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  • 5 अक्टूबर को खुलेगा शेयर बाजार, क्या फिर आएगी तेजी या जारी रहेगी गिरावट, Nifty Sensex पर इन बड़े संकेतों का असर

    5 अक्टूबर को खुलेगा शेयर बाजार, क्या फिर आएगी तेजी या जारी रहेगी गिरावट, Nifty Sensex पर इन बड़े संकेतों का असर


    नई दिल्ली। 5 अक्टूबर 2026 सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार फिर से शुरू होगा। गांधी जयंती के कारण 2 अक्टूबर को NSE और BSE बंद रहे थे और इसके बाद शनिवार तथा रविवार का अवकाश रहा। ऐसे में निवेशकों की नजर सोमवार के कारोबारी सत्र पर रहेगी। बाजार के लिए पिछला सप्ताह काफी चुनौतीपूर्ण रहा है क्योंकि लगातार बिकवाली के दबाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी में कमजोरी बनी रही। 1 अक्टूबर को सेंसेक्स 570.59 अंक गिरकर 71909.70 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 198.50 अंक की गिरावट के साथ 22421.95 पर पहुंच गया।

    5 अक्टूबर को बाजार खुलने से पहले निवेशकों के सामने कई बड़े संकेत मौजूद हैं। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार की धारणा पर दबाव बना रही है। इसके अलावा कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। सितंबर के डेरिवेटिव कारोबार में निफ्टी में करीब 6.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी और बाजार में तेजी वाले दांव कमजोर हुए हैं। ऐसे माहौल में सोमवार को शुरुआती कारोबार में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    तकनीकी स्तरों की बात करें तो बाजार विशेषज्ञों की नजर निफ्टी के 22000 से 22200 के क्षेत्र पर रहेगी। इसे महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। वहीं 22500 से 22600 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस के तौर पर देखा जा रहा है। अगर निफ्टी इन स्तरों के ऊपर मजबूती कायम करता है तो बाजार में कुछ राहत की उम्मीद बन सकती है। दूसरी तरफ कमजोरी बढ़ने पर 22000 के आसपास का क्षेत्र महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

    अक्टूबर का पहला सप्ताह शेयर बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक चलेगी और 7 अक्टूबर को नीतिगत फैसले की घोषणा होगी। इसके अलावा कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों का सीजन भी शुरू होने वाला है। TCS 8 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। इन घटनाओं का असर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।

    बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। सितंबर में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने भारतीय शेयरों पर दबाव बढ़ाया है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार को कुछ सहारा मिल रहा है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी होगा कि वे किसी एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें।

    कुल मिलाकर 5 अक्टूबर को बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है। निवेशकों की नजर निफ्टी के अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के साथ कच्चे तेल की कीमतों विदेशी निवेशकों की गतिविधियों बॉन्ड यील्ड RBI की बैठक और आगामी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। मौजूदा माहौल में जोखिम को समझकर और अपनी निवेश रणनीति के अनुसार ही कदम उठाना बेहतर रहेगा। यह जानकारी बाजार विश्लेषण के लिए है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

  • वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा और निफ्टी 1.56 प्रतिशत लुढ़का

    वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा और निफ्टी 1.56 प्रतिशत लुढ़का

    नई दिल्ली 28 सितंबर। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजारों में दबाव के कारण सप्ताह के पहले कारोबारी दिन दोनों प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए।

    बीएसई सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,771.72 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,780.25 पर बंद हुआ। कारोबारी सत्र के दौरान दोनों सूचकांकों में लगातार दबाव बना रहा।सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 73,895.74 से 160.91 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,734.83 पर खुला था। कारोबार के दौरान यह एक समय 1,179.51 अंक यानी 1.59 प्रतिशत तक टूटकर 72,716.23 के निचले स्तर पर पहुंच गया।

    इसी तरह निफ्टी 50 अपने पिछले बंद स्तर 23,140.50 से 0.32 प्रतिशत नीचे 23,064.90 पर खुला। कारोबार के दौरान इसमें गिरावट बढ़ी और यह 378.3 अंक यानी 1.63 प्रतिशत टूटकर 22,762.20 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    बाजार में गिरावट के पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के साथ पश्चिम एशिया में जारी तनाव प्रमुख कारणों में रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के नवीनतम प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड में भी उछाल आया। इससे निवेशकों की धारणा पर दबाव बढ़ा और शेयर बाजारों में बिकवाली तेज हुई।व्यापक बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.63 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे कमजोर रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी बैंक में भी दबाव रहा, जबकि निफ्टी आईटी में तुलनात्मक रूप से सबसे कम गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी 50 में शामिल ज्यादातर शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, इंफोसिस और एचडीएफसी लाइफ को छोड़कर अन्य शेयरों में कमजोरी रही। टीएमपीवी, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, पावरग्रिड और एलएंडटी के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिली।

    बाजार में तेज गिरावट का असर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण करीब 482 लाख करोड़ रुपये से घटकर 474 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस तरह एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।वैश्विक स्तर पर भी शेयर बाजारों पर दबाव रहा। ट्रम्प द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और लड़ाई समाप्त करने से संबंधित ईरानी प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद बाजारों में चिंता बढ़ी। ईरान ने संघर्ष के समाधान के लिए कूटनीति को ही रास्ता बताया है। इस घटनाक्रम का असर वैश्विक शेयर, तेल और बॉन्ड बाजारों पर दिखाई दिया।

    एशियाई बाजारों में भी अधिकांश प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। दक्षिण कोरिया का सूचकांक करीब 2 प्रतिशत और जापान का निक्केई 0.10 प्रतिशत नीचे रहा। चीन के बाजारों में भी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।पश्चिम एशिया संकट के समाधान में देरी के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ा सकता है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

    ब्रेंट क्रूड वायदा 2.2 प्रतिशत बढ़कर 106.6 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.45 प्रतिशत बढ़कर 93.76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में तेजी और मुद्रास्फीति की बढ़ती चिंता के बीच बॉन्ड बाजार में भी बिकवाली फिर से शुरू हुई, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार की धारणा पर पड़ा।

  • BSE Sensex और Nifty 50 सपाट, सीमित दायरे में कारोबार कर रहा बाजार

    BSE Sensex और Nifty 50 सपाट, सीमित दायरे में कारोबार कर रहा बाजार


    नई दिल्ली। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआत से ही हल्की उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन दिन चढ़ने के साथ बाजार सीमित दायरे में सिमट गया। दोपहर 12:30 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 24 अंकों की मामूली गिरावट के साथ 75,478 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 50 13 अंक कमजोर होकर 23,394 के स्तर पर था। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 75,324.73 का निचला स्तर और 76,014 का ऊपरी स्तर जारी किया, वहीं निफ्टी 23,346 से 23,577 के बीच घूम रहा।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में भी लिमिटेड दायरा

    बाजार की यह सुस्ती केवल लार्जकैप तक लिमिटेड नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप रिकवरी में भी लिमिटेड हलचल देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 92 अंक की हल्की बढ़त के साथ 54,707 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 29 अंक 15,840 पर कारोबार कर रहा था। यह संकेत देता है कि बाजार के सभी निवेश में निवेशक बचे सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और किसी बड़े ट्रेंड का इंतजार कर रहे हैं।

    फेड की बैठक बना सबसे बड़ा फैक्टर

    बाजार के सीमित दायरे में रहने की सबसे बड़ी वजह फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय बैठक है, जो मंगलवार से शुरू या बुधवार को खत्म होगी। इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर जाने वाले फैसले पर वैश्विक बाजारों की नजर टिकी हुई है। मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से और वैश्विक महंगाई की खतरों के बीच फेड का रुख बेहद अहम हो गया है। निवेशक इस फैसले से पहले बड़े निवेश से बच रहे हैं, जिससे बाजार में स्थिरता की स्थिति बनी हुई है।

    कच्चे तेल की तेजी से बढ़ी चिंता

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में पिछले एक महीने में 50 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी से देखी गई है। इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। यदि महंगाई बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकते हैं, जो शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत है। यही कारण है कि निवेशक सतर्क हैं और बाजार में बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं।

    एक्सपायरी और FII बिकवाली का दबाव

    मंगलवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर डेरिवेटिव्स बेंचों की एक्सपायरी भी है, जिसके चलते ट्रेडर्स अपनी व्यवस्था में बदलाव करते हैं। इससे बाजार में मुनाफा कम या एक दायरे में कारोबार होता है। दूसरी ओर, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बनाए हुए है। सोमवार को बाजार में तेजी के बावजूद एफआईआई ने 9,365.52 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है।

    आगे की दिशा क्या होगी?

    एफआईआई के अनुसार, जब तक फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजे सामने नहीं आते, तब तक बाजार इसी तरह सीमित दायरे में बना रह सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख पर भी बाजार की दिशा निर्भर करेगी।

    कुल मिलाकर भारतीय शेयर बाजार इस समय इंतजार और जोखिम के दौर से गुजर रहा है। BSE Sensex और Nifty 50 में बड़ी चाल तभी देखने को मिलेगी, जब वैश्विक संकेत स्पष्ट होंगे। अगर जींस के लिए धैर्य और सतर्क रणनीति ही सबसे बेहतर विकल्प मानी जा रही है।