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  • सुरक्षा घटाने के फैसले पर गरमाई सियासत, लालू यादव ने कहा- सब कुछ नीतीश कुमार ने ही करवाया

    सुरक्षा घटाने के फैसले पर गरमाई सियासत, लालू यादव ने कहा- सब कुछ नीतीश कुमार ने ही करवाया

    नई दिल्ली । बिहार की राजनीति में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को नया मुद्दा दे दिया है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं।

    बुधवार को लालू प्रसाद यादव ने अपनी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा वापस लिए जाने के मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका रही है। लालू यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और अब सभी की निगाहें सत्ताधारी दल की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

    दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को विशेष सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध थी। सुरक्षा में बदलाव के फैसले के बाद दोनों नेताओं ने उन्हें उपलब्ध कराई गई नई सुरक्षा व्यवस्था स्वीकार करने के बजाय वापस करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही परिवार के अन्य प्रमुख सदस्यों ने भी सुरक्षा वापस कर दी। इस फैसले ने मामले को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में विधानसभा चुनावों से पहले ऐसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते जा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था जैसे प्रशासनिक निर्णयों को भी राजनीतिक दृष्टि से देखा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित है, जबकि सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल निर्धारित नियमों और समीक्षा प्रक्रिया के आधार पर तय किए जाते हैं।

    इस बीच पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के नेता तेज प्रताप यादव ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि यदि भविष्य में उनके साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उनके इस बयान ने विवाद को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। विपक्षी दल इस मामले को जनता के बीच प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं।

    आरजेडी लगातार इस फैसले का विरोध कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह केवल सुरक्षा का मामला नहीं बल्कि राजनीतिक सम्मान और गरिमा से जुड़ा विषय है। पार्टी का आरोप है कि राज्य के वरिष्ठ नेताओं के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया है, वह उचित नहीं माना जा सकता। आरजेडी नेताओं ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग भी उठाई है।

    वहीं दूसरी ओर सरकार से जुड़े नेताओं का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था का निर्धारण निर्धारित मानकों और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है। उनके अनुसार इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक भावना या पक्षपात की गुंजाइश नहीं होती। हालांकि विपक्ष इन दलीलों से संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है और लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है।

    फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था का यह मुद्दा बिहार की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस विषय पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। साथ ही यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इस विवाद पर आगे क्या रुख अपनाती हैं तथा राजनीतिक दल इसे किस तरह जनता के बीच लेकर जाते हैं।

  • निरहुआ बोले नीतीश का राज्यसभा जाना गर्व की बात पवन सिंह और खेसारी पर भी रखी खुलकर राय

    निरहुआ बोले नीतीश का राज्यसभा जाना गर्व की बात पवन सिंह और खेसारी पर भी रखी खुलकर राय

    नई दिल्ली: भोजपुरी स्टार से नेता बने दिनेश लाल यादव निरहुआ ने बिहार की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले को पूरी तरह सही और सकारात्मक कदम बताया है निरहुआ ने कहा कि नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में बिहार को मजबूत दिशा दी है और अब वे जिस भी मंच पर रहेंगे वहां से राज्य के विकास के लिए काम करते रहेंगे

    निरहुआ ने इस फैसले को बिहार के लिए गर्व की बात बताते हुए कहा कि यह राजनीतिक दृष्टि से एक संतुलित और दूरदर्शी निर्णय है उन्होंने कहा कि अनुभव और नेतृत्व क्षमता का लाभ राज्य को आगे भी मिलता रहेगा

    निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चाओं पर निरहुआ ने संयमित प्रतिक्रिया दी उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिए जाते हैं और इस पर अभी अटकलें लगाना ठीक नहीं है उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन और गठबंधन के वरिष्ठ नेता मिलकर ही ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं

    वहीं भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव के राजनीति को लेकर दिए गए बयान पर निरहुआ ने कड़ा रुख अपनाया उन्होंने कहा कि राजनीति ईमानदारी और जिम्मेदारी का क्षेत्र है और इसमें बेवजह आरोप लगाने वालों के लिए कोई जगह नहीं है उनके इस बयान को भोजपुरी इंडस्ट्री और राजनीति के बीच चल रही बहस से जोड़कर देखा जा रहा है

    समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के पेट्रोल डीजल को लेकर दिए गए बयान पर भी निरहुआ ने प्रतिक्रिया दी उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान नेताओं की सोच को दर्शाते हैं और ऐसे समय में देश को एकजुट रखने की जरूरत होती है न कि भ्रम फैलाने की

    भोजपुरी सिनेमा के कलाकारों के बीच विवाद को लेकर भी उन्होंने स्थिति साफ की निरहुआ ने कहा कि पवन सिंह और खेसारी लाल यादव के बीच किसी तरह का कोई विवाद नहीं है सभी कलाकार एक परिवार की तरह हैं और समाज के विकास के लिए काम करते हैं

    पवन सिंह को राज्यसभा न भेजे जाने के सवाल पर निरहुआ ने कहा कि भाजपा में जिम्मेदारियां समय और परिस्थिति के अनुसार दी जाती हैं उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में पवन सिंह को भी बड़ी जिम्मेदारी जरूर मिलेगी

    आगामी चुनावों में अपनी भूमिका को लेकर निरहुआ ने कहा कि वे एक कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के लिए काम करते रहेंगे उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार ही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और जहां भी पार्टी को उनकी जरूरत होगी वे वहां मौजूद रहेंगे

    निरहुआ ने अंत में कहा कि वे राजनीति में किसी पद या प्रतिष्ठा के लिए नहीं बल्कि विचारधारा के लिए आए हैं और एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के साथ खड़े रहेंगे उनका यह बयान साफ तौर पर दिखाता है कि वे पार्टी लाइन पर मजबूती से कायम हैं और नेतृत्व के फैसलों का समर्थन करते हैं

  • दो दशक बाद नया राजनीतिक कदम नीतीश कुमार राज्यसभा जाना चाहते हैं नई सरकार को मार्गदर्शन देने का वादा

    दो दशक बाद नया राजनीतिक कदम नीतीश कुमार राज्यसभा जाना चाहते हैं नई सरकार को मार्गदर्शन देने का वादा


    नई दिल्ली:
    बिहार की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने साफ कर दिया है कि वे राज्यसभा जाना चाहते हैं उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा रखते हैं साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार में जो भी नई सरकार बनेगी उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संदेश में जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले दो दशक से भी अधिक समय से बिहार की जनता ने उन पर भरोसा और समर्थन बनाए रखा है इसी विश्वास के कारण उन्हें राज्य की सेवा करने का अवसर मिला उन्होंने कहा कि जनता के भरोसे की ताकत से ही बिहार आज विकास और सम्मान की नई पहचान बना रहा है उन्होंने इस भरोसे और समर्थन के लिए एक बार फिर लोगों का धन्यवाद भी दिया

    अपने पोस्ट में उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की एक पुरानी इच्छा का भी जिक्र किया उन्होंने लिखा कि जब उन्होंने संसदीय जीवन की शुरुआत की थी तभी से उनके मन में यह इच्छा थी कि वे बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें इसी क्रम में अब वे राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा रखते हैं

    नीतीश कुमार ने अपने संदेश में यह भी भरोसा दिलाया कि जनता के साथ उनका रिश्ता आगे भी पहले की तरह बना रहेगा उन्होंने कहा कि एक विकसित बिहार बनाने का उनका संकल्प आगे भी जारी रहेगा और वे भविष्य में भी जनता के साथ मिलकर राज्य के विकास के लिए काम करते रहेंगे उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में जो भी नई सरकार बनेगी उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा

    गौरतलब है कि नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक माने जाते हैं वे पिछले करीब दो दशकों से राज्य की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं वर्ष 2025 में उन्होंने दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी इसके साथ ही वे राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बन चुके हैं

    उनका राजनीतिक सफर भी काफी लंबा और दिलचस्प रहा है वर्ष 1985 में वे पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए थे इसके बाद वर्ष 1989 में उन्होंने पहली बार लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया इसके बाद वे लगातार 1989 से 2004 तक बाढ़ संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने जाते रहे

    मार्च 2000 में उन्होंने पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में पद संभाला था हालांकि उस समय उनकी सरकार बहुमत साबित नहीं कर सकी और मात्र सात दिनों में ही गिर गई इसके बाद वर्ष 2001 से 2004 के बीच उन्होंने केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया और रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली

    बिहार में वर्ष 2005 के बाद से नीतीश कुमार की राजनीतिक पकड़ लगातार मजबूत होती गई हालांकि वर्ष 2014 से 2015 के बीच कुछ समय के लिए Jitan Ram Manjhi मुख्यमंत्री बने थे लेकिन उसके बाद फिर से नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली और तब से अब तक वे राज्य की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेता बने हुए हैं

    अब उनके राज्यसभा जाने की इच्छा जाहिर करने के बाद बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला राज्य की भविष्य की राजनीति और सत्ता संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है

  • हिजाब हटाने को लेकर विवाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से माफी की मांग इमारत-ए-शरिया के सचिव भड़के

    हिजाब हटाने को लेकर विवाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से माफी की मांग इमारत-ए-शरिया के सचिव भड़के


    पटना । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला आयुष चिकित्सक के चेहरे से हिजाब हटाने का विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना पर अब इमारत-ए-शरिया के सचिव मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सईदउर रहमान कासमी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को ऐसा नहीं करना चाहिए था और इस कदम की सख्त निंदा करते हुए उन्होंने नीतीश कुमार से माफी की मांग की है।

    घटना उस समय की है जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक कार्यक्रम में नवनियुक्त आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र दे रहे थे। कार्यक्रम के दौरान जब नुसरत परवीन नामक महिला चिकित्सक की बारी आई तो वह हिजाब पहने हुए थीं। मुख्यमंत्री ने यह देखकर कहा यह क्या है और फिर महिला के चेहरे से हिजाब हटा दिया। इससे महिला असहज हो गई और एक अधिकारी ने जल्दी से उन्हें एक और कर दिया। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिस पर इमारत-ए-शरिया के सचिव ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

    मौलाना रहमान कासमी ने कहा कि पर्दा महिलाओं और समाज की इज्जत है और हिजाब को हटाना महिला का अपमान है। मुख्यमंत्री को ऐसा नहीं करना चाहिए था क्योंकि यह महिलाओं की इज्जत और गरिमा की तौहीन है। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उन्होंने महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाई है।

    मुख्यमंत्री कार्यालय ने हालांकि इस घटना पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन यह मामला अब राजनीति में भी गहरे विवाद का कारण बन गया है। विपक्षी दलों खासकर राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने इस वीडियो को साझा करते हुए इसे मुख्यमंत्री की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाया है। राजद ने एक्स पर पोस्ट किया नीतीश जी का क्या हो गया है अब उनकी मानसिक स्थिति पूरी तरह से अस्थिर हो गई है।

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार ने हाल ही में 685 आयुर्वेद 393 होम्योपैथी और 205 यूनानी पद्धति के चिकित्सकों को नियुक्त किया था जिनमें से कुछ को मंच से नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे। हालांकि यह घटना और इसके बाद की प्रतिक्रिया राज्य की राजनीति में नई बहस का कारण बन गई है। विपक्षी नेताओं ने इसे नीतीश कुमार के विचारधारा परिवर्तन के रूप में भी देखा है और इसपर तीखे हमले किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद आने वाले समय में बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है।