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  • पहलगाम आतंकी हमले की चार्जशीट में सनसनीखेज खुलासे, धर्म पूछकर की गई थी हत्या, आतंकियों की पूरी साजिश सामने आई

    नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले को लेकर दाखिल चार्जशीट ने उस भयावह साजिश की पूरी तस्वीर सामने रख दी है, जिसने देश को झकझोर दिया था। जांच एजेंसियों के अनुसार यह हमला अचानक नहीं बल्कि पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया था, जिसमें आतंकियों ने पर्यटकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया और उनकी पहचान धर्म के आधार पर करने की कोशिश की। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

    जांच के दौरान सामने आया कि इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन टीआरएफ की भूमिका थी, जिसने शुरुआत में जिम्मेदारी ली थी लेकिन बाद में अपने बयान से पीछे हट गया। जांच एजेंसियों ने पाया कि हमले को तीन आतंकियों ने अंजाम दिया था, जिनकी पहचान फैसल जट्ट, हबीब ताहिर और हमजा अफगानी के रूप में हुई। इसके अलावा इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड सज्जाद जट्ट बताया गया है, जिसने हमले की रणनीति तैयार की थी।

    चार्जशीट के अनुसार आतंकियों ने बैसरन पार्क जैसे सुनसान और रणनीतिक स्थान को जानबूझकर चुना, जहां सुरक्षा व्यवस्था कमजोर थी और कोई सीधा सीसीटीवी कवरेज नहीं था। हमले से पहले आतंकियों ने इलाके की रेकी की और स्थानीय मददगारों के जरिए उन्हें लॉजिस्टिक सपोर्ट मिला। जांच में यह भी सामने आया कि आतंकियों ने पर्यटकों को रोककर उनका धर्म पूछा और जो लोग उनकी मांगों पर खरे नहीं उतरे, उन्हें गोली मार दी गई।

    गवाहों के बयान के अनुसार हमलावर लगातार लोगों से कलमा पढ़ने के लिए कह रहे थे और कई लोगों को बेहद नजदीक से गोली मारी गई। इस दौरान आतंकियों ने बार-बार ऐसे नारे और शब्दों का इस्तेमाल किया जो यह दर्शाते हैं कि उनका उद्देश्य सिर्फ हत्या नहीं बल्कि दहशत फैलाना भी था। जांच में यह भी सामने आया कि आतंकियों ने हमले के दौरान अलग-अलग पोजिशन लेकर पूरे इलाके को घेर लिया था ताकि किसी को भागने का मौका न मिले।

    चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आतंकियों ने हमले के लिए आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया, जिसमें M-4 कार्बाइन और AK-47 शामिल थे। पहले जिपलाइन वाले हिस्से से गोली चलाई गई और उसके बाद पूरे इलाके में अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गई। कुछ मिनटों में ही पूरा पर्यटन स्थल चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गया।

    जांच एजेंसियों ने स्थानीय लोगों और गवाहों से पूछताछ के आधार पर यह भी पाया कि आतंकियों को इलाके की पूरी जानकारी स्थानीय मददगारों से मिली थी। कुछ लोगों ने उन्हें खाना, ठहरने की जगह और मार्गदर्शन तक उपलब्ध कराया, जिससे उन्हें हमला करने में आसानी हुई। बाद में इन्हीं मददगारों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगीं।

    चार्जशीट में यह भी दर्ज है कि हमले के बाद आतंकियों ने मौके से भागते समय भी कई लोगों को रोका और उनसे पहचान पूछी। कई गवाहों ने बताया कि आतंकियों का व्यवहार बेहद संगठित और योजनाबद्ध था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई अचानक की गई वारदात नहीं बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी।

    इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों ने फॉरेंसिक साक्ष्यों, घटनास्थल की मैपिंग और सैकड़ों गवाहों के बयान के आधार पर चार्जशीट तैयार की है। अब यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है, लेकिन इस खुलासे ने एक बार फिर देश को उस दर्दनाक घटना की याद दिला दी है जिसने सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

  • पहलगाम हमला केस: NIA की चार्जशीट में लश्कर कमांडर सैफुल्लाह आरोपी नंबर-1 घोषित, ड्रोन और डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी साजिश का खुलासा

    पहलगाम हमला केस: NIA की चार्जशीट में लश्कर कमांडर सैफुल्लाह आरोपी नंबर-1 घोषित, ड्रोन और डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी साजिश का खुलासा

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में वर्ष 2025 में हुए भीषण आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी और अब जांच एजेंसी ने इस पूरी साजिश के पीछे पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन टीआरएफ के शीर्ष कमांडर सैफुल्लाह उर्फ साजिद जाट उर्फ ‘लंगड़ा’ को मुख्य साजिशकर्ता और आरोपी नंबर-1 बताया है। जांच में सामने आया है कि यह हमला किसी स्थानीय घटना का परिणाम नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क द्वारा रची गई गहरी साजिश थी, जिसमें डिजिटल संचार, ड्रोन तकनीक और ओवरग्राउंड नेटवर्क का व्यापक उपयोग किया गया।

    जांच एजेंसी के अनुसार सैफुल्लाह पाकिस्तान के लाहौर में बैठकर इस पूरे हमले को अंजाम देने की रणनीति तैयार कर रहा था और हमलावरों को रियल टाइम निर्देश भी दे रहा था। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हमले के दौरान आतंकियों को जीपीएस कोऑर्डिनेट्स और रास्तों की जानकारी लगातार उपलब्ध कराई जा रही थी, जिससे वे अपने लक्ष्य तक आसानी से पहुंच सके। जांच में मिले तकनीकी सबूतों, जैसे आईपी एड्रेस और मोबाइल नेटवर्क डेटा, ने इस बात की पुष्टि की है कि हमले की योजना और संचालन पूरी तरह सीमापार बैठे नेटवर्क द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था।

    एजेंसी ने यह भी खुलासा किया है कि इस हमले के पीछे केवल हिंसा ही उद्देश्य नहीं था, बल्कि इसके साथ एक संगठित प्रोपेगैंडा अभियान भी चलाया गया था, जिसका मकसद इस घटना को गलत तरीके से पेश कर भ्रम फैलाना था। हालांकि जांच में जुटाए गए डिजिटल और मानव स्रोतों के साक्ष्यों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। चार्जशीट के अनुसार हमले से पहले और बाद में सोशल मीडिया के माध्यम से झूठी जानकारी फैलाने की कोशिश की गई थी, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई को प्रभावित किया जा सके।

    सैफुल्लाह उर्फ ‘लंगड़ा’ के बारे में जांच में यह भी सामने आया है कि वह लंबे समय से कश्मीर में सक्रिय रहा है और उसने पहले भी कई गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसका जन्म पाकिस्तान के कसूर में हुआ था और वह वर्ष 2005 में अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में छिपकर रहा था। इस दौरान उसने स्थानीय नेटवर्क तैयार किया और कई लोगों को संगठन से जोड़ा। बाद में वह पाकिस्तान लौट गया, लेकिन वहां से लगातार अपने नेटवर्क का संचालन करता रहा।

    जांच में यह भी सामने आया है कि 2019 के बाद कश्मीर में युवाओं को प्रभावित करने के लिए टीआरएफ नामक संगठन के विस्तार में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके साथ ही वह ड्रोन के जरिए हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी में भी सक्रिय था, जिससे सीमा पार से गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा था। हमले से कुछ दिन पहले ही उसने फिदायीन हमलावरों को निर्देशित कर बेसरन घाटी की ओर रवाना किया था। इस पूरे मामले में जुटाए गए सबूतों के आधार पर एजेंसी ने कहा है कि यह हमला एक सुनियोजित, तकनीकी रूप से संचालित और सीमा पार से नियंत्रित आतंकवादी अभियान था, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।