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  • हिजाब पहनकर कार्यक्रम में पहुंचीं न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल

    हिजाब पहनकर कार्यक्रम में पहुंचीं न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल

    न्यूयॉर्क। न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल के एक इस्लामिक कल्चरल सेंटर के कार्यक्रम में हिजाब पहनकर शामिल होने के बाद अमेरिका में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। दक्षिणपंथी नेताओं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने गवर्नर के इस कदम की आलोचना करते हुए उन पर मुस्लिम समुदाय के सामने झुकने और ‘थर्ड वर्ल्ड’ के आगे समर्पण करने जैसे आरोप लगाए हैं।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों की 25वीं बरसी नजदीक है। आलोचकों ने इसी संदर्भ को लेकर होचुल के हिजाब पहनने पर सवाल उठाए हैं।

    इस्लामिक कल्चरल सेंटर के कार्यक्रम में पहुंची थीं होचुल

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैथी होचुल हाल ही में न्यूयॉर्क के इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस दौरान वह हिजाब पहने नजर आईं। कार्यक्रम में उन्होंने केंद्र के पदाधिकारियों और इमाम का आभार जताया।

    सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में होचुल एक व्यक्ति को धन्यवाद देते हुए उन्हें परिवार का हिस्सा महसूस कराने की बात कहती दिखाई देती हैं।

    इसके बाद दक्षिणपंथी सोशल मीडिया अकाउंट्स और कुछ राजनीतिक हस्तियों ने उनके पहनावे को लेकर सवाल खड़े किए।

    ‘न्यूयॉर्क भूल गया’ लिखकर शेयर की 9/11 की तस्वीर

    राइट-विंग इन्फ्लुएंसर मैट वैन स्वोल ने होचुल की आलोचना करते हुए 9/11 हमले की तस्वीर के साथ पोस्ट किया और लिखा, ‘न्यूयॉर्क भूल गया।’

    कंजर्वेटिव कमेंटेटर ग्राहम एलन ने भी वीडियो शेयर करते हुए 9/11 की 25वीं बरसी का जिक्र किया और गवर्नर की आलोचना की।

    वहीं फॉक्स न्यूज की होस्ट राइली गेन्स ने सवाल उठाया कि खुद को फेमिनिस्ट बताने वाली महिला द्वारा मुस्लिम पुरुषों को नाराज न करने के लिए हिजाब पहनना कथित तौर पर किस तरह की विडंबना है।

    न्यूयॉर्क यंग रिपब्लिकन क्लब ने भी साधा निशाना

    न्यूयॉर्क यंग रिपब्लिकन क्लब ने भी गवर्नर पर निशाना साधा। संगठन ने आरोप लगाया कि होचुल न्यूयॉर्क के इस्लामिक कल्चरल सेंटर में ‘थर्ड वर्ल्ड’ के आगे झुक रही हैं।

    संगठन ने यह दावा भी किया कि जिस मस्जिद में गवर्नर ने भाषण दिया, उसे लगभग पूरी तरह कुवैत से फंडिंग मिलती है। संगठन ने विदेशी देशों के अमेरिकी मामलों में कथित हस्तक्षेप को लेकर भी सवाल उठाए।

    हालांकि, ये आरोप संबंधित राजनीतिक समूहों और आलोचकों की ओर से लगाए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

    पहले भी हिजाब को लेकर विवाद में घिर चुकी हैं होचुल

    कैथी होचुल को हिजाब पहनने को लेकर पहली बार आलोचना का सामना नहीं करना पड़ा है। हफपोस्ट के मुताबिक, पिछले साल भी एक मुस्लिम पुलिस अधिकारी के अंतिम संस्कार में हेडस्कार्फ पहनने पर उनकी आलोचना हुई थी।

    उस समय सीनेटर टेड क्रूज ने उनके पहनावे का मजाक उड़ाया था। इसके जवाब में होचुल ने कहा था कि वह दुखी परिवार की आस्था का सम्मान कर रही थीं और ऐसा करना किसी नेता तथा सभ्य व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

    कांग्रेस तक पहुंचा विवाद

    गवर्नर के ताजा कार्यक्रम को लेकर शुरू हुई बहस अमेरिकी कांग्रेस तक भी पहुंच गई। टेक्सास के रिपब्लिकन सांसद ब्रैंडन गिल ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और होचुल के रुख पर सवाल उठाया।

    इसके अलावा पूर्व रियलिटी टीवी स्टार स्पेंसर प्रैट ने भी सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक अंदाज में गवर्नर की आलोचना की।

    गवर्नर कार्यालय ने तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी

    होचुल के खिलाफ सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चल रही आलोचनाओं को लेकर हफपोस्ट ने उनके कार्यालय से प्रतिक्रिया मांगी थी, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक तत्काल कोई जवाब नहीं मिला।

    पूरे विवाद का केंद्र यह सवाल है कि किसी धार्मिक कार्यक्रम में मेजबान समुदाय की धार्मिक संवेदनाओं का सम्मान करने के लिए किसी निर्वाचित नेता द्वारा पारंपरिक पोशाक पहनना सांस्कृतिक सम्मान है या राजनीतिक संदेश। समर्थक इसे धार्मिक सम्मान और सामुदायिक संवाद का हिस्सा मान सकते हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक तुष्टिकरण के तौर पर देख रहे हैं।

  • रक्षा बंधन से दिया एकता और भाईचारे का संदेश! न्यूयॉर्क में धर्मगुरु बोले- नफरत नहीं, इंसानियत जरूरी

    रक्षा बंधन से दिया एकता और भाईचारे का संदेश! न्यूयॉर्क में धर्मगुरु बोले- नफरत नहीं, इंसानियत जरूरी


    नई दिल्ली। दुनियाभर में बढ़ती नफरत पूर्वाग्रह हिंसा और सामाजिक विभाजन के बीच न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित यूनिवर्सल वननेस कार्यक्रम ने इंसानियत और आपसी एकता का मजबूत संदेश दिया। कार्यक्रम में यहूदी ईसाई और मुस्लिम धर्मगुरुओं सहित विभिन्न देशों के धार्मिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और लोगों से धार्मिक तथा सांस्कृतिक सीमाओं से ऊपर उठकर संवाद करुणा और सम्मान को बढ़ावा देने की अपील की। इस आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और कई देशों के धार्मिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि अलग-अलग आस्थाओं के बावजूद मानवता सभी को जोड़ने वाली सबसे बड़ी कड़ी है।

    वर्ल्ड काउंसिल ऑफ रिलीजियस लीडर्स के संस्थापक महासचिव बाबा जैन ने 30 देशों के प्रमुख धर्मों से जुड़े 200 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद तैयार किया गया कॉल टू एक्शन पेश किया। उन्होंने कहा कि धर्म के भीतर लोगों को जोड़ने और उपचार तथा मेल-मिलाप की ताकत मौजूद है लेकिन इतिहास में कई बार धर्म का इस्तेमाल लोगों को बांटने और हिंसा को उचित ठहराने के लिए भी किया गया है। उन्होंने धार्मिक नेताओं से अपने समुदायों के शब्दों शिक्षाओं संस्थाओं और परंपराओं की समीक्षा करने का आह्वान किया ताकि किसी भी प्रकार की नफरत या हिंसा को धार्मिक आधार न मिल सके।

    बाबा जैन ने कहा कि धार्मिक समुदायों को नफरत अपमान अमानवीय व्यवहार और हिंसा को सही ठहराने के लिए धर्म के इस्तेमाल को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि गहरी धार्मिक आस्था और दूसरे विश्वासों के प्रति सम्मान एक साथ कायम रह सकते हैं। उन्होंने धार्मिक नेताओं से संकट आने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही अलग समुदायों के बीच मजबूत रिश्ते बनाने की अपील की। युवाओं को भी धार्मिक और सांस्कृतिक सीमाओं से बाहर एक दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया गया। उनका मानना था कि जब लोग एक दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानने लगते हैं तो नफरत के लिए जगह कम होती जाती है।

    इमाम शरीफ ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि इसमें शामिल लोग यहां से लौटने के बाद अपने व्यवहार और समाज में क्या बदलाव लाते हैं। उन्होंने एकता को एकरूपता से अलग बताते हुए कहा कि लोगों को एक दूसरे से जुड़े रहने के लिए एक जैसा बनने की जरूरत नहीं है। अलग-अलग धार्मिक विश्वासों के बावजूद सम्मान और संवाद कायम रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि तकनीकी प्रगति के बावजूद इंसान के भीतर मौजूद नफरत पूर्वाग्रह अहंकार और समूहों में बंटने की प्रवृत्ति समाप्त नहीं हुई है।

    उन्होंने कहा कि आज नफरत सीमाओं के पार और हमारी स्क्रीन के माध्यम से पहले से कहीं ज्यादा तेजी से फैल रही है। ऐसे समय में तकनीक के बढ़ते प्रभाव के साथ इंसानियत के सामने मौजूद चुनौतियों को समझना जरूरी है। रेवरेंड थॉर्न ने भी लोगों से डर और नफरत के बजाय एक दूसरे को सुनने समझने और साथ आने का रास्ता चुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि पद धर्म राजनीति और देशों की सीमाओं से पहले सभी लोग इंसान हैं।

    रब्बी ब्लुमेंथल ने यहूदी शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हर इंसान में ईश्वरीय अंश मौजूद है और प्रत्येक व्यक्ति सम्मान तथा प्रेम का हकदार है। उन्होंने समाज में बढ़ते अकेलेपन को भी कई समस्याओं की एक बड़ी वजह बताया और लोगों से जुड़ाव प्रेम तथा सम्मान के रिश्ते मजबूत करने की अपील की।

    कार्यक्रम में रक्षा बंधन और राखी बांधने की परंपरा को विशेष रूप से देखभाल सुरक्षा और आपसी जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। लोगों को संदेश दिया गया कि भाई बहन के रिश्ते तक सीमित इस भावना को पड़ोसियों अजनबियों और अलग-अलग धार्मिक समुदायों तक भी बढ़ाया जा सकता है। इस तरह राखी को एक ऐसे मानवीय बंधन के रूप में पेश किया गया जो सुरक्षा और जिम्मेदारी की भावना के जरिए समाज में विश्वास और एकता को मजबूत कर सकता है।

  • न्यूयॉर्क में आज मोहन भागवत देंगे संबोधन, भारत से अमेरिका तक सियासत तेज, अखिलेश ने पूछे RSS से 21 सवाल

    न्यूयॉर्क में आज मोहन भागवत देंगे संबोधन, भारत से अमेरिका तक सियासत तेज, अखिलेश ने पूछे RSS से 21 सवाल


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत अमेरिका दौरे पर हैं और शुक्रवार, 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस ‘ग्लोबल आउटरीच प्रोग्राम’ में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम की थीम ‘वैश्विक सौहार्द और सार्वभौमिक एकता का उत्सव’ रखी गई है।

    भागवत के संबोधन से पहले ही इस कार्यक्रम को लेकर अमेरिका से लेकर भारत तक राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि भागवत अपने संबोधन में किन मुद्दों पर बात करेंगे और अमेरिका में संघ की भूमिका को किस तरह पेश करेंगे।

    संतों और प्रमुख हस्तियों ने किया समर्थन

    भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम को जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी समेत कई हस्तियों का समर्थन मिला है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उनके अमेरिकी दौरे और कार्यक्रम को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

    X अकाउंट सस्पेंड होने पर अखिलेश का तंज

    कार्यक्रम के आयोजक ‘अहेड फोरम’ का X अकाउंट कुछ समय के लिए सस्पेंड होने के बाद अखिलेश यादव ने इस पर तंज किया। उन्होंने कहा, ‘विदेशों में जब Unregistered-Underground लोग उभरकर आएंगे तो उनके एक्स अकाउंट तो सस्पेंड किए ही जाएंगे।’

    इसके बाद अखिलेश ने RSS से 21 सवाल पूछे। उन्होंने स्वदेशी का नारा देने वाले संगठन के प्रमुख के विदेश दौरे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भागवत वहां सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने गए हैं या फिर भविष्य में राजनीतिक प्रश्रय तलाशने की कोशिश की जा रही है।

    हालांकि, कुछ समय बाद ‘अहेड फोरम’ का X अकाउंट बहाल हो गया। संस्था ने दावा किया कि विरोधियों के बॉट अटैक के कारण एल्गोरिदम प्रभावित हुआ था और इसी वजह से हैंडल अस्थायी रूप से ब्लॉक हो गया था।

    कर्नाटक में RSS मार्च पर दो सरकारी शिक्षक सस्पेंड

    इधर कर्नाटक में RSS के मार्च में शामिल होने को लेकर भी विवाद सामने आया है। राज्य में दो सरकारी शिक्षकों अन्ना साहेब देशमुख और गुरुराज जोशी को मार्च में शामिल होने पर सस्पेंड किया गया है।

    कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि किसी गैर-रजिस्टर्ड संगठन के कार्यक्रम में सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी नियमों के खिलाफ है। वहीं विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सी. नारायणस्वामी ने सरकार की कार्रवाई को बदले की भावना से प्रेरित बताया। उनका कहना था कि RSS कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है और देश का कोई भी देशभक्त किसी देशभक्त संगठन से जुड़ सकता है।

    न्यूयॉर्क के मेयर ने भी जताया विरोध

    मोहन भागवत के कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क में भी विरोध की आवाज उठी है। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते।

    हालांकि, प्रदर्शन या कार्यक्रम रद्द किए जाने से जुड़े सवाल पर ममदानी ने कहा कि यह एक निजी कार्यक्रम है। इसलिए इसे रद्द करने का अधिकार या क्षेत्राधिकार संभवतः सिटी अथॉरिटी के पास नहीं है।

    अब निगाहें भागवत के संबोधन पर

    एक तरफ कार्यक्रम को वैश्विक सौहार्द और सार्वभौमिक एकता से जोड़कर पेश किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर भारत और अमेरिका दोनों जगह राजनीतिक बहस शुरू हो चुकी है। ऐसे में अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन से मोहन भागवत अपने संबोधन में संघ, भारत और वैश्विक समाज को लेकर क्या संदेश देते हैं।

  • न्यूयॉर्क में AC पर 'बैन' का खतरा मंडराया, मेयर Mamdani ने दी चेतावनी, मचा हड़कंप

    न्यूयॉर्क में AC पर 'बैन' का खतरा मंडराया, मेयर Mamdani ने दी चेतावनी, मचा हड़कंप


    नई दिल्‍ली । New York इस समय इतिहास की सबसे भीषण गर्मी से जूझ रहा है. तापमान 100 डिग्री और हीट इंडेक्स 112 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है. इस बीच, शहर के नए मेयर ज़ोहरान मम्दानी (Zohran Mamdani) ने न्यू यॉर्कर्स के लिए एक बेहद जरूरी और कड़ा संदेश जारी किया है. यूरोप में हाल ही में आए AC नियमों के बाद अब न्यू यॉर्क का पावर ग्रिड भी खतरे में है. मेयर ने साफ कहा है कि अगर ग्रिड को बचाना है और लोगों की जान सुरक्षित रखनी है, तो AC चलाने के तरीकों में तुरंत बदलाव करना होगा.

    Europe का AC नियम और New York का संकट
    यूरोपियन कमीशन ने हाल ही में एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत AC इंस्टॉल करने वालों को ग्राहकों को एनर्जी एफिशिएंसी की पूरी जानकारी देनी होगी. फ्रांस और स्पेन जैसे देशों में रिकॉर्ड गर्मी के कारण AC की बिक्री अचानक बहुत बढ़ गई है. अब ठीक वैसा ही संकट न्यू यॉर्क के सामने खड़ा हो गया है. न्यू यॉर्क का पावर ग्रिड इस समय शहर को ठंडा रखने के लिए अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहा है.

    Mayor Mamdani का ’78 डिग्री रूल’
    मेयर ज़ोहरान मम्दानी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए लोगों से अपील की है. उन्होंने लिखा कि न्यू यॉर्क में बाहर बहुत गर्मी है और हमारा पावर ग्रिड ओवरटाइम काम कर रहा है. मेयर ने सभी नागरिकों से अपने AC को 78 डिग्री पर सेट करने की अपील की है. इसके साथ ही उन्होंने इस्तेमाल में न आने वाली लाइटों और इलेक्ट्रॉनिक्स को बंद करने और प्लग निकालने के लिए कहा है. मेयर का मानना है कि ग्रिड स्थिर रहेगा तो AC चलता रहेगा और लोगों की जान बचाई जा सकेगी.

    सरकार खुद कर रही है नियमों का पालन
    इस संकट से निपटने के लिए सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि खुद न्यू यॉर्क प्रशासन भी कड़े कदम उठा रहा है. मेयर ने बताया कि सभी सरकारी इमारतों में भी 78 डिग्री का नियम लागू कर दिया गया है. पीक ऑवर्स के दौरान सरकारी दफ्तरों की लाइटें डिम या पूरी तरह बंद की जा रही हैं. गैर-जरूरी उपकरणों को पावर डाउन किया जा रहा है. प्रशासन ने न्यू यॉर्क की प्राइवेट कंपनियों से भी अपील की है कि वे इस संकट में शहर का साथ दें और बिजली की खपत कम करें.

    112 डिग्री का टॉर्चर और हीट इमरजेंसी
    नेशनल वेदर सर्विस ने न्यू यॉर्क सिटी के लिए ‘एक्सट्रीम हीट वॉर्निंग’ जारी की है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह पिछले एक दशक की सबसे खतरनाक हीटवेव हो सकती है. गर्मी का अहसास (Heat Index) 112 डिग्री तक जा सकता है. इसके लिए शहर में ‘हीट इमरजेंसी प्लान’ एक्टिव कर दिया गया है. प्रशासन ने उन लोगों के लिए कूलिंग सेंटर्स खोले हैं, जिनके घरों में AC की सुविधा नहीं है. बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को घरों के अंदर ही रहने की सलाह दी गई है.

    मेयर की कार्यशैली पर खड़े हुए सवाल
    एक तरफ जहां मेयर मम्दानी शहर को गर्मी से बचाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ न्यू यॉर्क का बिजनेस माहौल गरमा गया है. दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल जेफ बेजोस (Jeff Bezos) ने न्यू यॉर्क के स्कूल सिस्टम पर सवाल उठाए हैं, जिसके बाद मेयर के साथ उनकी बहस छिड़ गई है. शार्क टैंक के केविन ओ’लेरी ने भी बेजोस का समर्थन करते हुए न्यू यॉर्क को ‘कम्पलीट डिजास्टर’ करार दिया है. ब्लैकरॉक के लैरी फिंक ने भी चेतावनी दी है कि भारी टैक्स और खराब माहौल के कारण अमीर लोग न्यू यॉर्क छोड़ सकते हैं, जिससे शहर को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा.

  • अमेरिका–कनाडा हथियार तस्करी रैकेट का भंडाफोड़: 89 हथियारों के साथ 3 गिरफ्तार, पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल

    अमेरिका–कनाडा हथियार तस्करी रैकेट का भंडाफोड़: 89 हथियारों के साथ 3 गिरफ्तार, पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल



    नई दिल्ली। अमेरिका में सुरक्षा एजेंसियों ने हथियार तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। न्यूयॉर्क स्टेट पुलिस ने 89 हथियारों की अवैध खेप के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जो इन्हें अमेरिका से कनाडा भेजने की फिराक में थे। पकड़े गए आरोपियों में एक पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल है।

    जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई स्टेट रूट-90 पर उस समय हुई जब पुलिस ने एक संदिग्ध वाहन को रोका। शुरुआती पूछताछ में जवाब असंगत पाए जाने पर जब तलाशी ली गई तो कार के भीतर भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए। कुछ हथियार पीछे की सीट पर खुले तौर पर रखे हुए थे।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 22 वर्षीय मलिक ब्रॉमफील्ड (कनाडा नागरिक), 25 वर्षीय फैजान अली (पाकिस्तानी नागरिक) और 22 वर्षीय कमाल सलमान (कनाडा-अमेरिका-जॉर्डन की नागरिकता) के रूप में हुई है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार, फैजान अली के पास एक एक्सपायर्ड पाकिस्तानी नेशनल ड्राइविंग परमिट भी मिला है, जो किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी था। बरामद हथियारों में कम से कम 17 चोरी की बंदूकें भी शामिल हैं।

    अधिकारियों का कहना है कि आरोपी 80 से अधिक हथियार कनाडा पहुंचाने की योजना में थे। इस पूरे ऑपरेशन में न्यूयॉर्क स्टेट पुलिस, एफबीआई और एटीएफ की संयुक्त टीम शामिल रही।

    यूएस अटॉर्नी ऑफिस ने बताया कि सभी आरोपियों पर अवैध हथियार तस्करी, बिना लाइसेंस हथियार कारोबार और चोरी के हथियार रखने सहित गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को 5 से 15 साल तक की सजा हो सकती है, जबकि अंतिम निर्णय अदालत करेगी।

    अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क को कनाडा और अमेरिका दोनों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। 

  • कुरान पर शपथ लेकर आज न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बनेंगे भारतीय मूल के ममदानी… रचेंगे इतिहास

    कुरान पर शपथ लेकर आज न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बनेंगे भारतीय मूल के ममदानी… रचेंगे इतिहास


    न्यूयॉर्क।
    भारतीय मूल (Indian origin) के जोहरान ममदानी (Zohran Mamdani) गुरुवार को इतिहास रचने जा रहे हैं। आधी रात को शपथ लेते ही वह अमेरिका के सबसे बड़े शहर (Largest city America), न्यूयॉर्क (New York) के पहले मुस्लिम मेयर (First Muslim mayor) बन जाएंगे। इस दिन को खास बनाने के लिए ममदानी एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहे हैं। वे मेयर पद के लिए कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेने जा रहे हैं। यह पहली बार होगा जब न्यूयॉर्क शहर का कोई मेयर शपथ लेने के लिए इस्लाम के पवित्र ग्रंथ का इस्तेमाल करेगा।

    34 साल के डेमोक्रेट जोहरान ममदानी सिटी हॉल के नीचे एक लंबे समय से बंद सबवे स्टेशन में मेयर की शपथ लेने जा रहे हैं। शपथ लेते ही वह इस पद को संभालने वाले पहले मुस्लिम, पहले दक्षिण एशियाई और अफ्रीका में जन्मे पहले व्यक्ति बन जाएंगे।

    जानकारी के मुताबिक ममदानी की पत्नी, रमा दुवाजी ने इस पवित्र ग्रंथ को चुनने में उनकी मदद की। इसे अमेरिका के सबसे अधिक आबादी वाले शहर के मुस्लिम निवासियों को एक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। जहां एक तरफ उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में एफोर्डिबिलिटी को मुद्दा बनाया था, वहीं वे अपने मुस्लिम धर्म के बारे में भी खुलकर बात करते थे। वह अक्सर मस्जिदों में दिखाई देते थे और उन्होंने इससे अपने समर्थकों का बेस तैयार किया। जोहरान ममदानी को वोट देने वालों में कई पहली बार वोट देने वाले दक्षिण एशियाई और मुस्लिम मतदाता थे।


    तीन कुरान का इस्तेमाल करेंगे ममदानी

    ममदानी सबवे समारोह के दौरान दो कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेंगे। इनमें से एक उनके दादा का कुरान है। वहीं वे एक दूसरे पॉकेट साइज के संस्करण पर भी हाथ रखेंगे, जो 18वीं या 19वीं सदी का है। यह न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी के शॉम्बर्ग सेंटर फॉर रिसर्च इन ब्लैक कल्चर के कलेक्शन का हिस्सा है। लाइब्रेरी की क्यूरेटर हिबा आबिद ने बताया है कि कुरान की यह कॉपी शहर के मुसलमानों की विविधता और पहुंच का प्रतीक है। वहीं साल के पहले दिन सिटी हॉल में होने वाल शपथ ग्रहण समारोह के लिए, ममदानी अपने दादा और दादी दोनों के कुरान का इस्तेमाल करेंगे।


    रचा था इतिहास

    इससे पहले बीते नवंबर में भारतीय मूल के जोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर चुनाव में निर्णायक और ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। उन्होंने अपने विजय भाषण के दौरान पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के शब्दों को जिक्र करते हुए कहा था कि शहर नए युग की ओर बढ़ रहा है। ममदानी प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्माता मीरा नायर और कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर महमूद ममदानी के पुत्र हैं। ममदानी का जन्म युगांडा में हुआ था। इस जीत के साथ ही वह अमेरिका के सबसे बड़े शहर में मेयर बनने वाले पहले दक्षिण एशियाई और मुस्लिम व्यक्ति बन गए हैं।