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  • हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद फिर चर्चा में, प्रवचन रोकने का लगाया आरोप

    हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद फिर चर्चा में, प्रवचन रोकने का लगाया आरोप


    नई दिल्ली । उज्जैन के लक्ष्मीपुरा में आयोजित सात दिवसीय देवी प्रवचन कार्यक्रम का समापन इस बार विवादों में घिर गया। मॉडल से संन्यास लेकर साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ स्वामी हर्षानंद गिरि ने मंच से आरोप लगाया कि कुछ संत उनके प्रवचन को रोकने और उसका समय घटाने की कोशिश कर रहे थे।

    हर्षानंद ने कहा कि शुरुआती दिनों में कार्यक्रम सामान्य रहा, लेकिन जैसे-जैसे श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी, उनके प्रवचन के समय को सीमित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने दावा किया कि विरोध के बावजूद श्रद्धालुओं की उपस्थिति लगातार बढ़ती रही और पंडाल तक बढ़ाना पड़ा।

    कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच से युवतियों को ‘लव जिहाद’ से सतर्क रहने की शपथ दिलाई। इसके साथ ही युवतियों को तलवारबाजी, घुड़सवारी और शस्त्र प्रशिक्षण सीखने की सलाह भी दी गई। करणी सेना की ओर से कार्यक्रम में युवतियों को तलवारें भी वितरित की गईं।

    आयोजन के समापन पर करीब 11 युवतियों को प्रतीकात्मक रूप से तलवारें सौंपी गईं, जबकि लक्ष्य 101 तलवारें बांटने का था।

    हर्षानंद ने यह भी कहा कि वे मां भगवती की कृपा से इस कार्यक्रम में डटी रहीं और कोई भी उन्हें रोक नहीं सका।

    करीब एक माह पहले उन्होंने उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में संन्यास लेकर नया नाम “स्वामी हर्षानंद गिरि” अपनाया था। संन्यास से पहले वे मॉडलिंग और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में सक्रिय थीं और अब धार्मिक प्रवचनों के जरिए चर्चा में रहती हैं।

  • इंदौर में स्विफ्ट कार बनी आग का गोला समय रहते बाहर निकला परिवार टला बड़ा हादसा

    इंदौर में स्विफ्ट कार बनी आग का गोला समय रहते बाहर निकला परिवार टला बड़ा हादसा


    इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में एक बड़ा हादसा होते होते टल गया जब रेडिसन चौराहा के पास बॉम्बे हॉस्पिटल रोड पर एक चलती मारुति स्विफ्ट कार में अचानक भीषण आग लग गई। इस घटना के दौरान कार में एक पूरा परिवार सवार था जिसमें पति पत्नी, उनकी बुजुर्ग मां और लगभग तीन साल की बच्ची शामिल थी।

    जानकारी के अनुसार जैसे ही कार आगे बढ़ रही थी तभी अचानक उसमें से धुआं निकलने लगा और कुछ ही पलों में आग की लपटें दिखाई देने लगीं। स्थिति को भांपते हुए चालक ने तुरंत सूझबूझ दिखाई और कार को सड़क किनारे रोक दिया। बिना देर किए पूरे परिवार ने समय रहते वाहन से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।

    घटना के दौरान सड़क से गुजर रहे राहगीरों ने भी तत्परता दिखाई। मौके पर मौजूद एक पानी के टैंकर चालक ने तुरंत स्थिति को समझते हुए आग बुझाने का प्रयास किया और पानी डालकर आग पर काफी हद तक काबू पाया। उनकी इस तेजी और सूझबूझ की वजह से आग और ज्यादा फैलने से रोक ली गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चपेट में आ गया। अगर परिवार समय रहते बाहर नहीं निकलता तो बड़ा नुकसान हो सकता था। घटना की सूचना मिलते ही विजयनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। एसीपी पराग सैनी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए जांच जारी है।

    इस घटना में राहत की बात यह रही कि किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और पूरा परिवार सुरक्षित बच गया। स्थानीय लोगों और राहगीरों की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया। पुलिस अब मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि तकनीकी खराबी के अलावा कोई अन्य कारण तो जिम्मेदार नहीं था।

  • Lenskart विवाद: हिजाब की इजाजत और बिंदी पर रोक की खबर से बवाल, पीयूष बंसल ने दी सफाई

    Lenskart विवाद: हिजाब की इजाजत और बिंदी पर रोक की खबर से बवाल, पीयूष बंसल ने दी सफाई

    नई दिल्ली। आईवियर कंपनी Lenskart इन दिनों सोशल मीडिया पर बड़े विवाद में घिर गई है। कंपनी की कथित “स्टाफ यूनिफॉर्म और ग्रूमिंग गाइड” सामने आने के बाद आरोप लगे कि कर्मचारियों को हिजाब या पगड़ी पहनने की अनुमति है, लेकिन बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई गई है।

    इस खबर के सामने आते ही लोगों में नाराजगी फैल गई और कंपनी पर भेदभाव के आरोप लगने लगे।

    क्या है पूरा विवाद?

    सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेज में दावा किया गया कि Lenskart स्टोर कर्मचारियों को काले रंग का हिजाब और पगड़ी पहनने की छूट देता है, लेकिन “धार्मिक टीका/तिलक और बिंदी/स्टिकर” की अनुमति नहीं है।
    इसी कथित नियम को लेकर यूजर्स ने सवाल उठाए और इसे धार्मिक असमानता से जोड़कर देखा।

    पीयूष बंसल की सफाई

    विवाद बढ़ने के बाद कंपनी के संस्थापक पीयूष बंसल ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वायरल दस्तावेज कंपनी की मौजूदा नीति का हिस्सा नहीं है और यह एक पुराना ड्राफ्ट है।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि कंपनी किसी भी तरह के धार्मिक प्रतीकों पर रोक नहीं लगाती और कर्मचारियों को बिंदी, तिलक समेत सभी प्रतीक पहनने की पूरी स्वतंत्रता है।
    साथ ही, उन्होंने इस पूरे मामले से पैदा हुए भ्रम के लिए माफी भी मांगी।

    सफाई पर भी उठे सवाल

    हालांकि, बंसल की सफाई के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि वायरल दस्तावेज हाल ही (फरवरी 2026) का है, इसलिए इसे “पुराना” बताना सही नहीं है।

    कुछ लोगों ने कंपनी से मौजूदा नीति सार्वजनिक करने की मांग की, जबकि अन्य ने यह सवाल उठाया कि अगर यह पुरानी पॉलिसी भी थी, तो उस समय ऐसे नियम क्यों बनाए गए थे।

    सोशल मीडिया पर बढ़ा दबाव

    यह मामला अब कंपनी की ब्रांड छवि से जुड़ गया है। यूजर्स लगातार पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं और स्पष्ट नीति सामने लाने की बात कह रहे हैं।

    फिलहाल कंपनी ने अपनी स्थिति साफ कर दी है, लेकिन सोशल मीडिया पर जारी बहस से यह साफ है कि मामला अभी पूरी तरह थमा नहीं है।

  • संकट के बीच राहत की खबर…. 6000 PNG उपभोक्ताओं ने सरेंडर किए LPG कनेक्शन

    संकट के बीच राहत की खबर…. 6000 PNG उपभोक्ताओं ने सरेंडर किए LPG कनेक्शन


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) द्वारा पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) (PNG – Piped Natural Gas) को बढ़ावा देने और एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) (LPG – Liquefied Petroleum Gas) की सप्लाई को सुव्यवस्थित करने के प्रयासों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, शनिवार तक 6000 पीएनजी उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं।

    इस विषय पर मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इन उपभोक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘कल तक 6000 पीएनजी उपभोक्ताओं ने अपनी एलपीजी सरेंडर कर दी! उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद!!’ उन्होंने अन्य पीएनजी यूजर्स से भी अपील की कि वे उन लोगों की मदद के लिए अपना एलपीजी कनेक्शन छोड़ दें, जिनके पास अभी तक पीएनजी की सुविधा नहीं है।


    तीन महीने बाद बंद हो सकती है एलपीजी सप्लाई

    सरकार की योजना है कि जिन घरों में पीएनजी का एक्सेस यानी पाइपलाइन की पहुंच है, लेकिन उन्होंने अभी तक कनेक्शन नहीं लिया है तो वहां तीन महीने बाद एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई रोक दी जाएगी। यह नियम उन जगहों पर लागू नहीं होगा जहां पीएनजी की सप्लाई तकनीकी रूप से संभव नहीं है, बशर्ते किसी अधिकृत संस्था द्वारा ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) जारी किया गया हो।

    पश्चिमी एशिया से आयात में आ रही बाधाओं के कारण एलपीजी आपूर्ति पर दबाव है। सरकार का लक्ष्य पाइपलाइन वाले क्षेत्रों के लोगों को पीएनजी पर शिफ्ट करना है, ताकि वहां की एलपीजी को उन ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में भेजा जा सके जहां पाइपलाइन का बुनियादी ढांचा नहीं है।


    गैस आपूर्ति में घरेलू और परिवहन क्षेत्र को प्राथमिकता

    – मौजूदा स्थिति को देखते हुए गैस क्षेत्र में आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर बांटा गया है।
    – पीएनजी और सीएनजी: घरेलू पीएनजी और परिवहन के लिए सीएनजी को 100% (पूर्ण आवंटन) गैस दी जा रही है।
    – औद्योगिक और वाणिज्यिक: इन उपभोक्ताओं को उनके औसत उपयोग का लगभग 80% गैस मिल रही है।
    – उर्वरक संयंत्र: इन्हें 70-75% क्षमता पर गैस की आपूर्ति की जा रही है। कमी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त एलएनजी कार्गो की व्यवस्था की जा रही है।

    एलपीजी की स्थिति और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई
    भू-राजनीतिक स्थितियों के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार डिलीवरी सामान्य है और कहीं से भी किसी कमी की सूचना नहीं है। प्रतिदिन 55 लाख से अधिक गैस सिलेंडरों की डिलीवरी की जा रही है। कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति को संकट-पूर्व के स्तर के लगभग 70% तक बहाल कर दिया गया है। इसमें हॉस्पिटैलिटी (होटल-रेस्तरां), खाद्य सेवाओं और प्रमुख उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है।

    छापेमारी और जब्ती: सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। हाल के दिनों में लगभग 2,900 छापेमारी की गई हैं और करीब 1,000 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। इसके अलावा राज्यों का केरोसिन आवंटन भी बढ़ाया गया है।

    पीएनजी को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों के इंसेंटिव्स
    पीएनजी नेटवर्क (सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन) के विस्तार को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अकेले मार्च महीने में 2,90,000 से अधिक नए पीएनजी कनेक्शन जोड़े गए हैं। इंद्रप्रस्थ गैस (IGL), महानगर गैस (MGL), गेल गैस (GAIL Gas) और बीपीसीएल (BPCL) जैसी कंपनियां लोगों को एलपीजी से पीएनजी पर शिफ्ट होने के लिए कई तरह के इंसेंटिव्स (प्रोत्साहन/छूट) भी दे रही हैं।

    सरकार की अपील
    केंद्र सरकार ने राज्यों से निगरानी तेज करने, दैनिक ब्रीफिंग आयोजित करने और गैस बुनियादी ढांचे के लिए अप्रूवल में तेजी लाने को कहा है। सरकार ने जनता से यह भी अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

  • बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की बेटी का दुखद निधन

    बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की बेटी का दुखद निधन



    भोपाल । भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल की सुपुत्री सुरभि खंडेलवाल का आज बुधवार को दुखद निधन हो गया है। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है।

    सुरभि खंडेलवाल के निधन से क्षेत्र में गहरा दुख व्याप्त है। उनकी अंतिम यात्रा आज शाम 5:00 बजे उनके निज निवास बैतूल गंज से कोठी बाजार मोक्ष धाम के लिए रवाना होगी। अंतिम संस्कार कोठी बाजार मोक्ष धाम में किया जाएगा। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। सामाजिक संगठनों ने भी परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं।

  • लिटान गांव में तंगखुल नागा पर हमला, विवाद पारंपरिक तरीके से सुलझा पर बैठक रद्द; हिंसा की आशंका बढ़ी

    लिटान गांव में तंगखुल नागा पर हमला, विवाद पारंपरिक तरीके से सुलझा पर बैठक रद्द; हिंसा की आशंका बढ़ी


    नई दिल्ली । मणिपुर के उखरुल जिला में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। सोमवार दोपहर लिटान सारेइखोंग गांव में हथियारबंद बदमाशों द्वारा कई घरों में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। अधिकारियों के मुताबिक,पहाड़ी इलाकों के आसपास सशस्त्र समूहों ने हवा में कई राउंड गोलियां भी चलाईं जिससे इलाके में दहशत फैल गई।स्थिति बिगड़ने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण जरूरी सामान लेकर पड़ोसी कांगपोकपी जिला के सुरक्षित इलाकों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए। तंगखुल समुदाय से जुड़े कई ग्रामीणों के भी अपने घर छोड़ने की सूचना है।

    शनिवार रात से हुई थी हिंसा की शुरुआत

    अधिकारियों के अनुसार,हिंसा की शुरुआत शनिवार रात को लिटान गांव में हुई,जब तंगखुल नागा समुदाय के एक सदस्य पर सात से आठ लोगों द्वारा कथित हमला किया गया। शुरुआत में पीड़ित पक्ष और लिटान सारेइखोंग के मुखिया के बीच मामला सुलझ गया था और पारंपरिक तरीकों से समाधान पर सहमति बनी थी। रविवार को इस संबंध में बैठक प्रस्तावित थी,लेकिन वह नहीं हो सकी।इसके बजाय,पास के सिकिबुंग गांव के कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर लिटान सारेइखोंग के मुखिया के आवास पर हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलावरों ने लिटान थाने के पास से गुजरते हुए फायरिंग भी की।

    रविवार को लागू की गई निषेधाज्ञा

    रविवार शाम को दो आदिवासी समूहों के बीच पथराव की घटना के बाद प्रशासन को निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी। इसके बाद मध्यरात्रि के आसपास तंगखुल नागा समुदाय के कई घरों में कथित तौर पर आग लगा दी गई जबकि पास के इलाके में कुकी समुदाय के कुछ मकानों को भी नुकसान पहुंचा।

    हालात अभी भी तनावपूर्ण अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात

    जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है और हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए महादेव लंबुई शांगकाई और लिटान की ओर जाने वाले मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। रविवार शाम को सुरक्षा बलों ने हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे।

    सीएम खेमचंद सिंह ने की शांति की अपील

    इस बीच वाई. खेमचंद सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए सभी समुदायों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने बताया कि वे आरआईएमएस अस्पताल पहुंचे और घायलों से मुलाकात कर उनके इलाज के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

    कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू

    उखरुल जिले के मजिस्ट्रेट द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि तंगखुल नगा और कुकी समुदायों के सदस्यों के बीच तनाव के कारण गांव में शांति और व्यवस्था भंग होने की आशंका है। जिला मजिस्ट्रेट आशीष दास ने अधिसूचना में कहा कि रविवार शाम सात बजे से अगले आदेश तक किसी भी व्यक्ति का अपने निवास स्थान से बाहर निकलना प्रतिबंधित है। इसमें कहा गया है कि यह आदेश सरकारी अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों पर लागू नहीं होगा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हथियारबंद लोग मकानों और वाहनों को आग लगाते तथा अत्याधुनिक हथियारों से फायरिंग करते दिखाई दे रहे हैं,हालांकि इन फुटेज की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

  • हम दो-हमारे दो दर्जन, AIMIM यूपी अध्यक्ष शौकत अली बोले- ज्यादा जनसंख्या देश की ताकत

    हम दो-हमारे दो दर्जन, AIMIM यूपी अध्यक्ष शौकत अली बोले- ज्यादा जनसंख्या देश की ताकत


    नई दिल्ली । एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने एक बार फिर विवादित राग छेड़ा है। जनसंख्या नियंत्रण की सरकारी नीतियों और सामाजिक विमर्श के उलट, उन्होंने आबादी बढ़ाने को देश की मजबूती से जोड़कर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली अपने बयानों के चलते एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। सोमवार को मुरादाबाद के रामपुर दोराहा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने जनसंख्या वृद्धि को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। शौकत अली ने मुसलमानों से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील करते हुए नारा दिया कि “हम दो, हमारे दो नहीं, बल्कि हमारे दो दर्जन होने चाहिए।
    शौकत अली ने अपने संबोधन में जनसंख्या नियंत्रण के वैश्विक और राष्ट्रीय तर्कों को दरकिनार करते हुए दावा किया कि किसी भी देश की असली मजबूती उसकी बड़ी आबादी में निहित होती है। उन्होंने धार्मिक भावनाओं को जोड़ते हुए कहा, “जब अल्लाह बच्चों की नेमत दे रहा है, तो उसे पूरी खुशी के साथ स्वीकार करना चाहिए। बच्चे ऊपर वाले की देन हैं और उन्हें रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने तर्क दिया कि आबादी बढ़ने से देश कमजोर नहीं बल्कि और अधिक ताकतवर होकर उभरेगा।
    कुंवारे नेताओं पर कसा तंज
    जनसंख्या नियंत्रण की वकालत करने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए शौकत अली ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद शादी नहीं करते या जिनका अपना परिवार नहीं है, वही दूसरों को जनसंख्या नियंत्रण का ज्ञान बांटते फिर रहे हैं। उनका यह इशारा सीधे तौर पर सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं की ओर माना जा रहा है। साथ ही, उन्होंने मुरादाबाद के मदरसों का जिक्र करते हुए नाराजगी जताई कि यहाँ मदरसों का विस्तार शिक्षा के लिए किया गया है, लेकिन कुछ लोग इन्हें जानबूझकर ‘आतंकवाद का अड्डा’ बताकर बदनाम करने की कोशिश करते हैं।
    सपा और बी टीम के आरोपों पर पलटवार
    जनसभा के दौरान शौकत अली केवल जनसंख्या तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी जमकर भड़ास निकाली। सपा के एक विधायक द्वारा एआईएमआईएम को भाजपा की बी टीम बताए जाने पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि सपा खुद अपनी जमीन खो रही है और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए मजलिस पर झूठे आरोप मढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का सच्चा रहनुमा वही है जो उनके हक की बात डंके की चोट पर करे, न कि वह जो केवल वोट बैंक की राजनीति करे।
    बयान पर छिड़ा सियासी घमासान
    शौकत अली के इस ‘दो दर्जन’ वाले बयान के बाद भाजपा और अन्य दलों ने उन पर कड़ा प्रहार किया है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देते हैं और विकास के मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाते हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

  • देवेंद्र फडणवीस का आधी रात दिल्ली दौरा, महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, बड़े बदलाव के आसार

    देवेंद्र फडणवीस का आधी रात दिल्ली दौरा, महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, बड़े बदलाव के आसार


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के देर रात अचानक दिल्ली दौरे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सोमवार, 9 फरवरी की रात बीजेपी के शीर्ष नेताओं से बंद कमरे में मुलाकात करने के बाद फडणवीस तड़के मुंबई लौट आए। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस दौरे से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी NCP के विलय और सहयोगी दलों के साथ नई बातचीत की अटकलें तेज हो गई हैं।

    सुनेत्रा पवार का भी दिल्ली दौरा

    फडणवीस के बाद महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार मंगलवार, 10 फरवरी को शाम 6:45 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगी। उनके साथ NCP प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल भी मौजूद रहेंगे। वे बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगी। उनकी यह यात्रा शिष्टाचार भेंट के रूप में बताई जा रही है, लेकिन राजनीतिक संकेत भी इसे जोड़कर देखे जा रहे हैं।

    जिला परिषद और पंचायत चुनावों में बीजेपी का दबदबा
    महाराष्ट्र की हालिया जिला परिषद 12 और पंचायत समिति 125 चुनावों में बीजेपी ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। जिला परिषद की 731 सीटों में से बीजेपी ने 233 और पंचायत समितियों की 1462 सीटों में सबसे ज्यादा कब्जा जमाया। अजित पवार गुट की NCP को जिला परिषद में 167 और शिंदे गुट की शिवसेना को 162 सीटें मिलीं। महायुति गठबंधन ने कुल 562 सीटें जीतकर अपनी पकड़ मजबूत की। दूसरी ओर, कांग्रेस 56, शरद पवार गुट 26 और उद्धव ठाकरे गुट 43 सीटें ही जीत सका। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि फडणवीस का दिल्ली दौरा और सुनेत्रा पवार की यात्रा आगामी महीनों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलावों की शुरुआत हो सकती है।

  • राजपाल यादव के समर्थन में आए सोनू सूद, बढ़ाया मदद का हाथ, 9 करोड़ के कर्ज से दिलाएंगे मुक्ति

    राजपाल यादव के समर्थन में आए सोनू सूद, बढ़ाया मदद का हाथ, 9 करोड़ के कर्ज से दिलाएंगे मुक्ति


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के चर्चित कॉमिक एक्टर राजपाल यादव इन दिनों गंभीर कानूनी और आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। चेक बाउंस और करीब 9 करोड़ रुपये के बकाया कर्ज के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 फरवरी को उनकी आखिरी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद अदालत के आदेश पर उन्होंने तिहाड़ जेल में सरेंडर किया।इस मुश्किल घड़ी में अभिनेता सोनू सूद सामने आए और राजपाल यादव के समर्थन में खुलकर अपनी मदद का प्रस्ताव रखा। सोनू ने स्पष्ट किया कि यह मदद किसी चैरिटी के लिए नहीं, बल्कि एक कलाकार के लिए प्रोफेशनल सहयोग और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने इंडस्ट्री से भी अपील की कि वे आगे आएं और राजपाल को इस कठिन दौर से बाहर निकलने में मदद करें।

    सोनू सूद की अपील

    मंगलवार को राजपाल यादव का भावुक बयान सामने आने के बाद, सोनू सूद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और इंस्टाग्राम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने न सिर्फ राजपाल यादव को अपनी आने वाली फिल्म में काम देने की बात कही, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री से भी अपील की कि वे इस कठिन समय में कलाकार के साथ खड़े हों।सोनू ने लिखा कि राजपाल यादव बेहद प्रतिभाशाली अभिनेता हैं, जिन्होंने सालों तक इंडस्ट्री को यादगार किरदार दिए। उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका सहयोग भविष्य के काम के साथ एडजस्ट होने वाला एक छोटा साइनिंग अमाउंट है, जो कलाकार के सम्मान का प्रतीक है। सोनू ने आगे कहा, जब कोई अपना मुश्किल हालात से गुजर रहा हो, तो इंडस्ट्री उसका सपोर्ट करे, ताकि वह महसूस करे कि वह अकेला नहीं है। यही एकता दिखाती है कि फिल्म जगत सिर्फ काम करने की जगह नहीं, बल्कि एक परिवार भी है।

    राजपाल यादव की आर्थिक तंगी
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिहाड़ जेल में सरेंडर करने से कुछ समय पहले, राजपाल यादव ने अधिकारियों के सामने खुलकर अपनी आर्थिक बदहाली का दर्द साझा किया। उन्होंने कहा, सर, मेरे पास पैसे नहीं हैं कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा।  राजपाल की कानूनी उलझनें लगभग एक दशक पुरानी हैं। साल 2010 में उन्होंने अपनी पहली निर्देशित फिल्म अता पता लापता के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म फ्लॉप होने के बाद कर्ज की अदायगी नहीं हो पाई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

    कोर्ट का रुख और जेल की सजा

    शिकायतकर्ता को दिए गए सातों चेक बाउंस होने के कारण अदालत ने राजपाल यादव को छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई। हाई कोर्ट तक लंबी सुनवाई और रिवीजन याचिकाओं के बावजूद बकाया रकम बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। 4 फरवरी 2026 को उनकी अंतिम याचिका खारिज हो गई। अदालत ने कहा कि एक्टर पहले भी लगभग 20 बार भुगतान में असफल रहे हैं। 5 फरवरी 2026 को राजपाल यादव ने छह महीने की जेल की सजा काटने के लिए तिहाड़ में सरेंडर किया।

    सोनू सूद ने की मदद की अपील
    सोनू ने यह स्पष्ट किया कि उनका सहयोग चैरिटी नहीं, बल्कि पेशेवर सम्मान और इंडस्ट्री में एकता का प्रतीक है। उन्होंने इंडस्ट्री से अपील की कि वे फिल्म प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और सह-कलाकार मिलकर राजपाल यादव का सहयोग करें, ताकि वह इस कठिन दौर से बाहर निकल सकें।

  • चारधाम में नो एंट्री पर इमाम की दो टूक: मक्का-मदीना की तरह ,गंगोत्री के भी अपने नियम मुस्लिमों का वहां क्या काम?

    चारधाम में नो एंट्री पर इमाम की दो टूक: मक्का-मदीना की तरह ,गंगोत्री के भी अपने नियम मुस्लिमों का वहां क्या काम?

    नई दिल्ली । देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थलों बद्रीनाथ केदारनाथ और गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने की सुगबुगाहट ने देश के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर इसे लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने इस संभावित फैसले का पुरजोर समर्थन कर सबको चौंका दिया है। इमाम इलियासी ने इसे पूरी तरह आस्था का विषय करार देते हुए तर्क दिया है कि जिस प्रकार इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है उसी तरह हिंदू धर्मस्थलों को भी अपने नियम तय करने का पूरा अधिकार है।

    आस्था और मर्यादा की दलील इमाम उमर अहमद इलियासी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर धर्मस्थल की अपनी गरिमा और मर्यादा होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक मुसलमान का गंगोत्री या केदारनाथ जैसे पवित्र सनातनी केंद्रों में क्या काम? उनके अनुसार यदि कोई मुस्लिम ऐसी जगहों पर जाता है जहां सदियों पुरानी सनातनी परंपराएं जुड़ी हैं तो वहां वैचारिक या शारीरिक टकराव की स्थिति बन सकती है। उन्होंने नसीहत दी कि मुसलमानों को दूसरे धर्मों की अत्यंत पवित्र जगहों पर जाने से परहेज करना चाहिए। इमाम ने तिरुपति बालाजी मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी इसी प्रकार के कड़े नियम लागू हैं और सभी समुदायों को एक-दूसरे के धार्मिक नियमों और सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। उनके मुताबिक इस मुद्दे पर राजनीति करना व्यर्थ है क्योंकि यह सीधे तौर पर किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है।

    मंदिर समितियों की एकजुटता वर्तमान स्थिति यह है कि गंगोत्री मंदिर समिति ने पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय ले लिया है। वहीं बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने सभी संबंधित हितधारकों और तीर्थ पुरोहितों के साथ इस विषय पर आम सहमति बना ली है। अब बस बोर्ड की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया जाना बाकी है। हालांकि समितियों ने यह स्पष्ट किया है कि सनातन धर्म में सच्ची आस्था रखने वाले किसी भी व्यक्ति का स्वागत किया जाएगा चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि का हो। दूसरी ओर हरिद्वार की गंगा सभा ने भी हर की पौड़ी पर इसी तरह की पाबंदी लगाने की मांग तेज कर दी है जिससे यह अभियान पूरे उत्तराखंड में फैलता दिख रहा है।

    सियासी घमासान और विरोध के स्वर जैसे-जैसे यह मामला चर्चा में आ रहा है उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी रणनीति बताया है। उत्तराखंड कांग्रेस का आरोप है कि सरकार बेरोजगारी और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के भावनात्मक विवाद पैदा कर रही है। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गंगोत्री जैसे ऊंचे और पवित्र स्थानों पर पहले से ही कोई मुसलमान नहीं जाता लेकिन वहां पहचान साबित करने जैसी अनिवार्य शर्तें लगाना समाज में नफरत का जहर घोलने जैसा है। फिलहाल उत्तराखंड सरकार ने इस संवेदनशील विषय पर फूंक-फूंक कर कदम रखने का संकेत दिया है और कहा है कि सभी मंदिर समितियों का पक्ष सुनने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।