Tag: NHM

  • एनएचएम और आयुष्मान भारत को बड़ी राशि, भोपाल-विदिशा मार्ग निर्माण सहित वन समितियों के लिए कैबिनेट ने लिए अहम फैसले

    एनएचएम और आयुष्मान भारत को बड़ी राशि, भोपाल-विदिशा मार्ग निर्माण सहित वन समितियों के लिए कैबिनेट ने लिए अहम फैसले

    मध्य प्रदेश: में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जन-स्वास्थ्य, सड़क अधोसंरचना, वन प्रबंधन और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 47 हजार 990 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।

    कैबिनेट के फैसलों में स्वास्थ्य क्षेत्र को सबसे बड़ी प्राथमिकता मिली। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के निरंतर संचालन के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 44 हजार 515.13 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 28 हजार 83.47 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। यह केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में संचालित केंद्र प्रवर्तित योजना है। इसके तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, टीकाकरण, टीबी उन्मूलन, सिकल सेल, किशोर स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।

    इसके अलावा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और गैर-एसईसीसी हितग्राहियों से संबंधित योजना के संचालन के लिए 12 हजार 123 करोड़ 81 लाख रुपये मंजूर हुए हैं। इसका उद्देश्य पात्र लोगों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार उपलब्ध कराना तथा बीमारी के कारण होने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।

    स्वास्थ्य संस्थाओं की सुरक्षा और सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 1,159 करोड़ 58 लाख रुपये तथा जिला स्तरीय अमले से संबंधित योजना के लिए 654 करोड़ 84 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जिला स्तरीय अमला योजना लंबे समय से स्वास्थ्य प्रशासन की व्यवस्था का हिस्सा रही है।

    सड़क अधोसंरचना के क्षेत्र में कैबिनेट ने भोपाल-विदिशा मार्ग के चार लेन निर्माण को मंजूरी दी है। 44.830 किलोमीटर लंबे मार्ग के निर्माण के लिए 1,757 करोड़ 55 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। परियोजना को हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल के आधार पर विकसित किया जाएगा।

    यह मार्ग भोपाल के भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होकर सांची-सलामतपुर जंक्शन तक जाएगा। इसके निर्माण से भोपाल और विदिशा के बीच संपर्क बेहतर होने के साथ औद्योगिक गतिविधियों और क्षेत्रीय अधोसंरचना को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मार्ग सांची जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन और सांस्कृतिक क्षेत्र से भी जुड़ा है।

    कैबिनेट ने भोपाल बायपास चार लेन मार्ग पर उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह की अनुमति भी दी है। 51.963 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 19 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2031 तक शुल्क संग्रह की स्वीकृति दी गई है। आवश्यकता होने पर इसकी अवधि पांच वर्ष तक बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग को अधिकृत किया गया है।

    भोपाल बायपास भोपाल को इंदौर, रायसेन, विदिशा और नर्मदापुरम जिलों से जोड़ता है। इसके संचालन और रखरखाव से शहर के भीतर यातायात दबाव कम करने में मदद मिलती है। टोल से प्राप्त राशि राज्य राजमार्ग निधि में जमा की जाएगी और सड़क विकास व रखरखाव पर खर्च होगी।

    वन क्षेत्र में संयुक्त वन प्रबंधन समितियों से जुड़ी योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 918 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसका उद्देश्य वन संरक्षण और संवर्धन में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाना है। प्रावधानों के तहत काष्ठ बिक्री से प्राप्त राजस्व की 20 प्रतिशत राशि समितियों को दी जाती है, जबकि बांस विदोहन से प्राप्त शुद्ध लाभ का प्रावधानित हिस्सा श्रमिकों को दिया जाता है।

  • आप सैलरी बताइए, सरकार देगी', एमपी की नई हेल्थ पॉलिसी से ग्रामीण अस्पतालों की बदलेगी तस्वीर

    आप सैलरी बताइए, सरकार देगी', एमपी की नई हेल्थ पॉलिसी से ग्रामीण अस्पतालों की बदलेगी तस्वीर


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ा और अनोखा कदम उठाया है। लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों में अब मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके, इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत ‘यू कोट, वी पे’ नीति लागू करने की तैयारी की गई है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य विशेषज्ञ डॉक्टरों को गांवों और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए आकर्षित करना है, ताकि गरीब और आदिवासी मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ न लगानी पड़े।

    नई नीति के तहत सरकार विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधे बातचीत करेगी और उनसे पूछेगी कि ग्रामीण क्षेत्र में सेवाएं देने के लिए वे कितना वेतन चाहते हैं। डॉक्टर अपनी अपेक्षित सैलरी बताएंगे और आपसी सहमति के आधार पर उनका मानदेय तय किया जाएगा। यही वजह है कि इस योजना को ‘यू कोट, वी पे’ यानी ‘आप मांगिए, हम देंगे’ नाम दिया गया है। सरकार का मानना है कि तय वेतन की वजह से जो विशेषज्ञ डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से बचते हैं, वे इस व्यवस्था के बाद वहां सेवाएं देने के लिए तैयार होंगे।

    सरकार ने केवल आकर्षक वेतन तक ही इस योजना को सीमित नहीं रखा है। दुर्गम और आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाले डॉक्टरों को विशेष दुर्गम क्षेत्र भत्ता, बेहतर आवास और भविष्य में पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) में प्रवेश के दौरान अतिरिक्त लाभ भी मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को पीजी एडमिशन में प्राथमिकता और बोनस अंक दिए जाएंगे, जिससे उनका करियर भी तेजी से आगे बढ़ सके।

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। महिला रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों को सिजेरियन ऑपरेशन और जच्चा-बच्चा की सुरक्षा से जुड़े मामलों में अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जाएगा। इससे ग्रामीण अस्पतालों में प्रसव के दौरान होने वाली जटिल परिस्थितियों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सकेगा और गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा।

    ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) और अन्य फील्ड स्टाफ को भी प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, टीकाकरण, स्वास्थ्य रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज करने और किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रमों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को बोनस दिया जाएगा। इससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।

    डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सरकार सामान्य चिकित्सकों को मल्टी-स्किलिंग प्रशिक्षण भी दे रही है। इस प्रशिक्षण के जरिए एक डॉक्टर प्रसूति सेवाएं, बच्चों का प्राथमिक उपचार और बेसिक एनेस्थीसिया जैसी कई जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम होगा। इससे विशेषज्ञों की कमी के बावजूद मरीजों का इलाज प्रभावित नहीं होगा।

    लोकसभा में रतलाम-झाबुआ-अलीराजपुर की सांसद अनिता नागरसिंह चौहान द्वारा आदिवासी क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने भी स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि मध्य प्रदेश में 14 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है, जिनमें छह आदिवासी बहुल जिलों में स्थापित किए जाएंगे। इन मेडिकल कॉलेजों के निर्माण पर होने वाले खर्च का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ‘यू कोट, वी पे’ नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो मध्य प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी काफी हद तक दूर हो सकती है। इससे गरीब और आदिवासी परिवारों को अपने जिले में ही बेहतर इलाज मिलेगा, स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा बढ़ेगा और ग्रामीण चिकित्सा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

  • लालच का वायरस, बना कारण जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग में 59 लाख की गड़बड़ी उजागर

    लालच का वायरस, बना कारण जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग में 59 लाख की गड़बड़ी उजागर


    जबलपुर । जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग एक बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर चर्चा में है, जहां करीब 59 लाख रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर विभाग में हड़कंप मच गया है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

    यह मामला संजीवनी क्लीनिकों के कायाकल्प और NQAS सर्टिफिकेशन की तैयारियों के लिए जारी की गई राशि से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, 58 संजीवनी क्लीनिकों को एक-एक लाख रुपये की राशि दी गई थी, ताकि रंगाई-पुताई और आवश्यक सुधार कार्य किए जा सकें, लेकिन आरोप है कि यह काम प्रस्तावित तरीके से पूरा नहीं हुआ।

    मामले के सामने आने के बाद यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्धारित कार्यों के बिना ही पूरी राशि का उपयोग कर लिया गया। इसके चलते संजीवनी अस्पतालों और क्लीनिकों के सुधार कार्य अधूरे रह गए, जबकि सरकारी फंड खर्च हो चुका था।

    इस वित्तीय अनियमितता के उजागर होने के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सख्त रुख अपनाते हुए चार अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। इनमें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नवीन कोठारी, सहायक शहरी कार्यक्रम प्रबंधक संदीप नामदेव, जिला क्वालिटी मॉनिटर शिखा गर्ग और लेखा प्रबंधक रेखा साहू शामिल हैं।

    अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि अगर तय मानकों के अनुसार NQAS सर्टिफिकेशन प्राप्त नहीं हुआ, तो संबंधित राशि की वसूली की कार्रवाई भी की जा सकती है। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

  • मप्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए एनएचएम और सनोफी इंडिया के बीच हुआ एमओयू

    मप्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए एनएचएम और सनोफी इंडिया के बीच हुआ एमओयू


    भोपाल।
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने मध्य प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से सनोफी इंडिया लिमिटेड के साथ मंगलवार को एक महत्वपूर्ण एमओयू किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य मधुमेह जैसे गैर-संचारी रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, उनकी शीघ्र पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करना और दुर्लभ रोगों से पीड़ित मरीजों को बेहतर सहयोग प्रदान करना है।

    एमओयू पर एनएचएम मध्य प्रदेश की मिशन डायरेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना और सनोफी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक अरोड़ा द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, आयुक्त धनराजू एस सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी एवं संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    एनएचएम एमडी डॉ. सलोनी सिडाना ने इस अवसर पर कहा कि यह पहल विशेष रूप से दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से लोगों को उनके क्षेत्र में ही निःशुल्क जांच, उपचार और डॉक्टरों से टेली-परामर्श की सुविधा मिलेगी। साथ ही मधुमेह एवं अन्य गैर-संचारी रोगों के लिए जागरूकता, प्रारंभिक जोखिम पहचान और रेफरल सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि दुर्लभ रोगों के लिए शीघ्र पहचान, निःशुल्क जांच और बेहतर उपचार व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे मरीजों को समय पर उचित देखभाल मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल स्तर पर बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण और जीवनशैली से संबंधित सही जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे स्वयं स्वस्थ आदतें अपनाने के साथ अपने परिवार और समुदाय में भी जागरूकता फैला सकें।

    सनोफी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अरोड़ा ने भारत में बढ़ते एनसीडी के दृष्टिगत शीघ्र पहचान की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सनोफी स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बनाने और मरीजों के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की साझेदारियों के प्रति प्रतिबद्ध है। यह साझेदारी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करेगी।

    इस अवसर पर बताया कि एमओयू के तहत दुर्लभ रोगों के निदान और उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा, जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण, उन्नत तकनीकों के माध्यम से शीघ्र पहचान तथा चयनित बीमारियों की निःशुल्क जांच की सुविधा चिन्हित संस्थानों में उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही मधुमेह एवं अन्य एनसीडी के लिए प्रारंभिक जोखिम पहचान, जागरूकता अभियान और रेफरल सेवाओं को मजबूत किया जाएगा, जिसमें राज्यभर में तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत “किड्स एंड डायबिटीज इन स्कूल्स (KiDS)” जैसे अभियानों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को स्वस्थ जीवनशैली, पोषण और रोगों की रोकथाम के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ एवं सामुदायिक कार्यकर्ताओं के लिए क्षमता निर्माण के तहत संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।

    एमओयू के तहत सिंगरौली, बालाघाट और अनूपपुर जिलों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की तैनाती की जाएगी, जिससे दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकेंगी। इन यूनिट्स के माध्यम से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मुख कैंसर जैसी बीमारियों की निःशुल्क जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रत्येक यूनिट में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी तैनात रहेंगे तथा डॉक्टरों से टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। प्रारंभिक चरण में यह सेवा इन तीन जिलों में शुरू की जाएगी और आवश्यकता अनुसार अन्य जिलों में भी विस्तार किया जाएगा।

  • मुरैना-धौलपुर रोड पर चलती कार में भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, NHM ने केंद्र को भेजी रिपोर्ट

    मुरैना-धौलपुर रोड पर चलती कार में भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, NHM ने केंद्र को भेजी रिपोर्ट


    नई दिल्ली ।  मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की टीम ने एक बड़े स्टिंग ऑपरेशन में चलती कार में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण करने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश किया। ऑपरेशन में टीम ने ननद बनकर महिला के साथ बैठी डॉक्टर और गर्भवती महिला को सुरक्षित बाहर निकाला।

    स्टिंग ऑपरेशन की झलक
    घटना 2 मई 2025 को मुरैना-धौलपुर रोड पर चंबल नदी के पुल के पास हुई।

    एक कार में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन लगाकर गर्भवती महिला का लिंग पता लगाया जा रहा था।

    पीछे से आ रही NHM की टीम ने गाड़ी को रोका, शीशे तोड़े और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।

    टीम में डॉ. प्रज्ञा तिवारी, डॉ. बिंदु, डॉ. प्रबल, डॉ. अनुभा और संजय जोशी शामिल थे।

    गिरोह का नेटवर्क
    जांच में सामने आया कि यह गिरोह मध्यप्रदेश-राजस्थान बॉर्डर क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय था।

    नेटवर्क में कुछ एएनएम और आशा कार्यकर्ता भी शामिल थीं।

    गर्भवती महिलाओं को अलग-अलग लोकेशन पर ले जाकर चलती कार में सोनोग्राफी की जाती थी।

    भ्रूण का लिंग मौखिक रूप से और स्क्रीन पर दिखाकर बताया जाता था।

    स्टिंग ऑपरेशन की तैयारी
    NHM ने करीब 6 महीने की तैयारी के बाद स्टिंग ऑपरेशन किया।

    एक गर्भवती महिला को डिकॉय के रूप में तैयार किया गया और गिरोह तक पहुंचाने के लिए स्थानीय इंफॉर्मर का उपयोग किया गया।

    आशा कार्यकर्ता ने भ्रूण लिंग बताने के लिए 50 हजार रुपए की मांग भी की।

    रिपोर्ट और केंद्र को जानकारी
    इस स्टिंग ऑपरेशन की जानकारी 6 मार्च 2026 को NHM की संयुक्त संचालक डॉ. प्रज्ञा तिवारी ने केंद्र सरकार को भेजी थी।

    रिपोर्ट में बताया गया कि प्रदेश में बिगड़ते लिंगानुपात के पीछे अवैध लिंग परीक्षण और फैमिली बैलेंसिंग तकनीकें बड़ी वजह हैं।

    लिंगानुपात पर चिंता
    आंकड़ों के अनुसार, 2016-18 में मध्यप्रदेश का लिंगानुपात 925 था, जो 2020-22 में घटकर 915 हो गया। 2023 में हल्का सुधार हुआ और यह 917 पर पहुंचा।

    ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों का जन्म अनुपात अभी भी कम (911) है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 941 दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रूण लिंग परीक्षण और बेटे की चाह सामाजिक मानसिकता के मुख्य कारण हैं।

    चुनौती अभी बाकी
    NHM का कहना है कि नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, लेकिन अवैध कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

    जागरूकता अभियान और इनफॉर्मर रिवॉर्ड (50 हजार से 2 लाख रुपए) के जरिए लोगों को सही रास्ते पर लाया जा रहा है।

    विभाग लगातार निगरानी और कानूनी कार्रवाई से इस काले कारोबार पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है।

    यह स्टिंग ऑपरेशन न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश में भ्रूण लिंग परीक्षण जैसे अवैध और सामाजिक रूप से घातक कृत्यों पर कड़ी कार्रवाई की मिसाल है।