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  • नया फ्री-फ्लो टोल सिस्टम शुरू, बिना रुके कटेगा टोल-ईंधन और समय दोनों की होगी बचत

    नया फ्री-फ्लो टोल सिस्टम शुरू, बिना रुके कटेगा टोल-ईंधन और समय दोनों की होगी बचत

    नई दिल्ली ।देश में हाईवे यात्रा को और अधिक आधुनिक और सुगम बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव किया गया है, जिसमें टोल कलेक्शन सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और बैरियर-लेस बनाने की पहल शुरू हो गई है। इस नई व्यवस्था के तहत अब वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और पूरा प्रोसेस ऑटोमैटिक तरीके से पूरा हो जाएगा।

    इस नई तकनीक में वाहन जैसे ही टोल प्लाजा से गुजरेंगे, कैमरे उनके नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे और जुड़े हुए फास्टैग अकाउंट से टोल शुल्क अपने आप कट जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है। यह सिस्टम खास तौर पर उन हाईवे सेक्शंस के लिए तैयार किया गया है जहां अक्सर लंबी कतारें और देरी देखने को मिलती है।

    नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्रा का समय कम होगा और वाहन लगातार गति में रहेंगे। इससे न सिर्फ यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी। लगातार रुकने और चलने की स्थिति खत्म होने से वाहनों का माइलेज बेहतर होगा और प्रदूषण में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।

    सरकारी अनुमान के अनुसार इस तकनीक के लागू होने से हर साल बड़ी मात्रा में ईंधन की बचत संभव होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी फायदा मिलेगा क्योंकि माल ढुलाई तेज और अधिक प्रभावी हो जाएगी। इससे सप्लाई चेन सिस्टम में भी सुधार देखने को मिलेगा।

    इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से देश के अलग-अलग हिस्सों में लागू किया जा रहा है। शुरुआत कुछ चुनिंदा टोल प्लाजा से की गई है और धीरे-धीरे इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की योजना है। आने वाले समय में बड़ी संख्या में टोल प्लाजा इस डिजिटल सिस्टम से जुड़ जाएंगे।

    हालांकि इस नई व्यवस्था में फास्टैग बैलेंस को लेकर यात्रियों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी। यदि खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होता है तो ई-नोटिस जारी किया जा सकता है और तय समय सीमा में भुगतान न करने पर अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ सकता है।

  • टोल प्लाजा हटेंगे…. देश में शुरू होगा नया GPS बेस्ड ऑटोमैटिक सिस्टम

    टोल प्लाजा हटेंगे…. देश में शुरू होगा नया GPS बेस्ड ऑटोमैटिक सिस्टम


    नई दिल्ली।
    देश में बहुत जल्द ही नया टोल सिस्टम (New Toll System) आने वाला है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने इसको लेकर जानकारी दी है। इसके मुताबिक इस साल के अंत तक पूरे देश से टोल प्लाजा हट सकते हैं। इसकी जगह ऑटोमैटिक सिस्टम (Automatic system) शुरू होगा। जीपीएस बेस्ड इस सिस्टम (GPS Based System) के जरिए गाड़ियों की नंबर प्लेट और फास्टैग लिंक्ड सिस्टम से पैसे कट जाएंगे। गडकरी ने इस सिस्टम के कई फायदे बताए हैं। जिसमें सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि टोल प्लाजा पर लगने वाली लाइनों से छुटकारा मिल जाएगा।


    जेब पर भी नहीं पड़ेगा भारी

    नितिन गडकरी ने बताया कि नया सिस्टम काफी सस्ता भी पड़ेगा। टाइम्स ड्राइव ऑटो समिट एंड अवॉर्ड्स 2026 के दौरान केंद्रीय परिवहन मंत्री इस नए सिस्टम की खूबियां बता रहे थे। उन्होंने कहाकि एक बार ऑटोमैटिक सिस्टम लागू होने के बाद वाहन चालकों के पैसे भी बचेंगे। गडकरी ने कहाकि अभी तक टोल बूथ पर 125 से 150 रुपए देने पड़ते हैं। लेकिन नया सिस्टम लागू होने के बाद यह रकम घटकर 15 रुपए प्रति टोल तक आ सकती है। सिर्फ इतना ही नहीं, 3000 रुपए का पास भी बनवाया जा सकेगा, जिससे वाहन चालक 200 टोल क्रॉसिंग्स तक पार कर सकेंगे।


    कैसे कटेगा पैसा

    नए टोल सिस्टम के बारे में जानकारी देते हुए गडकरी ने कहाकि वाहन चालक आराम से 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से जाएंगे। बिना वाहन को रोके नंबर प्लेट और फास्टैग डिटेल कैप्चर की जाएंगी। इसके बाद तय की गई दूरी के अनुसार बैंक अकाउंट से टोल अमाउंट ऑटोमैटिकली कट जाएगी। परिवहन मंत्री के मुताबिक फिलहाल 85 टोल लोकेशंस पर यह सिस्टम पहले ही शुरू किया जा चुका है। इस साल के अंत तक इसे पूरे देश में लागू करने की योजना है।

    ट्रॉलिंग पर क्या बोले

    नितिन गडकरी ने कहाकि सुधार हमेशा प्रैक्टिकल होने चाहिए। उन्होंने गाड़ियों के हॉर्न को बांसुरी और तबले की धुनों से बदले जाने की अपने सुझाव को याद किया। इसके लिए उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा ट्रॉल किया गया था। गडकरी ने बताया कि लोगों ने इस आइडिया की इतनी ज्यादा खिंचाई की कि उन्हें यह आइडिया ही ड्रॉप करना पड़ा। उन्होंने कहाकि इसके बाद मुझे समझ आया कि सुधार प्रैक्टिकल होने चाहिए और ऐसे होने चाहिए जिसे बड़े पैमाने पर स्वीकार किया जाए।

  • अन्नदाता बनेगा 'ऊर्जादाता': नितिन गडकरी ने बताया क्यों जरूरी है 100% एथनॉल, अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट।

    अन्नदाता बनेगा 'ऊर्जादाता': नितिन गडकरी ने बताया क्यों जरूरी है 100% एथनॉल, अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट।


    नई दिल्ली। भारत के ऊर्जा भविष्य और परिवहन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया है। एक हालिया कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि देश को निकट भविष्य में सौ प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, वैश्विक स्तर पर विशेषकर पश्चिम एशिया में जारी तेल आपूर्ति की अनिश्चितताओं को देखते हुए भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना समय की मांग है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसे कम करना आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोणों से आवश्यक है।

    एथनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है जिसे गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। जब इसे पेट्रोल के साथ मिलाया जाता है, तो इसे ‘फ्लेक्स फ्यूल’ कहा जाता है। गडकरी ने जोर देकर कहा कि फ्लेक्स फ्यूल तकनीक न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने ब्राजील जैसे देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां शत-प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग का सफल प्रयोग पहले से ही किया जा रहा है। भारत में भी इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए बीस प्रतिशत एथनॉल मिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद अब और बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ने का समय आ गया है।

    आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग सतासी प्रतिशत आयात करता है, जिस पर सालाना करीब बाईस लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। भारी मात्रा में जीवाश्म ईंधन का आयात न केवल अर्थव्यवस्था पर बोझ डालता है, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण में भी बड़ी हिस्सेदारी रखता है। केंद्रीय मंत्री ने ऑटोमोबाइल कंपनियों से आग्रह किया कि वे लागत के बजाय गुणवत्ता और नई तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करें ताकि भविष्य के वाहनों को पूरी तरह से वैकल्पिक ईंधन पर चलाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि पेट्रोल-डीजल वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए तकनीकी विकल्प तैयार करना सबसे प्रभावी तरीका होगा।

    भविष्य के ईंधन के रूप में गडकरी ने ग्रीन हाइड्रोजन के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन पंपों के संचालन की लागत को कम करना और परिवहन की चुनौतियों का समाधान करना प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि हाइड्रोजन की उत्पादन लागत को कम कर एक डॉलर प्रति किलोग्राम के स्तर पर लाया जा सके, तो भारत न केवल अपनी जरूरतें पूरी करेगा बल्कि ऊर्जा के एक प्रमुख निर्यातक के रूप में भी उभर सकता है। जैव ईंधन और हरित ऊर्जा के इन समन्वित प्रयासों से देश को प्रदूषण मुक्त बनाने और विदेशी मुद्रा भंडार की बचत करने में बड़ी सफलता मिल सकती है।

  • दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से बढ़ेगी रफ्तार, गडकरी बोले-रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

    दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से बढ़ेगी रफ्तार, गडकरी बोले-रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा


    नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देहरादून में बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया। करीब 213 किलोमीटर लंबे इस 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण 12,000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से किया गया है। यह हाई-स्पीड कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ता है।

    6 घंटे का सफर अब सिर्फ ढाई घंटे
    इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से नई दिल्ली से देहरादून तक की यात्रा का समय लगभग 6 घंटे से घटकर सिर्फ 2.5 घंटे रह जाएगा। इससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा।

    ‘सिर्फ सड़क नहीं, आर्थिक विकास का इंजन’
    केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना को देश के आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और क्षेत्रीय विकास को गति देगा।

    पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
    इस कॉरिडोर से हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। खासतौर पर उत्तराखंड जैसे पर्यटन-प्रधान राज्य के लिए यह परियोजना बेहद लाभकारी साबित होगी।

    आर्थिक और औद्योगिक विकास के नए अवसर
    बेहतर कनेक्टिविटी से:

    उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा
    निवेश आकर्षित होगा
    स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
    क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी

    आधुनिक सुविधाओं से लैस हाईवे
    यह कॉरिडोर अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ तैयार किया गया है:

    10 इंटरचेंज
    3 रेलवे ओवरब्रिज (ROB)
    4 बड़े पुल
    12 रोडसाइड सुविधाएं
    एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATM)

    पर्यावरण संरक्षण का भी रखा गया ध्यान
    इस परियोजना में पर्यावरण संतुलन को विशेष महत्व दिया गया है।
    12 किमी लंबा वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर (एशिया के सबसे लंबे में से एक)

    8 पशु मार्ग
    2 हाथी अंडरपास
    370 मीटर लंबी सुरंग (दात काली मंदिर के पास)
    इन सुविधाओं से वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा।

    आगे और मजबूत होगी कनेक्टिविटी
    मंत्री ने बताया कि सहारनपुर बाईपास से हरिद्वार तक 51 किमी लंबा 6-लेन सुपररोड भी जल्द शुरू किया जाएगा, जिससे इस पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और बेहतर होगी।

  • मध्यप्रदेश में सड़कों का मजबूत नेटवर्क तैयार होगा: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

    मध्यप्रदेश में सड़कों का मजबूत नेटवर्क तैयार होगा: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

    विदिशा।केंद्रीय सड़क परिवहन एवं महामार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने विदिशा जिला मुख्यालय में शनिवार को सड़कों के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने यहां 4,400 करोड़ रुपए की सड़कों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस मौके पर गडकरी ने 13,000 करोड़ रुपए की लागत से कोटा से दिल्ली-मुंबई तक राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की भी घोषणा की।

    मध्यप्रदेश की सड़कों के विकास के लिए विशेष प्रावधान
    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मांग पर मध्यप्रदेश की सड़क परियोजनाओं के लिए 1,600 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। इसमें से 400 करोड़ रुपए विशेष रूप से विदिशा संसदीय क्षेत्र की शहरी और आंतरिक सड़कों के निर्माण के लिए आवंटित किए जाएंगे।गडकरी ने बताया कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में लगभग 50 करोड़ रुपए की लागत से नई सड़कें बनाई जाएंगी जिससे प्रदेश के सभी हिस्सों में यातायात सुगम और तेज़ होगा।

    अत्याधुनिक मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर का शिलान्यास
    इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने विदिशा में अत्याधुनिक मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर का भी शिलान्यास किया। यह केंद्र सड़क सुरक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।नितिन गडकरी ने कहा कि प्रदेश में चारों ओर मजबूत सड़क नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे न केवल यातायात सुगमता बढ़ेगी, बल्कि उद्योग और व्यापार को भी नई गति मिलेगी। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों और जनता से कहा कि सड़क सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रति जागरूकता बनाए रखना जरूरी है

  • MP Morning News: सड़कों की बड़ी सौगात से लेकर राहुल गांधी का इंदौर दौरा , BJP का ‘सहयोग सेल’ और यूनियन कार्बाइड प्रांगण में CM का निरीक्षण

    MP Morning News: सड़कों की बड़ी सौगात से लेकर राहुल गांधी का इंदौर दौरा , BJP का ‘सहयोग सेल’ और यूनियन कार्बाइड प्रांगण में CM का निरीक्षण


    भोपाल । मध्यप्रदेश के लिए आज शनिवार 17 जनवरी का दिन विकास राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद अहम रहने वाला है। एक ओर प्रदेश को हजारों करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं की सौगात मिलने जा रही है तो वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी का इंदौर दौरा भाजपा का नया संगठनात्मक प्रयोग और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यूनियन कार्बाइड प्रांगण भ्रमण सुर्खियों में रहेगा।

    प्रदेश को आज केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की ओर से बड़ी सौगात मिलने जा रही है। विदिशा में आयोजित कार्यक्रम में वे 4 400 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित एवं प्रस्तावित 8 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। करीब 181 किलोमीटर लंबी इन परियोजनाओं से मध्य भारत और बुंदेलखंड क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी। भोपाल–विदिशा–सागर–राहतगढ़–ब्यावरा जैसे प्रमुख मार्गों पर यातायात पहले से कहीं अधिक सुगम होगा। चार-लेन चौड़ीकरण से यात्रा समय घटेगा ईंधन की बचत होगी और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है। ब्लैक स्पॉट सुधार अंडरपास और ज्यामितीय सुधार जैसे कार्य सड़क सुरक्षा को और मजबूत बनाएंगे।

    राजनीतिक मोर्चे पर भाजपा संगठन आज एक नई पहल की शुरुआत कर रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर ‘सहयोग सेल’ की स्थापना की जा रही है। इसका उद्देश्य पार्टी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की समस्याओं को समयबद्ध तरीके से सुलझाना है। यदि किसी जिले में समस्या का समाधान नहीं होता है तो मामला सीधे प्रदेश संगठन तक पहुंचेगा। इस सेल में प्रदेश और जिला स्तर पर संयोजक नियुक्त किए जाएंगे। रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों को भी इससे जोड़ने पर विचार किया जा रहा है ताकि प्रशासनिक अनुभव का लाभ मिल सके। साथ ही जिला कार्यालयों में पदाधिकारियों के बैठने के दिन भी तय कर दिए गए हैं जिससे कार्यकर्ताओं को सीधा संवाद का मौका मिल सके।

    वहीं कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज इंदौर दौरे पर रहेंगे। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई त्रासदी ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। दर्जनों मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के बाद राहुल गांधी स्वयं पीड़ितों से मिलने आ रहे हैं। वे बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों और बाद में भागीरथपुरा में प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त करेंगे। करीब तीन घंटे के इस दौरे को कांग्रेस एक बड़े राजनीतिक और मानवीय संदेश के रूप में देख रही है। प्रशासनिक स्तर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज सुबह लगभग 11 बजे यूनियन कार्बाइड प्रांगण का भ्रमण करेंगे। न्यायालय के निर्देश के बाद यूनियन कार्बाइड के ज़हरीले कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। मुख्यमंत्री वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वहां स्थिति की समीक्षा करेंगे। 1984 की गैस त्रासदी जिसे मानव इतिहास की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में गिना जाता है आज भी भोपाल के लिए एक संवेदनशील अध्याय है और सरकार इसे लेकर सतर्क दिखाई दे रही है।

  • स्लीपर बस या चलता-फिरता खतरा? सैकड़ों मौतों के बाद सरकार ने कसे शिकंजे

    स्लीपर बस या चलता-फिरता खतरा? सैकड़ों मौतों के बाद सरकार ने कसे शिकंजे

    नई दिल्ली। पिछले छह महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में स्लीपर कोच बसों से जुड़े भीषण सड़क हादसों और आग की घटनाओं ने परिवहन व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया। इन दुर्घटनाओं में अब तक करीब 145 यात्रियों की जान जा चुकी है। खासतौर पर रात के समय लंबी दूरी की यात्रा करने वाली स्लीपर बसों में आग लगने और आपात निकास की कमी के चलते जान-माल का भारी नुकसान हुआ। बढ़ते हादसों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला किया है।
    मान्यता प्राप्त कंपनियां ही बनाएंगी स्लीपर बस
    केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नए नियमों की घोषणा करते हुए कहा कि अब स्लीपर कोच बसों का निर्माण केवल वही ऑटोमोबाइल कंपनियां या बॉडी बिल्डर्स कर सकेंगे, जिन्हें केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त होगी। स्थानीय और मैनुअल बॉडी बिल्डर्स को स्लीपर बस बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे निर्माण गुणवत्ता में सुधार होगा और सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा।
    मौजूदा बसों में भी अनिवार्य होंगे नए सेफ्टी फीचर्स
    सरकार ने केवल नई बसों ही नहीं, बल्कि सड़कों पर चल रही सभी मौजूदा स्लीपर बसों में भी अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया है। इनमें फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, सेफ्टी हैमर, ड्राइवर की नींद का अलर्ट देने वाला सिस्टम और एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) शामिल हैं। इन सुविधाओं से आपात स्थिति में यात्रियों की जान बचाने में मदद मिलेगी।
    AIS-052 बस बॉडी कोड का पालन जरूरी
    नए नियमों के तहत सभी स्लीपर बसों को AIS-052 बस बॉडी कोड और संशोधित बस बॉडी कोड का पालन करना अनिवार्य होगा। यह संशोधित कोड 1 सितंबर 2025 से प्रभावी हो चुका है। बिना इस मानक को पूरा किए किसी भी स्लीपर बस का रजिस्ट्रेशन या संचालन संभव नहीं होगा। जो बसें इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन्हें सड़कों से हटाया जा सकता है।
    यात्रियों की सुरक्षा होगी मजबूत
    AIS-052 भारत का आधिकारिक बस बॉडी सेफ्टी और डिजाइन मानक है, जिसमें बस की संरचना, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रावधान तय किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन सख्त कदमों का मकसद भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोकना और स्लीपर कोच सेवाओं को सुरक्षित, भरोसेमंद और आधुनिक बनाना है। नए नियमों से न सिर्फ यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि देश में सड़क सुरक्षा को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।