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  • Stock Market News, निफ्टी रिकॉर्ड हाई से 15% नीचे, 80% शेयर 50 दिन के औसत से फिसले

    Stock Market News, निफ्टी रिकॉर्ड हाई से 15% नीचे, 80% शेयर 50 दिन के औसत से फिसले


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है और अब इसका असर बाजार के बड़े हिस्से में दिखाई देने लगा है। गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी दिन बिकवाली के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे। सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71909.70 अंक पर बंद हुआ जबकि कारोबार के दौरान यह 1187 अंक तक टूट गया और एक साल के निचले स्तर 71292.88 तक पहुंच गया। निफ्टी भी 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत गिरकर 22421.95 अंक पर बंद हुआ।

    निफ्टी में जारी कमजोरी की एक बड़ी तस्वीर लगातार आठवें हफ्ते की गिरावट से सामने आती है। पिछले नौ हफ्तों में निफ्टी करीब 2156 अंक यानी 8.7 प्रतिशत नीचे आ चुका है। सितंबर महीने में भी निफ्टी में करीब 6.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस साल जनवरी में बनाए गए 26373 अंक के रिकॉर्ड स्तर की तुलना में मौजूदा स्तर करीब 15 प्रतिशत नीचे है। बाजार में लगातार गिरावट के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है। हालांकि किसी बाजार को मंदी या बियर मार्केट में प्रवेश करने के लिए सामान्य तौर पर रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 20 प्रतिशत गिरावट का तकनीकी पैमाना इस्तेमाल किया जाता है।

    इस गिरावट के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 9484.22 करोड़ रुपये की निकासी की। इससे पहले बुधवार को उन्होंने करीब 10148 करोड़ रुपये और मंगलवार को 10743 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। इस तरह सिर्फ तीन कारोबारी दिनों में एफआईआई की बिकवाली 29 हजार करोड़ रुपये से अधिक रही। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से बाजार में खरीदारी का भरोसा प्रभावित हुआ है।

    बाजार की कमजोरी केवल कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं दिखाई दे रही है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आंकड़ों के अनुसार निफ्टी 500 में करीब 80 प्रतिशत शेयर अपने 50 दिन के औसत भाव से नीचे कारोबार कर रहे हैं। इसका मतलब है कि बाजार में दबाव व्यापक है और कई कंपनियों के शेयरों में निवेशकों को लगातार बिकवाली का सामना करना पड़ रहा है।

    तकनीकी स्तर पर भी अब निफ्टी के कुछ महत्वपूर्ण स्तरों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। सेबी रजिस्टर्ड शोध विश्लेषक विपिन डिक्सेना के मुताबिक निफ्टी फिलहाल 22400 के आसपास के समर्थन स्तर पर है। यदि यह स्तर टूटता है तो 22200 से 22000 तक दबाव बढ़ने की संभावना बताई गई है। वहीं ऊपर की तरफ 22600 से 22800 के बीच तत्काल प्रतिरोध का क्षेत्र बताया गया है। ये स्तर बाजार की आगे की दिशा समझने के लिए तकनीकी विश्लेषण का हिस्सा हैं और वास्तविक बाजार चाल इससे अलग भी हो सकती है।

    बाजार में जारी गिरावट के पीछे विदेशी निकासी के अलावा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कई कारक भी निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे माहौल में बाजार की दिशा केवल एक कारण से तय नहीं होती। आने वाले कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेश का रुख वैश्विक संकेतक और कंपनियों से जुड़े कारोबारी आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। निवेशकों के लिए मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच किसी भी फैसले से पहले अपने जोखिम और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • शेयर बाजार में तबाही का तूफान, दो दिन में निवेशकों के ₹15 लाख करोड़ साफ, सेंसेक्स 1500 अंक टूटा

    शेयर बाजार में तबाही का तूफान, दो दिन में निवेशकों के ₹15 लाख करोड़ साफ, सेंसेक्स 1500 अंक टूटा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि दो कारोबारी सत्रों में निवेशकों की करीब ₹15 लाख करोड़ की संपत्ति साफ हो गई। सेंसेक्स में 1500 अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तरों के नीचे फिसल गया।

    बाजार में यह गिरावट केवल घरेलू कारणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।

    विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव बढ़ाने वाली मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई, आयात बिल और चालू खाते के घाटे पर असर पड़ सकता है।

    इसके साथ ही भारतीय रुपये में भी बड़ी कमजोरी देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया, जिससे विदेशी निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। रुपये की कमजोरी का असर विदेशी फंड्स के रिटर्न पर पड़ता है, जिसके कारण वे बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया। बड़े वैश्विक फंड जोखिम कम करने के लिए लगातार भारतीय इक्विटी से दूरी बना रहे हैं। इसका असर खासतौर पर बड़े शेयरों और बैंकिंग सेक्टर में देखने को मिला, जहां भारी बिकवाली दर्ज की गई।

    बाजार में गिरावट को और तेज करने में डेरिवेटिव एक्सपायरी का भी बड़ा योगदान रहा। कमजोर सेंटीमेंट के बीच ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन घटानी शुरू कर दी, जिससे अचानक वॉलेटिलिटी बढ़ गई और बाजार में गिरावट और गहरी हो गई।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो आईटी, रियल एस्टेट और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई। निवेशकों को डर है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती का असर टेक्नोलॉजी कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है। हालांकि कमोडिटी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में कुछ मजबूती जरूर देखने को मिली, क्योंकि ऊंचे कच्चे तेल की कीमतों का इन कंपनियों को लाभ मिल सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार दबाव वाले दौर में है और निवेशकों को सावधानी के साथ कदम उठाने की जरूरत है। उनका कहना है कि ऐसे समय में घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए और मजबूत कंपनियों पर लंबी अवधि के नजरिए से ध्यान देना चाहिए।

    फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर बनी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में यही तय करेगा कि बाजार में स्थिरता लौटेगी या गिरावट का दबाव और बढ़ेगा।