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  • निवाड़ी में जैन समाज का विरोध प्रदर्शन, संतों की सुरक्षा को लेकर मांग तेज

    निवाड़ी में जैन समाज का विरोध प्रदर्शन, संतों की सुरक्षा को लेकर मांग तेज


    मध्य प्रदेश । रीवा में दो जैन साध्वियों को कार से टक्कर मारने की घटना को लेकर प्रदेशभर में जैन समाज में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को निवाड़ी में भी बड़ी संख्या में समाजजन सड़कों पर उतर आए और राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान के तहत प्रदर्शन किया।

    जैन समाज के लोग एसपी कार्यालय पहुंचे और प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर घटना की निष्पक्ष जांच और संतों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान समाजजनों ने कहा कि रीवा की घटना केवल एक सामान्य सड़क हादसा नहीं मानी जा सकती और इसकी गहराई से जांच जरूरी है।

    ज्ञापन में 20 मई को हुई घटना की SIT अथवा न्यायिक जांच कराने की मांग की गई। समाज के प्रतिनिधियों का कहना था कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार से “राष्ट्रीय संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग भी उठाई। समाज ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख मार्गों पर संतों के पद विहार के दौरान विशेष ट्रैफिक व्यवस्था और “सुरक्षित कॉरिडोर” बनाए जाएं, जिससे पैदल विहार करने वाले संतों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

    इसके अलावा समाज ने संतों के आहार, यात्रा और विहार के दौरान प्रशासन की जिम्मेदारी तय करने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि जैन संत पूरी तरह अहिंसक, निहत्थे और तपस्वी जीवन जीते हैं, इसलिए उनके खिलाफ होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

    जैन समाज ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि संतों की सुरक्षा को लेकर जल्द प्रभावी और ठोस नीति नहीं बनाई गई, तो आने वाले समय में देशव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे और पूरे आयोजन में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाया गया।

  • पूर्व विधायक पर जमीन कब्जे के आरोप निकले बेबुनियाद, प्रशासन ने की साफ पुष्टि

    पूर्व विधायक पर जमीन कब्जे के आरोप निकले बेबुनियाद, प्रशासन ने की साफ पुष्टि


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले की पृथ्वीपुर तहसील में पूर्व विधायक Shishupal Yadav पर लगे जमीन कब्जे के आरोपों को प्रशासन ने पूरी तरह निराधार बताया है। यह विवाद 9 मई को हुए एक सीमांकन प्रकरण से जुड़ा है, जिसके बाद 10 मई को वायरल वीडियो सामने आने से मामला सुर्खियों में आ गया था।
    तहसीलदार द्वारा मंगलवार को जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि सीमांकन की पूरी कार्रवाई तत्कालीन एसडीएम के आदेश पर और नियमानुसार की गई थी। यह प्रक्रिया प्रकरण क्रमांक 0025/अ-74/2025-26 के तहत की जा रही थी, जिसमें खसरा नंबर 612/4/1 की लगभग 245 आरे भूमि का सीमांकन शामिल था।
    जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों के प्रतिनिधि मौके पर मौजूद थे, लेकिन पूर्व विधायक शिशुपाल यादव वहां उपस्थित नहीं थे। जैसे ही सीमा चिन्ह लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई, कुछ लोगों ने इसका विरोध किया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई थी।
    किसानों की ओर से लगाए गए आरोपों में कहा गया था कि जमीन पर जबरन कब्जा कराया जा रहा है और हाईकोर्ट के स्टे का उल्लंघन किया जा रहा है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की मौके पर कोई पुष्टि नहीं हुई और न ही किसी प्रकार का कब्जा या धमकी जैसी स्थिति पाई गई।
    तहसीलदार ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित खसरा भूमि एकल स्वामित्व वाली है और इसका हाईकोर्ट में चल रहे अन्य मामलों से कोई संबंध नहीं है। पहले इस भूमि का स्वामित्व अलग व्यक्ति के पास था, बाद में नामांतरण के बाद पूर्व विधायक का नाम दर्ज हुआ।
    प्रशासन के अनुसार सीमांकन के समय खेत में फसल कट चुकी थी और मौके पर किसी भी तरह की खेती या कब्जे की स्थिति नहीं पाई गई। केवल सीमा चिन्ह लगाने का विरोध किया गया था। अब प्रशासन की इस सफाई के बाद मामला शांत होने की बजाय राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं।