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  • बंदरगाहों पर घटेगी देरी, कारोबार को मिलेगी तेजी: नए कस्टम और बैंकिंग सुधारों से विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती

    बंदरगाहों पर घटेगी देरी, कारोबार को मिलेगी तेजी: नए कस्टम और बैंकिंग सुधारों से विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती


    नई दिल्ली । भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार अब आर्थिक सुधारों के अगले चरण की तैयारी में जुट गई है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बदलाव के बाद सरकार की नजर अब सीमा शुल्क प्रणाली को आधुनिक बनाने और बैंकिंग क्षेत्र को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत करने पर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में आयात प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नई तकनीक और रिस्क आधारित जांच प्रणाली लागू की जा सकती है। साथ ही विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका तय करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी बनाई गई है। सरकार का मानना है कि कारोबार की राह आसान करने और वित्तीय व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने से भारत की आर्थिक रफ्तार को नई मजबूती मिलेगी।

    जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान एक विशेष बातचीत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में पहले ही कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं लेकिन सीमा शुल्क व्यवस्था में अभी और बदलाव की जरूरत है। सरकार का फोकस भारतीय बंदरगाहों से आयात होने वाले सामान की आवाजाही को तेज और आसान बनाने पर है ताकि कारोबारियों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े और देश के प्रमुख बंदरगाहों पर भीड़ कम हो सके।

    सरकार जिस नई व्यवस्था पर विचार कर रही है उसमें आधुनिक स्कैनर और रिस्क आधारित आयात स्क्रीनिंग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत ज्यादा जोखिम वाले आयात की गहन जांच की जाएगी जबकि कम जोखिम वाले कंसाइनमेंट को तेजी से मंजूरी मिल सकेगी। इस व्यवस्था से सीमा शुल्क अधिकारियों को संदिग्ध और संवेदनशील मामलों पर अधिक ध्यान देने में मदद मिलेगी जबकि सामान्य व्यापारिक गतिविधियां बिना अनावश्यक रुकावट के आगे बढ़ सकेंगी। इसका सीधा फायदा आयातकों के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन से जुड़े क्षेत्रों को भी मिल सकता है।

    सरकार का यह कदम कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेज कस्टम क्लियरेंस से बंदरगाहों पर माल के लंबे समय तक रुके रहने की समस्या कम हो सकती है। इससे व्यापार की लागत घटने और कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ने की संभावना है। हालांकि वित्त मंत्री ने स्कैनर आधारित प्रणाली और ऑटोमैटिक मंजूरी व्यवस्था को लागू करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई है लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि सीमा शुल्क क्षेत्र में व्यापक सुधारों पर काम जारी है।

    दूसरी ओर सरकार बैंकिंग सेक्टर को भी विकसित भारत 2047 की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है जो भविष्य की भारतीय अर्थव्यवस्था की जरूरतों के हिसाब से बैंकिंग व्यवस्था की भूमिका और दिशा पर विचार करेगी। यह समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी जिसके आधार पर बैंकिंग क्षेत्र में आगे की रणनीति तय की जा सकती है। मजबूत बैंकिंग व्यवस्था को निवेश बढ़ाने, उद्योगों को वित्त उपलब्ध कराने और देश की विकास यात्रा को गति देने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

    वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर नियमों के अनुपालन का बोझ कम करने पर लगातार काम कर रही है। अब तक एक हजार से अधिक पुराने कानून हटाए जा चुके हैं और लगभग 40 हजार नियमों को सरल बनाया गया है। सरकार का उद्देश्य नागरिकों और कंपनियों को जटिल प्रक्रियाओं से राहत देना और निवेश के लिए अधिक अनुकूल माहौल तैयार करना है।

    ये प्रस्तावित सुधार ऐसे समय में सामने आए हैं जब भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन ने आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया है। ऐसे में सरकार का नया सुधार एजेंडा स्पष्ट संकेत देता है कि तेज कारोबार आधुनिक सीमा शुल्क प्रणाली मजबूत बैंकिंग व्यवस्था और सरल नियमों के जरिए भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

  • जी-20 मंच पर भारत की मजबूत आर्थिक कूटनीति: अमेरिका के साथ ग्रोथ एजेंडे पर सहमति, कई देशों ने बढ़ाई आर्थिक साझेदारी में रुचि

    जी-20 मंच पर भारत की मजबूत आर्थिक कूटनीति: अमेरिका के साथ ग्रोथ एजेंडे पर सहमति, कई देशों ने बढ़ाई आर्थिक साझेदारी में रुचि


    नई दिल्ली । जी-20 की बैठक में भारत ने वैश्विक आर्थिक विकास और वित्तीय संतुलन को लेकर अपना स्पष्ट और मजबूत रुख पेश किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत अमेरिकी अध्यक्षता के तहत जी-20 में आर्थिक विकास वैश्विक असंतुलन को दूर करने और वित्तीय साक्षरता बढ़ाने जैसे प्रमुख मुद्दों पर अमेरिका के साथ पूरी तरह सहमत है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ हुई सकारात्मक और रचनात्मक द्विपक्षीय बैठक के बाद सीतारमण ने कहा कि नई दिल्ली और वाशिंगटन वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक जैसी सोच रखते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अध्यक्षता ने विकास को प्राथमिकता दी है और वैश्विक आर्थिक असंतुलन को गंभीर चुनौती के रूप में सामने रखा है। साथ ही वित्तीय साक्षरता को भी विशेष महत्व दिया गया है और भारत इन सभी विषयों पर खुली और निष्पक्ष चर्चा का समर्थन करता है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास जी-20 के वित्तीय ट्रैक का केंद्रीय विषय है और दुनिया की बदलती आर्थिक परिस्थितियों में वैश्विक असंतुलन को दूर करना भी बेहद जरूरी हो गया है। भारत चाहता है कि जी-20 के सदस्य देश उन सभी चुनौतियों पर गंभीर और व्यापक चर्चा करें जो अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। सीतारमण ने अमेरिकी अध्यक्षता द्वारा इन मुद्दों को प्राथमिकता देने की सराहना करते हुए कहा कि भारत एशविले में चल रही चर्चाओं में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर मजबूत आर्थिक सहयोग और बेहतर समन्वय के बिना आने वाली चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव नहीं होगा।

    जी-20 बैठक के दौरान सीतारमण ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर अलग से बातचीत भी की। उन्होंने इस बैठक को बेहद सकारात्मक और रचनात्मक बताया। हालांकि बैठक के विस्तृत मुद्दों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई लेकिन उनके बयान से यह साफ संकेत मिला कि आर्थिक विकास को प्राथमिकता देने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में मौजूद असंतुलन को कम करने के विषय पर भारत और अमेरिका के बीच व्यापक सहमति बनी है। यह सहमति ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब दुनिया कई आर्थिक और भू राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है।

    वित्त मंत्री ने जी-20 बैठक के दौरान पोलैंड कतर दक्षिण कोरिया और रूस के प्रतिनिधियों के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। उन्होंने कहा कि सभी देशों के प्रतिनिधियों के पास भारत की आर्थिक स्थिति और विकास से जुड़े तथ्य मौजूद थे और वे भारत के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। कुछ देशों के साथ आगे आर्थिक और वित्तीय संवाद की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है। दक्षिण कोरिया के साथ इस साल के अंत में विशेष संवाद होगा जबकि कतर के साथ भी आर्थिक सहयोग को लेकर आगे बातचीत की जाएगी।

    भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था ने भी जी-20 मंच पर देश की स्थिति को मजबूती दी है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज की है। इस दौरान मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि वित्तीय और पेशेवर सेवा क्षेत्र में 12.1 प्रतिशत का विस्तार दर्ज किया गया। सीतारमण ने इन आंकड़ों को वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक मजबूती का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि नई चुनौतियां सामने आने पर सरकार भारत को बेहतर और लाभकारी स्थिति में बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाती रहेगी।

    वित्त मंत्री की विदेश यात्रा की शुरुआत कनाडा से हुई जहां उन्होंने वहां के वित्त मंत्री के साथ बातचीत की। इसके बाद वह निवेश और वित्तीय एजेंसियों से चर्चा के लिए शिकागो पहुंचीं और फिर जी-20 बैठक में भाग लेने के लिए एशविले गईं। यहां कार्यक्रम पूरे होने के बाद वह न्यूयॉर्क में उन अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से मुलाकात करेंगी जो भारतीय बाजार में अपनी भागीदारी बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। जी-20 मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी और कई देशों के साथ बढ़ते आर्थिक संवाद से यह संकेत मिल रहा है कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

  • ग्रोथ के आंकड़ों पर सियासत गर्म, निर्मला सीतारमण बोलीं भारत की अर्थव्यवस्था को मृत कहना करोड़ों मेहनतकश भारतीयों का अपमान

    ग्रोथ के आंकड़ों पर सियासत गर्म, निर्मला सीतारमण बोलीं भारत की अर्थव्यवस्था को मृत कहना करोड़ों मेहनतकश भारतीयों का अपमान


    नई दिल्ली । एशविले में जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान पर कड़ा पलटवार किया है जिसमें उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत अर्थव्यवस्था बताया था। सीतारमण ने कहा कि ऐसे बयान केवल सरकार की आलोचना नहीं हैं बल्कि उन करोड़ों भारतीय नागरिकों की मेहनत को भी कमतर आंकते हैं जिनके प्रयासों से देश लगातार आर्थिक प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब भारत मजबूत विकास दर दर्ज कर रहा है और विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिल रहा है तब देश की अर्थव्यवस्था को नकारात्मक रूप से पेश करना तथ्यों से अलग तस्वीर दिखाने जैसा है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और सरकार से सवाल पूछना उसका अधिकार और जिम्मेदारी दोनों हैं। सरकार की नीतियों की आलोचना करना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है लेकिन राजनीतिक विरोध के दौरान देश के नागरिकों की मेहनत और आर्थिक उपलब्धियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सरकार से असहमति रखने का पूरा अधिकार है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति में आम नागरिकों के योगदान को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।

    सीतारमण ने भारत की आर्थिक स्थिति के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2026-27 वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि फाइनेंशियल और प्रोफेशनल सर्विस सेक्टर में 12.1 प्रतिशत का विस्तार देखने को मिला है। इसके साथ ही देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 700 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचना भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि ये आंकड़े केवल कागजों पर दर्ज उपलब्धियां नहीं हैं बल्कि इसके पीछे देश के करोड़ों नागरिकों की कड़ी मेहनत और उनकी महत्वाकांक्षाएं हैं। भारत के लोग अपनी व्यक्तिगत प्रगति के साथ देश को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाने में भी योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारत का आर्थिक प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है और यह देश की क्षमता को दर्शाता है।

    राहुल गांधी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए सीतारमण ने कांग्रेस में मौजूद अर्थशास्त्रियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में कई ऐसे लोग हैं जो आर्थिक आंकड़ों और वास्तविक तथ्यों को समझते हैं। इसलिए मजबूत विकास दर और अन्य सकारात्मक संकेतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत कहना हैरान करने वाला है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में सुधार की जरूरत हो सकती है और सरकार की नीतियों पर सवाल भी उठाए जा सकते हैं लेकिन इससे देश की पूरी आर्थिक प्रगति को नकारा नहीं जा सकता।

    सीतारमण ने मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कारोबार और निवेश को आसान बनाने के लिए 1000 से अधिक कानूनों को हटाया है और लगभग 40000 नियमों को सरल बनाया गया है। केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग तथा उद्योग और व्यापार जगत के साथ लगातार संवाद को भी आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण बताया गया।

    उन्होंने भरोसा जताया कि पहली तिमाही का मजबूत प्रदर्शन पूरे वित्तीय वर्ष के लिए सकारात्मक संकेत है। आने वाली तिमाहियों में भी भारत की विकास गति बनाए रखने की उम्मीद है। जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से होने वाली बातचीत में भी भारत की आर्थिक संभावनाओं और निवेश अवसरों पर जोर दिया जा रहा है। सीतारमण के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि आर्थिक आंकड़ों और विकास के मुद्दे पर राजनीतिक बहस के बीच देश की प्रगति को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए।

  • 2047 का विकसित भारत अब दूर नहीं! सिर्फ 20 साल बाकी, वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं- सुधारों को चाहिए और ज्यादा समर्थन

    2047 का विकसित भारत अब दूर नहीं! सिर्फ 20 साल बाकी, वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं- सुधारों को चाहिए और ज्यादा समर्थन


    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा है कि यह लक्ष्य अब मुश्किल से 20 वर्ष दूर रह गया है। ऐसे में भारत को आर्थिक और संरचनात्मक सुधारों की रफ्तार को और तेज करने के लिए व्यापक समर्थन की जरूरत होगी। अमेरिका के शिकागो में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिभाशाली और व्यापक अनुभव रखने वाले लोगों के साथ ऐसे लोगों का सहयोग भी जरूरी है जो नई सोच और नए विचारों के साथ भारत की विकास यात्रा को मजबूती दे सकें। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में पूंजी को बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि किसी देश की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त पूंजी आवश्यक होती है।

    सीतारमण ने भारत की आर्थिक नीतियों और राजकोषीय अनुशासन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने वर्ष 2030 तक कर्ज को सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 50 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य तय किया है। सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज का स्तर उनकी जीडीपी के 200 प्रतिशत से भी अधिक है लेकिन भारत ने अपने लिए राजकोषीय अनुशासन का स्पष्ट रास्ता चुना है। वित्त मंत्री के अनुसार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए तय किए गए लक्ष्यों की दिशा में भी सरकार ने निर्धारित प्रगति हासिल की है।

    वित्त मंत्री ने भारत की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि देश की क्रेडिट रेटिंग में सुधार हो रहा है और यह सुधार किसी नियम को दरकिनार करके हासिल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक कल्याण के लिए जरूरी संसाधनों को रोककर भी आर्थिक मजबूती हासिल नहीं की जा रही है बल्कि अर्थव्यवस्था का उचित और संतुलित प्रबंधन इसकी मुख्य वजह है। उनके मुताबिक भारत ने आर्थिक विकास के साथ सामाजिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है।

    सीतारमण ने वैश्विक आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाल के दौर में कच्चे तेल एलपीजी और उर्वरक जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति में मुश्किलें सामने आईं। इन वस्तुओं को भारत तक पहुंचाने वाले जहाजों को पर्याप्त बीमा कवर मिलने में भी दिक्कतें आईं और जोखिम प्रीमियम काफी बढ़ गया। ऐसी परिस्थितियों में आयात और आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता था।

    उन्होंने बताया कि सरकार ने बजट में एक घोषणा के जरिए ऐसा फंड उपलब्ध कराया जिससे जोखिम के कारण शिपिंग कंपनियों को चुकाने पड़ने वाले अतिरिक्त प्रीमियम में सहायता दी जा सके। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वैश्विक संकट का सीधा असर भारतीय किसानों परिवारों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र पर न पड़े। वित्त मंत्री के अनुसार इस कदम से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली और भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने की कोशिश की गई।

    उर्वरक की उपलब्धता का उदाहरण देते हुए सीतारमण ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में कमी के बावजूद भारत में उर्वरक की कमी महसूस नहीं होने दी गई। सरकार ने बाजारों को लगातार यह जानकारी उपलब्ध कराई कि देश को कितनी मात्रा में उर्वरक की आवश्यकता होगी। इससे आपूर्ति की योजना बनाने और जरूरत के मुताबिक संसाधन जुटाने में मदद मिली।

    वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कई देशों की आर्थिक गणनाएं प्रभावित हुईं लेकिन भारत ने अपनी सीमाओं के बावजूद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने की कोशिश की। उनके बयान का व्यापक संदेश यही रहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए आने वाले वर्षों में आर्थिक अनुशासन निवेश सुधार नवाचार और वैश्विक भारतीय समुदाय के सहयोग को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। अब जब लक्ष्य लगभग दो दशक की दूरी पर है तब सुधारों की गति और उनके प्रभाव को बढ़ाना सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

  • कनाडा के निवेशकों पर भारत की नजर, सीतारमण बोलीं- नीतियां अनुकूल और टैक्स व्यवस्था में बढ़ी निश्चितता

    कनाडा के निवेशकों पर भारत की नजर, सीतारमण बोलीं- नीतियां अनुकूल और टैक्स व्यवस्था में बढ़ी निश्चितता


    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडा के प्रमुख निवेशकों और कंपनियों को भारत में निवेश के बढ़ते अवसरों का लाभ उठाने का न्योता दिया है। टोरंटो में आयोजित हाई लेवल बिजनेस राउंडटेबल में वित्त मंत्री ने कनाडाई कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ भारत के निवेशक हितैषी नीतिगत माहौल टैक्स से जुड़ी निश्चितता और लगातार किए जा रहे आर्थिक सुधारों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत अलग अलग सेक्टर और क्षेत्रों में निवेश के लिए नए अवसर उपलब्ध करा रहा है और कनाडाई कंपनियां इन संभावनाओं के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत कर सकती हैं।

    राउंडटेबल में क्लीन टेक्नोलॉजी जरूरी खनिज रेयर अर्थ्स एनर्जी स्टोरेज सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर कृषि फूड प्रोसेसिंग ऑटोमोबाइल टेक्सटाइल्स ग्रीन स्टील एयरोस्पेस स्पेस साइबर सिक्योरिटी बायोटेक्नोलॉजी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एसेट मैनेजमेंट हायर एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के कारोबारी प्रतिनिधि शामिल हुए। इससे साफ है कि भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित रखने के बजाय भविष्य की तकनीकों और उभरते उद्योगों तक विस्तार देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    वित्त मंत्री ने ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान की प्रेसिडेंट और सीईओ जो टेलर से भी मुलाकात की। उन्होंने भारत में ओटीपीपी के लंबे समय से जारी भरोसे और नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के साथ उसकी साझेदारी की सराहना की। दोनों पक्षों के बीच पार्टनरशिप और को इन्वेस्टमेंट के जरिए भारत में ओटीपीपी के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को बढ़ाने की संभावनाओं पर बातचीत हुई। ट्रांसमिशन ट्रांसपोर्ट शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों को खास तौर पर महत्वपूर्ण बताया गया।

    सीतारमण ने ग्लोबल निवेशकों के लिए गिफ्ट आईएफएससी को एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश किया और ओटीपीपी को भारत के साथ अपने आर्थिक जुड़ाव को और मजबूत करने तथा बड़े निवेश अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके साथ ही उन्होंने ओएमईआरएस के प्रेसिडेंट और सीईओ ब्लेक हचेसन से भी मुलाकात की और भारत में संस्थान के लगातार भरोसे की सराहना की। बातचीत में इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट समेत कई क्षेत्रों में लंबे समय की साझेदारी को और गहरा करने के अवसरों पर चर्चा हुई।

    बैठक के दौरान ट्रांसपोर्टेशन ट्रांसमिशन रिन्यूएबल एनर्जी शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि बढ़ते मध्यम वर्ग और तेजी से बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया गया।

    वित्त मंत्री ने कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड के प्रेसिडेंट और सीईओ जॉन ग्राहम से भी मुलाकात की। उन्होंने भारत में सीपीपीआईबी के लंबे समय के भरोसे और एनआईआईएफ इंफ्रा फंड II में उसके निवेश की सराहना की। दोनों पक्षों के बीच ट्रांसमिशन रिन्यूएबल एनर्जी सड़कें बंदरगाह शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटरों में संस्थागत पूंजी के लिए नए अवसर बढ़ाने पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री का यह दौरा भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और कनाडाई निवेशकों के साथ दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

  • चार दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हुईं निर्मला सीतारमण, द्विपक्षीय साझेदारी पर होगा फोकस

    चार दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हुईं निर्मला सीतारमण, द्विपक्षीय साझेदारी पर होगा फोकस


    नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बुधवार को फ्रांस के लिए रवाना हो गईं। इस दौरे का उद्देश्य भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना, आर्थिक सहयोग को नई गति देना तथा निवेश, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में संबंधों को और विस्तार देना है।

    यात्रा के दौरान वित्त मंत्री कई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगी। इस दौरे का प्रमुख आकर्षण भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (Economic and Financial Dialogue-EFD) होगा, जिसकी सह-अध्यक्षता वह फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त तथा औद्योगिक एवं ऊर्जा संप्रभुता मंत्री रोलैंड लेस्क्योर के साथ ऐक्स-एन-प्रोवेंस में करेंगी। इस बैठक में दोनों देश आर्थिक सहयोग के नए अवसरों और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करेंगे।

    निर्मला सीतारमण वैश्विक कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों (सीईओ) के साथ अलग-अलग बैठकें भी करेंगी। इसके अलावा वह प्रमुख उद्योगपतियों के साथ आयोजित एक राउंडटेबल चर्चा में शामिल होकर भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, जारी संरचनात्मक सुधारों, निवेश की संभावनाओं और दीर्घकालिक विकास के अवसरों को प्रस्तुत करेंगी।

    वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्त मंत्री यूरोप के प्रतिष्ठित वार्षिक मंच ‘लेस रेन्कॉन्ट्रेस इकोनॉमिक्स डी’एक्स-एन-प्रोवेंस’ में “नए मध्यम वर्ग के विकास को कैसे बढ़ावा दें” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भी हिस्सा लेंगी। इस सम्मेलन में दुनिया भर के नीति-निर्माता, केंद्रीय बैंक प्रमुख, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, अर्थशास्त्री और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञ वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर विचार साझा करेंगे।

    अपने दौरे के दौरान सीतारमण फ्रांस के कैडाराश स्थित इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) परियोजना का भी दौरा करेंगी। यह परमाणु संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) ऊर्जा से जुड़ी दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजनाओं में शामिल है, जिसमें भारत और फ्रांस सहित 30 से अधिक देशों की भागीदारी है।

    इसके अलावा वित्त मंत्री ‘कैंपस साइबर’ का भी दौरा करेंगी, जो फ्रांस में साइबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास का प्रमुख केंद्र है। इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अनुभवों एवं सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान की उम्मीद है।

    यात्रा के दौरान सीतारमण प्रोवेंस-आल्प्स-कोटे डी’अजूर (PACA) क्षेत्र के अध्यक्ष रेनॉड म्यूसेलियर से भी मुलाकात करेंगी। इस बैठक में निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।

    अपने चार दिवसीय दौरे के अंतिम चरण में वित्त मंत्री फ्रांस में रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ आयोजित एक सामुदायिक कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगी।

  • 2033 तक देश के हर नागरिक को मिलेगा स्वास्थ्य बीमा का लाभ : निर्मला सीतारमण

    2033 तक देश के हर नागरिक को मिलेगा स्वास्थ्य बीमा का लाभ : निर्मला सीतारमण


    नई दिल्ली।
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2033 तक देश के सभी नागरिकों को बीमा कवर के दायरे में लाया जाएगा। मंगलवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय बीमा क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। यह एक मजबूत और समावेशी इकोसिस्टम के रूप में उभर रहा है, जहां सरकार की नीतियों के कारण समाज के सबसे निचले तबके को भी सुरक्षा कवच मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में बीमा क्षेत्र का आकार 1,17,505 करोड़ रुपये हो गया, जिसके तहत देश के 58 करोड़ लोगों को कवर किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने 42,420 करोड़ रुपये का प्रीमियम जुटाया है। निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 37,752 करोड़ रुपये है। स्टैंडअलोन स्वास्थ्य बीमा कंपनियों का योगदान 37,331 करोड़ रुपये है।

    उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में 2.51 करोड़ व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियां जारी हुईं, जिनसे 6.01 करोड़ लोगों को कवर मिला। इसके अतिरिक्त, 13.05 लाख ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों के जरिए 27.51 करोड़ सदस्य कवर किए गए हैं। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि वैश्विक स्तर पर औसत प्रति व्यक्ति प्रीमियम 943 डॉलर है, जबकि भारत में यह केवल 97 डॉलर है। इस अंतर को पाटने के लिए सरकार कई लक्षित सुधार कर रही है। व्यक्तिगत प्रीमियम पर जीएसटी छूट और ग्रामीण व सामाजिक क्षेत्रों में बीमा की पहुंच बढ़ाने के लिए नियामक संस्था इरडा द्वारा 2024 में अधिसूचित नए नियम इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। इसके अलावा, बाजार में गहराई लाने और पैठ बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार दिसंबर 2025 में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए एक विधेयक लेकर आई।

    वित्त मंत्री ने कहा कि देश के सबसे गरीब नागरिकों को पीछे नहीं छोड़ा जा रहा है। पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत मात्र 436 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का लाइफ कवर देती है। इसमें अब तक 26.79 करोड़ नामांकन हो चुके हैं। आयुष्मान भारत (एबी-पीएमजेएवाई) देश की 40 प्रतिशत निचली आबादी (लगभग 12 करोड़ परिवार) को हर साल 5 लाख रुपये का अस्पताल खर्च कवर देती है। 28 फरवरी 2026 तक देश भर में 43.52 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।

  • एमपी में GST चोरी का बड़ा आरोप: गुजरात-महाराष्ट्र से बिना टैक्स का माल खपाने का दावा, नेता प्रतिपक्ष ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र

    एमपी में GST चोरी का बड़ा आरोप: गुजरात-महाराष्ट्र से बिना टैक्स का माल खपाने का दावा, नेता प्रतिपक्ष ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र



    भोपाल। उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर हो रही कथित GST चोरी को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को पत्र लिखकर पूरे मामले की केंद्रीय स्तर पर उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    गुजरात-महाराष्ट्र से आ रहा बिना टैक्स का माल
    सिंघार ने आरोप लगाया कि Madhya Pradesh में संगठित नेटवर्क के जरिए Gujarat, Maharashtra और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों से आयरन, कंस्ट्रक्शन मटेरियल और मसालों की खेप बिना वैध टैक्स चुकाए प्रदेश के बाजारों में खपाई जा रही है।

    ऐसे किया जा रहा टैक्स में घोटाला
    नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक इस नेटवर्क में कई तरीके अपनाए जा रहे हैंफर्जी E-Way बिल: ट्रकों में माल भरा होता है, लेकिन कागजों में फर्जी या हेरफेर किए गए E-Way बिल दिखाए जाते हैं।अंडर-इनवॉइसिंग: टैक्स बचाने के लिए माल की असली कीमत और मात्रा कागजों में कम दिखाई जाती है।बिचौलियों का नेटवर्क: बॉर्डर से लेकर जिलों तक ट्रांसपोर्टरों और बिचौलियों का संगठित सिंडिकेट सक्रिय है, जो बिना टैक्स चुकाए माल को सुरक्षित बाजारों तक पहुंचाता है।

    हजारों करोड़ के नुकसान का दावा
    उमंग सिंघार ने अपने पत्र में कहा कि इस संगठित टैक्स चोरी से केंद्र और राज्य सरकार को हर साल हजारों करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है और उनके पास इसके पुख्ता प्रमाण भी हैं।

    इन अधिकारियों को भी भेजी शिकायत
    मामले की गंभीरता को देखते हुए सिंघार ने अपने पत्र की प्रतियां कई अहम अधिकारियों को भी भेजी हैं, जिनमें शामिल हैं:Central Board of Indirect Taxes and Customs के अध्यक्षमध्यप्रदेश शासन के वित्त मंत्रीवाणिज्यिक कर विभाग (मप्र) के प्रमुख सचिव
    नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि पूरे नेटवर्क की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि टैक्स चोरी के इस कथित सिंडिकेट का खुलासा हो सके।

  • राहुल-सीतारमण के बीच संसद में तीखी बहस: भारत बेचने के आरोप पर गरमा गया बजट सत्र

    राहुल-सीतारमण के बीच संसद में तीखी बहस: भारत बेचने के आरोप पर गरमा गया बजट सत्र


    नई दिल्ली। लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील को लेकर आरोप लगाया कि सरकार ने भारत माता को बेच दिया और अब अमेरिका तय करेगा कि हम किससे तेल खरीदेंगे।

    सीतारमण का पलटवार: कांग्रेस ने भारत को बेचा
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि भारत को बेचने का असली जिम्मेदार कांग्रेस है। उन्होंने याद दिलाया कि बाली में जाकर कांग्रेस ने सौदा किया था और किसानों के हक से समझौता किया। मोदी सरकार ने 2014 में विश्व व्यापार संगठन में जाकर इसे सुधारा।

    सीतारमण ने बजट पर सवाल उठाने वाले टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के GST आरोपों को भी खारिज किया और कहा कि बंगाल में पेट्रोल दिल्ली से 10रुपए ज्यादा महंगा है, जिसे कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट शासित राज्यों में आर्थिक विकास सबसे नीचे है और वहां उद्योग नहीं टिकते।

    राहुल के अडाणी और अमेरिका केस वाले आरोप
    राहुल गांधी ने अडाणी पर अमेरिका में चल रहे केस का जिक्र किया और कहा कि यह मोदी पर दबाव बनाने का तरीका है। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल से सबूत पेश करने को कहा और संसद में विशेषाधिकार नोटिस देने की बात कही।

    सीतारमण ने संसद में मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
    निर्मला सीतारमण ने कहा कि बजट का मुख्य फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और MSME के लिए सहायक नीतियों पर है। उन्होंने कहा कि हेल्थकेयर, शिक्षा और लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी हटाया गया है।

    ओवैसी ने तेल और विदेश नीति पर सवाल उठाया
    एआईएमआईएमके असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि किसी “गोरी चमड़ी वाले” को यह तय करने का अधिकार नहीं कि भारत किससे तेल खरीदे। उन्होंने ऑपरेशन इंसाफ, हाफिज सईद, मसूद अजहर और लखवी को भारत लाने की मांग भी की।

  • Budget 2026: टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, कैंसर दवाइयों पर कस्टम ड्यूटी हटाई, 3 आयुर्वेदिक AIIMS का ऐलान

    Budget 2026: टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, कैंसर दवाइयों पर कस्टम ड्यूटी हटाई, 3 आयुर्वेदिक AIIMS का ऐलान


    नई दिल्ली। संसद के पटल पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना लगातार 9वां बजट पेश किया। 85 मिनट के अपने संबोधन में उन्होंने देश की आर्थिक नींव को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हालांकि, इस बार इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न करके मध्यम वर्ग को थोड़ा निराश जरूर किया है, लेकिन टैक्स फाइलिंग की समय सीमा बढ़ाकर और ‘न्यू इनकम टैक्स एक्ट’ की घोषणा कर भविष्य में प्रक्रिया को सरल बनाने का वादा किया है।

    1. स्वास्थ्य क्षेत्र: कैंसर और दुर्लभ बीमारियों का इलाज होगा सस्ता
    बजट की सबसे मानवीय और बड़ी घोषणा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी है। सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 महत्वपूर्ण दवाओं पर से 5% बेसिक कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह हटा दिया है। इसके अलावा, हीमोफिलिया और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाएं भी अब ड्यूटी फ्री होंगी। आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए देश में 3 नए आयुर्वेदिक एम्स (AIIMS) खोले जाएंगे, जो भारत को ‘बायो-फार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    2. रेलवे और कनेक्टिविटी: 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर का जाल
    बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार ने रेलवे को नई गति दी है। देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ने के लिए 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया गया है। इसमें दिल्ली-वाराणसी और मुंबई-पुणे जैसे रूट शामिल हैं, जो न केवल यात्रा का समय घटाएंगे बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी तेज करेंगे। साथ ही, अगले 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास किया जाएगा, जिससे माल ढुलाई सस्ती और सुगम होगी।

    3. रक्षा बजट: आधुनिकीकरण पर ₹2.19 लाख करोड़ का दांव
    बदलते वैश्विक परिवेश और जियो-पॉलिटिकल चुनौतियों को देखते हुए रक्षा बजट में 15.2% की भारी बढ़ोतरी की गई है। कुल ₹7.85 लाख करोड़ के रक्षा बजट में से ₹2.19 लाख करोड़ सीधे तौर पर सैन्य बलों के आधुनिकीकरण (Modernization) पर खर्च होंगे। इसमें स्वदेशी विमानों के इंजन विकास के लिए ₹64 हजार करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की संकल्पना को साकार करेगा।

    4. महिला सशक्तिकरण और शिक्षा: हॉस्टल और SHE-मार्ट
    महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘लखपति दीदी’ मॉडल को विस्तार देते हुए SHE-मार्ट (शी-मार्ट) योजना शुरू की गई है। ये स्टोर महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित होंगे, जहाँ वे बिना बिचौलियों के अपने उत्पाद बेच सकेंगी। शिक्षा के क्षेत्र में, हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने और कॉलेजों में ‘कंटेंट क्रिएटर लैब्स’ स्थापित करने का निर्णय युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने का प्रयास है।

    5. कृषि और लघु उद्योग: चंदन से लेकर काजू-कोको तक
    खेती को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि मुनाफे का जरिया बनाने के लिए सरकार ने नारियल, चंदन और काजू-कोको उद्योग को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है। ‘मछली पालन’ के लिए 500 नए तालाबों का विकास किया जाएगा। टेक्सटाइल सेक्टर में कारीगरों की मदद के लिए ‘नेशनल हैंडलूम पॉलिसी’ और ‘मेगा टेक्सटाइल पार्क’ के जरिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे।
    बजट 2026 में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन रिवाइज्ड रिटर्न की तारीख 31 मार्च तक बढ़ाई गई है। कैंसर की 17 दवाएं सस्ती होंगी, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और 3 आयुर्वेदिक एम्स बनेंगे। रक्षा बजट को बढ़ाकर ₹7.85 लाख करोड़ किया गया है, जिसमें सैन्य आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया गया है।