Tag: Noida engineer death case

  • नोएडा: गड्ढे में गिरकर इंजीनियर की मौत का मामला, बिल्डर निर्मल सिंह को अग्रिम जमानत

    नोएडा: गड्ढे में गिरकर इंजीनियर की मौत का मामला, बिल्डर निर्मल सिंह को अग्रिम जमानत


    नई दिल्ली । नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत का मामला नोएडा सेक्टर-150 स्थित टी प्वाइंट के पास पानी से भरे गड्ढे में कार सहित गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में सत्र अदालत ने बिल्डर निर्मल सिंह को अग्रिम जमानत दे दी है. जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव की अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद पाया कि प्रथम दृष्टया आरोपी की प्रत्यक्ष या सचेत भूमिका स्थापित करने वाला ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है और उसकी कस्टोडियल पूछताछ आवश्यक प्रतीत नहीं होती. हालांकि अदालत ने कहा कि वह बिना न्यायालय की अनुमति के देश नहीं छोड़ेंगे और जांच में सहयोग करेंगे.

    बचाव पक्ष की दलील

    आरोपी के अधिवक्ता एवं जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी बोड़ाकी व सचिव शोभाराम चंदीला ने अदालत में दलील दी कि आरोपी एक प्रतिष्ठित व्यवसायी और डेवलपर हैं. FIR में उनका नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है और न ही किसी प्रत्यक्ष कृत्य का उल्लेख है. वह संबंधित कंपनी के निदेशक या की-मैनेजरियल पर्सन नहीं रहे हैं. कंपनी के शेयरों का बड़ा हिस्सा पहले ही अन्य कंपनी को हस्तांतरित किया जा चुका था. निर्माण स्थल पर दो वर्ष से अधिक समय से नोएडा प्राधिकरण द्वारा रोक लगी हुई थी.

    अदालत ने क्या पाया

    सत्र अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह स्थापित नहीं होता कि आरोपी का विवादित भूमि पर प्रत्यक्ष या परोक्ष नियंत्रण था. आरोपी के विरुद्ध किसी आपत्तिजनक वस्तु की बरामदगी प्रस्तावित नहीं है. संबंधित दस्तावेज प्राधिकरण या जांच एजेंसी के पास उपलब्ध हैं, जिनके लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी नहीं.

    प्राधिकरण द्वारा लगी थी रोक

    घटना से पूर्व नोएडा प्राधिकरण द्वारा निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी. अदालत ने कहा कि कॉर्पोरेट संरचना, लीज, सब-लीज, शेयर ट्रांसफर और MOU जैसे लेन-देन के मामलों में केवल स्वामित्व संबंध के आधार पर आपराधिक दायित्व नहीं थोपा जा सकता. अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी कंपनी के प्रमोटर हैं और इस नाते जिम्मेदार हैं. लेकिन अदालत ने कहा कि प्रमोटर शब्द की स्पष्ट कानूनी परिभाषा और दायित्व का निर्धारण रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों से स्थापित नहीं होता.

    जलभराव की समस्या

    अदालत ने यह भी नोट किया कि जलभराव की समस्या को लेकर विजटाउन प्लानर्स द्वारा 2022 में आवेदन दिया गया था और सिंचाई विभाग द्वारा 2023 में जलनिकासी के लिए प्रस्ताव रखा गया था. नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में 18 जनवरी 2021 को संबंधित भूखंड पर निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई थी, जो जनवरी 2026 में हटाई गई. जब निर्माण और विकास कार्य पर वैधानिक रोक लागू थी, तब जलनिकासी या अन्य निर्माणात्मक हस्तक्षेप सीमित हो सकते थे.

    ऐसे में यह निष्कर्ष निकालना कि आरोपी ने जानबूझकर पानी जमा रहने दिया, इस स्तर पर उचित नहीं है. तथ्यों, आरोपों की प्रकृति, प्रथम दृष्टया भूमिका के अभाव और कस्टोडियल पूछताछ की आवश्यकता न होने को देखते हुए अदालत ने निर्मल सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली.

  • नोएडा इंजीनियर मौत केस: CBI ने मामला लिया, नोएडा अथॉरिटी से फाइलें जब्त, अब तक 4 गिरफ्तार

    नोएडा इंजीनियर मौत केस: CBI ने मामला लिया, नोएडा अथॉरिटी से फाइलें जब्त, अब तक 4 गिरफ्तार



    नई दिल्ली। नोएडा सेक्टर-150 में 16 जनवरी को हुए दर्दनाक हादसे में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की जांच अब सीबीआई करेगी। इस मामले में CBI की एंट्री 21 जनवरी की रात हुई, जब जांच एजेंसी ने नोएडा प्राधिकरण से MJ विजटाउन से जुड़े दस्तावेज और फाइलें अपने साथ ले लीं।

    यह कदम इस बात का संकेत है कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि भूमि आवंटन, निर्माण मानक और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही से जुड़ा मामला बन चुका है।

    अब CBI इस केस में स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट आवंटन और MJ विजटाउन की भूमिका की जांच करेगी।

    CBI की जांच का केंद्र: स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट और बिल्डर की भूमिका
    हादसा स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट नंबर-2 (ए-3) में हुआ था। यह वही जगह है जहाँ गहरे पानी से भरा गड्ढा था और युवराज की कार उसमें गिर गई थी।यह प्लॉट 27,185 वर्ग मीटर का है और लेआउट में इसे कॉमर्शियल उपयोग के लिए दिखाया गया था।
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MJ विजटाउन को इस प्लॉट का एक हिस्सा आवंटित किया गया था और इस पर नोएडा अथॉरिटी का करीब 129 करोड़ रुपये बकाया बताया गया है।

    यही वजह है कि CBI अब इस प्लॉट के आवंटन, उपविभाजन और बिल्डर के कर्ज के मसले की भी जांच करेगी।

    फॉरेंसिक टीम ने की गहन जांच
    घटना स्थल पर फॉरेंसिक टीम ने इंच-इंच माप कर जांच की और उस स्थान का निरीक्षण किया जहाँ कार गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी।

    जांच में यह बात सामने आई कि हादसे वाली जगह पर सुरक्षा रेलिंग या ठोस बैरिकेडिंग नहीं थी, जिसे हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है।पुलिस, NDRF और SDRF की टीमों ने कोहरे के बीच बचाव कार्य किया, लेकिन युवा इंजीनियर को बचाया नहीं जा सका।

    अभय कुमार की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
    इस मामले में MJ विजटाउन प्लानर्स के निदेशक अभय कुमार को गिरफ्तार किया गया और उन्हें सूरजपुर की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 27 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की जांच पर कड़ी टिप्पणी की और निर्देश दिए कि यह स्पष्ट किया जाए कि लापरवाही किसकी हैनाली टूटने की जिम्मेदारी किसकी, और बैरिकेडिंग नहीं लगाने की जिम्मेदारी किसकी।

    क्या था पूरा मामला?
    गुरुग्राम में काम करने वाले इंजीनियर युवराज मेहता 16 जनवरी की रात घर लौट रहे थे। सेक्टर-150 में निर्माण स्थल के पास उनकी कार गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिर गई।
    कथित तौर पर उन्होंने लगभग दो घंटे तक मदद की गुहार लगाई, लेकिन मदद नहीं पहुंची और उनकी मौत हो गई।

    उनके पिता राज कुमार मेहता ने इस पूरी त्रासदी को अपनी आंखों के सामने देखा।

    अब तक 4 गिरफ्तार, 2 FIR दर्ज
    नोएडा पुलिस ने इस मामले में दो FIR दर्ज की हैं और अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
    CBI की जांच के बाद यह संख्या बढ़ने की भी संभावना है, क्योंकि जांच का दायरा भूमि आवंटन और प्राधिकरण के फैसलों तक पहुंच गया है।

    यह मामला अब सिर्फ हादसा नहीं रहा। CBI की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि किसकी लापरवाही और किसके स्वार्थ ने एक युवा की जान ली।
    अब सभी की निगाहें CBI की जांच पर टिकी हैं—क्योंकि इस केस में न सिर्फ बिल्डर, बल्कि प्राधिकरण के अधिकारियों की जवाबदेही भी सवालों के घेरे में है।