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  • शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता

    शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 9 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत निवेशकों के लिए बेहद अहम रहने वाली है। लगातार दबाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी के सामने अब बाजार को संभालने की चुनौती है। 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी और सेंसेक्स 1045 अंक से ज्यादा टूटकर 71593.24 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 50 में करीब 1.64 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22231.80 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी का यह स्तर करीब 18 महीने का निचला स्तर माना जा रहा है।

    बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद मौद्रिक नीति का रुख भी सख्त किया गया है। रेपो रेट बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गया है। महंगाई के दबाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच RBI का यह फैसला बाजार के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होने की आशंका रहती है जिसका असर निवेश और मुनाफे की उम्मीदों पर पड़ सकता है।

    दूसरी बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता के कारण तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है इसलिए महंगा तेल देश के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ा सकता है। इसका असर रुपये और शेयर बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ा दबाव बनी हुई है। विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं। इसके साथ ही कमजोर रुपया बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक बाजारों में उतार चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। 8 अक्टूबर की गिरावट में लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे जबकि मेटल रियल्टी और ऑयल एंड गैस जैसे सेक्टरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।

    अब 9 अक्टूबर को निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहेगी। सितंबर तिमाही के नतीजों का दौर शुरू हो चुका है और TCS के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगर कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है लेकिन कमजोर नतीजे मौजूदा दबाव को और बढ़ा सकते हैं।

    ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी से बचना जरूरी है। बाजार में भारी उतार चढ़ाव के बीच किसी भी शेयर में केवल गिरावट देखकर खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है। 9 अक्टूबर को कच्चे तेल की चाल रुपये की स्थिति विदेशी निवेशकों की गतिविधियां RBI की नीति और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। फिलहाल बाजार में सावधानी का माहौल है और निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी आती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है।

  • लगातार चौथे दिन शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 571 अंक टूटा; निफ्टी 0.88 प्रतिशत नीचे, ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित

    लगातार चौथे दिन शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 571 अंक टूटा; निफ्टी 0.88 प्रतिशत नीचे, ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित

    मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र गिरावट जारी रही। ऊर्जा की स्थिर कीमतों, बॉन्ड यील्ड में अस्थिरता और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के बीच निवेशकों में सतर्कता बढ़ी, जिससे बाजार लाल निशान में बंद हुआ। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 22,421.95 के स्तर पर बंद हुआ।

    दिनभर के कारोबार में प्रमुख सूचकांकों में उतार-चढ़ाव के साथ भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर 72,573 से फिसलकर 71,293 के निचले स्तर तक पहुंच गया। इस दौरान इसमें करीब 1,280 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और सूचकांक 2 अप्रैल 2026 को बने 71,545 के पिछले कैलेंडर वर्ष के न्यूनतम स्तर से भी नीचे चला गया। निफ्टी 50 में भी दिन के दौरान 1.7 प्रतिशत यानी 394 अंकों की गिरावट दर्ज हुई। सूचकांक 22,611 के उच्च स्तर से गिरकर 22,217 के निचले स्तर तक पहुंचा। अप्रैल में निफ्टी ने कैलेंडर वर्ष का 22,183 का न्यूनतम स्तर छुआ था।

    निफ्टी 50 में बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी, श्रीराम फाइनेंस, टाटा स्टील, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, आयशर मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट रही। इसके विपरीत इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई लाइफ, मैक्स हेल्थ और टीसीएस के शेयरों में तेजी दर्ज की गई। व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.01 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार समाप्त हुआ। क्षेत्रवार कारोबार में निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया और निफ्टी एफएमसीजी में सबसे ज्यादा कमजोरी रही, जबकि निफ्टी आईटी में सबसे अधिक बढ़त दर्ज की गई।

    एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, बाजार में गिरावट के पीछे मुख्य रूप से बाहरी कारण रहे। बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बने रहने से 2026-27 के आर्थिक परिदृश्य को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। घरेलू स्तर पर निवेशक दूसरी तिमाही यानी क्यू2 के नतीजों और अगले सप्ताह आने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति को लेकर भी सतर्क हैं। विशेषज्ञ ने कहा कि क्यू2 की कमाई क्यू1 की तुलना में कमजोर रह सकती है, क्योंकि क्यू1 में परिचालन लागत के प्रभाव का लाभ मिला था, जो इस बार उसी स्तर पर नहीं मिल सकता।

    विशेषज्ञ के मुताबिक, पिछली मौद्रिक नीति में आरबीआई का रुख अपेक्षाकृत खुला था, लेकिन वैश्विक महंगाई के दबाव और रुपये को समर्थन देने की जरूरत को देखते हुए उसके रुख में बदलाव की संभावना पर विचार किया जा सकता है। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और मौजूदा चुनौतियों से निपटने की स्थिति में है। लंबे समय के निवेशकों के लिए बाजार की कमजोरी में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने की बात कही गई है, जबकि कम अवधि के निवेशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और सरकार के कदमों से वैश्विक वित्तीय बाजारों में स्थिरता आने तक इंतजार और निगरानी की रणनीति अपनाने की सलाह दी गई है।

  • 25 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल पर नजर, जानिए अहम स्तर

    25 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल पर नजर, जानिए अहम स्तर


    नई दिल्ली। 25 सितंबर 2026 शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी। इससे एक दिन पहले यानी 24 सितंबर को घरेलू बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान Sensex और Nifty दोनों दबाव में रहे। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई दिया।

    24 सितंबर की सुबह Sensex करीब 576 अंक की गिरावट के साथ 74251 के आसपास कारोबार कर रहा था जबकि Nifty 23245 के स्तर तक फिसल गया था। बाजार में गिरावट का असर कई प्रमुख शेयरों और सेक्टर पर देखने को मिला। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर भी दबाव रहा। रिपोर्ट के मुताबिक बाजार पूंजीकरण में शुरुआती कारोबार के दौरान 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई थी।

    अब 25 सितंबर को बाजार की दिशा तय करने में Nifty के अहम तकनीकी स्तर महत्वपूर्ण हो सकते हैं। बाजार विश्लेषण के अनुसार 23200 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के तौर पर देखा जा रहा है। यदि Nifty इस स्तर के नीचे टिकता है तो 23100 से 23000 का क्षेत्र अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट बन सकता है। वहीं ऊपर की तरफ 23500 का स्तर अहम रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

    बाजार की चाल पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर भी बना रह सकता है। 24 सितंबर को अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.1 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई थी जो 2007 के बाद का ऊंचा स्तर बताया गया। बढ़ती यील्ड के कारण निवेशकों के बीच ब्याज दरों को लेकर नए अनुमान बन रहे हैं। इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।

    कच्चे तेल की कीमत भी निवेशकों के लिए अहम संकेत रहेगी। Brent crude 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है इसलिए तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से बाजार में तेल की हर बड़ी चाल पर नजर बनी रहेगी।

    इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। 23 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में खरीदारी की थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक भी खरीदार रहे थे। ऐसे में 25 सितंबर को अगर संस्थागत निवेश का रुख बदलता है तो बाजार की चाल पर उसका असर दिखाई दे सकता है।

    निवेशकों के लिए फिलहाल बाजार में तेजी या गिरावट को लेकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय प्रमुख तकनीकी स्तरों और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। खासतौर पर Nifty का 23200 के आसपास व्यवहार और 23500 के स्तर की ओर उसकी चाल बाजार की दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। शेयर बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य है इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले जोखिम और अपनी निवेश रणनीति को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • Stock Market Today: 22 सितंबर को बाजार में दिख सकती है हलचल Nifty के इन लेवल पर रहेगी नजर

    Stock Market Today: 22 सितंबर को बाजार में दिख सकती है हलचल Nifty के इन लेवल पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली। 22 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी। सोमवार को बाजार ने लगातार छह सप्ताह की गिरावट के बाद राहत की सांस ली और सेंसेक्स तथा निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए। सोमवार को सेंसेक्स 564.03 अंक यानी 0.76 प्रतिशत चढ़कर 74858.99 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 67.90 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23414.30 पर पहुंचा। बाजार में यह तेजी कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेश से मिले सहारे के बीच देखने को मिली।

    अब 22 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सोमवार की तेजी आगे भी कायम रहती है या बाजार फिर से दबाव में आता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 23200 से 23150 के आसपास का क्षेत्र महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। वहीं 23500 के स्तर के आसपास बाजार को तत्काल प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। यदि निफ्टी 23500 से ऊपर मजबूती बनाए रखता है तो बाजार में आगे की दिशा को लेकर नजर 23600 के आसपास के स्तर पर जा सकती है।

    सोमवार की तेजी में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की भी भूमिका रही। ब्रेंट क्रूड करीब 2.25 प्रतिशत गिरकर लगभग 101.5 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल की कीमतों में नरमी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी हालिया बिकवाली के बाद खरीदारी की तरफ रुख किया। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 599 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी।

    हालांकि बाजार के सामने चुनौतियां भी बनी हुई हैं। हाल के सप्ताहों में ऊंची कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण रही हैं। इसके साथ ही अमेरिकी ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड से जुड़े संकेत भी उभरते बाजारों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। वैश्विक मौद्रिक नीति में सख्ती की आशंका और भू राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

    22 सितंबर को सेक्टर आधारित गतिविधियों पर भी निवेशकों की नजर रह सकती है। सोमवार को फार्मा और एफएमसीजी समेत कई क्षेत्रों में मजबूती देखने को मिली जबकि आईटी मेटल और पीएसयू बैंकिंग जैसे कुछ हिस्सों में दबाव रहा। बाजार में स्टॉक विशेष गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं इसलिए केवल इंडेक्स की चाल के बजाय अलग अलग सेक्टर और कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

    इसके अलावा रुपये की चाल भी बाजार के लिए अहम संकेत दे सकती है। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूत होकर 95.8150 पर बंद हुआ। हालांकि आयातकों की डॉलर मांग और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी परिस्थितियां रुपये पर असर डाल सकती हैं। विदेशी निवेश का प्रवाह भी मुद्रा और शेयर बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

    कुल मिलाकर 22 सितंबर के कारोबार में निफ्टी के 23200 से 23150 के सपोर्ट क्षेत्र और 23500 से 23600 के प्रतिरोध क्षेत्र पर बाजार की नजर रह सकती है। यह स्तर बाजार विशेषज्ञों के तकनीकी आकलन पर आधारित हैं और वास्तविक कारोबार में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव हो सकता है। निवेशकों को बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए किसी भी निवेश या ट्रेडिंग फैसले से पहले अपनी जोखिम क्षमता और संबंधित कंपनी के बुनियादी आंकड़ों पर विचार करना चाहिए।

  • हफ्ते के आखिरी दिन बाजार में मिला-जुला रुख निफ्टी चढ़ा IT शेयर फिसले जानिए किन सेक्टरों में रही तेजी

    हफ्ते के आखिरी दिन बाजार में मिला-जुला रुख निफ्टी चढ़ा IT शेयर फिसले जानिए किन सेक्टरों में रही तेजी


    नई दिल्ली। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में पूरे दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान कभी बाजार में तेजी दिखाई दी तो कभी बिकवाली का दबाव बढ़ा। अंत में सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ लगभग सपाट बंद हुआ जबकि निफ्टी बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहा। व्यापक बाजार में हालांकि खरीदारी का रुझान मजबूत रहा और मिडकैप तथा स्मॉलकैप इंडेक्स में भी तेजी दर्ज की गई।

    कारोबार समाप्त होने पर 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 19.63 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74294.96 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 में 75.80 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 23346.40 के स्तर पर पहुंच गया। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों में अलग अलग रुख देखने को मिला।

    व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.24 प्रतिशत की तेजी रही जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 1.74 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि शुक्रवार के कारोबार में बड़ी कंपनियों के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।

    सेक्टर के स्तर पर भी बाजार में अलग अलग रुझान दिखाई दिए। निफ्टी मेटल निफ्टी रियल्टी निफ्टी ऑयल एंड गैस निफ्टी सीमेंट और निफ्टी केमिकल में मजबूती रही। दूसरी ओर निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। आईटी शेयरों में कमजोरी की एक वजह प्रॉफिट बुकिंग को माना गया। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों के कारण वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी खर्च पर संभावित असर को लेकर भी बाजार में चिंता बनी हुई है।

    निफ्टी 50 में अदाणी पोर्ट्स अदाणी एंटरप्राइजेज भारती एयरटेल एचडीएफसी बैंक पावरग्रिड अल्ट्राटेक सीमेंट और अपोलो हॉस्पिटल जैसे शेयर बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे। वहीं टीसीएस टीएमपीवी एसबीआई लाइफ कोल इंडिया मारुति सुजुकी एनटीपीसी टाटा कंज्यूमर और सन फार्मा में गिरावट देखने को मिली।

    बाजार के एक विशेषज्ञ के अनुसार लगातार बनी भू राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों और ग्लोबल यील्ड में नरमी ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कुछ समर्थन दिया। इसके चलते भारतीय इक्विटी बाजार में रिकवरी का रुझान जारी रहा। बड़े केंद्रीय बैंकों की ओर से उम्मीद के मुताबिक नीतिगत फैसलों के बाद मिले सकारात्मक वैश्विक संकेतों से भी निवेशकों का भरोसा बढ़ने की बात कही गई।

    विशेषज्ञ के अनुसार बाजार की रिकवरी कई सेक्टर में दिखाई दी लेकिन आईटी शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव रहा। आगे बाजार की दिशा को लेकर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण रहेंगी। कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक यील्ड में नरमी से फिलहाल राहत मिली है लेकिन यह रिकवरी कितनी टिकाऊ रहती है यह ग्लोबल मैक्रो जोखिमों में कमी और विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार निवेश पर निर्भर कर सकता है।

    कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबार भारतीय शेयर बाजार के लिए मिश्रित रहा। सेंसेक्स लगभग सपाट रहा जबकि निफ्टी और व्यापक बाजार सूचकांकों में बढ़त देखने को मिली। अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों विदेशी निवेश और विभिन्न सेक्टरों में खरीदारी की दिशा पर रहेगी।

  • शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर

    शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 18 सितंबर को निवेशकों की नजर घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक घटनाक्रम पर भी बनी रहेगी। 17 सितंबर के कारोबारी सत्र में बाजार ने काफी उतार चढ़ाव के बीच लगभग सपाट रुख दिखाया था। कारोबारी दिन के अंत में Nifty 50 करीब 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23270.60 के स्तर पर बंद हुआ जबकि Sensex 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74314.59 पर रहा। बाजार में हाल की गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जरूर दिखाई दी लेकिन निवेशकों का रुख पूरी तरह से जोखिम लेने वाला नहीं रहा।

    18 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का रह सकता है। फेड ने ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है और ब्याज दर का दायरा 3.75 से 4 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही आगे भी दरों में बढ़ोतरी की संभावना का संकेत दिया गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और दुनियाभर के बाजारों में निवेशकों की नजर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड पर बनी हुई है। भारतीय बाजार के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां आकर्षक हो सकती हैं और उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी पर दबाव बढ़ सकता है।

    रुपये की चाल भी बाजार के लिए अहम संकेत रहेगी। 17 सितंबर को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.93 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपया 96 के स्तर के पार भी गया था लेकिन बाद में इसमें सुधार देखने को मिला। Reuters के मुताबिक संभावित RBI हस्तक्षेप और पोर्टफोलियो निवेश से रुपये को कुछ सहारा मिला। ऐसे में 18 सितंबर को डॉलर इंडेक्स और रुपये की दिशा पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है।

    कच्चा तेल भी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगा। 17 सितंबर को Brent crude करीब 104.8 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें महंगाई और आयात बिल से जुड़े दबाव बढ़ा सकती हैं। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी या गिरावट का असर बाजार के अलग अलग सेक्टर पर दिखाई दे सकता है।

    सेक्टर के लिहाज से 17 सितंबर को ऑटो और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली थी। वहीं व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने मजबूती दिखाई। Business Standard के अनुसार कारोबारी सत्र के दौरान Nifty Metal में भी बढ़त रही और बाजार की चौड़ाई सकारात्मक बनी रही।

    18 सितंबर को निवेशकों की नजर विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी रहेगी। 17 सितंबर से पहले उपलब्ध आंकड़ों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही थी। इस खींचतान के बीच Nifty और Sensex में उतार चढ़ाव बढ़ सकता है। इसलिए बाजार की चाल को केवल एक संकेत के आधार पर समझने के बजाय वैश्विक बाजार रुपये कच्चे तेल विदेशी निवेश और अमेरिकी ब्याज दरों को साथ देखकर समझना महत्वपूर्ण रहेगा।

  • पैसा Nifty में लगाएं या Sensex में निवेशकों की उलझन होगी दूर जानिए लंबी अवधि के लिए कौन सा विकल्प हो सकता है बेहतर

    पैसा Nifty में लगाएं या Sensex में निवेशकों की उलझन होगी दूर जानिए लंबी अवधि के लिए कौन सा विकल्प हो सकता है बेहतर


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के सामने अक्सर यह सवाल रहता है कि पैसा Nifty 50 में लगाया जाए या Sensex में। दोनों ही भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स हैं और देश की बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाते हैं। हालांकि निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि Nifty और Sensex में सीधे पैसा नहीं लगाया जाता बल्कि इनके आधार पर बने Index Fund या ETF के जरिए निवेश किया जा सकता है। यही वजह है कि नए निवेशकों के लिए दोनों के अंतर को समझना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।

    Nifty 50 में 50 बड़ी और प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। NSE के अनुसार यह 13 अलग अलग सेक्टरों को कवर करने वाला diversified index है और इसका इस्तेमाल Index Fund तथा ETF सहित कई निवेश उत्पादों के benchmark के रूप में किया जाता है। दूसरी तरफ Sensex में 30 बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन शामिल होता है। इस लिहाज से दोनों इंडेक्स large cap कंपनियों में निवेश का रास्ता देते हैं लेकिन Nifty 50 में कंपनियों की संख्या अधिक होने के कारण diversification थोड़ा ज्यादा मिलता है।

    अगर कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए पैसा लगाना चाहता है तो Nifty 50 Index Fund को एक सरल विकल्प के तौर पर देखा जा सकता है। इसमें निवेशक को अलग अलग कंपनियों के शेयर खुद चुनने की जरूरत नहीं होती। Index Fund इंडेक्स के प्रदर्शन को ट्रैक करने की कोशिश करता है। SIP के जरिए हर महीने एक तय राशि निवेश करने से बाजार के उतार चढ़ाव के दौरान अलग अलग स्तरों पर निवेश होता रहता है।

    Sensex आधारित Index Fund भी इसी तरह निवेश का विकल्प देता है। इसमें 30 बड़ी कंपनियों का exposure मिलता है। इसलिए ऐसा नहीं है कि Sensex में निवेश करना गलत है। अगर किसी निवेशक के पास पहले से Sensex आधारित फंड है तो केवल Nifty में अधिक कंपनियां होने की वजह से उसे बदलना जरूरी नहीं है। दोनों ही विकल्पों में असली महत्व निवेश की अवधि लागत और निवेशक की जोखिम क्षमता का होता है।

    मौजूदा समय में बाजार में उतार चढ़ाव भी बना हुआ है। 11 सितंबर 2026 को Nifty 50 करीब 23398 के स्तर पर बंद हुआ जबकि Sensex करीब 74782 पर रहा। दोनों प्रमुख इंडेक्स लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। मध्य पूर्व में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार की चिंता बढ़ाई है।

    ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए एक साथ पूरी रकम बाजार में लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश या SIP का रास्ता उपयोगी हो सकता है। अगस्त 2026 में भारतीय म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए निवेश रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा था जो बताता है कि बड़ी संख्या में खुदरा निवेशक नियमित निवेश की रणनीति अपना रहे हैं।

    हालांकि किसी भी इंडेक्स में निवेश से मुनाफे की गारंटी नहीं होती। बाजार में गिरावट आने पर Index Fund की वैल्यू भी घट सकती है। इसलिए निवेश का फैसला अपनी आर्थिक स्थिति निवेश की अवधि और जोखिम सहने की क्षमता देखकर लेना चाहिए। सामान्य तौर पर अगर कोई व्यक्ति लंबी अवधि के लिए सरल और diversified equity investment चाहता है तो Nifty 50 आधारित Index Fund एक मजबूत विकल्प हो सकता है। वहीं Sensex आधारित फंड भी समान उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। निवेश से पहले फंड का expense ratio tracking error और निवेश की शर्तों को जरूर देखना चाहिए।

  • शेयर बाजार पर दोहरा संकट: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट के बाद 10 सितंबर को भी बढ़ सकती है हलचल

    शेयर बाजार पर दोहरा संकट: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट के बाद 10 सितंबर को भी बढ़ सकती है हलचल


    नई दिल्ली । 10 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार की नजर एक बार फिर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। बीते कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और सेंसेक्स तथा निफ्टी लगातार तीसरे सत्र में गिरावट के साथ तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। 9 सितंबर को सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत गिरकर 74764.23 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत फिसलकर 23431.50 पर आ गया।

    बाजार में इस समय सबसे बड़ा दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से बन रहा है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई से लेकर कंपनियों की लागत और रुपये की मजबूती तक दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते नजर आ रहे हैं।

    9 सितंबर के कारोबार में आईटी शेयरों पर खास दबाव देखने को मिला। टेक्नोलॉजी इंडेक्स में करीब 3.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और कई बड़ी आईटी कंपनियों के शेयर कमजोर रहे। टीसीएस में भी गिरावट दर्ज की गई जबकि एचसीएल टेक और अन्य प्रमुख आईटी शेयरों में बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ाया। दूसरी तरफ मेटल और कुछ ऊर्जा शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इससे साफ है कि बाजार में इस समय एकतरफा तेजी के बजाय सेक्टर के हिसाब से अलग अलग रुझान दिखाई दे रहे हैं।

    10 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर रुपये की चाल पर भी रहेगी। 9 सितंबर को भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर के पार चली गई थी। रुपये में कमजोरी और महंगे कच्चे तेल का दबाव बाजार के लिए दोहरी चुनौती बन सकता है। अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और रुपये पर दबाव जारी रहता है तो विदेशी निवेशकों की धारणा पर भी असर पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की है। 9 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब 123 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 1350 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू निवेशक बाजार में कमजोरी को कुछ अवसर के रूप में देख रहे हैं लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के कारण सतर्कता अभी भी जरूरी है।

    निवेशकों के लिए 10 सितंबर का कारोबारी सत्र इसलिए भी अहम रहेगा क्योंकि निफ्टी तीन महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच चुका है। ऐसे माहौल में बाजार में अचानक तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कारोबारियों की नजर निफ्टी के 23400 के आसपास के स्तर पर रहेगी और इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर और दबाव बन सकता है। वहीं अगर बाजार इस स्तर से संभलता है तो निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने की उम्मीद बन सकती है।

    फिलहाल बाजार की दिशा किसी एक घरेलू खबर से ज्यादा वैश्विक घटनाक्रम तय कर सकता है। कच्चे तेल की कीमत पश्चिम एशिया का तनाव अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर संकेत रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां 10 सितंबर के कारोबार के प्रमुख ट्रिगर रहेंगे। ऐसे समय में छोटे निवेशकों के लिए जल्दबाजी में ट्रेडिंग करने के बजाय अपने जोखिम और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी होगा। शेयर बाजार में तेजी या गिरावट का अनुमान हमेशा निश्चित नहीं होता इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के फंडामेंटल और अपनी जोखिम क्षमता को देखना महत्वपूर्ण है।

  • Nifty vs Sensex: आखिर निवेशकों के लिए कौन सा इंडेक्स है ज्यादा बेहतर, 50 शेयरों वाला निफ्टी या 30 कंपनियों वाला सेंसेक्स

    Nifty vs Sensex: आखिर निवेशकों के लिए कौन सा इंडेक्स है ज्यादा बेहतर, 50 शेयरों वाला निफ्टी या 30 कंपनियों वाला सेंसेक्स


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि निफ्टी बेहतर है या सेंसेक्स। रोजाना बाजार की खबरों में इन दोनों इंडेक्स के चढ़ने और गिरने की चर्चा होती है लेकिन कई निवेशक इनके बीच का वास्तविक अंतर नहीं समझ पाते। पहली बात यह जानना जरूरी है कि निफ्टी और सेंसेक्स दोनों भारत के प्रमुख शेयर बाजार इंडेक्स हैं और दोनों का उद्देश्य देश की बड़ी कंपनियों तथा बाजार की दिशा का संकेत देना है। हालांकि दोनों की संरचना और कवरेज में अंतर है। निफ्टी 50 नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई की 50 प्रमुख कंपनियों को दर्शाता है जबकि सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई की 30 बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन को दिखाता है। दोनों इंडेक्स फ्री फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर तैयार किए जाते हैं और इनमें शामिल बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन इंडेक्स की दिशा पर असर डालता है।

    अगर केवल कंपनियों की संख्या के आधार पर देखा जाए तो निफ्टी का दायरा सेंसेक्स से बड़ा है। निफ्टी में 50 कंपनियां शामिल होने के कारण इसमें सेक्टरों की भागीदारी अपेक्षाकृत व्यापक मानी जाती है। सेंसेक्स में केवल 30 कंपनियां हैं लेकिन इनमें भी भारत की कई बड़ी और प्रभावशाली कंपनियां शामिल रहती हैं। यही कारण है कि दोनों इंडेक्स अक्सर एक जैसी दिशा में चलते दिखाई देते हैं। जब देश के बड़े बैंक आईटी कंपनियां ऊर्जा क्षेत्र या दूसरे प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में तेजी या गिरावट आती है तो उसका असर निफ्टी और सेंसेक्स दोनों पर पड़ सकता है।

    निवेशकों के लिए यह समझना भी जरूरी है कि किसी इंडेक्स का अंक अधिक होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि वह दूसरे इंडेक्स से बेहतर है। कई नए निवेशक सेंसेक्स के बड़े अंक को देखकर इसे निफ्टी से अधिक मजबूत या महंगा मान लेते हैं लेकिन यह सही तरीका नहीं है। दो इंडेक्स की तुलना हमेशा प्रतिशत के आधार पर की जानी चाहिए। सेंसेक्स में 500 अंकों की गिरावट और निफ्टी में 200 अंकों की गिरावट को सीधे तुलना नहीं किया जा सकता क्योंकि दोनों का स्तर अलग है। इसलिए बाजार की वास्तविक चाल समझने के लिए प्रतिशत बदलाव अधिक महत्वपूर्ण होता है।

    अगर कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए इंडेक्स फंड या ईटीएफ के जरिए निवेश करने पर विचार कर रहा है तो निफ्टी 50 को अक्सर व्यापक कवरेज के कारण देखा जाता है। निफ्टी 50 भारत की 50 प्रमुख कंपनियों और कई महत्वपूर्ण सेक्टरों को कवर करता है तथा यह फंड पोर्टफोलियो की तुलना और इंडेक्स आधारित निवेश के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। वहीं सेंसेक्स उन निवेशकों के लिए भी उपयोगी बेंचमार्क है जो भारत की चुनिंदा 30 बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन के आधार पर बाजार की दिशा समझना चाहते हैं।

    हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि हर निवेशक के लिए केवल निफ्टी ही बेहतर है या सेंसेक्स ही सबसे अच्छा विकल्प है। दोनों प्रमुख बाजार इंडेक्स हैं और लंबी अवधि में इनके प्रदर्शन की दिशा अक्सर काफी हद तक मिलती जुलती रही है। सही विकल्प निवेशक के लक्ष्य जोखिम लेने की क्षमता निवेश अवधि और चुने गए निवेश उत्पाद के खर्च जैसे कारकों पर निर्भर करता है। इंडेक्स फंड या ईटीएफ चुनते समय केवल निफ्टी या सेंसेक्स का नाम देखने के बजाय एक्सपेंस रेशियो ट्रैकिंग एरर और निवेश की अवधि पर भी ध्यान देना चाहिए।

    कुल मिलाकर बाजार को व्यापक रूप से समझने और 50 बड़ी कंपनियों की भागीदारी देखने के लिए निफ्टी 50 को अधिक विस्तृत प्रतिनिधित्व वाला इंडेक्स माना जा सकता है जबकि सेंसेक्स 30 प्रमुख कंपनियों के जरिए बाजार की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है। दोनों में से कौन बेहतर है इसका जवाब हर निवेशक के लिए अलग हो सकता है। निवेश का फैसला केवल इंडेक्स के पिछले प्रदर्शन के आधार पर नहीं बल्कि अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर करना चाहिए। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है इसलिए बिना समझे केवल तेजी के दौर को देखकर निवेश करने के बजाय पूरी जानकारी और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार की सलाह के साथ कदम उठाना बेहतर है।

    निफ्टी 50 में 50 कंपनियां और सेंसेक्स में 30 कंपनियां शामिल हैं तथा दोनों फ्री फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन पद्धति का उपयोग करते हैं। निफ्टी का कवरेज अपेक्षाकृत व्यापक है लेकिन दोनों प्रमुख इंडेक्स भारत की बड़ी कंपनियों और बाजार की दिशा को दर्शाते हैं।

  • शेयर बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक! 4 सितंबर को इन फैक्टर्स से बदल सकती है Nifty-Sensex की चाल

    शेयर बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक! 4 सितंबर को इन फैक्टर्स से बदल सकती है Nifty-Sensex की चाल


    नई दिल्ली। शुक्रवार 4 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बीते कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार पर वैश्विक अनिश्चितता का दबाव रहा है और निवेशकों की नजर अब घरेलू संकेतों के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी बनी हुई है। 3 सितंबर को बाजार में शुरुआती बढ़त के बाद बिकवाली लौट आई और सेंसेक्स करीब 417 अंक गिरकर बंद हुआ जबकि निफ्टी 23900 के स्तर से नीचे चला गया। इससे संकेत मिल रहा है कि बाजार में फिलहाल तेजी को लेकर पूरी तरह भरोसा नहीं बन पाया है।

    4 सितंबर के कारोबार में सबसे अहम भूमिका कच्चे तेल की कीमतों की रह सकती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव डाल सकता है। ऐसे में अगर शुक्रवार को तेल की कीमतों में दोबारा तेज उछाल आता है तो इसका असर बाजार की धारणा पर दिखाई दे सकता है।

    दूसरी ओर ग्लोबल बाजार से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। अमेरिकी और एशियाई बाजारों में हालिया कारोबार के दौरान मजबूती देखने को मिली है और गुरुवार को भारतीय बाजार में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया था। विदेशी मुद्रा प्रवाह से भारतीय बैंकों की तरलता स्थिति को भी समर्थन मिला है। ऐसे संकेत बाजार में गिरावट को सीमित करने में मदद कर सकते हैं।

    निवेशकों की नजर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के संकेतों पर भी रहेगी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में सतर्कता बढ़ी है। यदि अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़े ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की संभावना बढ़ाते हैं तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। दूसरी तरफ कमजोर आर्थिक आंकड़े दरों में नरमी की उम्मीद को बढ़ा सकते हैं जिससे उभरते बाजारों को कुछ राहत मिल सकती है।

    घरेलू स्तर पर बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयर बाजार को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हाल के कारोबार में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी देखने को मिली है। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। हालांकि बाजार में उतार चढ़ाव को देखते हुए किसी एक सेक्टर या शेयर में जल्दबाजी से दांव लगाने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और बाजार की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर 4 सितंबर का कारोबार बेहद अहम रह सकता है। बाजार में तेजी की कोशिश दिखाई दे सकती है लेकिन महंगा कच्चा तेल वैश्विक तनाव अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव डाल सकती हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए सतर्क रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा। बाजार की दिशा को लेकर किसी निश्चित तेजी या गिरावट का अनुमान लगाने के बजाय सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के साथ वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। यह खबर निवेश सलाह नहीं है और निवेश का फैसला अपनी रिसर्च तथा विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर ही लेना चाहिए।