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  • लालच का वायरस, बना कारण जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग में 59 लाख की गड़बड़ी उजागर

    लालच का वायरस, बना कारण जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग में 59 लाख की गड़बड़ी उजागर


    जबलपुर । जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग एक बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर चर्चा में है, जहां करीब 59 लाख रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर विभाग में हड़कंप मच गया है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

    यह मामला संजीवनी क्लीनिकों के कायाकल्प और NQAS सर्टिफिकेशन की तैयारियों के लिए जारी की गई राशि से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, 58 संजीवनी क्लीनिकों को एक-एक लाख रुपये की राशि दी गई थी, ताकि रंगाई-पुताई और आवश्यक सुधार कार्य किए जा सकें, लेकिन आरोप है कि यह काम प्रस्तावित तरीके से पूरा नहीं हुआ।

    मामले के सामने आने के बाद यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्धारित कार्यों के बिना ही पूरी राशि का उपयोग कर लिया गया। इसके चलते संजीवनी अस्पतालों और क्लीनिकों के सुधार कार्य अधूरे रह गए, जबकि सरकारी फंड खर्च हो चुका था।

    इस वित्तीय अनियमितता के उजागर होने के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सख्त रुख अपनाते हुए चार अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। इनमें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नवीन कोठारी, सहायक शहरी कार्यक्रम प्रबंधक संदीप नामदेव, जिला क्वालिटी मॉनिटर शिखा गर्ग और लेखा प्रबंधक रेखा साहू शामिल हैं।

    अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि अगर तय मानकों के अनुसार NQAS सर्टिफिकेशन प्राप्त नहीं हुआ, तो संबंधित राशि की वसूली की कार्रवाई भी की जा सकती है। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

  • मप्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए एनएचएम और सनोफी इंडिया के बीच हुआ एमओयू

    मप्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए एनएचएम और सनोफी इंडिया के बीच हुआ एमओयू


    भोपाल।
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने मध्य प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से सनोफी इंडिया लिमिटेड के साथ मंगलवार को एक महत्वपूर्ण एमओयू किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य मधुमेह जैसे गैर-संचारी रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, उनकी शीघ्र पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करना और दुर्लभ रोगों से पीड़ित मरीजों को बेहतर सहयोग प्रदान करना है।

    एमओयू पर एनएचएम मध्य प्रदेश की मिशन डायरेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना और सनोफी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक अरोड़ा द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, आयुक्त धनराजू एस सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी एवं संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    एनएचएम एमडी डॉ. सलोनी सिडाना ने इस अवसर पर कहा कि यह पहल विशेष रूप से दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से लोगों को उनके क्षेत्र में ही निःशुल्क जांच, उपचार और डॉक्टरों से टेली-परामर्श की सुविधा मिलेगी। साथ ही मधुमेह एवं अन्य गैर-संचारी रोगों के लिए जागरूकता, प्रारंभिक जोखिम पहचान और रेफरल सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि दुर्लभ रोगों के लिए शीघ्र पहचान, निःशुल्क जांच और बेहतर उपचार व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे मरीजों को समय पर उचित देखभाल मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल स्तर पर बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण और जीवनशैली से संबंधित सही जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे स्वयं स्वस्थ आदतें अपनाने के साथ अपने परिवार और समुदाय में भी जागरूकता फैला सकें।

    सनोफी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अरोड़ा ने भारत में बढ़ते एनसीडी के दृष्टिगत शीघ्र पहचान की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सनोफी स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बनाने और मरीजों के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की साझेदारियों के प्रति प्रतिबद्ध है। यह साझेदारी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करेगी।

    इस अवसर पर बताया कि एमओयू के तहत दुर्लभ रोगों के निदान और उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा, जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण, उन्नत तकनीकों के माध्यम से शीघ्र पहचान तथा चयनित बीमारियों की निःशुल्क जांच की सुविधा चिन्हित संस्थानों में उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही मधुमेह एवं अन्य एनसीडी के लिए प्रारंभिक जोखिम पहचान, जागरूकता अभियान और रेफरल सेवाओं को मजबूत किया जाएगा, जिसमें राज्यभर में तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत “किड्स एंड डायबिटीज इन स्कूल्स (KiDS)” जैसे अभियानों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को स्वस्थ जीवनशैली, पोषण और रोगों की रोकथाम के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ एवं सामुदायिक कार्यकर्ताओं के लिए क्षमता निर्माण के तहत संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।

    एमओयू के तहत सिंगरौली, बालाघाट और अनूपपुर जिलों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की तैनाती की जाएगी, जिससे दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकेंगी। इन यूनिट्स के माध्यम से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मुख कैंसर जैसी बीमारियों की निःशुल्क जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रत्येक यूनिट में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी तैनात रहेंगे तथा डॉक्टरों से टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। प्रारंभिक चरण में यह सेवा इन तीन जिलों में शुरू की जाएगी और आवश्यकता अनुसार अन्य जिलों में भी विस्तार किया जाएगा।

  • मुरैना-धौलपुर रोड पर चलती कार में भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, NHM ने केंद्र को भेजी रिपोर्ट

    मुरैना-धौलपुर रोड पर चलती कार में भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, NHM ने केंद्र को भेजी रिपोर्ट


    नई दिल्ली ।  मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की टीम ने एक बड़े स्टिंग ऑपरेशन में चलती कार में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण करने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश किया। ऑपरेशन में टीम ने ननद बनकर महिला के साथ बैठी डॉक्टर और गर्भवती महिला को सुरक्षित बाहर निकाला।

    स्टिंग ऑपरेशन की झलक
    घटना 2 मई 2025 को मुरैना-धौलपुर रोड पर चंबल नदी के पुल के पास हुई।

    एक कार में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन लगाकर गर्भवती महिला का लिंग पता लगाया जा रहा था।

    पीछे से आ रही NHM की टीम ने गाड़ी को रोका, शीशे तोड़े और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।

    टीम में डॉ. प्रज्ञा तिवारी, डॉ. बिंदु, डॉ. प्रबल, डॉ. अनुभा और संजय जोशी शामिल थे।

    गिरोह का नेटवर्क
    जांच में सामने आया कि यह गिरोह मध्यप्रदेश-राजस्थान बॉर्डर क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय था।

    नेटवर्क में कुछ एएनएम और आशा कार्यकर्ता भी शामिल थीं।

    गर्भवती महिलाओं को अलग-अलग लोकेशन पर ले जाकर चलती कार में सोनोग्राफी की जाती थी।

    भ्रूण का लिंग मौखिक रूप से और स्क्रीन पर दिखाकर बताया जाता था।

    स्टिंग ऑपरेशन की तैयारी
    NHM ने करीब 6 महीने की तैयारी के बाद स्टिंग ऑपरेशन किया।

    एक गर्भवती महिला को डिकॉय के रूप में तैयार किया गया और गिरोह तक पहुंचाने के लिए स्थानीय इंफॉर्मर का उपयोग किया गया।

    आशा कार्यकर्ता ने भ्रूण लिंग बताने के लिए 50 हजार रुपए की मांग भी की।

    रिपोर्ट और केंद्र को जानकारी
    इस स्टिंग ऑपरेशन की जानकारी 6 मार्च 2026 को NHM की संयुक्त संचालक डॉ. प्रज्ञा तिवारी ने केंद्र सरकार को भेजी थी।

    रिपोर्ट में बताया गया कि प्रदेश में बिगड़ते लिंगानुपात के पीछे अवैध लिंग परीक्षण और फैमिली बैलेंसिंग तकनीकें बड़ी वजह हैं।

    लिंगानुपात पर चिंता
    आंकड़ों के अनुसार, 2016-18 में मध्यप्रदेश का लिंगानुपात 925 था, जो 2020-22 में घटकर 915 हो गया। 2023 में हल्का सुधार हुआ और यह 917 पर पहुंचा।

    ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों का जन्म अनुपात अभी भी कम (911) है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 941 दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रूण लिंग परीक्षण और बेटे की चाह सामाजिक मानसिकता के मुख्य कारण हैं।

    चुनौती अभी बाकी
    NHM का कहना है कि नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, लेकिन अवैध कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

    जागरूकता अभियान और इनफॉर्मर रिवॉर्ड (50 हजार से 2 लाख रुपए) के जरिए लोगों को सही रास्ते पर लाया जा रहा है।

    विभाग लगातार निगरानी और कानूनी कार्रवाई से इस काले कारोबार पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है।

    यह स्टिंग ऑपरेशन न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश में भ्रूण लिंग परीक्षण जैसे अवैध और सामाजिक रूप से घातक कृत्यों पर कड़ी कार्रवाई की मिसाल है।