटनीतिक और सैन्य संकट



    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की संसद में एक ऐसे बिल पर चर्चा चल रही है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ कार्रवाई करने वालों को भारी इनाम देने का प्रावधान हो सकता है। हालांकि यह अभी प्रारंभिक प्रस्ताव स्तर पर है और इस पर अंतिम वोटिंग बाकी है। इस कदम को पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव का और बड़ा संकेत माना जा रहा है।

    ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के हवाले से सामने आई जानकारी में कहा गया है कि यह प्रस्ताव हाल के सैन्य और राजनीतिक तनावों के जवाब में तैयार किया जा रहा है। कुछ सांसदों ने यह भी संकेत दिया है कि इस पर जल्द ही संसद में मतदान हो सकता है। इसी बीच ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य ढांचे में हालिया घटनाओं को लेकर भी नाराजगी बढ़ी हुई बताई जा रही है, जिससे क्षेत्रीय हालात और संवेदनशील हो गए हैं।

    दूसरी ओर, अमेरिका की ओर से भी सख्त रुख देखने को मिल रहा है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया गया है। ट्रम्प के मुताबिक कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों के नेताओं ने बातचीत के लिए कुछ समय देने की अपील की थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई समझौता नहीं होता है तो अमेरिका कार्रवाई के लिए तैयार रहेगा।

    इस घटनाक्रम के बीच पश्चिम एशिया में तनाव कई मोर्चों पर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बनी हुई है, जहां हजारों नाविकों के साथ बड़ी संख्या में जहाज फंसे होने की रिपोर्ट सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या टकराव से वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।

    इसी दौरान क्षेत्र में ड्रोन गतिविधियों और सुरक्षा घटनाओं की खबरों ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है। सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था और हवाई रक्षा को और मजबूत किया है। वहीं ईरान ने भी अपने भीतर सुरक्षा और खुफिया गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन की स्वतंत्रता किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। UN ने सभी पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की अपील की है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर ईरान-अमेरिका संबंधों को तनावपूर्ण मोड़ पर ला दिया है, जहां एक ओर कूटनीतिक बातचीत जारी है, वहीं दूसरी ओर सैन्य और रणनीतिक तैयारी भी तेज होती दिख रही है।

  • नेतन्याहू का बड़ा आरोप: पाकिस्तान चला रहा है इजरायल-अमेरिका के खिलाफ डिजिटल युद्ध, भारत की खुलकर तारीफ

    नेतन्याहू का बड़ा आरोप: पाकिस्तान चला रहा है इजरायल-अमेरिका के खिलाफ डिजिटल युद्ध, भारत की खुलकर तारीफ




    नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक अमेरिकी टीवी इंटरव्यू में पाकिस्तान को लेकर बड़ा और तीखा बयान दिया है। CBS के कार्यक्रम “60 Minutes” में बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सोशल मीडिया के जरिए एक संगठित डिजिटल अभियान चला रहा है, जिसका मकसद इजरायल और अमेरिका के रिश्तों को कमजोर करना है। नेतन्याहू के अनुसार यह अभियान फर्जी अकाउंट्स और बॉट नेटवर्क के जरिए चलाया जा रहा है, जिसमें इजरायल विरोधी नैरेटिव फैलाए जा रहे हैं।

    नेतन्याहू ने कहा कि कई देशों द्वारा सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और फर्जी प्रचार के जरिए हेरफेर की कोशिशें की जा रही हैं और पाकिस्तान जैसे देशों से ऐसे डिजिटल ऑपरेशन सामने आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इंटरनेट पर जो इजरायल विरोधी संदेश तेजी से फैलते हैं, उनकी शुरुआती गतिविधियां अक्सर पाकिस्तान से जुड़ी पाई जाती हैं। हालांकि इन आरोपों पर पाकिस्तान की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

    इसी इंटरव्यू में नेतन्याहू ने भारत की जमकर तारीफ की और भारत-इजरायल संबंधों को बेहद मजबूत और भरोसेमंद बताया। उन्होंने कहा कि जब वे अपनी पत्नी के साथ भारत यात्रा पर गए थे तो वहां उन्हें जिस तरह का सम्मान और गर्मजोशी मिली, वह उनके लिए “प्यार के उत्सव” जैसा अनुभव था। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में इजरायल और उसके नागरिकों को काफी सम्मान मिलता है और दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं।

    नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी सराहना की और कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी बहुत गहरी है। उन्होंने बताया कि भारत और इजरायल के बीच रक्षा, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ रहा है।

    इसी बातचीत के दौरान ईरान मुद्दे पर बोलते हुए नेतन्याहू ने दावा किया कि अगर हालिया सैन्य कार्रवाई नहीं की जाती तो ईरान बहुत जल्दी परमाणु हथियार विकसित कर सकता था। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को मजबूत करने में लगा हुआ है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।

    नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि ईरान के भीतर राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है और शासन के अंदर दरारें सामने आ रही हैं। उनके अनुसार देश में हाल की घटनाओं के बाद विरोध प्रदर्शन और असंतोष बढ़ा है, जिससे वहां की सरकार कमजोर स्थिति में दिखाई दे रही है।

    कुल मिलाकर इस इंटरव्यू में नेतन्याहू ने एक तरफ पाकिस्तान पर डिजिटल युद्ध और दुष्प्रचार के गंभीर आरोप लगाए, वहीं दूसरी तरफ भारत के साथ रिश्तों को मजबूत और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण बताया, जिससे यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

  • ईरान के यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना मुख्य लक्ष्य…. आधे से आगे पहुंचा अभियान : नेतन्याहू

    ईरान के यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना मुख्य लक्ष्य…. आधे से आगे पहुंचा अभियान : नेतन्याहू


    तेल अवीव।
    इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने ईरान (Iran) के खिलाफ चल रहे अमेरिका-इस्राइल संयुक्त सैन्य अभियान (US-Israel Joint Military Operation) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन अब आधे से आगे पहुंच चुका है और इसका अगला मुख्य लक्ष्य ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना या हटाना है।

    एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने दावा किया कि इस अभियान में अब तक अहम सफलताएं हासिल हुई हैं। उनके मुताबिक, ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है।


    ईरान की सैन्य ताकत को बड़ा नुकसान

    नेतन्याहू ने बताया कि अमेरिका और इस्राइल की सेनाओं ने मिलकर ईरान के मिसाइल सिस्टम, हथियार फैक्ट्रियों और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई प्रमुख वैज्ञानिकों को निशाना बनाया है। इससे ईरान की युद्ध क्षमता को गंभीर झटका लगा है। उन्होंने कहा हमने उनकी मिसाइल क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है, फैक्ट्रियां तबाह कर दी हैं और उनके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अहम लोगों को खत्म किया है।


    अब यूरेनियम भंडार पर नजर

    इस्राइली प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब ऑपरेशन का फोकस ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार पर है, जो परमाणु हथियार बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस सामग्री को ईरान से हटाने और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में देने की मांग की है।

    नेतन्याहू ने इस सैन्य कार्रवाई को सिर्फ मौजूदा खतरे से निपटने का नहीं, बल्कि भविष्य में संभावित बड़े संकट को रोकने का प्रयास बताया। उनका कहना है ईरान परमाणु हथियार बनाने और उन्हें अमेरिकी शहरों तक पहुंचाने की क्षमता विकसित कर रहा है। इस युद्ध का मकसद इसी खतरे को रोकना है।


    ईरान कमजोर, गठबंधन मजबूत

    नेतन्याहू ने दावा किया कि इस ऑपरेशन के चलते ईरान की स्थिति कमजोर हो रही है, जबकि अमेरिका-इस्राइल गठबंधन और मजबूत होकर उभर रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के अंदर अस्थिरता बढ़ रही है। हालांकि, उन्होंने ऑपरेशन के खत्म होने की कोई समयसीमा नहीं बताई, लेकिन भरोसा जताया कि मिशन अपने लक्ष्य तक पहुंचने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

  • ट्रंप से बातचीत के बाद नेतन्याहू की चेतावनी, बोले- हमले जारी रहेंगे; दो वैज्ञानिक मारने का दावा

    ट्रंप से बातचीत के बाद नेतन्याहू की चेतावनी, बोले- हमले जारी रहेंगे; दो वैज्ञानिक मारने का दावा

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    ल अवीव। । इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत के बाद कहा कि इजरायल अपने सैन्य अभियान जारी रखेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान और लेबनान में हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक इजरायल के सुरक्षा हित पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाते।
    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए नेतन्याहू ने लिखा: आज मैंने अपने मित्र राष्ट्रपति ट्रंप से बात की। राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि अमेरिकी सेना के साथ मिलकर हमने जो शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं, उनका लाभ उठाकर एक समझौते के माध्यम से युद्ध के लक्ष्यों को पूरा करने का अवसर है। इसी बीच, हम ईरान और लेबनान दोनों जगह हमले जारी रखे हुए हैं। हम उनके मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को नष्ट कर रहे हैं और हिजबुल्लाह को लगातार करारे झटके दे रहे हैं। कुछ ही दिन पहले, हमने दो और परमाणु वैज्ञानिकों को ढेर किया है और हमारे अभियान अभी भी सक्रिय हैं। हम हर परिस्थिति में अपने महत्वपूर्ण हितों की रक्षा करेंगे।
    ट्रंप का बड़ा फैसला: ईरान पर सैन्य हमले 5 दिन के लिए टले
    एक बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की कि उन्होंने ‘युद्ध विभाग’ को ईरान के बिजली संयंत्रों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर होने वाले सैन्य हमलों को पांच दिनों के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह स्थगन वर्तमान में चल रही चर्चाओं की सफलता पर निर्भर करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि मध्य पूर्व में शत्रुता को पूरी तरह से समाप्त करने के मुद्दे पर संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बहुत अच्छी और उत्पादक बातचीत हुई है।

    युद्ध चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष में 2,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल गई है, तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और दुनिया के कुछ सबसे व्यस्त हवाई मार्गों को खतरा पैदा हो गया है। ईरान ने कहा था कि वह पूरे पश्चिम एशिया में बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगा। वहीं ट्रंप ने कहा था कि महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोले जाने पर अमेरिका, ईरान में ऊर्जा संयंत्रों पर हमले करेगा।
    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बहरीन का नया मसौदा प्रस्ताव

    अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहरीन द्वारा पेश किए गए एक नए मसौदा प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है। यह प्रस्ताव सदस्य देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए “सभी आवश्यक कदम” उठाने का अधिकार देने की वकालत करता है। मसौदे में मांग की गई है कि ईरान तुरंत वाणिज्यिक जहाजों पर अपने सभी हमले बंद करे और जलडमरूमध्य के आसपास कानूनी मार्ग या नेविगेशन की स्वतंत्रता में बाधा डालने के किसी भी प्रयास को रोके।
    सैन्य कार्रवाई की अनुमति

    प्रस्ताव के तहत सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन को बाधित करने के प्रयासों को विफल करने और रोकने के लिए सीमावर्ती देशों के ‘क्षेत्रीय जल’ के भीतर भी कार्रवाई करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। जो कोई भी नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रता को कमजोर करेगा, उसके खिलाफ लक्षित प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी गई है।

  • अमेरिका-इजराइल का संयुक्त हमला, ईरान परमाणु विवाद में 742 मौतों के बाद सुरक्षा अलर्ट

    अमेरिका-इजराइल का संयुक्त हमला, ईरान परमाणु विवाद में 742 मौतों के बाद सुरक्षा अलर्ट



    नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों के बीच ईरान में संकट गहराता जा रहा है। यह संघर्ष अब चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका के स्पेशल प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ परमाणु समझौते की अंतिम कोशिश भी नाकाम रही। अमेरिका ने ईरान को प्रस्ताव दिया था कि वह अगले 10 साल तक यूरेनियम इनरिचमेंट पूरी तरह बंद कर दे, और बदले में अमेरिका न्यूक्लियर फ्यूल उपलब्ध कराने को तैयार था। हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। बातचीत टूटते ही अमेरिका और इजराइल ने मिलकर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।

    इस संघर्ष में अब तक ईरान में 742 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 176 बच्चे शामिल हैं। घायल हुए लोगों की संख्या 750 से अधिक है। इस हिंसा ने पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा की स्थिति पैदा कर दी है। लेबनान के बेरूत में इजराइली सेना ने हिज्बुल्लाह से जुड़े अल-मनार टीवी स्टेशन की इमारत को निशाना बनाया, जिससे प्रसारण कुछ समय के लिए बाधित हुआ। हालांकि, हमले के बाद प्रसारण फिर से शुरू कर दिया गया।

    ईरान के मिनाब शहर में गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले में मारी गई 165 लड़कियों का अंतिम संस्कार भी हुआ। इस दौरान हजारों लोग इकट्ठा हुए, और एक मां ने मंच से अमेरिका पर हमले का आरोप लगाया। भीड़ ने ‘अमेरिका मुर्दाबाद’, ‘इजराइल मुर्दाबाद’ और ‘नो सरेंडर’ जैसे नारे लगाए। ईरानी मीडिया ने हमले का आरोप इजराइल पर लगाया, जबकि इजराइली सेना ने इसे नकारा।

    इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध लंबा और अंतहीन नहीं होगा। उनका कहना है कि यह संघर्ष क्षेत्र में स्थायी शांति लाने का अवसर बन सकता है। उन्होंने पहले हुए अब्राहम अकॉर्ड्स का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ मिलकर अब और देशों के साथ शांति समझौते भी संभव हैं।

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प अमेरिका को लंबी और अनिश्चित लड़ाई में नहीं फंसने देंगे। उन्होंने कहा कि ईरान पर हमला विशेष रणनीति के तहत किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों। ट्रम्प की अनुमति के बिना कोई युद्ध लंबे समय तक जारी नहीं रहेगा, जिससे अमेरिका को इराक और अफगानिस्तान जैसी लंबी लड़ाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    सुरक्षा के मद्देनजर अमेरिका ने जॉर्डन, बहरीन और इराक से गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है। जॉर्डन और बहरीन में ईरान से ड्रोन और मिसाइल हमले का खतरा है, जबकि इराक में हिंसा और अपहरण का भी जोखिम बना हुआ है। अमेरिकी दूतावासों में केवल आवश्यक स्टाफ ही रहेंगे, और फ्लाइट्स रद्द होने के कारण नागरिकों को सुरक्षित निकासी का निर्देश दिया गया है।

    अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति को गंभीर बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने शांति बहाल करने और संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस बीच अमेरिका और इजराइल की मिलीजुली कार्रवाई, ईरानी नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नए संकट की घंटी साबित हो रही है।

  • नेतन्याहू ने IDF को तेहरान पर हमले और तेज करने का आदेश दिया

    नेतन्याहू ने IDF को तेहरान पर हमले और तेज करने का आदेश दिया


    तेल अवीव। इजरायल और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा संकेत देते हुए सेना को ईरान के खिलाफ अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। यह घोषणा उन्होंने रक्षा मुख्यालय ‘किर्या’ में उच्चस्तरीय बैठक के बाद की।
    बैठक में रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज, सेना प्रमुख इयाल जमीर और खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्नेया शामिल थे। इसके बाद नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सेना ईरान के खिलाफ अपने ऑपरेशन को और व्यापक रूप देगी।
    तेहरान पर लगातार हमलों का दावा

    इजरायल ने कहा कि उसकी सेना Israel Defense Forces पहले से ही तेहरान को निशाना बनाकर कार्रवाई कर रही है और आने वाले दिनों में यह और तेज होगी। नेतन्याहू ने संकेत दिया कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक इजरायल अपने सुरक्षा लक्ष्यों को हासिल नहीं कर लेता।

    खामेनेई की मौत के बाद भड़का तनाव

    यह बयान उस घटनाक्रम के बाद आया जिसमें संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की खबरों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया। इसके बाद ईरान ने हमलों को “अवैध कार्रवाई” बताते हुए जवाबी मिसाइल हमले शुरू किए।

    इजरायल में नागरिक हताहत
    नेतन्याहू ने बताया कि ईरानी हमलों में इजरायल के कई नागरिकों की मौत हुई। तेल अवीव में एक महिला की जान गई, जबकि बेत शेमेश में नौ लोगों के मारे जाने की सूचना है।

    उन्होंने मृतकों के प्रति शोक व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

    ‘पूरी ताकत से जारी रहेगा अभियान’

    प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में इजरायल की पूरी सैन्य क्षमता लगाई गई है और इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी मिल रहा है, जिसमें अमेरिका का सहयोग शामिल बताया गया है। उनके अनुसार यह अभियान लंबे समय से घोषित सुरक्षा नीति का हिस्सा है और इसका उद्देश्य देश को भविष्य के खतरों से सुरक्षित करना है।

  • मोदी की इजरायल यात्रा पर कांग्रेस का हमला, नेतन्याहू से मुलाकात को बताया …

    मोदी की इजरायल यात्रा पर कांग्रेस का हमला, नेतन्याहू से मुलाकात को बताया …

    नई दिल्ली। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इजरायल यात्रा को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी ने कहा कि ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायली नेतृत्व की आलोचना हो रही है, तब भारतीय प्रधानमंत्री की यह यात्रा कई नैतिक सवाल खड़े करती है।

    कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री की इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू से प्रस्तावित मुलाकात को लेकर भी आपत्ति जताई और गाजा की स्थिति पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।

    जयराम रमेश ने ऐतिहासिक रुख का दिलाया हवाला
    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत का इतिहास फिलिस्तीनी मुद्दे पर संतुलित और सिद्धांत आधारित रहा है, लेकिन मौजूदा कूटनीतिक रुख उस परंपरा से अलग दिखाई देता है।
    उन्होंने आरोप लगाया कि गाजा में भारी तबाही और वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार जैसे मुद्दों पर भारत को अधिक स्पष्टता दिखानी चाहिए।

    रमेश ने भारत के पुराने रुख की याद दिलाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 1960 के गाजा दौरे और बाद के दशकों में फिलिस्तीन के समर्थन से जुड़े निर्णयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने 1988 में फिलिस्तीन को औपचारिक मान्यता देकर वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र नीति का परिचय दिया था।

    प्रियंका गांधी ने गाजा का मुद्दा उठाने की अपील
    की

    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के दौरान इजरायली संसद नेसेट को संबोधित करते हुए गाजा पट्टी की मानवीय स्थिति का जिक्र करेंगे और निर्दोष नागरिकों के लिए न्याय की बात उठाएंगे।

    उन्होंने कहा कि भारत का ऐतिहासिक दायित्व रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति, न्याय और मानवीय मूल्यों की वकालत करता रहे।

    सरकार का फोकस: रणनीतिक और द्विपक्षीय सहयोग

    प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापार सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से हो रही है।

    2017 में मोदी की पहली इजरायल यात्रा के दौरान संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया गया था, जिसके बाद कृषि, रक्षा तकनीक, जल प्रबंधन और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।

    राजनीतिक बनाम कूटनीतिक बहस

    इस मुद्दे ने एक बार फिर भारत की पश्चिम एशिया नीति को लेकर घरेलू राजनीतिक बहस तेज कर दी है—एक तरफ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देने की दलील है, तो दूसरी ओर मानवीय और ऐतिहासिक दृष्टिकोण को बनाए रखने की मांग उठ रही है।

  • नेतन्याहू ने मोदी को बताया ‘भाई’, कट्टरपंथ के खिलाफ ‘आयरन एलायंस’ बनाने की घोषणा

    नेतन्याहू ने मोदी को बताया ‘भाई’, कट्टरपंथ के खिलाफ ‘आयरन एलायंस’ बनाने की घोषणा


    यरुशलम।
    इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Indian Prime Minister Narendra Modi) की यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि वह इससे पहले कभी इतने भावुक नहीं हुए। इजराइल की संसद नेसेट में अपने संबोधन के दौरान नेतन्याहू ने मोदी को “महान मित्र” और “विश्व मंच के बड़े नेता” की संज्ञा दी।

    उन्होंने कहा, “नरेन्द्र, मेरे प्रिय मित्र, आपके यहां आने से मैं काफी भावुक हूं… मैं यह कहने का साहस करता हूं कि आप केवल मित्र ही नहीं, बल्कि भाई जैसे हैं।” नेतन्याहू ने दोनों देशों के बीच तकनीकी और रणनीतिक सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना और सहयोग कई गुना बढ़ा है।

    ‘कट्टरपंथी इस्लाम’ के खिलाफ आयरन एलायंस

    नेतन्याहू ने अपने भाषण में कहा कि भारत और इजराइल “कट्टरपंथी इस्लाम” के खतरे के खिलाफ एक “आयरन एलायंस” (मजबूत गठबंधन) का निर्माण करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देश आज पहले से अधिक मजबूत हैं और साझा मूल्यों — प्रगति, मानव गरिमा और पारस्परिक सम्मान — में विश्वास रखते हैं।

    उन्होंने 07 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद भारत के समर्थन के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया। नेतन्याहू ने इजराइल की कार्रवाई को “रक्षात्मक युद्ध” बताते हुए कहा कि यह मानवता और सत्य के भविष्य के लिए संघर्ष है।

    आईएमईसी और नए समझौते

    नेतन्याहू ने कहा कि भारत और इजराइल मिलकर अमेरिका समर्थित इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकॉनमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) पहल को आगे बढ़ा रहे हैं। इस परियोजना का उद्देश्य समुद्र और रेल मार्ग के जरिए भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ना है।

    उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर तभी सफल हो सकता है जब इसके मार्ग में स्थिर और सुरक्षित देश हों, और इस धुरी पर भारत और इजराइल से अधिक सुरक्षित देश कोई नहीं है।

    नेतन्याहू ने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान पर्यटन, संस्कृति, कृषि, जल प्रबंधन और आव्रजन जैसे क्षेत्रों में कई समझौतों को लागू किया जाएगा। उन्होंने इसे अब्राहम समझौते की भावना के अनुरूप शांति और सहयोग की दिशा में अहम कदम बताया।

    इससे पहले, तेल अवीव एयरपोर्ट पर इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। नेतन्याहू के आमंत्रण पर 25-26 फरवरी तक हो रहा यह दौरा भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

    तेल अवीव पहुंचने पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ उनका स्वागत किया गया। भारतीय प्रवासी समुदाय में इस दौरे को लेकर खासा उत्साह देखा गया। प्रवासियों ने इसे दोनों देशों के रिश्तों के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। इसी मौके पर भारतीय मूल की नेत्रहीन गायिका दीना सेमटे ने पीएम मोदी के समक्ष प्रस्तुति दी। मणिपुर से ताल्लुक रखने वाली दीना ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के सामने प्रस्तुति देने पर गर्व है और संगीत लोगों को जोड़ने का माध्यम है।

    उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद यह मोदी का दूसरा इजराइल दौरा है। इससे पहले वे 2017 में इजराइल गए थे, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी। वर्ष 2018 में नेतन्याहू ने भारत का दौरा कर संबंधों को और मजबूती दी थी।

    इस बार की यात्रा को केवल द्विपक्षीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत-इजराइल संबंधों की लंबी ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा माना जा रहा है। दोनों देश रक्षा, प्रौद्योगिकी, जल प्रबंधन, कृषि और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। पीएम मोदी ने नेतन्याहू के साथ मुलाकात में टेक्नोलॉजी, वॉटर मैनेजमेंट, एग्रीकल्चर, टैलेंट पार्टनरशिप और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।

    इस यात्रा को भारत–इजराइल संबंधों में नई मजबूती और रणनीतिक साझेदारी के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।