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  • भारत की विकास यात्रा मजबूत लेकिन चुनौतियां बरकरार, निर्मला सीतारमण बोलीं- सतत प्रगति के लिए सुधार, नवाचार और तैयारी जरूरी

    भारत की विकास यात्रा मजबूत लेकिन चुनौतियां बरकरार, निर्मला सीतारमण बोलीं- सतत प्रगति के लिए सुधार, नवाचार और तैयारी जरूरी

    नई दिल्ली । भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन दीर्घकालिक और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता बनी हुई है। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि देश ने आर्थिक मोर्चे पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, फिर भी विकास की इस गति को स्थायी बनाए रखने के लिए आत्मसंतोष की बजाय निरंतर सुधार, नवाचार और संस्थागत मजबूती पर ध्यान देना होगा।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी बड़ी और जटिल अर्थव्यवस्था के लिए केवल विकास दर हासिल करना पर्याप्त नहीं होता। वास्तविक सफलता तब मानी जाती है जब आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे और विकास समावेशी तथा टिकाऊ स्वरूप ग्रहण करे। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थानों, प्रभावी नीतियों और सक्षम प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बिना दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बनाए रखना कठिन हो सकता है।

    सीतारमण ने कहा कि भारत वर्तमान में कई आर्थिक संकेतकों पर बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन यह स्थिति स्थायी रूप से सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती। उनके अनुसार समय-समय पर नीतियों का मूल्यांकन करना और उन क्षेत्रों की पहचान करना आवश्यक है जहां सुधार की गुंजाइश अभी भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि बदलती घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत ढांचे को लगातार अद्यतन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

    वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विकास को गति देने के लिए देश की उत्पादन क्षमता, कार्यकुशलता और प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, लेकिन कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं जिन्हें अतिरिक्त नीति समर्थन और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है। विशेष रूप से जटिल विनिर्माण, मध्यवर्ती उत्पादों और विशिष्ट सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में नई रणनीतियों की जरूरत महसूस की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि लंबे समय से जिन चुनौतियों पर चर्चा होती रही है, अब उनके व्यावहारिक समाधान तलाशने का समय है। इसके लिए बेहतर क्रियान्वयन, संस्थागत क्षमता निर्माण और आवश्यकतानुसार नई नीतियों का निर्माण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है ताकि भविष्य की आर्थिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

    वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए सीतारमण ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में भारत को भी अपनी नीतियों को लचीला और परिस्थितियों के अनुरूप बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया स्वतः संचालित नहीं होती, बल्कि इसके लिए निरंतर निगरानी, सुधार और दूरदर्शी योजना की आवश्यकता होती है।

    कोविड-19 महामारी के प्रभावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महामारी से जुड़े कुछ असर अब भी आर्थिक योजना और अपेक्षाओं को प्रभावित करते हैं। हालांकि वर्तमान समय में किसी बड़े व्यवधान की आशंका नहीं है, फिर भी सरकार संभावित जोखिमों पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक तैयारियां कर रही है।

    वित्त मंत्री ने मौसम संबंधी चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एल नीनो प्रभाव के कारण सामान्य से कमजोर मानसून की संभावना को ध्यान में रखते हुए सरकार पहले से तैयारी कर रही है। कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति और कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा की आशंका को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

    उन्होंने विश्वास जताया कि उचित नीतियों, मजबूत संस्थागत ढांचे और निरंतर सुधारों के माध्यम से भारत अपनी दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को और अधिक सशक्त बना सकेगा तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।

  • थोक महंगाई में तेज उछाल, मई में 9.68 प्रतिशत पहुंची डब्ल्यूपीआई दर; सरकार ने नई मूल्यांकन प्रणाली की शुरुआत की

    थोक महंगाई में तेज उछाल, मई में 9.68 प्रतिशत पहुंची डब्ल्यूपीआई दर; सरकार ने नई मूल्यांकन प्रणाली की शुरुआत की

    नई दिल्ली । देश में महंगाई के आकलन और उत्पादक स्तर पर कीमतों की निगरानी को अधिक आधुनिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 2022-23 को नया आधार वर्ष मानते हुए संशोधित थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) सीरीज लागू कर दी है। इसके साथ ही मई माह के लिए जारी आंकड़ों में थोक महंगाई दर 9.68 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े क्षेत्रों में लागत दबाव को दर्शाती है।

    नई सीरीज ने 2011-12 आधार वर्ष वाली पुरानी व्यवस्था का स्थान ले लिया है। सरकार का उद्देश्य बदलती आर्थिक संरचना, उत्पादन पैटर्न और ऊर्जा क्षेत्र में आए बदलावों को महंगाई मापन प्रणाली में बेहतर तरीके से शामिल करना है। संशोधित व्यवस्था के जरिए देश की वास्तविक आर्थिक गतिविधियों और बाजार स्थितियों को अधिक सटीक रूप से प्रतिबिंबित करने का प्रयास किया गया है।

    मई के आंकड़ों के अनुसार सभी वस्तुओं का समग्र थोक मूल्य सूचकांक बढ़कर 109.9 पर पहुंच गया। प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी में भी महंगाई बढ़कर 4.99 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि सबसे अधिक प्रभाव ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में देखने को मिला, जहां महंगाई दर लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह वृद्धि ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी और उससे जुड़े उत्पादन व्यय के प्रभाव को दर्शाती है।

    विनिर्माण क्षेत्र भी लागत दबाव से अछूता नहीं रहा। मैन्यूफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई दर मई में 7.48 प्रतिशत दर्ज की गई। औद्योगिक उत्पादन से जुड़े कई क्षेत्रों में कच्चे माल और ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी का असर कीमतों पर दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर उपभोक्ता स्तर की महंगाई पर भी पड़ सकता है।

    मंत्रालय के अनुसार खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, रसायन एवं रासायनिक उत्पाद तथा बेसिक मेटल्स जैसी श्रेणियां थोक महंगाई में वृद्धि के प्रमुख कारणों में शामिल रहीं। इन क्षेत्रों में लागत बढ़ने का प्रभाव उद्योगों की उत्पादन लागत पर सीधे तौर पर पड़ा है।

    खाद्य क्षेत्र में स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रित रही। डब्ल्यूपीआई फूड इंडेक्स के तहत खाद्य महंगाई दर 4.49 प्रतिशत दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन अन्य प्रमुख श्रेणियों की तुलना में दबाव सीमित रहा।

    नई डब्ल्यूपीआई सीरीज की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका विस्तारित दायरा है। पहले जहां बास्केट में 697 वस्तुएं शामिल थीं, वहीं अब उनकी संख्या बढ़ाकर 957 कर दी गई है। इससे विभिन्न क्षेत्रों की मूल्य स्थिति का अधिक व्यापक और यथार्थपरक आकलन संभव होगा।

    ऊर्जा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहली बार सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा से उत्पादित बिजली को सूचकांक बास्केट में शामिल किया गया है। यह कदम देश के ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे बदलावों और नवीकरणीय स्रोतों की बढ़ती भूमिका को प्रतिबिंबित करता है।

    इसके अलावा कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी से हटाकर ईंधन और ऊर्जा वर्ग में शामिल किया गया है। नई पद्धति में वस्तुओं का वेटेज तय करने के लिए ग्रॉस वैल्यू ऑफ आउटपुट का उपयोग किया गया है, जिससे आर्थिक गतिविधियों का अधिक सटीक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

    सरकार ने संशोधित डब्ल्यूपीआई के साथ आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स, ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स तथा विभिन्न सेवा क्षेत्रों के लिए नई मूल्य सूचकांक श्रृंखलाएं भी जारी की हैं। इससे उत्पादक स्तर पर कीमतों की निगरानी और आर्थिक नीतियों के निर्माण में अधिक व्यापक और विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।

  • जन्मदिन को रोजगार दिवस बनाने की तैयारी, राहुल गांधी के सम्मान में आयोजित होगा विशाल जॉब फेयर

    जन्मदिन को रोजगार दिवस बनाने की तैयारी, राहुल गांधी के सम्मान में आयोजित होगा विशाल जॉब फेयर

    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi के आगामी जन्मदिन को लेकर कांग्रेस संगठन ने रोजगार के मुद्दे पर एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। 19 जून को राजधानी में एक विशाल जॉब फेयर आयोजित किए जाने की योजना बनाई गई है, जिसके माध्यम से हजारों युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। पार्टी इसे केवल एक आयोजन नहीं बल्कि युवाओं को रोजगार से जोड़ने की व्यापक पहल के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

    इस कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली स्थित Talkatora Stadium में किए जाने की तैयारी है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार आयोजन में देश की अनेक निजी कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न शैक्षणिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे सीधे कंपनियों के प्रतिनिधियों से संपर्क स्थापित कर सकें।

    बताया जा रहा है कि जॉब फेयर में 150 से अधिक कंपनियों के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों का लक्ष्य एक ही दिन में बड़ी संख्या में युवाओं को इंटरव्यू और भर्ती प्रक्रिया से जोड़ना है। इस दौरान उम्मीदवारों को अपने कौशल, अनुभव और योग्यता के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी के अवसर मिल सकते हैं। कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि युवा सीधे भर्ती अधिकारियों से बातचीत कर सकें और कई मामलों में मौके पर ही प्रारंभिक चयन प्रक्रिया भी पूरी हो सके।

    कांग्रेस की युवा इकाई इस आयोजन को अपने व्यापक रोजगार अभियान का हिस्सा बता रही है। पार्टी का कहना है कि देश में बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता और युवाओं से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। ऐसे में केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय युवाओं को प्रत्यक्ष अवसर उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। इसी सोच के तहत यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

    कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि रोजगार का मुद्दा वर्तमान समय में देश के युवाओं की सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल है। इसी कारण पार्टी लंबे समय से विभिन्न मंचों पर रोजगार और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अपनी आवाज उठाती रही है। अब जॉब फेयर जैसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को सीधे लाभ पहुंचाने की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है।

    पार्टी नेताओं का दावा है कि इससे पहले आयोजित किए गए इसी प्रकार के रोजगार मेलों में भी बड़ी संख्या में युवाओं को अवसर मिले थे। इस बार आयोजन का दायरा और अधिक व्यापक रखने की तैयारी है। कार्यक्रम में आईटी, सेवा क्षेत्र, बिक्री, वित्त, ग्राहक सेवा, तकनीकी कार्यों और अन्य कई क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आयोजन रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ युवाओं के बीच एक राजनीतिक संदेश देने का भी प्रयास हो सकता है। बेरोजगारी और रोजगार सृजन का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख विषयों में शामिल रहा है। ऐसे में राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    फिलहाल आयोजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं और विभिन्न स्तरों पर समन्वय का काम जारी है। यदि निर्धारित योजना के अनुसार कार्यक्रम आयोजित होता है, तो यह राजधानी में युवाओं के लिए आयोजित होने वाले बड़े रोजगार आयोजनों में से एक माना जा सकता है। रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं की नजरें अब इस पहल पर टिकी हुई हैं।

  • फिल्म 'काला हिरण' की रिलीज और प्रमोशन पर रोक लगाने की मांग, दिल्ली उच्च न्यायालय में अब 19 जून को होगी अगली सुनवाई

    फिल्म 'काला हिरण' की रिलीज और प्रमोशन पर रोक लगाने की मांग, दिल्ली उच्च न्यायालय में अब 19 जून को होगी अगली सुनवाई

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान द्वारा फिल्म ‘काला हिरण : द बैटल फॉर लेगेसी’ की रिलीज और इसके प्रचार पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने फिल्म के निर्माता अमित जानी, जानी फायरफॉक्स फिल्म्स और अन्य संबंधित पक्षों को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने इस संवेदनशील कानूनी विवाद की अगली सुनवाई के लिए 19 जून की तारीख तय की है। सलमान खान ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि फिल्म के जरिए उनके व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनैलिटी राइट्स) का व्यावसायिक लाभ के लिए खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।

    अदालती कार्यवाही के दौरान सलमान खान का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता निजाम पाशा ने दलील दी कि अभिनेता के व्यक्तित्व अधिकार पहले से ही उच्च न्यायालय द्वारा संरक्षित हैं। इन विधिक अधिकारों के दायरे में सलमान खान की छवि, उनकी सार्वजनिक पहचान, उनके जैसा दिखने वाला स्वरूप और उनसे जुड़ी अन्य विशिष्ट व्यक्तिगत विशेषताएं शामिल हैं। याचिका में मुख्य रूप से 29 मई को जारी किए गए फिल्म के एक पोस्टर पर आपत्ति जताई गई है। वकील ने अदालत को बताया कि इस पोस्टर में एक व्यक्ति को हूबहू सलमान खान जैसा दिखाया गया है, जिसने कलाई में वही खास फिरोजा ब्रेसलेट पहना हुआ है, जो लंबे समय से सलमान खान की अनूठी पहचान रहा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि फिल्म के प्रचार-प्रसार में उनकी इस पहचान का इस्तेमाल बिना किसी पूर्व अनुमति के किया जा रहा है।

    कानूनी टीम ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि साल 1998 के बहुचर्चित काला हिरण शिकार मामले से जुड़े कुल चार मुकदमों में से तीन में सलमान खान को कानूनी रूप से राहत मिल चुकी है, जबकि केवल एक मामला वर्तमान में अपील के साथ अदालत में लंबित है। इसके बावजूद फिल्म और उससे जुड़े प्रचार प्रसार की सामग्रियों के माध्यम से अभिनेता के नाम को लगातार विवादों के साथ घसीटा जा रहा है। सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान दिए जा रहे हैं जो उनकी सामाजिक छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    अभिनेता ने अपनी इस याचिका में निर्माता अमित जानी के साथ-साथ निर्देशक भरत एस. श्रीनाते, अक्षय पांडेय और अन्य संबंधित सहयोगियों को मुख्य पक्षकार बनाया है। सलमान खान की मांग है कि अदालत इस फिल्म के निर्माण, वितरण, डिजिटल या सैटेलाइट रिलीज और किसी भी प्रकार के विज्ञापन पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाए। उनका तर्क है कि उनकी सार्वजनिक छवि का इस तरह उपयोग करना कानूनी और नैतिक रूप से गलत है।

    उल्लेखनीय है कि फिल्म ‘काला हिरण : द बैटल फॉर लेगेसी’ साल 1998 के चर्चित शिकार मामले और उसके बाद के घटनाक्रमों पर आधारित बताई जा रही है, जिसका फर्स्ट लुक और ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया था। इस कंटेंट के सामने आने के बाद सलमान खान की कानूनी टीम ने पहले ही निर्माताओं को एक कानूनी नोटिस भेजा था और अब यह मामला पूरी तरह से दिल्ली हाईकोर्ट के विचाराधीन है, जहां 19 जून को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

  • 'द फैमिली मैन' के फैंस के लिए ओटीटी पर थ्रिलर और सस्पेंस का नया धमाका, इस वीकेंड को रोमांचक बनाएंगी ये 6 बेहतरीन वेब सीरीज

    'द फैमिली मैन' के फैंस के लिए ओटीटी पर थ्रिलर और सस्पेंस का नया धमाका, इस वीकेंड को रोमांचक बनाएंगी ये 6 बेहतरीन वेब सीरीज

    नई दिल्ली। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर इस वीकेंड दर्शकों के लिए मनोरंजन का एक बड़ा और बेहद रोमांचक बुके तैयार है। अगर आप ‘द फैमिली मैन’ जैसी थ्रिलर, क्राइम, सस्पेंस और देशभक्ति से ओत-प्रोत कहानियां देखने के शौकीन हैं, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस समय कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं। जी5, सोनी लिव और अमेजन प्राइम वीडियो जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर इस समय ऐसी कई सीरीज ट्रेंड कर रही हैं, जो अपनी कसी हुई पटकथा और शानदार अभिनय के दम पर दर्शकों को पलक झपकने का मौका भी नहीं दे रही हैं। इन सीरीज में देश के लिए जान जोखिम में डालने वाले जासूसों की अनसुनी कहानियों से लेकर असल जिंदगी के घोटालों पर बने तीखे व्यंग्य तक शामिल हैं।

    इसी कड़ी में जी5 पर उपलब्ध ‘मुखबिर – द स्टोरी ऑफ अ स्पाई’ एक बेहतरीन जासूसी थ्रिलर के रूप में उभरी है। इस सीरीज की कहानी एक अनाथ और शातिर चोर हरफान बुखारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे भारतीय खुफिया एजेंसी के अधिकारी देशहित में जासूसी करने के लिए चुनते हैं। हरफान को कड़ी ट्रेनिंग देकर और एक नई पहचान के साथ पाकिस्तान भेजा जाता है। यह सीरीज एक जासूस के अकेलेपन, उसके आंतरिक संघर्ष और देश के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च बलिदान को बेहद संजीदगी और यथार्थ के साथ परदे पर उतारती है।

    दूसरी तरफ, अमेजन प्राइम वीडियो पर हाल ही में रिलीज हुई सीरीज ‘राख’ दर्शकों के बीच भारी चर्चा बटोर रही है। यह सीरीज साल 1978 के दिल्ली के मशहूर रंगा-बिल्ला कांड जैसी वास्तविक घटना से प्रेरित है। इस क्राइम ड्रामा में अभिनेता अली फजल एक बेहद जिद्दी सब-इंस्पेक्टर की भूमिका में हैं, जबकि सोनाली बेंद्रे एक पीड़ित स्कूल शिक्षिका का किरदार निभा रही हैं। कहानी दो किशोरों के अचानक गायब होने और उसके बाद पूरे शहर में फैले खौफ के इर्द-गिर्द घूमती है। इस जांच के दौरान जो चौंकाने वाले सच सामने आते हैं, वे दर्शकों को अंदर तक हिलाकर रख देते हैं।

    सस्पेंस के शौकीनों के लिए सोनी लिव पर ‘तनाव’ सीरीज भी एक शानदार विकल्प है। यह मशहूर इजरायली थ्रिलर सीरीज ‘फौदा’ का आधिकारिक भारतीय रूपांतरण है। इस सीरीज की पृष्ठभूमि कश्मीर पर आधारित है, जहां एक स्पेशल टास्क फोर्स यूनिट को एक ऐसे खतरनाक और अंडरग्राउंड हो चुके विद्रोही कमांडर को पकड़ने के लिए दोबारा सक्रिय किया जाता है, जिसे पहले मृत मान लिया गया था। यह सीरीज भारत के सुरक्षा बलों के ऑपरेशन्स और उनके व्यक्तिगत जीवन के तनाव को बेहद करीब से दिखाती है।

    इसके अलावा जी5 पर ही उपलब्ध ‘ब्राउन’ एक अलग तरह की डार्क और कसी हुई कॉप थ्रिलर है। इसकी मुख्य किरदार रीता कोलकाता पुलिस की एक बेहद तेज-तर्रार लेकिन व्यक्तिगत जीवन में डिप्रेशन और शराब की लत से जूझ रही डिटेक्टिव है। जब शहर का एक बेहद हाई-प्रोफाइल मर्डर केस उसके पास आता है, तो उसे न सिर्फ व्यवस्था के भीतर फैले झूठ और भ्रष्टाचार से लड़ना पड़ता है, बल्कि वह अपने आंतरिक विकारों से भी मुकाबला करती है। इस सीरीज को अपनी सस्पेंस भरी कहानी के लिए अच्छी रेटिंग मिली है।

    आधुनिक समय के अपराधों और समाज पर केंद्रित ‘द पिरामिड स्कीम’ अमेजन प्राइम वीडियो पर एक अनूठा प्रयोग है। परमवीर चीमा और रणवीर शौरी के अभिनय से सजी यह सीरीज आज के दौर के लालच और मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कैम्स पर एक करारा और मनोरंजक सटायर है। यह गोल्डी नाम के एक ऐसे युवक की कहानी है, जो शॉर्टकट से अमीर बनने के सपने देखते हुए एक नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी के जाल में फंस जाता है, जिसके बाद धोखे और कॉमेडी की एक जबरदस्त रोलरकोस्टर राइड शुरू होती है। अंत में, देशप्रेम के जज्बे से भरी ‘द टेस्ट केस’ जी5 पर एक और शानदार मिलिट्री ड्रामा है, जो भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज में कॉम्बैट ट्रेनिंग लेने वाली पहली महिला कैप्टन शिखा शर्मा के संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प की कहानी को बयां करती है।

  • न्यूक्लियर सेक्टर को कर राहत का तोहफा: सरकार ने पूर्व प्रभाव से कस्टम ड्यूटी माफी दी, ऊर्जा परियोजनाओं की लागत घटने की उम्मीद

    न्यूक्लियर सेक्टर को कर राहत का तोहफा: सरकार ने पूर्व प्रभाव से कस्टम ड्यूटी माफी दी, ऊर्जा परियोजनाओं की लागत घटने की उम्मीद

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को प्रोत्साहन देने और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए परमाणु बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कुछ विशेष आयातित सामानों पर कस्टम ड्यूटी से छूट प्रदान कर दी है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह राहत 1 अप्रैल 2019 से 31 जनवरी 2026 तक की अवधि के लिए प्रभावी मानी जाएगी, जिससे इस दौरान किए गए पात्र आयातों पर सीमा शुल्क देनदारी समाप्त हो जाएगी।

    सरकारी निर्णय के तहत गैर-विकिरणित फ्यूल एलिमेंट्स तथा परमाणु रिएक्टरों में उपयोग किए जाने वाले विशेष कार्ट्रिज जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों और सामग्रियों के आयात पर कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी। ये सामग्री परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन और बिजली उत्पादन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में यह कदम परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की परिचालन लागत को कम करने में सहायक माना जा रहा है।

    सरकार का कहना है कि इन उत्पादों के आयात पर शुल्क नहीं लेने की व्यवस्था लंबे समय से व्यवहारिक रूप से लागू थी, लेकिन अब इसे औपचारिक वैधानिक मान्यता प्रदान की गई है। इससे संबंधित संस्थानों और कंपनियों को पूर्व अवधि के आयातों के संबंध में किसी प्रकार की कर अनिश्चितता या अतिरिक्त वित्तीय दायित्व का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    इस फैसले का सबसे अधिक लाभ न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को मिलने की संभावना है, जो देश के विभिन्न परमाणु बिजली संयंत्रों के लिए आवश्यक ईंधन असेंबली और तकनीकी सामग्री का आयात करती है। इसके अतिरिक्त, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी अन्य एजेंसियों और सहयोगी संस्थानों को भी इस राहत का लाभ प्राप्त होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी और भविष्य में निवेश का वातावरण अधिक अनुकूल बनेगा।

    भारत वर्तमान समय में ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन दोनों लक्ष्यों को समान प्राथमिकता दे रहा है। बढ़ती ऊर्जा मांग, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी के वैश्विक लक्ष्यों को देखते हुए परमाणु ऊर्जा को एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। यही कारण है कि सरकार लगातार इस क्षेत्र में निवेश, तकनीकी उन्नयन और नीतिगत समर्थन बढ़ाने पर जोर दे रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार परमाणु ऊर्जा स्थिर और बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन का ऐसा स्रोत है जो मौसम संबंधी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं रहता। सौर और पवन ऊर्जा के साथ संतुलन बनाते हुए यह देश के ऊर्जा मिश्रण को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बना सकता है। ऐसे में आयातित महत्वपूर्ण सामग्रियों पर कर छूट का यह निर्णय राष्ट्रीय ऊर्जा रणनीति के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप माना जा रहा है।

    उल्लेखनीय है कि हाल ही में सरकार ने अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर भी उत्पाद शुल्क को शून्य करने का निर्णय लिया था। 22 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण वाले मोटर स्पिरिट को इस राहत के दायरे में लाया गया है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार ऊर्जा क्षेत्र में वैकल्पिक और स्वच्छ स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए कर संबंधी नीतियों का सक्रिय उपयोग कर रही है। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को मिली यह नई राहत भी उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य देश को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की ओर अग्रसर करना है।

  • ब्रांड एंबेसडर से निवेशक तक का सफर, रोहित शर्मा ने FITTR में हिस्सेदारी लेकर हेल्थ और वेलनेस सेक्टर पर जताया भरोसा

    ब्रांड एंबेसडर से निवेशक तक का सफर, रोहित शर्मा ने FITTR में हिस्सेदारी लेकर हेल्थ और वेलनेस सेक्टर पर जताया भरोसा

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने फिटनेस और हेल्थ टेक्नोलॉजी क्षेत्र में अपनी भागीदारी को नया विस्तार देते हुए FITTR में निवेशक और इक्विटी पार्टनर के रूप में प्रवेश किया है। इस कदम को भारत में तेजी से बढ़ रहे हेल्थ और वेलनेस सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है। इससे पहले रोहित शर्मा कंपनी के पहले ब्रांड एंबेसडर के रूप में जुड़े हुए थे, लेकिन अब उन्होंने कंपनी की विकास यात्रा में प्रत्यक्ष भागीदारी का फैसला किया है।

    कंपनी और रोहित शर्मा के बीच यह साझेदारी केवल व्यावसायिक निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका केंद्र लोगों को बेहतर स्वास्थ्य, नियमित व्यायाम और संतुलित जीवनशैली के प्रति प्रेरित करना भी है। पिछले कुछ वर्षों में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में तेजी से वृद्धि देखने को मिली है। ऐसे समय में फिटनेस और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास इस साझेदारी की प्रमुख विशेषता माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, निवेश का निर्णय लेने से पहले रोहित शर्मा ने कई महीनों तक कंपनी के संस्थापक और नेतृत्व टीम के साथ विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कंपनी के बिजनेस मॉडल, कार्यप्रणाली, दीर्घकालिक रणनीति और विस्तार योजनाओं को करीब से समझा। कंपनी के संचालन और भविष्य की संभावनाओं का मूल्यांकन करने के बाद ही उन्होंने निवेशक बनने का फैसला किया।

    कंपनी के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र चौकसे का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली के कारण स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि लोगों को फिर से व्यायाम, संतुलित आहार और अनुशासित दिनचर्या जैसी मूलभूत आदतों को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अच्छी सेहत का कोई त्वरित विकल्प नहीं होता और दीर्घकालिक परिणाम केवल नियमित प्रयासों से ही प्राप्त किए जा सकते हैं।

    रोहित शर्मा ने भी इस साझेदारी को अपने व्यक्तिगत विश्वास और पेशेवर अनुभव से जुड़ा निर्णय बताया। उनका कहना है कि किसी भी संस्था में निवेश करने से पहले उसकी सोच, उद्देश्य और विकास क्षमता को समझना आवश्यक होता है। FITTR के साथ समय बिताने के दौरान उन्हें यह महसूस हुआ कि कंपनी केवल व्यवसायिक विस्तार पर नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लक्ष्य पर भी काम कर रही है।

    उन्होंने कहा कि कंपनी की मजबूत बुनियाद, स्पष्ट दृष्टिकोण और स्वास्थ्य क्षेत्र में दीर्घकालिक प्रभाव पैदा करने की क्षमता ने उन्हें प्रभावित किया। इसी कारण उन्होंने ब्रांड एंबेसडर की भूमिका से आगे बढ़कर निवेशक और इक्विटी पार्टनर बनने का निर्णय लिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी लोकप्रिय खिलाड़ी की सक्रिय भागीदारी से फिटनेस और हेल्थ प्लेटफॉर्म को व्यापक पहचान मिलती है। इससे आम लोगों के बीच स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों को भी मजबूती मिल सकती है। रोहित शर्मा जैसे प्रतिष्ठित खिलाड़ी का जुड़ाव कंपनी के लिए विश्वसनीयता और पहुंच दोनों के स्तर पर लाभकारी साबित हो सकता है।

    कंपनी का लक्ष्य आने वाले समय में अपने निवारक स्वास्थ्य तंत्र का विस्तार करना और अधिक लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। रोहित शर्मा की नई भूमिका को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो फिटनेस और स्वास्थ्य जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने में सहायक साबित हो सकती है।

  • 2019 और 2024 की नाकामी के बाद फिर विपक्षी एकजुटता की कवायद, बिखरे इंडिया गठबंधन को नई दिशा देने में जुटीं ममता बनर्जी

    2019 और 2024 की नाकामी के बाद फिर विपक्षी एकजुटता की कवायद, बिखरे इंडिया गठबंधन को नई दिशा देने में जुटीं ममता बनर्जी

    नई दिल्ली । देश की राजनीति में विपक्षी एकजुटता की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजनीति के सामने प्रभावी चुनौती खड़ी करने के उद्देश्य से विभिन्न विपक्षी दल नए सिरे से साझा मंच तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में दिल्ली में आयोजित बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें कई प्रमुख विपक्षी दलों के नेता एक साथ रणनीति पर विचार कर रहे हैं। इस पूरी कवायद में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की भूमिका विशेष रूप से चर्चा में है।

    पिछले एक दशक में विपक्षी दलों ने कई बार एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा बनाने का प्रयास किया है। वर्ष 2019 के आम चुनाव से पहले विपक्षी दलों के बीच तालमेल स्थापित करने की कोशिश हुई थी, जबकि 2024 के चुनावों से पहले भी विभिन्न दलों ने साझा रणनीति पर काम किया। हालांकि इन प्रयासों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित राजनीतिक सफलता नहीं मिल सकी और भाजपा सत्ता में बनी रही। अब एक बार फिर विपक्षी दलों के बीच संवाद और समन्वय की प्रक्रिया शुरू होती दिखाई दे रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहती हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदले हालात और पार्टी के भीतर उभरती चुनौतियों के बीच उनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सक्रियता बढ़ाना भी एक राजनीतिक आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है। यही कारण है कि वे विपक्षी दलों के बीच संवाद स्थापित करने और साझा रणनीति बनाने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रही हैं।

    दिल्ली में आयोजित विपक्षी दलों की बैठक को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक में कांग्रेस सहित कई क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिन राजनीतिक दलों के साथ अतीत में मतभेद प्रमुखता से सामने आते रहे, अब उनके साथ सहयोग और समन्वय की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है। यह बदलाव विपक्षी राजनीति की बदलती प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है।

    ममता बनर्जी पहले ऐसे राजनीतिक मंच की पक्षधर रही हैं जिसमें कांग्रेस की भूमिका सीमित रहे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उनका रुख अपेक्षाकृत व्यावहारिक दिखाई दे रहा है। विपक्षी दलों के बीच व्यापक सहयोग के लिए अब कांग्रेस की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही वजह है कि विभिन्न विचारधाराओं और क्षेत्रीय हितों वाले दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश की जा रही है।

    विपक्षी खेमे के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल एकजुटता प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि साझा राजनीतिक एजेंडा तैयार करना भी है। पिछले अनुभव बताते हैं कि केवल चुनावी गठबंधन पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मतदाताओं के सामने स्पष्ट दृष्टिकोण और समन्वित रणनीति भी आवश्यक होती है। ऐसे में दिल्ली की यह बैठक भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि विपक्षी दलों की यह नई पहल केवल राजनीतिक संवाद तक सीमित रहती है या फिर यह एक व्यापक और संगठित राजनीतिक अभियान का रूप लेती है। फिलहाल इतना तय है कि राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष फिर से अपनी सामूहिक ताकत को संगठित करने की कोशिश में जुटा हुआ है और ममता banerjee इस प्रक्रिया के प्रमुख चेहरों में शामिल दिखाई दे रही हैं।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP ने तेज किया अभियान, अभिजीत दीपके बोले- छात्रों के भविष्य के सवाल पर अब राज्यों तक पहुंचेगा आंदोलन

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP ने तेज किया अभियान, अभिजीत दीपके बोले- छात्रों के भविष्य के सवाल पर अब राज्यों तक पहुंचेगा आंदोलन

    नई दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सक्रिय कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की घोषणा की है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि यदि 13 जून 2026 तक शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो वह स्वयं विभिन्न राज्यों और शहरों में जाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और इस मुद्दे पर जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

    छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन और बाद में जारी एक वीडियो संदेश में दीपके ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य किसी प्रकार की अराजकता फैलाना नहीं बल्कि छात्रों और युवाओं की चिंताओं को लोकतांत्रिक तरीके से सामने लाना है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा तक सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जाता तो आंदोलन का अगला चरण देश के अलग-अलग हिस्सों में शुरू किया जाएगा।

    दीपके ने बताया कि हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन को व्यापक समर्थन मिला था। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र और युवा इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उनके अनुसार यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा, जिसने युवाओं की नाराजगी और उनकी अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उन्होंने कहा कि आने वाले कार्यक्रम भी इसी प्रकार लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके से आयोजित किए जाएंगे।

    नेपाल और बांग्लादेश में हाल के वर्षों में युवाओं द्वारा किए गए आंदोलनों के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर दीपके ने कहा कि भारत की परिस्थितियां अलग हैं और यहां के आंदोलन की तुलना पड़ोसी देशों की घटनाओं से नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनके अभियान को गलत तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि उनका संगठन संवैधानिक और शांतिपूर्ण माध्यमों से अपनी मांगें रख रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था मौजूद है और उसी व्यवस्था के भीतर रहकर आंदोलन संचालित किया जाएगा।

    CJP प्रमुख ने यह भी कहा कि यदि राज्यों में प्रस्तावित प्रदर्शन के बाद भी उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता तो देशभर के छात्रों को एकजुट कर पुनः नई दिल्ली में बड़ा आंदोलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन शिक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है और जब तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक अभियान जारी रहेगा।

    मई महीने में एक ऑनलाइन पहल के रूप में शुरू हुआ CJP अभियान कम समय में युवाओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर संगठन को व्यापक समर्थन मिला है और इसके डिजिटल प्लेटफॉर्म से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं। इसी आधार पर संगठन ने हाल के दिनों में जमीनी स्तर पर भी अपनी सक्रियता बढ़ाई है।

    दीपके ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है और इसका केंद्र केवल छात्रों तथा युवाओं से जुड़े मुद्दे हैं। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने और कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा।

  • NEET-UG 2026 री-एग्जाम के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा कवच, पेपर लीक रोकने को विशेषज्ञों का लॉकडाउन और डिजिटल निगरानी सख्त

    NEET-UG 2026 री-एग्जाम के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा कवच, पेपर लीक रोकने को विशेषज्ञों का लॉकडाउन और डिजिटल निगरानी सख्त


    नई दिल्ली ।
    NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और शिक्षा मंत्रालय इस बार किसी भी प्रकार की चूक से बचने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू कर रहे हैं। पिछले वर्ष सामने आए पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परीक्षा केंद्रों तक उसकी सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र तैयार किया गया है।

    21 जून को आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने, उसकी समीक्षा करने और विभिन्न भाषाओं में अनुवाद करने वाले विशेषज्ञों को विशेष सुरक्षित परिसरों में रखा गया है। इन परिसरों में उनकी गतिविधियों और संचार पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें बाहरी दुनिया से सीमित संपर्क की ही अनुमति होगी। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से गोपनीय सूचनाओं के बाहर जाने की संभावना को काफी हद तक रोका जा सकेगा।

    परीक्षा सुरक्षा के तहत इस बार डिजिटल नियंत्रण को भी विशेष महत्व दिया गया है। सुरक्षित परिसरों में मौजूद अधिकारियों और विशेषज्ञों के लिए मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, स्मार्टवॉच तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इंटरनेट पहुंच भी नियंत्रित रखी गई है ताकि किसी भी स्तर पर प्रश्नपत्र से जुड़ी जानकारी साझा न हो सके। परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की विस्तृत जांच की जा रही है और उसकी गतिविधियों का रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है।

    सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पूरी परीक्षा प्रक्रिया को अलग-अलग चरणों में विभाजित किया गया है। प्रश्नपत्र निर्माण, मॉडरेशन, छपाई, पैकेजिंग, भंडारण और वितरण जैसी जिम्मेदारियों को स्वतंत्र इकाइयों में बांटा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक व्यक्ति या समूह के पास पूरी प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध न हो। इससे गोपनीय सूचनाओं के दुरुपयोग की आशंका कम होने की उम्मीद है।

    सूत्रों के अनुसार, प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। इसके तहत वायुसेना के विमानों की सहायता लेने की संभावना पर चर्चा की जा रही है। यदि यह योजना लागू होती है तो प्रश्नपत्रों को निर्धारित स्थानों तक अधिक सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से पहुंचाया जा सकेगा। इससे परिवहन के दौरान संभावित सुरक्षा जोखिमों को भी कम किया जा सकेगा।

    परीक्षा से पहले और परीक्षा के दिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी। सोशल मीडिया, मैसेजिंग एप्स और विभिन्न ऑनलाइन मंचों पर चौबीसों घंटे नजर रखने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। इनका उद्देश्य फर्जी प्रश्नपत्र, भ्रामक दावों और अफवाहों की पहचान कर उन्हें समय रहते रोकना है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों को भ्रमित करने या परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रयास पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

    शिक्षा मंत्रालय ने सभी संबंधित एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पिछली बार सामने आई कमियों को दोहराने की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। इसी कारण हर स्तर पर अतिरिक्त निगरानी और जवाबदेही तय की गई है। अधिकारियों का मानना है कि पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा प्रक्रिया से अभ्यर्थियों का विश्वास मजबूत होगा और देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा की साख भी बरकरार रहेगी।

    21 जून को आयोजित होने वाली यह परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक ऑफलाइन मोड में होगी। इसके लिए भारत के सैकड़ों शहरों के साथ विदेशों में भी परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। लाखों अभ्यर्थियों की नजर इस परीक्षा पर टिकी हुई है और ऐसे में प्रशासन का पूरा फोकस निष्पक्ष, सुरक्षित और भरोसेमंद परीक्षा आयोजन सुनिश्चित करने पर है।