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  • राजधानी में ट्रैफिक क्रांति, 34,800 करोड़ का मास्टर प्लान करेगा दिल्ली-NCR की सड़कों को पूरी तरह बदलने का दावा

    राजधानी में ट्रैफिक क्रांति, 34,800 करोड़ का मास्टर प्लान करेगा दिल्ली-NCR की सड़कों को पूरी तरह बदलने का दावा


    नई दिल्ली ।
      दिल्ली में लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने एक बड़ा और महत्वाकांक्षी मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसके तहत राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सड़क ढांचे को पूरी तरह नया रूप देने की योजना बनाई गई है। इस 34,800 करोड़ रुपये की परियोजना का उद्देश्य दिल्ली-NCR को सिग्नल-फ्री और तेज रफ्तार यातायात व्यवस्था में बदलना है, जिससे लोगों को रोजमर्रा के जाम से राहत मिल सके।

    इस योजना के तहत लगभग 186 किलोमीटर लंबी नई सड़कों, एक्सप्रेसवे, सुरंगों और एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए उन प्रमुख मार्गों को जोड़ा जाएगा जहां सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव रहता है, खासकर एयरपोर्ट, बाहरी रिंग रोड और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों के आसपास। सरकार का लक्ष्य है कि भारी वाहनों को शहर के अंदर आने से रोका जाए और उन्हें वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया जाए, जिससे शहरी सड़कों पर दबाव कम हो सके।

    योजना के तहत कई महत्वपूर्ण रूट्स को आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे द्वारका, रोहिणी, पंजाबी बाग, गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आएगा। इसके साथ ही एयरपोर्ट और प्रमुख व्यावसायिक इलाकों तक पहुंच को और तेज और आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है। इस मास्टर प्लान का उद्देश्य केवल नए मार्ग बनाना नहीं है, बल्कि पूरे ट्रैफिक सिस्टम को पुनर्गठित करना भी है।

    इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अंडरग्राउंड टनल प्रोजेक्ट भी है, जिसके तहत एयरपोर्ट के आसपास एक लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जिससे वाहन बिना किसी ट्रैफिक सिग्नल के सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। यह प्रोजेक्ट दिल्ली के व्यस्ततम इलाकों में यात्रा समय को काफी हद तक कम करने में मदद करेगा।

    इसके अलावा दिल्ली और गुरुग्राम के बीच एक नया एलिवेटेड कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिससे आईएमएस, हौज खास और महिपालपुर जैसे क्षेत्रों से होते हुए तेज और निर्बाध यात्रा संभव हो सकेगी। इस कॉरिडोर का उद्देश्य मौजूदा हाईवे पर दबाव को कम करना और यात्रा को अधिक सुगम बनाना है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कई प्रमुख सड़क परियोजनाएं राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों को सौंप दी गई हैं ताकि उनका तेजी से विकास हो सके। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दिल्ली और एनसीआर के कई हिस्सों में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।

  • सड़क विकास को मिली रफ्तार, बंगाल ने सात हाईवे खंड केंद्र को ट्रांसफर करने का रास्ता साफ किया

    सड़क विकास को मिली रफ्तार, बंगाल ने सात हाईवे खंड केंद्र को ट्रांसफर करने का रास्ता साफ किया

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सड़क ढांचे को मजबूत करने और लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के सात प्रमुख खंडों को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड को सौंपने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद लंबे समय से अटके हुए बुनियादी ढांचा विकास कार्यों के तेजी से आगे बढ़ने की संभावना बन गई है।

    इन सात खंडों का संचालन अब तक राज्य के लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अंतर्गत किया जा रहा था। केंद्र सरकार की ओर से लगातार अनुरोध किए जाने के बावजूद इन मार्गों के हस्तांतरण में देरी हो रही थी, जिससे कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं ठप पड़ी थीं। अब इस मंजूरी के साथ केंद्रीय एजेंसियों को इन मार्गों पर बिना किसी बाधा के कार्य शुरू करने का अवसर मिल सकेगा।

    एनएचएआई को जिन प्रमुख खंडों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनमें एनएच-312 का वह महत्वपूर्ण हिस्सा शामिल है जो जंगीपुर, उमरपुर, कृष्णानगर, बनगांव और बसीरहाट को जोड़ते हुए भारत-बांग्लादेश सीमा तक जाता है। इसके अलावा बिहार से पश्चिम बंगाल सीमा को जोड़ने वाले एनएच-31 और फरक्का तक पहुंचने वाले एनएच-33 के हिस्से भी इसमें शामिल हैं। ये सभी मार्ग व्यापार और सीमा कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद अहम माने जाते हैं।

    वहीं दूसरी ओर, एनएचआईडीसीएल को जिन खंडों की जिम्मेदारी दी गई है, उनमें सेवक आर्मी कैंटोनमेंट से लेकर कोरोनेशन ब्रिज, कालिम्पोंग और पश्चिम बंगाल-सिक्किम सीमा तक जाने वाला नया एनएच-10 मार्ग शामिल है। इसके अलावा भारत-भूटान सीमा तक जाने वाला हासिमारा-जयगांव मार्ग, बांग्लादेश सीमा तक पहुंचने वाला बारादिघी-मैनागुड़ी-चांगराबंधा कॉरिडोर और सिलीगुड़ी-कुर्सियांग-दार्जिलिंग का पहाड़ी मार्ग भी इस सूची में शामिल हैं।

    इन परियोजनाओं के शुरू होने से न केवल राज्य के भीतर सड़क संपर्क बेहतर होगा, बल्कि पड़ोसी देशों जैसे भूटान और बांग्लादेश के साथ कनेक्टिविटी भी मजबूत होने की उम्मीद है। उत्तरी बंगाल, दुआर क्षेत्र और पहाड़ी इलाकों में परिवहन व्यवस्था में सुधार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है। इसके साथ ही मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में भी आवागमन सुगम होगा।

    राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी और लंबे समय से लंबित बुनियादी ढांचा कार्यों को नई दिशा मिलेगी। केंद्रीय एजेंसियों की तकनीकी क्षमता और संसाधनों के साथ इन राजमार्गों का विकास अधिक तेजी और प्रभावशीलता के साथ किया जा सकेगा।

    यह निर्णय राज्य और केंद्र के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल सड़क नेटवर्क का विस्तार होगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा एवं संपर्क व्यवस्था भी पहले से अधिक मजबूत हो सकेगी।

  • चार राज्यों को जोड़ने वाला हाईस्पीड कॉरिडोर तैयार, बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर एक्सप्रेसवे से घटेगा आधा सफर समय

    चार राज्यों को जोड़ने वाला हाईस्पीड कॉरिडोर तैयार, बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर एक्सप्रेसवे से घटेगा आधा सफर समय

    नई दिल्ली । भारत में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के बीच एक और महत्वाकांक्षी परियोजना सुर्खियों में है, जो देश के दक्षिण और मध्य हिस्सों की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से विकसित किया जा रहा बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर हाईस्पीड एक्सप्रेसवे एक ऐसा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर है, जो न केवल यात्रा को तेज बनाएगा बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगा।

    यह लगभग 1100 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे चार प्रमुख राज्यों से होकर गुजरेगा, जिनमें कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं। इस मार्ग में आने वाले प्रमुख शहरों में नागपुर, हिंगनघाट, आदिलाबाद, निजामाबाद, हैदराबाद, कुरनूल, अनंतपुर और चिक्काबल्लापुर जैसे महत्वपूर्ण केंद्र शामिल हैं। यह कॉरिडोर इन क्षेत्रों को सीधे एक हाईस्पीड नेटवर्क से जोड़ देगा, जिससे व्यापार और आवागमन दोनों में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा।

    वर्तमान समय में महाराष्ट्र के नागपुर से कर्नाटक के बेंगलुरु तक की यात्रा में लगभग 23 से 24 घंटे का समय लग जाता है। लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद यही सफर घटकर लगभग 11 से 12 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इसे 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुरक्षित और तेज हो जाएगी।

    इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 35 हजार करोड़ रुपये है। शुरुआत में इसे 6-लेन एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसे भविष्य में बढ़ते यातायात को देखते हुए 8 या 12 लेन तक विस्तारित करने की योजना भी शामिल है। यह एक एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे होगा, जिसमें प्रवेश और निकास के लिए सीमित स्थान निर्धारित किए जाएंगे, जिससे ट्रैफिक फ्लो सुचारू और नियंत्रित रहेगा।

    इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता इसके आसपास विकसित होने वाली औद्योगिक संरचना है। इसके किनारे विशेष आर्थिक क्षेत्र और औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और रियल एस्टेट तथा व्यापारिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

    हाल ही की प्रगति के अनुसार, परियोजना के कई हिस्सों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर काम तेजी से चल रहा है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि पर्यावरणीय मंजूरियों के कारण कुछ चरणों में देरी देखने को मिली, लेकिन अब परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    यह हाईस्पीड एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि एक व्यापक विकास मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और आर्थिक ढांचे को एक नई गति प्रदान करेगा।

  • MP में NH-52 का बड़ा अपग्रेड: 4 लेन से 6 लेन बनेगा इंदौर-खलघाट कॉरिडोर, NHAI ने शुरू किया काम

    MP में NH-52 का बड़ा अपग्रेड: 4 लेन से 6 लेन बनेगा इंदौर-खलघाट कॉरिडोर, NHAI ने शुरू किया काम

    इंदौर । मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-52 (NH-52) के इंदौर-खलघाट-सेंधवा-महाराष्ट्र सेक्शन को 4-लेन से 6-लेन में बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस अहम हिस्से के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पर काम शुरू कर दिया है। यह हिस्सा आगरा-मुंबई कॉरिडोर का महत्वपूर्ण भाग है, जिसकी लंबाई लगभग 160 किलोमीटर है।

    इस अपग्रेड के बाद क्षेत्र में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और बढ़ते ट्रैफिक दबाव को नियंत्रित करना आसान हो जाएगा। परियोजना के तहत भेरू घाट, बाकनेर घाट और बिजासन घाट जैसे कठिन पहाड़ी क्षेत्रों को भी 6-लेन में बदला जाएगा।

    DPR तैयार होने के बाद शुरू होगा निर्माण
    NHAI के अनुसार फिलहाल DPR तैयार करने का काम जारी है। रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के बाद निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को लंबे समय के ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षित यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है।

    नर्मदा पर बनेगा नया पुल
    खलघाट क्षेत्र में नर्मदा नदी पर एक नया समानांतर पुल बनाने का भी प्रस्ताव है। इससे मौजूदा पुल पर दबाव कम होगा और 6-लेन कॉरिडोर पर निर्बाध यातायात सुनिश्चित किया जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना से यात्रा का समय घटेगा, ट्रैफिक फ्लो बेहतर होगा और मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र के बीच संपर्क और मजबूत होगा।

    सुरक्षा और सड़क सुधार पर जोर
    NHAI ने बताया कि पहले हुए 4-लेन कार्यों के दौरान सड़क का रिअलाइनमेंट, चौड़ीकरण और ढलान सुधार जैसे कई कदम उठाए गए थे, जिससे सुरक्षा में सुधार हुआ। अब 6-लेन विस्तार में इन सुधारों को और मजबूत किया जाएगा। इस परियोजना में भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बाईपास, सर्विस रोड, फ्लाईओवर और अंडरपास बनाने की योजना भी शामिल है। खासकर बिजासन घाट जैसे दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैकस्पॉट) को सुरक्षित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    रोजाना 40 हजार वाहनों का दबाव
    NH-52 का यह हिस्सा आगरा से मुंबई को जोड़ने वाले प्रमुख कॉरिडोर का हिस्सा है, जिससे इंदौर और मुंबई जैसे बड़े आर्थिक केंद्र भी जुड़े हैं। इस मार्ग से रोजाना लगभग 40,000 वाहन गुजरते हैं, जिनमें भारी मालवाहन भी शामिल हैं। 6-लेन बनने के बाद यह मार्ग अधिक सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद होगा, साथ ही यात्रा समय में भी कमी आएगी।

    औद्योगिक विकास को मिलेगा फायदा
    इस परियोजना से NH-47 और प्रस्तावित इंदौर-वेस्टर्न बायपास को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही मध्य भारत के औद्योगिक केंद्र पीथमपुर को बड़ा लाभ मिलेगा, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और सप्लाई चेन और बेहतर होगी।

  • विंध्य को मिलेगा विकास का नया हाईवे, सीधी सिंगरौली फोर लेन से प्रयागराज और वाराणसी से सीधे जुड़ेगा मध्य प्रदेश

    विंध्य को मिलेगा विकास का नया हाईवे, सीधी सिंगरौली फोर लेन से प्रयागराज और वाराणसी से सीधे जुड़ेगा मध्य प्रदेश

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के लिए बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने राष्ट्रीय राजमार्ग-39 के सीधी सिंगरौली खंड के शेष 105 किलोमीटर फोर लेन निर्माण कार्य का अवॉर्ड जारी कर दिया है। लंबे समय से लंबित इस परियोजना को अब गति मिलने जा रही है और उम्मीद है कि अप्रैल 2026 से इसका निर्माण कार्य धरातल पर शुरू हो जाएगा। यह परियोजना न केवल विंध्य क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी बल्कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच व्यापार परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगी।

    सीधी सिंगरौली मार्ग को विंध्य क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता है। अभी तक इस मार्ग पर संकरी सड़कें और सीमित पुल होने के कारण यात्रियों और भारी वाहनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। कई जगहों पर जाम और दुर्घटनाओं की स्थिति भी बनती थी। लेकिन अब एनएचएआई इस सड़क को आधुनिक वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने जा रहा है जिससे आवागमन सुरक्षित और तेज हो सकेगा।

    इस परियोजना के तहत केवल सड़क का चौड़ीकरण ही नहीं होगा बल्कि बड़े पैमाने पर आधुनिक बुनियादी ढांचा भी विकसित किया जाएगा। योजना के अनुसार इस मार्ग पर तीन रेलवे ओवर ब्रिज और एक रेलवे अंडर ब्रिज बनाए जाएंगे। इसके अलावा तीन बड़े पुल और 33 छोटे पुलों का निर्माण भी किया जाएगा। सड़क पर सुचारु आवागमन सुनिश्चित करने के लिए कई अंडरपास भी बनाए जाएंगे जिनमें स्थानीय वाहनों की आवाजाही के लिए 11 व्हीकुलर अंडरपास और एक पैदल अंडरपास शामिल है।

    सड़क निर्माण के साथ ही आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम भी तैयार किया जाएगा ताकि बारिश के दौरान पानी जमा होने की समस्या से बचा जा सके। इसके तहत 85 बॉक्स कलवर्ट और 165 पाइप कलवर्ट बनाए जाएंगे जिससे सड़क के दोनों ओर बेहतर जल निकासी की व्यवस्था हो सकेगी।

    इस हाईवे के निर्माण से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच दूरी और यात्रा समय दोनों में कमी आएगी। खासतौर पर विंध्य क्षेत्र के जिलों की कनेक्टिविटी प्रयागराज मिर्जापुर रॉबर्ट्सगंज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों से सीधे और तेज तरीके से जुड़ जाएगी। इससे व्यापारिक गतिविधियों को भी बड़ा फायदा मिलेगा और माल परिवहन अधिक सुगम हो सकेगा।

    सिंगरौली को देश का ऊर्जा हब माना जाता है जहां कोयला बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियां बड़े पैमाने पर होती हैं। ऐसे में बेहतर सड़क नेटवर्क बनने से यहां से होने वाले लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को नई गति मिलेगी। भारी वाहनों के लिए जंक्शन सुधार सर्विस रोड और बेहतर यातायात व्यवस्था भी इस परियोजना का हिस्सा है।

    इसके साथ ही विंध्य क्षेत्र की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए रीवा से सीधी के बीच फोर लेन हाईवे बनाने की योजना भी अंतिम चरण में है। इस परियोजना का अवॉर्ड जल्द जारी होने की संभावना है और मानसून के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है। इसके अलावा देवतालाब नईगढ़ी मार्ग के निर्माण से रीवा की कनेक्टिविटी प्रयागराज से और अधिक आसान हो जाएगी।

    कुल मिलाकर यह परियोजना विंध्य क्षेत्र के विकास व्यापार और परिवहन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सड़क नेटवर्क के मजबूत होने से न केवल यात्रा आसान होगी बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

  • Toll Tax: इस तारीख से नेशनल हाईवे पर नकद टोल बंद करने की तैयारी, फास्टैग-यूपीआई होंगे अनिवार्य

    Toll Tax: इस तारीख से नेशनल हाईवे पर नकद टोल बंद करने की तैयारी, फास्टैग-यूपीआई होंगे अनिवार्य

    नई दिल्ली । देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) 1 अप्रैल 2026 से सभी टोल प्लाजा पर नकद भुगतान बंद करने पर विचार कर रहा है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो टोल शुल्क केवल डिजिटल माध्यमों जैसे FASTag और UPI के जरिए ही लिया जाएगा।

    फास्टैग का बढ़ता प्रयोग
    एनएचएआई के आधिकारिक बयान के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में फास्टैग का उपयोग 98 प्रतिशत से अधिक हो चुका है।

    इससे टोल वसूली के तरीके में व्यापक बदलाव आया है और अधिकांश टोल लेनदेन अब RFID-सक्षम फास्टैग के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से हो रहे हैं। इससे संपर्क रहित और तेज आवागमन संभव हो गया है। इसके अलावा, देशभर के टोल प्लाजा पर UPI भुगतान सुविधा भी शुरू हो चुकी है, जो त्वरित और सुलभ विकल्प प्रदान करती है।

    नकद भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क
    राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों के मुताबिक, वैध और सक्रिय फास्टैग के बिना टोल प्लाजा में प्रवेश करने वाले वाहनों से नकद भुगतान करने पर दोगुना शुल्क लिया जाता है। वहीं UPI के माध्यम से भुगतान करने पर निर्धारित उपयोगकर्ता शुल्क का 1.25 गुना शुल्क देना होता है।

    एनएचएआई ने बताया कि नकद भुगतान के कारण व्यस्त समय में लंबी कतारें लगती हैं, प्रतीक्षा अवधि बढ़ती है और लेनदेन विवाद भी उत्पन्न होते हैं।

    डिजिटल टोलिंग से बेहतर संचालन
    देशभर के 1150 से अधिक टोल केंद्रों पर पूर्ण डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू होने से परिचालन दक्षता, यातायात प्रबंधन और समय की बचत में सुधार की उम्मीद है। यह पहल एनएचएआई के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत प्रौद्योगिकी आधारित, उच्च दक्षता वाला और उपयोगकर्ता-अनुकूल राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, ताकि देशभर में आवागमन और अधिक सुगम और निर्बाध बनाया जा सके।

  • जबलपुर–दमोह फोरलेन पर बस्ती का बवाल, NHAI कार्यालय घेरा, करणी सेना ने 15 दिन में फैसला मांगा

    जबलपुर–दमोह फोरलेन पर बस्ती का बवाल, NHAI कार्यालय घेरा, करणी सेना ने 15 दिन में फैसला मांगा



    जबलपुर। जबलपुर–दमोह NH-34 को टू-लेन से फोरलेन करने की योजना के विरोध में बोरिया बस्ती के ग्रामीणों ने शुक्रवार को सड़क पर उतरकर NHAI कार्यालय का घेराव किया। करणी सेना के कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय नागरिक भी प्रदर्शन में शामिल रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि बस्ती के 50 से अधिक घर फोरलेन के लिए ध्वस्त हो सकते हैं, जिससे 150 से अधिक लोग बेघर होने की कगार पर हैं।
    करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग प्रताप राघव ने NHAI को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में प्रभावितों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा, जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक आंदोलन बढ़ाया जाएगा। क्षेत्रीय विधायक और स्थानीय मंत्री ग्रामीणों के समर्थन में नहीं खड़े हुए, इसलिए करणी सेना ने मोर्चा संभाला है।

    ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें उजाड़ा जा रहा है, जो पूरी तरह अन्याय है। महिलाओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि वर्षों से बसे परिवारों को हटाने से पहले प्रशासन को पुनर्वास और वैकल्पिक इंतजामों की ठोस योजना प्रस्तुत करनी चाहिए।

    ग्रामीणों की मुख्य मांगें
    प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था हो
    जमीन अधिग्रहण पर तत्काल रोक
    प्रभावितों को साथ लेकर प्रोजेक्ट के विकल्पों पर चर्चा
    सड़क के सेंटर से दोनों तरफ बराबर भूमि अधिग्रहण किया जाए
    बोरिया गांव के सतिश पटेल ने कहा कि वर्तमान में 70 फीट की सड़क को 150 फीट करने की योजना है, लेकिन सड़क एक तरफ चौड़ी की जा रही है, जिससे 70 मकान प्रभावित हो रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि रोड सेंटर से दोनों तरफ बराबर अधिग्रहण किया जाए या बस्ती वाले क्षेत्र में सड़क चौड़ाई को घटाकर 120 फीट किया जाए। साथ ही प्रभावितों को मुआवजे के साथ घर बनाने के लिए जमीन भी दी जाए।

    सुनीता बर्मन ने कहा कि यदि उनका घर टूटता है तो वे पूरी तरह से बर्बाद हो जाएँगी, क्योंकि परिवार में बुजुर्ग ही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क के विरोध में नहीं हैं, लेकिन सरकार को यह देखना चाहिए कि किसी को बेघर न किया जाए।

    NHAI का जवाब
    NHAI प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू ने कहा कि फोरलेन के लिए 150 फीट भूमि अधिग्रहण का नियम है। बोरिया और आसपास के गांवों में बायपास का प्रावधान नहीं है, इसलिए मुख्य मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर फ्लाईओवर भी बनाया जाएगा। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि जनता की मांग पर विचार किया जाएगा और वैकल्पिक विकल्पों पर काम किया जाएगा।
  • सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को दिया अल्टीमेटम: हर 50 किलोमीटर पर गौशाला बनाएं, आवारा जानवरों के लिए CSR से समाधान जरूरी

    सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को दिया अल्टीमेटम: हर 50 किलोमीटर पर गौशाला बनाएं, आवारा जानवरों के लिए CSR से समाधान जरूरी


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को गुरुवार को निर्देश दिया कि वह सड़क निर्माण में लगे ठेकेदारों से राजमार्गों पर आवारा जानवरों की देखभाल के लिए CSR के तहत गौशाला/पशु आश्रय बनाने पर विचार करने को कहे। अदालत ने कहा कि लगभग हर 50 किलोमीटर के बाद ऐसे आश्रय बनाकर आवारा पशुओं को संरक्षित किया जा सकता है।

    न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने आवारा कुत्तों के स्थानांतरण और बधियाकरण संबंधी 7 नवंबर, 2025 के आदेश में संशोधन की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

    पंजाब, राजस्थान, यूपी और तमिलनाडु पर कोर्ट ने जताया असंतोष
    सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्यों के निर्देशों के अनुपालन पर असंतोष जताया। कोर्ट ने पंजाब सरकार के दैनिक 100 कुत्तों के बधियाकरण प्रयास को अपर्याप्त बताते हुए इसे “ऊंट के मुंह में जीरे” जैसा बताया।

    NHAI से ऐप बनाने का निर्देश
    कोर्ट ने NHAI से कहा कि वह एक ऐप विकसित करे, जिसमें लोग राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा जानवरों को देखने पर तुरंत सूचना दे सकें। इससे सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।

    राज्यों की रिपोर्टों पर कोर्ट ने उठाए सवाल
    NHAI ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1300 से अधिक संवेदनशील स्थान हैं। कुछ राज्यों ने कदम उठाए हैं, लेकिन महाराष्ट्र, झारखंड और राजस्थान जैसे राज्यों ने अभी तक समस्या के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की।

    राजस्थान ने कहा कि राज्य में बधियाकरण केंद्र बनाए गए हैं और संस्थानों के आसपास बाड़बंदी की गई है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि केवल 45 वैन से यह काम संभव नहीं है।

    कोर्ट ने दी चेतावनी: समस्या बढ़ती जाएगी
    पीठ ने कहा कि यदि अभी कार्रवाई नहीं हुई तो आवारा कुत्तों की संख्या हर साल 10-15% तक बढ़ेगी। कोर्ट ने कहा कि 100 कुत्तों का रोज़ाना बधियाकरण कोई समाधान नहीं है।

    AWBI के पास 250+ आवेदन लंबित, कोर्ट ने फटकार लगाई
    भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) ने बताया कि 7 नवंबर के आदेश के बाद 250 से अधिक बधियाकरण केंद्र और आश्रय खोलने के आवेदन आए हैं, लेकिन कई आवेदन पर अभी भी निर्णय नहीं लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने AWBI से कहा कि वे जल्दी से जल्दी निर्णय लें।

    कोर्ट ने राज्यों को दिया चेतावनी संकेत
    सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी को कहा था कि यदि कुत्ते के काटने की घटनाएं बढ़ती हैं तो राज्यों को भारी हर्जाना देना होगा और कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
    सुप्रीम कोर्ट ने आवारा पशुओं की समस्या पर सख्त रुख अपनाया है और NHAI को CSR के जरिए गौशाला बनाने, ऐप बनाने और ठेकेदारों को जिम्मेदार बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्यों को चेतावनी दी है कि यदि वे निर्देशों का पालन नहीं करेंगे तो कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना हो सकता है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को निर्देश दिया: 50 किलोमीटर के बाद गौशाला बनाएं, आवारा पशुओं की देखभाल CSR से हो

    सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को निर्देश दिया: 50 किलोमीटर के बाद गौशाला बनाएं, आवारा पशुओं की देखभाल CSR से हो


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से कहा है कि सड़क निर्माण में लगे ठेकेदारों को आवारा जानवरों की समस्या से निपटने के लिए CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी) के तहत गौशाला/पशु आश्रय बनाने के निर्देश दिए जाएं। कोर्ट ने कहा कि हर 50 किलोमीटर के बाद ऐसे आश्रय बनाकर आवारा पशुओं की देखभाल सुनिश्चित की जा सकती है। कोर्ट ने कई राज्यों पर जताया असंतोष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के निर्देशों के पालन पर नाराजगी जताई।
    कोर्ट ने विशेषकर पंजाब सरकार के दैनिक 100 कुत्तों के बधियाकरण प्रयास को अपर्याप्त बताया और इसे “ऊंट के मुंह में जीरे” जैसा बताया। NHAI को ऐप बनाने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने NHAI से कहा कि वह एक ऐप विकसित करे, जिसमें आम लोग राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा जानवरों को देखने पर सूचना (report) कर सकें।
    इससे तुरंत कार्रवाई संभव होगी और दुर्घटनाओं में कमी आएगी। राज्यों की रिपोर्ट पर कोर्ट ने उठाए सवाल राजस्थान सरकार ने कहा कि उन्होंने बधियाकरण केंद्र बनाए हैं और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास बाड़बंदी की गई है, लेकिन कोर्ट ने इस पर भी संदेह जताया कि केवल 45 वैन से कैसे काम चलेगा।
    न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि जयपुर के लिए ही लगभग 20 वैन की जरूरत होगी और विभिन्न शहरों में वैन की संख्या बढ़ानी होगी। कोर्ट का सख्त संदेश: समस्या बढ़ती जा रही है पीठ ने चेतावनी दी कि अगर आवारा कुत्तों की समस्या पर तुरंत नियंत्रण नहीं हुआ तो हर साल उनकी संख्या 10-15% बढ़ती जाएगी। कोर्ट ने कहा कि 100 कुत्तों का बधियाकरण रोज़ाना कोई बड़ी मदद नहीं है।
    AWBI की स्थिति: 250 से अधिक आवेदन लंबित भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) ने बताया कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 250 से अधिक बधियाकरण केंद्र और आश्रय खोलने के लिए आवेदन आए, लेकिन अभी तक कई आवेदन पर कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने AWBI से कहा कि वे अभ्यर्थियों के आवेदन को जल्द निर्णय दें। कोर्ट ने राज्यों को दिया चेतावनी का संकेत सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी को कहा था कि यदि कुत्ते के काटने की घटनाओं में वृद्धि होती है तो राज्यों को भारी हर्जाना देना होगा और कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
    सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैंगौशाला, ऐप, CSR के तहत पहलऔर राज्यों को चेतावनी दी है कि इस समस्या को हल न किया गया तो कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना हो सकता है।
  • रिंग रोड निर्माण में दर्दनाक हादसा: पुल पिलर की सेंट्रिंग गिरने से मजदूर की मौत, दो घायल

    रिंग रोड निर्माण में दर्दनाक हादसा: पुल पिलर की सेंट्रिंग गिरने से मजदूर की मौत, दो घायल


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में रविवार देर रात रिंग रोड निर्माण के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसने निर्माण कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यू भेड़ाघाट क्षेत्र के ललपुर गांव के पास निर्माणाधीन पुल के पिलर की सेंट्रिंग अचानक गिर गई, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए। इस हादसे में पश्चिम बंगाल निवासी एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर की पहचान शेख नैरुद्दीन के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रात के समय पुल के पिलर पर सेंट्रिंग का काम चल रहा था, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से भारी ढांचा गिर पड़ा। सेंट्रिंग के नीचे काम कर रहे मजदूर संभल भी नहीं पाए और मलबे में दब गए। घटना के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और अन्य मजदूरों ने शोर मचाकर मदद की गुहार लगाई।

    हादसे में घायल हुए मजदूरों के नाम राहिल और राजेश्वर बताए जा रहे हैं। दोनों को हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। घायलों को तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर बताई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार दोनों मजदूर फिलहाल निगरानी में हैं और उनका इलाज जारी है।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया और एहतियातन रिंग रोड पर चल रहा निर्माण कार्य तुरंत रोक दिया गया। प्रारंभिक जांच में सेंट्रिंग के गिरने की वजह तकनीकी खामी या लापरवाही मानी जा रही है, हालांकि वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

    बताया जा रहा है कि रिंग रोड पर यह पुल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से बनवाया जा रहा है। हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण कार्य में नाबालिगों से भी काम कराया जा रहा था और मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के जोखिम भरे कार्य में लगाया गया था। हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य आवश्यक सुरक्षा साधनों की कमी के आरोप भी सामने आए हैं।

    इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर कर दिया है। मजदूरों की जान की कीमत पर तेजी से काम पूरा करने की प्रवृत्ति पर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। वहीं मृतक मजदूर के परिजनों को सूचना दे दी गई है और मुआवजे की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। कुल मिलाकर यह हादसा न सिर्फ एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है।