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  • BRICS: नई दिल्ली घोषणापत्र पर ईरान को राजी करने के लिए करनी पड़ी मशक्कत

    BRICS: नई दिल्ली घोषणापत्र पर ईरान को राजी करने के लिए करनी पड़ी मशक्कत


    नई दिल्ली।
    ब्रिक्स देशों (BRICS Nations) ने एकतरफा टैरिफ, व्यापार प्रतिबंधों और संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी के बिना लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों पर कड़ा रुख अपनाया है। शनिवार को सर्वसम्मति से जारी ‘नई दिल्ली घोषणापत्र-2026’ (New Delhi Declaration-2026’) में इन्हें वैश्विक व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं के लिए नुकसानदेह बताते हुए ऐसी कार्रवाइयों से बचने का आह्वान किया गया। वहीं नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर ईरान (Iran) को तैयार करना आसान नहीं था। इसके लिए शनिवार सुबह 4 बजे तक मान-मनौव्वल और मशक्कत चलती रही।

    ब्रिक्स ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) (World Trade Organization (WTO)) की विवाद निपटारा व्यवस्था बहाल करने और वैश्विक व्यापार व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत बनाने पर जोर दिया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक में विकासशील देशों की आवाज और हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की।


    आतंकवाद किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं

    45 पन्नों और 140 बिंदुओं के नई दिल्ली घोषणापत्र का ईरान और यूएई ने भी समर्थन किया। इसमें ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की। कहा गया कि किसी भी वजह या मकसद से अंजाम दी गई आतंकवादी घटनाओं को उचित नहीं ठहराया जा सकता है। ब्रिक्स ने आतंकवाद, इसकी आर्थिक मदद, सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाना दिए जाने के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता दोहराई। घोषणापत्र में कहा गया है कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। ब्रिक्स देशों ने ब्रिक्स काउंटर -टेररिज्म वर्किंग ग्रुप और उसके पांच उप-समूहों के काम की सराहना करते हुए आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।


    पहलगाम हमले की निंदा

    साझा घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।


    स्थायी सदस्यता का समर्थन

    ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन भी दोहराया। घोषणापत्र में चीन और रूस ने भारत की बड़ी भूमिका के समर्थन की बात कही। यूएनएससी में सुधार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि इसे अब और नहीं टाला जा सकता है।


    इजरायल को झटका

    यूएई फलस्तीन समस्या के द्वि राष्ट्र समाधान का समर्थक है। ईरान भी इस प्रस्ताव के पक्ष में रहा। हालांकि, ब्रिक्स का यह प्रस्ताव इजरायल के लिए कूटनीतिक झटका है।


    परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र घोषित हो मध्य एशिया

    नई दिल्ली घोषणा में समूचे मध्य एशिया को परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र घोषित करने का भी प्रस्ताव है। यदि संयुक्त राष्ट्र किसी क्षेत्र को परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र घोषित करता है तो वहां परमाणु हथियारों का निर्माण और वितरण निषेध होता है। ईरान पर अमेरिकी हमलों के मद्देनजर यह एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव है।


    कैसे राजी हुआ ईरान

    ब्रिक्स में संयुक्त बयान पर यूएई और ईरान आखिर कैसे राजी हुए, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कहा गया लेकिन सूत्रों का दावा है कि ईरान संयुक्त बयान में फलस्तीन को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव जोड़ने की शर्त पर माना। इन शर्तों में फलस्तीन को संयुक्त राष्ट्र का पूर्ण सदस्य घोषित करने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है। यूएई ने भी इनका समर्थन किया। इसके बाद ईरान और यूएई की केमिस्ट्री में बदलाव दिखा।

    सूत्रों के अनुसार, एकमत करने के लिए भारत ने सभी पक्षों से शनिवार सुबह चार बजे तक बात की। दिल्ली घोषणा पत्र के प्रस्ताव संख्या 31 में कहा गया है कि हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि इजरायल-फलस्तीन संघर्ष का सही और स्थायी समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से ही हासिल किया जा सकता है। ब्रिक्स सभी वैश्विक संगठनों में फलस्तीन के सही प्रतिनिधित्व की जरूरत को मानता है जिसमें विश्व बैंक, आईएमएफ जैसी वित्तीय संस्थाएं भी शामिल हैं।

  • नई दिल्ली घोषणापत्र: 91 देशों और वैश्विक संगठनों ने किया एआई सहयोग का ऐतिहासिक समर्थन

    नई दिल्ली घोषणापत्र: 91 देशों और वैश्विक संगठनों ने किया एआई सहयोग का ऐतिहासिक समर्थन


    नई दिल्ली, फ़रवरी 2026 । आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ ने दुनिया भर के देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, अब तक इस घोषणापत्र में 91 देशों और वैश्विक संगठनों ने समर्थन दिया है।

    पिछले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का समापन इस घोषणापत्र को अपनाने के साथ हुआ। यह घोषणा एआई के उपयोग को आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण और समावेशी प्रौद्योगिकी के लिए वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने का एक संकेतक माना जा रहा है। प्रारंभ में 21 फ़रवरी 2026 तक 88 देशों और संगठनों ने इसका समर्थन किया था। इसके तुरंत बाद बांग्लादेश, कोस्टा रिका और ग्वाटेमाला के शामिल होने से इस संख्या बढ़कर 91 हो गई।

    घोषणापत्र का मूल संदेश ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत से प्रेरित है। इसका मकसद एआई के लाभ को पूरी मानवता तक समान रूप से पहुँचाना और तकनीकी असमानताओं को कम करना है। बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहु-हितधारक भागीदारी को मजबूत करना, राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करना और भरोसेमंद तथा सुलभ ढांचे के माध्यम से एआई को आगे बढ़ाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    घोषणापत्र में आर्थिक परिवर्तन में एआई की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। ओपन-सोर्स और सुलभ एआई इकोसिस्टम को बढ़ावा देना, ऊर्जा-कुशल एआई अवसंरचना का निर्माण और विज्ञान, शासन तथा सार्वजनिक सेवा वितरण में एआई की भूमिका को मजबूत करना इसमें शामिल हैं। इसके साथ ही वैश्विक सहयोग को मजबूत करना और डिजिटल अवसंरचना तथा किफ़ायती कनेक्टिविटी के माध्यम से एआई की पूरी क्षमता का उपयोग सुनिश्चित करना भी प्रमुख बिंदु हैं।

    ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत के अनुसार, घोषणापत्र एआई संसाधनों की वहनीयता और पहुँच बढ़ाने के महत्व को स्वीकार करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी देश अपने नागरिकों के लिए एआई का विकास, अपनाना और उपयोग कर सकें। इसके अतिरिक्त, सुरक्षित, भरोसेमंद और मजबूत एआई को बढ़ावा देना समाज और अर्थव्यवस्था के लिए विश्वास निर्माण की बुनियाद के रूप में देखा गया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह घोषणापत्र केवल तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक नीति और नैतिकता के स्तर पर भी एआई के संतुलित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देता है। नई दिल्ली घोषणापत्र 91 देशों और संगठनों के हस्ताक्षर से यह संदेश देता है कि एआई अब केवल तकनीकी क्षेत्र की बात नहीं रही, बल्कि यह वैश्विक विकास, सामाजिक कल्याण और समान अवसरों की दिशा में एक साझा प्रयास बन गया है।

  • नई दिल्ली डिक्लेरेशन: 88 देशों ने एआई के भविष्य के लिए किए हस्ताक्षर, भारत की ऐतिहासिक जीत

    नई दिल्ली डिक्लेरेशन: 88 देशों ने एआई के भविष्य के लिए किए हस्ताक्षर, भारत की ऐतिहासिक जीत


    नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में आयोजित पांच दिवसीय इंडिया एआई इम्पैक्ट शुक्रवार को एक ऐतिहासिक मोड़ पर संपन्न हुआ, जब 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन एआई इम्पैक्ट’ पर हस्ताक्षर किए। इस घोषणापत्र ने न केवल एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के भविष्य को दिशा देने का काम किया, बल्कि भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव को भी वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया।

    भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
    भारत के लिए यह समझौता एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। पिछले साल पेरिस में हुए ‘एआई एक्शन समिट’ में अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने यूरोपीय नियामक दृष्टिकोण का हवाला देते हुए घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। लेकिन नई दिल्ली में भारत ने इन सभी देशों को एक मंच पर लाने में सफलता हासिल की। भारत का मुख्य उद्देश्य एआई का “लोकतंत्रीकरण” करना है, ताकि यह तकनीक केवल कुछ बड़ी कंपनियों या व्यक्तियों के हाथों में न रहे, बल्कि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

    नई दिल्ली डिक्लेरेशन के मुख्य पहलू
    इस घोषणापत्र के माध्यम से हस्ताक्षर करने वाले देशों ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर सहमति जताई है, जो एआई के प्रभाव और उपयोग को वैश्विक स्तर पर बेहतर और सुरक्षित बनाएंगे:

    डेमोक्रेटिक डिफ्यूजन चार्टर:
    इस चार्टर के तहत एआई के बुनियादी संसाधनों तक सभी की पहुंच को बढ़ावा दिया जाएगा, साथ ही स्थानीय नवाचारों को भी समर्थन मिलेगा।

    ग्लोबल एआई इम्पैक्ट कॉमन्स:
    यह एक व्यावहारिक मंच होगा जो एआई के सफल उपयोगों को विभिन्न क्षेत्रों में अपनाने और पुनरावृत्त करने में मदद करेगा।

    ट्रस्टेड एआई कॉमन्स:
    एआई प्रणालियों की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी संसाधनों, बेंचमार्क और सर्वोत्तम प्रथाओं का साझा संग्रह बनाया जाएगा।

    इंटरनेशनल नेटवर्क ऑफ एआई फॉर साइंस इंस्टीट्यूशन्स:
    वैज्ञानिक अनुसंधान में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर के संस्थानों को जोड़ा जाएगा।

    समाज के उत्थान के लिए एआई का उपयोग
    इस घोषणापत्र में इस बात को स्वीकार किया गया है कि एआई समाज के सभी वर्गों के उत्थान की क्षमता रखता है। इसके लिए सोशल एम्पॉवरमेंट प्लेटफॉर्म बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे विभिन्न सामाजिक वर्गों को एआई के लाभ मिल सकें। साथ ही, एआई के कारण बदलते रोजगार स्वरूप को ध्यान में रखते हुए, ‘रीस्किलिंग’ और कार्यबल विकास के लिए स्वैच्छिक मार्गदर्शक सिद्धांतों पर भी सहमति बनी है।

    आगे की चुनौतियाँ और कार्यान्वयन
    हालांकि 88 देशों ने इस डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इन वादों को वास्तविकता में बदलना होगी, क्योंकि ये सभी प्रतिबद्धताएं स्वैच्छिक प्रकृति की हैं। कुछ सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) ने शुरुआत में इस घोषणापत्र के कुछ अंशों पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि वे संयुक्त राष्ट्र के (UN) चार्टर से मिलते-जुलते थे। हालांकि, भारत को एक महत्वपूर्ण व्यापारिक सहयोगी मानते हुए, यूरोपीय संघ अंततः इस पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हो गया।