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  • गेहूं खरीदी में नया रिकॉर्ड संभव एमपी सरकार ने केंद्र से बढ़ाया कोटा मांग

    गेहूं खरीदी में नया रिकॉर्ड संभव एमपी सरकार ने केंद्र से बढ़ाया कोटा मांग


    भोपाल । भोपाल में मध्य प्रदेश सरकार ने गेहूं खरीदी को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार से निर्धारित लक्ष्य बढ़ाने की मांग की है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में इस बार गेहूं का उत्पादन काफी अच्छा हुआ है और मौजूदा लक्ष्य से अधिक खरीदी होने की पूरी संभावना है। ऐसे में किसानों को पूरा लाभ दिलाने के लिए केंद्र से कोटा बढ़ाने को लेकर लगातार संवाद किया जा रहा है।

    रबी विपणन वर्ष 2026 27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य तय किया गया है। लेकिन प्रदेश में बंपर पैदावार और किसानों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए यह लक्ष्य कम पड़ता नजर आ रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि यदि लक्ष्य नहीं बढ़ाया गया तो कई किसानों को समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने का अवसर नहीं मिल पाएगा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और खरीदी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा है। पहले छोटे किसानों से गेहूं खरीदा जा रहा है इसके बाद मध्यम और अंत में बड़े किसानों की बारी आएगी ताकि सभी वर्गों को समान अवसर मिल सके।

    इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए किसानों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। करीब 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 लाख अधिक है। अब तक 2 लाख 21 हजार 455 किसानों से 95 लाख 17 हजार 550 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इसमें से 75 लाख 57 हजार 580 क्विंटल गेहूं का परिवहन भी किया जा चुका है जिससे भंडारण व्यवस्था पर दबाव कम हुआ है।

    सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने वाले किसानों को तेजी से भुगतान भी किया जा रहा है। अब तक 1 लाख 6 हजार 55 किसानों को 1091 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उनके खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। यह पहल किसानों के विश्वास को मजबूत करने और खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर भी इस प्रक्रिया पर पड़ा है। पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थितियों के कारण शुरुआती दौर में बारदानों की उपलब्धता चुनौती बनी रही लेकिन सरकार ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था कर स्थिति को संभाल लिया। जूट के नए बारदानों के साथ साथ पीपी बैग और पुनः उपयोग योग्य बारदानों का उपयोग किया गया जिससे खरीदी प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।

    वर्तमान में किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य के साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है। यह दर किसानों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में मददगार साबित हो रही है।

    प्रदेश सरकार का यह कदम न केवल किसानों को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण है बल्कि यह भी दर्शाता है कि बेहतर उत्पादन के साथ नीति स्तर पर त्वरित निर्णय कितने जरूरी होते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार राज्य की इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और क्या वास्तव में गेहूं खरीदी का लक्ष्य बढ़ाया जाता है

  • भारत ने रक्षा निर्यात में बनाया नया रिकॉर्ड, 80 से अधिक देश खरीद रहे हथियार

    भारत ने रक्षा निर्यात में बनाया नया रिकॉर्ड, 80 से अधिक देश खरीद रहे हथियार

    नई दिल्ली। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। रक्षा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में देश का रक्षा निर्यात अब तक के उच्चतम स्तर 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के मुकाबले 62 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है, जब निर्यात 23,622 करोड़ रुपये था।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा निर्यातकों और अन्य सभी सहयोगियों की सराहना की। उन्होंने कहा, “यह बड़ी छलांग भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर वैश्विक भरोसे को दर्शाती है। देश रक्षा निर्यात में सफलता की एक शानदार कहानी लिख रहा है।”

    निजी और सार्वजनिक क्षेत्र का योगदान

    रक्षा निर्यात में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSU) का योगदान 54.84 प्रतिशत और निजी उद्योग का योगदान 45.16 प्रतिशत रहा। रक्षा मंत्री राजनाथ ने इसे सहयोगात्मक और आत्मनिर्भर रक्षा तंत्र की ताकत बताया।

    वैश्विक विस्तार
    रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारत वित्त वर्ष 2025-26 तक 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। साथ ही, निर्यातकों की संख्या भी बढ़कर 145 हो गई है, जो पिछले वर्ष के 128 से 13.3 प्रतिशत अधिक है। मंत्रालय के अनुसार यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को विश्व के शीर्ष रक्षा निर्यातकों में शामिल करने के लक्ष्य के अनुरूप है।

  • ट्रंप के टैरिफ वॉर के बीच चीन का नया रिकॉर्ड, ट्रेड सरल्प्स 1 ट्रिलियन डॉलर के पार

    ट्रंप के टैरिफ वॉर के बीच चीन का नया रिकॉर्ड, ट्रेड सरल्प्स 1 ट्रिलियन डॉलर के पार


    हांगकांग।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के टैरिफ को लेकर बनाए गए दबाव और अमेरिका-चीन (America-China) के बीच छिड़े ट्रेड वॉर के बाद भी चीन ने पहली बार 1 हजार अरब डॉलर के सरप्लस के आंकड़े को पार कर लिया है। सोमवार को चीन द्वारा जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। जानकारी के मुताबिक अक्टूबर माह में आई अप्रत्याशित गिरावट के बाद चीन के निर्यात में नवंबर के दौरान वृद्धि दर्ज की गई जिससे 2025 में उसका व्यापार अधिशेष पहली बार 1,000 अरब डॉलर से अधिक हो गया।

    चीन के सीमा-शुल्क आंकड़ों के मुताबिक नवंबर महीने में डॉलर के संदर्भ में चीन का कुल निर्यात सालाना आधार पर 5.9 प्रतिशत और आयात करीब दो प्रतिशत बढ़ गया। हालांकि अमेरिका को चीन के निर्यात में एक साल पहले की तुलना में करीब 29 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह लगातार आठवें महीने दहाई अंकों में गिरावट है। वहीं चीन के दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका सहित अन्य गंतव्यों को निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई।

    अमेरिकी बहुराष्ट्रीय वित्तीय सेवा फर्म मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि 2030 तक वैश्विक निर्यात में चीन की हिस्सेदारी बढ़कर 16.5 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी जो फिलहाल करीब 15 प्रतिशत है। यह वृद्धि उन्नत विनिर्माण और इलेक्ट्रिक वाहन, रोबोटिक्स और बैटरी जैसे उच्च-विकासशील क्षेत्रों में निर्यात की बढ़त की वजह से होगी।

    इससे पहले चीन का निर्यात अक्टूबर में 1 प्रतिशत से अधिक गिर गया था। हालांकि नवंबर में इसका प्रदर्शन बेहतर रहा और दुनिया भर में निर्यात 330.3 अरब डॉलर रहा जो अर्थशास्त्रियों के अनुमान से काफी अधिक है। वहीं चीन का आयात नवंबर में कुल 218.6 अरब डॉलर रहा। फैक्टसेट द्वारा जारी आधिकारिक व्यापार आंकड़ों के मुताबिक 2025 के पहले 11 महीनों के लिए लगभग 1080 अरब डॉलर का ट्रेड सरल्प्स एक रिकॉर्ड उच्च स्तर है जो 2024 की समान अवधि के 992 अरब डॉलर सरप्लस से अधिक है। आईएनजी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री लिन सोंग ने रिपोर्ट में लिखा, ‘‘संभवत: नवंबर के निर्यात में शुल्क कटौती का असर पूरी तरह नहीं दिखा है। इसका असर आने वाले महीनों में दिखाई देगा।’’

    गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अक्टूबर के अंत में दक्षिण कोरिया में हुई बैठक में दोनों देशों के बीच एक साल के लिए व्यापार-युद्ध को रोकने पर सहमति बनी थी। अमेरिका ने चीन पर अपने शुल्क कम कर दिए हैं और चीन ने दुर्लभ खनिजों से संबंधित अपने निर्यात नियंत्रणों को समाप्त करने का वादा किया है। एक आधिकारिक सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले महीने चीन की उत्पादन गतिविधि लगातार आठवें महीने घटी थीं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह निर्धारित करना अब भी जल्दबाजी होगी कि अमेरिका-चीन व्यापार समझौते के बाद बाहरी मांग में वास्तविक उछाल आया है या नहीं।